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Tuesday, 7 April 2020

हनुमान के पुत्र मकरध्वज का जन्म कैसे हुआ

Hanuman Ji Ka Putra Makardhwaj


वनवास काल के दौरान जब  रावण सीता का अपहरण कर लेता हैं, तब सीता की खोज में श्री राम की मुलाकात हनुमान जी से होती है और वे सीता के खो जाने की कथा हनुमान को सुनाते हैं तब हनुमान और उनके सखा सुग्रीव और उसकी वानर सेना सीता की खोज में श्री राम एवम लक्ष्मण की मदद करते हैं बहुत प्रयासो के बाद जब श्री राम और उनके साथियों को यह पता चलता हैं कि सीता का अपहरण लंका पति रावण ने किया हैं तब वे हनुमान को समुद्र पार सीता की खोज में भेजते हैं। हनुमान मायावी थे वे अपनी शक्ति की सहायता से आकाश मार्ग से लंका पहुँचते हैं और लंका की अशोक वाटिका में बैठी सीता से मुलाकात करते हैं जिसके लिए वे सीता को श्री राम के दूत होने के प्रमाण के रूप में श्री राम द्वारा दी हुई मुद्रिका दिखाते हैं जिसे देखते ही सीता समझ जाती हैं और उन्हें यकीन हो जाता हैं कि उनके पति श्री राम उन्हें लेने आ चुके हैं हनुमान सीता की खबर लेने के बाद अशोक वाटिका में लगे वृक्षों के फल खाकर अपना पेट भरते हैं और पूरी अशोक वाटिका को उजाड़ देते हैं तब रावण के सेना के राक्षस हनुमान से युद्ध करते हैं लेकिन कोई उन्हें पकड़ नहीं पाता तब उन्हें रावण का पुत्र मेघनाद पकड़ने जाता हैं और पकड़ कर दरबार में रावण के सामने बंधी बनाकर लाता हैं तब हनुमान..........आगे पढ़ने के लिए लिए गए लिंक पर क्लिक करें:- हनुमान के पुत्र मकरध्वज का जन्म कैसे हुआ




Friday, 13 March 2020

इन 52 केंद्रों पर करवा सकते हैं कोरोना वायरस का टेस्ट

Health ministry make 52 centre for covid 19 test here is list


सरकार ने 22 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेश में कुल 52 केंद्र बनाए हैं। अगर आप को कोरोना के लक्षण दिखे या आपने उन इलाकों की यात्रा की है जो कोरोना से प्रभावित हैं तो जरूर टेस्ट कराएं!


इस लेख में हम आपको इस टेस्ट के बारे में और सभी 52 टेस्ट केंद्रों के बारे में बता रहे हैं, जहां आप Covid-19 का टेस्ट करा सकते हैं।


कैसे होता है कोरोना वायरस का टेस्ट?

स्वैब/पट्टी टेस्ट: आपके गले या फिर नाक से पट्टी की मदद से एक सैंपल कलेक्ट किया जाएगा।

नेजल एसपिरेट: इस मेथड में, एक लैब तकनीशियन आपकी नाक में एक स्लाइन सॉल्यूशन इंजेक्ट करता है और फिर सक्शन की मदद से सैंपल लिया जाता है।

ट्रेकीअल एसपिरेट यानी कि सांस की नली का सैंपल: ब्रोंकोस्कोप नाम की एक पतली, रौशनी वाली ट्यूब को आपके फेफड़ों/लंग्स में डाला जाता है और वहां से एक सैंपल लिया जाता है।

लार टेस्ट: लार एक एक पट्टी की मदद से नाक से ली जाती है या फिर मरीज़ को बलगम खांसने के लिए कहा जाता है।

ब्लड टेस्ट: ब्लड सैंपल लेकर इसे लैब में टेस्ट के लिए दिया जाता है। इसे दो तरह से किया जाता है- एक तो पूरा टेस्ट करना यानी कि कोरोना वायरस के हर एक वेरिएंट के लिए टेस्ट करना, जिसमें सामान्य फ्लू भी शामिल होता है। दूसरा, एक स्पेशल जीन-सीक्वेंसिंग टेस्ट करना जो कोरोना वायरस के लिए मार्कर को लोकेट करता है।

अगर आपको इन्फेक्शन हो या आपने हाल में उन इलाकों की यात्रा की है जो कोरोना से प्रभावित हैं तो आपको अपना टेस्ट कराना चाहिए। अगर आपके जान-पहचान के किसी व्यक्ति ने इस तरह की यात्रा की है और आप उनके संपर्क में रहे हों तब भी आपको कोरोना का टेस्ट कराने की जरूरत है।


इन केंद्रों पर करवा सकते हैं टेस्ट:

1. आंध्र प्रदेश: 

श्री वेंकेटेश्वर आयुर्विज्ञान संस्थान, तिरुपति
संपर्क सूत्र: +91-8772287777

आंध्र मेडिकल कॉलेज, विशाखापटनम, आंध्र प्रदेश
संपर्क सूत्र: +91- 89127 12258

सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतपुर, आंध्र- प्रदेश
संपर्क सूत्र: +91 85542 49115


2. अंडमान और निकोबार

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर, पोर्ट ब्लेयर
संपर्क सूत्र: 03192 251158/59


3. असम

गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज, गुवाहाटी
संपर्क सूत्र: 03612132751

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर, डिब्रूगढ़
संपर्क सूत्र: 03732381494


4. बिहार

राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, पटना
संपर्क सूत्र: 06122636651


5. चंडीगढ़

पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़
संपर्क सूत्र: 01722747585


6. छत्तीसगढ़




ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेज, रायपुर
संपर्क सूत्र: 07712572240


7. दिल्ली- एनसीआर

ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली
संपर्क सूत्र: 01126588500

नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल, दिल्ली
संपर्क सूत्र: 01123913148


8. गुजरात

बीजे मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद
संपर्क सूत्र: 07922680074

एम. पी. शाह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जामनगर
संपर्क सूत्र: 02882553515


9. हरियाणा

पंडित बी. डी. शर्मा पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, रोहतक
संपर्क सूत्र: 01262211307

बीपीएस गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, सोनीपत
संपर्क सूत्र: 01263 283 025


10. हिमाचल प्रदेश




इंदिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज, शिमला
संपर्क सूत्र: 01772654713

डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, काँगड़ा, टांडा
संपर्क सूत्र: 01892287187


11. जम्मू और कश्मीर

शेर- ए- कश्मीर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, श्रीनगर
संपर्क सूत्र: 01942401013

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जम्मू
संपर्क सूत्र: 01912584247


12. झारखंड

एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर
संपर्क सूत्र: 06572360859


13. कर्नाटक

बंगलुरु मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, बंगलुरु
संपर्क सूत्र: 08026700810

नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलोजी फील्ड यूनिट, बंगलुरु
संपर्क सूत्र: 08026654084

मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, मैसूर
संपर्क सूत्र: 08212520512

हासन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, हासन
संपर्क सूत्र: 08172231699

शिमोगा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, शिमोगा
संपर्क सूत्र: 08182229933


14. केरल

नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलोजी फील्ड यूनिट, केरल
संपर्क सूत्र: 04772970004

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम, केरल
संपर्क सूत्र: 04712528300

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोड़िकोड/ कैलीकट
संपर्क सूत्र: 04952350216


15. मध्य-प्रदेश




ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, भोपाल
संपर्क सूत्र: 07552672322

नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ, जबलपुर
संपर्क सूत्र: 07612370800


16. मेघालय

नॉर्थ ईस्टर्न इंदिरा गाँधी रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज, शिलोंग
संपर्क सूत्र: 03642538013


17. महाराष्ट्र

इंदिरा गाँधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नागपुर
संपर्क सूत्र: 07122725423

कस्तूरबा हॉस्पिटल फॉर इन्फेक्शस डिजीजेज, मुंबई
संपर्क सूत्र: 022300432333


18. मणिपुर

जे. एन. इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल, इम्फाल-ईस्ट, मणिपुर
संपर्क सूत्र: 03852443144


19. ओड़िशा/उड़ीसा

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर, भुवनेश्वर
संपर्क सूत्र: 06742301322


20. पुदुचेरी

जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्टग्रैजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुदुचेरी
संपर्क सूत्र: 04132271301


21. पंजाब

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, पटियाला, पंजाब
संपर्क सूत्र: 01752212018

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अमृतसर
संपर्क सूत्र: 01832426918


22. राजस्थान




सवाई मान सिंह हॉस्पिटल, जयपुर
संपर्क सूत्र: 01412744283

डॉ. एस. एन. मेडिकल कॉलेज, जोधपुर
संपर्क सूत्र: 02912434374

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज, झालावाड़, राजस्थान
संपर्क सूत्र: 07432233388

एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर, राजस्थान
संपर्क सूत्र: 01512220115


23. तमिलनाडु

किंग्स इंस्टिट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, चेन्नई
संपर्क सूत्र: 04422501520

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, तेनी
संपर्क सूत्र: 04546244502


24. त्रिपुरा

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अगरतला
संपर्क सूत्र: 03812357130


25. तेलंगाना




गाँधी मेडिकल कॉलेज, सिकंदराबाद
संपर्क सूत्र: 04027505566


26. उत्तर प्रदेश

किंग्स जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ
संपर्क सूत्र: 05222257540

इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
संपर्क सूत्र: 05422367568

जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़
संपर्क सूत्र: 05712721165


27. उत्तराखंड

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी
संपर्क सूत्र: 05946282824


28. पश्चिम बंगाल




नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉलेरा एंड एंटरीक डिजीजेज, कोलकाता
संपर्क सूत्र: 03323633373

आईपीजीएमईआर, कोलकाता
संपर्क सूत्र: 03322041101

अगर आपको या फिर आपके परिवार को टेस्ट कराने की जरूरत है तो आप इनमें से किसी नजदीकी केंद्र पर जा सकते हैं!

Thursday, 14 March 2019

भारतीय क्रिकेटरों की जर्सी में BCCI लोगो के ऊपर "तीन स्टार” क्यों बने होते हैं


भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है। अगर हम कहें  कि इस देश में क्रिकेट एक धर्म की तरह है तो यह एक अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भारत में क्रिकेट के विकास के लिए एक राष्ट्रीय शासी निकाय है "बीसीसीआई" की स्थापना दिसंबर 1928 में तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत 'सोसाइटी' के रूप में हुई थी। बीसीसीआई का अपना संविधान है जो खिलाड़ियों और प्रशासकों के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को बनाता है

दुनिया के हर क्रिकेट बोर्ड का अपना 'लोगो' होता है जिससे उस देश की टीम की पहचान होती है। भारत की क्रिकेट टीम का 'लोगो' है एक सूर्य के आकार का गोला जिसके अन्दर एक स्टार बना हुआ है। दरअसल BCCI का यह 'लोगो' अंग्रेजों द्वारा शुरू किये गये एक आवर्ड 'Order of the Star of India'से लिया गया है। इस अवार्ड को महारानी विक्टोरिया ने 1861 में शुरू किया था ताकि 1857 के ग़दर में अंग्रेजों के प्रति लॉयल रहने वाले भारतीय राजाओं और राजकुमारों को सम्मानित किया जा सके

जैसा हम जानते हैं कि हर घटना के पीछे एक कारण होता है, ऐसा ही कुछ मामला बीसीसीआई के लोगो के ऊपर बने इन 3 सितारों का भी है। अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो आपको पता चलेगा कि भारतीय क्रिकेटरों की जर्सी पर BCCI लोगो के ऊपर तीन स्टार बने हुए हैं तो क्या आप जानते हैं कि ये स्टार क्यों बने हुए हैं?

प्रसिद्ध खेल सामान बनाने वाली कंपनी ‘नाइकी’ ने वर्ष 2011 का विश्व कप जीतने के बाद इन सितारों को भारतीय क्रिकेटरों की जर्सी पर बनाया था। ‘नाइकी’ भारतीय क्रिकेट टीम का आधिकारिक किट प्रायोजक है और जो भारतीय क्रिकेट टीम को मैच के साथ-साथ अभ्यास सत्र के लिए सामान प्रदान करता है। इसने प्रयोजन के अधिकार 2016 से 2020 तक 5 वर्षों के लिए 370 करोड़ रुपये में खरीदे हैं


जर्सी पर 3 स्टार बनाने का कारण

➤ ज्ञातव्य है कि भारत ने अभी तक केवल 3 क्रिकेट विश्व कप जीते हैं और क्रिकेट खिलाडियों की जर्सी पर बने 3 स्टार इन्हीं विश्व कपों की संख्या को बताते हैं। 

➤ ज्ञातव्य है कि भारत ने पहला क्रिकेट विश्व कप 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्ट इंडीज को हराकर जीता था

➤ इसके बाद भारत ने दूसरा विश्व कप 2007 में T-20 विश्व कप के रूप में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में जीता था

➤ तीसरे विश्व कप में धोनी द्वारा लगाये गए छक्के को शायद ही कोई भारतीय भूल सकता है। भारत ने तीसरा विश्व कप 2011 में श्रीलंका को हराकर जीता था

➤ यहाँ पर यह बताना भी जरूरी है कि ऑस्ट्रलियाई खिलाडियों की टी-शर्ट पर बने लोगो में 5 स्टार बने हुए हैं और ऑस्ट्रेलिया ने अभी तक 5 विश्व कप जीते हैं।

Tuesday, 12 March 2019

भारत पर साइबर युद्ध का खतरा

The threat of cyber war on India (Author : R. Ranjan)


मामला चाहे चीनी-पाकिस्तानी हैकरों का हो या रूसी-कोरियाई हैकरों का, सवाल है कि आखिर वर्चुअल जंग रुकेगी कैसे? इसमें संदेह नहीं है कि दुनिया में अगला निर्णायक युद्ध साइबर युद्ध होगा क्योंकि सारी जानकारियां कंप्यूटर नेटवर्कों में ही समाई हुई हैं।

भारत में इस तरह के साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। एक आंकड़ा तो 2013 में अमेरिकी पूर्व सैनिक एडवर्ड स्नोडेन ने ही मुहैया कराया था। मार्च 2013 में स्नोडेन ने बताया था कि बाहर बैठे सेंधमारों ने भारतीयों की 6.3 अरब खुफिया सूचनाओं तक पहुंच बना ली थी। हालत यह है कि हमारे प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा व विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, मिसाइल प्रणालियों, एनआइसी, यहाँ तक कि खुफिया एजेंसी- सीबीआइ के कंप्यूटरों पर भी साइबर हमले कर उनकी जासूसी हो चुकी है।

साइबर स्पेस के खतरों की बात अब काल्पनिक नहीं रह गई है। वर्चुअल आतंकवाद, सेंधमारी और सैन्य व आर्थिक महत्त्व की सूचनाओं के लीक होने जैसी घटनाओं ने साबित कर दिया है कि सूचनाओं के इलेक्ट्रॉनिक संजाल में घुसपैठ की रोकथाम के पुख्ता प्रबंध नहीं करने का खमियाजा दुनिया की कई सरकारों को भी उठाना पड़ सकता है। हाल में, पुलवामा हमले के फौरन बाद खबर मिली कि पाकिस्तानी हैकरों ने भारत सरकार से जुड़ी कम से कम नब्बे वेबसाइटों को हैक कर लिया। इनमें खासतौर से वित्तीय संचालन और पावर ग्रिड से संबंधित वेबसाइटें हैकरों के निशाने पर थीं।

साइबर कहें या वर्चुअल (आभासी) जंग, असल में अब इसका खतरा वास्तविक है। मामला सिर्फ भारत, पाकिस्तान या चीन तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें महाशक्तियां शामिल हैं। पिछले वर्ष अक्तूबर में कई पश्चिमी देशों ने रूस के सैन्य खुफिया विभाग पर दुनियाभर में कई साइबर हमले करने के आरोप लगाए थे। हालांकि रूस ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा था कि कुछ पश्चिमी देश उसे योजनाबद्ध तरीके से फैलाए जा रहे दुष्प्रचार में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसमें संदेह नहीं रह गया है कि भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती साइबर जंग होगी। साइबर युद्ध यानी इंटरनेट के जरिये संचालित की जाने वाली वे आपराधिक और आतंकी गतिविधियां जिनसे कोई व्यक्ति या संगठन देश-दुनिया और समाज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे। अभी तक देश में इस तरीके से कई गैरकानूनी काम हुए, जैसे आॅनलाइन ठगी, बैंकिंग नेटवर्क में सेंध, लोगों- खासकर महिलाओं को उनके गलत प्रोफाइल बना कर परेशान करना आदि। साइबर जंग या आतंकवाद का हैकिंग के रूप में भी एक चेहरा ऐसा हो सकता है जिसमें खासतौर से महत्त्वपूर्ण सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाया जाए। भारत में हाल के साइबर हमलों की घटनाओं के बाद यह मांग तक उठने लगी है कि वर्चुअल जंग से दो-दो हाथ करने के मामले में हमारे देश में ठीक वैसा ही रवैया अपनाने की जरूरत है जैसा उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद हवाई हमले के रूप में अपनाया गया है, यानी साइबर अपराधियों का संपूर्ण सफाया किया जाए। पर यह काम आसान नहीं है।

असल में साइबर युद्ध छेड़ने वाले अपराधियों का चेहरा साफ नहीं दिखता है। दुनिया के किसी भी कोने में बैठ कर सेंधमार सरकारी प्रतिष्ठानों की वेबसाइटों को चौपट करने के अलावा बैंकिंग से जुड़ी गतिविधियों में सेंधमारी करके अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं। जहां तक सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाने की बात है तो ऐसा अक्सर दो देशों के बीच तनाव पैदा होने के हालात में ही सेंधमार करते हैं। ऐसी स्थिति में ये हैकर न सिर्फ सरकारी वेबसाइटों को अपने नियंत्रण में लेकर ठप कर डालते हैं, बल्कि सरकारी दूतावासों, प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों-अधिकारियों के लॉगइन विवरण, ईमेल, पासवर्ड, फोन नंबर और पासपोर्ट नंबर चुरा लेते हैं और उन्हें दूसरी वेबसाइटों पर इस दावे के साथ लीक कर देते हैं कि फलां देश की साइबर सुरक्षा कितनी कमजोर है। खासतौर से भारत की सरकारी वेबसाइटों के बारे में हमारे देश के संदर्भ में हैकिंग की ये कार्रवाइयां बड़ी घटना मानी जाएंगी। इसकी दो अहम वजहें हैं। एक तो यह कि सूचना प्रौद्योगिकी के मामले में भारत खुद को अगुआ देश मानता रहा है, उसके आइटी विशेषज्ञ पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थापित सिलीकॉन वैली की स्थापना तक में युवा भारतीय आइटी विशेषज्ञों की भूमिका मानी जाती है।

साइबर खतरों को भांपते हुए सरकार छह साल पहले 2013 में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति जारी कर चुकी है जिसमें देश के साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए प्रमुख रणनीतियों को अपनाने की बात कही गई थी। इन नीतियों के तहत देश में चौबीसों घंटे काम करने वाले एक नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीईआइपीसी) की स्थापना शामिल है, जो देश में महत्त्वपूर्ण सूचना तंत्र के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए एक नोडल एज

ekawaz18, [09.03.19 22:14]
ेंसी के रूप में काम कर सके। सवाल है कि क्या इन उपायों को अमल में लाने में कोई देरी या चूक हुई है, अथवा यह हमारे सूचना प्रौद्योगिकी तंत्र की कमजोर कड़ियों का नतीजा है कि एक ओर सेंधमार जब चाहें, जो चाहें सरकारी प्रतिष्ठानों की वेबसाइटें ठप कर रहे हैं और दूसरी ओर साइबर आतंकी भी अपनी गतिविधियां चलाने में सफल हो रहे हैं?

भारत में इस तरह के साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। एक आंकड़ा तो एडवर्ड स्नोडेन ने ही मुहैया कराया था। मार्च 2013 में स्नोडेन ने बताया था कि बाहर बैठे सेंधमारों ने भारतीयों की 6.3 अरब खुफिया सूचनाओं तक पहुंच बना ली थी। हालत यह है कि हमारे प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा व विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, मिसाइल प्रणालियों, एनआइसी, यहां तक कि खुफिया एजेंसी- सीबीआइ के कंप्यूटरों पर भी साइबर हमले कर उनकी जासूसी हो चुकी है। यह तथ्य भी प्रकाश में आया है कि विशुद्ध कारोबारी उद्देश्य से भी हमारी संचार सेवाओं को निशाना बनाया जा चुका है। जुलाई 2010 में इनसेट-4बी की बिजली प्रणाली में गड़बड़ी के कारण उसके एक सोलर पैनल ने काम बंद कर दिया था जिससे उसके आधे ट्रांसपॉन्डर ठप हो गए थे। पता चला कि यह काम व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के तहत किया गया था। किसी ने उसमें ‘स्टक्सनेट’ नामक वायरस पहुंचा दिया था, ताकि इनसेट से जुड़े टीवी चैनल चीनी उपग्रह पर चले जाएं! ऐसी ही एक घटना जुलाई, 2015 में हुई थी, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक वेबसाइट ‘एंट्रिक्स’ हैक कर ली गई थी। इस करतूत के पीछे चीन का हाथ माना गया था। ये घटनाएं साबित करती हैं कि अगर कभी दुनिया में साइबर युद्ध के हालात पैदा हुए तो भारत को निशाना बनाना कितना आसान होगा।

बहरहाल, मामला चाहे चीनी-पाकिस्तानी हैकरों का हो या रूसी-कोरियाई हैकरों का, सवाल है कि आखिर वर्चुअल जंग रुकेगी कैसे? इसमें संदेह नहीं है कि दुनिया में अगला निर्णायक युद्ध साइबर युद्ध होगा क्योंकि सारी जानकारियां कंप्यूटर नेटवर्कों में ही समाई हुई हैं। आज सूचनाओं और जानकारियों का सारा संचालन इंटरनेट के जरिये ही हो रहा है। ऐसी स्थिति में विजेता वही होगा जो दुश्मन के कंप्यूटर नेटवर्क में सेंध लगाने में सक्षम होगा और हैकरों से इंटरनेट पर संचालित की जाने वाली सर्जिकल स्ट्राइक से निपट सकेगा।

जानकारों का मत यह है कि कुछ तकनीकों की वजह से देश से बाहर चल रही गतिविधियों पर निगरानी रखना संभव नहीं हो पाता है, जिसका फायदा विदेशी संगठन और अपराधी-आतंकी उठाने में कामयाब हो जाते हैं। असल मुद्दा विदेशों में स्थित प्रॉक्सी इंटरनेट सर्वर और वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआइपी) जैसी तकनीकों की निगरानी का अभाव है। वीओआइपी की पहचान करना और उसके सही पते-ठिकाने की जानकारी लेना काफी मुश्किल काम है। हालांकि राहत की बात यह है कि हमारे देश में वर्ष 2015 में इंटरनेट के जरिये होने वाली आपराधिक गतिविधियों के नियंत्रण के लिए एक विशेष कार्यबल बनाया जा चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर चौबीसों घंटे काम करने वाली कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन), साइबर सुरक्षा के इमरजेंसी रिस्पांस और क्राइसिस मैनेजमेंट के सभी प्रयासों में तालमेल के लिए नोडल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव भी किया गया था। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति में यह प्रस्ताव भी था कि ट्विटर जैसी विदेशी वेबसाइटें किसी भी भारतीय उपभोक्ता से संबंधित सूचनाओं का आवागमन भारत स्थित सर्वरों से ही कर पाएं, अन्यथा नहीं। मुमकिन है कि ये इंतजाम वर्चुअल जंग के हालात पर नियंत्रण करने में हमारी कुछ सहायता कर पाएंगे।

मामला चाहे चीनी-पाकिस्तानी हैकरों का हो या रूसी-कोरियाई हैकरों का, सवाल है कि आखिर वर्चुअल जंग रुकेगी कैसे? इसमें संदेह नहीं है कि दुनिया में अगला निर्णायक युद्ध साइबर युद्ध होगा क्योंकि सारी जानकारियां कंप्यूटर नेटवर्कों में ही समाई हुई हैं।

भारत में इस तरह के साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। एक आंकड़ा तो 2013 में अमेरिकी पूर्व सैनिक एडवर्ड स्नोडेन ने ही मुहैया कराया था। मार्च 2013 में स्नोडेन ने बताया था कि बाहर बैठे सेंधमारों ने भारतीयों की 6.3 अरब खुफिया सूचनाओं तक पहुंच बना ली थी। हालत यह है कि हमारे प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा व विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, मिसाइल प्रणालियों, एनआइसी, यहां तक कि खुफिया एजेंसी- सीबीआइ के कंप्यूटरों पर भी साइबर हमले कर उनकी जासूसी हो चुकी है।

साइबर स्पेस के खतरों की बात अब काल्पनिक नहीं रह गई है। वर्चुअल आतंकवाद, सेंधमारी और सैन्य व आर्थिक महत्त्व की सूचनाओं के लीक होने जैसी घटनाओं ने साबित कर दिया है कि सूचनाओं के इलेक्ट्रॉनिक संजाल में घुसपैठ की रोकथाम के पुख्ता प्रबंध नहीं करने का खमियाजा दुनिया की कई सरकारों को भी उठाना पड़ सकता है। हाल में, पुलवामा हमले के फौरन बाद खबर मिली कि पाकिस्तानी हैकरों ने भारत सरकार से जुड़ी कम से कम नब्बे वेबसाइटों को हैक कर लिया। इनमें खासतौर से वित्तीय संचालन और पावर ग्रिड से संबंधित वेबसाइटें हैकरों के निशाने पर थीं।

साइबर कहें या वर्चुअल (आभासी) जंग, असल में अब इसका खतरा वास्तविक है। मामला सिर्फ भारत, पाकिस्तान या चीन तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें महाशक्तियां शामिल हैं। पिछले वर्ष अक्तूबर में कई पश्चिमी देशों ने रूस के सैन्य खुफिया विभाग पर दुनियाभर में कई साइबर हमले करने के आरोप लगाए थे। हालांकि रूस ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा था कि कुछ पश्चिमी देश उसे योजनाबद्ध तरीके से फैलाए जा रहे दुष्प्रचार में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसमें संदेह नहीं रह गया है कि भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती साइबर जंग होगी। साइबर युद्ध यानी इंटरनेट के जरिये संचालित की जाने वाली वे आपराधिक और आतंकी गतिविधियां जिनसे कोई व्यक्ति या संगठन देश-दुनिया और समाज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे। अभी तक देश में इस तरीके से कई गैरकानूनी काम हुए, जैसे आॅनलाइन ठगी, बैंकिंग नेटवर्क में सेंध, लोगों- खासकर महिलाओं को उनके गलत प्रोफाइल बना कर परेशान करना आदि। साइबर जंग या आतंकवाद का हैकिंग के रूप में भी एक चेहरा ऐसा हो सकता है जिसमें खासतौर से महत्त्वपूर्ण सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाया जाए। भारत में हाल के साइबर हमलों की घटनाओं के बाद यह मांग तक उठने लगी है कि वर्चुअल जंग से दो-दो हाथ करने के मामले में हमारे देश में ठीक वैसा ही रवैया अपनाने की जरूरत है जैसा उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद हवाई हमले के रूप में अपनाया गया है, यानी साइबर अपराधियों का संपूर्ण सफाया किया जाए। पर यह काम आसान नहीं है।

असल में साइबर युद्ध छेड़ने वाले अपराधियों का चेहरा साफ नहीं दिखता है। दुनिया के किसी भी कोने में बैठ कर सेंधमार सरकारी प्रतिष्ठानों की वेबसाइटों को चौपट करने के अलावा बैंकिंग से जुड़ी गतिविधियों में सेंधमारी करके अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं। जहां तक सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाने की बात है तो ऐसा अक्सर दो देशों के बीच तनाव पैदा होने के हालात में ही सेंधमार करते हैं। ऐसी स्थिति में ये हैकर न सिर्फ सरकारी वेबसाइटों को अपने नियंत्रण में लेकर ठप कर डालते हैं, बल्कि सरकारी दूतावासों, प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों-अधिकारियों के लॉगइन विवरण, ईमेल, पासवर्ड, फोन नंबर और पासपोर्ट नंबर चुरा लेते हैं और उन्हें दूसरी वेबसाइटों पर इस दावे के साथ लीक कर देते हैं कि फलां देश की साइबर सुरक्षा कितनी कमजोर है। खासतौर से भारत की सरकारी वेबसाइटों के बारे में हमारे देश के संदर्भ में हैकिंग की ये कार्रवाइयां बड़ी घटना मानी जाएंगी। इसकी दो अहम वजहें हैं। एक तो यह कि सूचना प्रौद्योगिकी के मामले में भारत खुद को अगुआ देश मानता रहा है, उसके आइटी विशेषज्ञ पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थापित सिलीकॉन वैली की स्थापना तक में युवा भारतीय आइटी विशेषज्ञों की भूमिका मानी जाती है।

साइबर खतरों को भांपते हुए सरकार छह साल पहले 2013 में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति जारी कर चुकी है जिसमें देश के साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए प्रमुख रणनीतियों को अपनाने की बात कही गई थी। इन नीतियों के तहत देश में चौबीसों घंटे काम करने वाले एक नेशनल क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीईआइपीसी) की स्थापना शामिल है, जो देश में महत्त्वपूर्ण सूचना तंत्र के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए एक नोडल एजेंसी  के रूप में काम कर सके। सवाल है कि क्या इन उपायों को अमल में लाने में कोई देरी या चूक हुई है, अथवा यह हमारे सूचना प्रौद्योगिकी तंत्र की कमजोर कड़ियों का नतीजा है कि एक ओर सेंधमार जब चाहें, जो चाहें सरकारी प्रतिष्ठानों की वेबसाइटें ठप कर रहे हैं और दूसरी ओर साइबर आतंकी भी अपनी गतिविधियां चलाने में सफल हो रहे हैं?

भारत में इस तरह के साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। एक आंकड़ा तो एडवर्ड स्नोडेन ने ही मुहैया कराया था। मार्च 2013 में स्नोडेन ने बताया था कि बाहर बैठे सेंधमारों ने भारतीयों की 6.3 अरब खुफिया सूचनाओं तक पहुंच बना ली थी। हालत यह है कि हमारे प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा व विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, मिसाइल प्रणालियों, एनआइसी, यहां तक कि खुफिया एजेंसी- सीबीआइ के कंप्यूटरों पर भी साइबर हमले कर उनकी जासूसी हो चुकी है। यह तथ्य भी प्रकाश में आया है कि विशुद्ध कारोबारी उद्देश्य से भी हमारी संचार सेवाओं को निशाना बनाया जा चुका है। जुलाई 2010 में इनसेट-4बी की बिजली प्रणाली में गड़बड़ी के कारण उसके एक सोलर पैनल ने काम बंद कर दिया था जिससे उसके आधे ट्रांसपॉन्डर ठप हो गए थे। पता चला कि यह काम व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के तहत किया गया था। किसी ने उसमें ‘स्टक्सनेट’ नामक वायरस पहुंचा दिया था, ताकि इनसेट से जुड़े टीवी चैनल चीनी उपग्रह पर चले जाएं! ऐसी ही एक घटना जुलाई, 2015 में हुई थी, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की व्यावसायिक वेबसाइट ‘एंट्रिक्स’ हैक कर ली गई थी। इस करतूत के पीछे चीन का हाथ माना गया था। ये घटनाएं साबित करती हैं कि अगर कभी दुनिया में साइबर युद्ध के हालात पैदा हुए तो भारत को निशाना बनाना कितना आसान होगा।

बहरहाल, मामला चाहे चीनी-पाकिस्तानी हैकरों का हो या रूसी-कोरियाई हैकरों का, सवाल है कि आखिर वर्चुअल जंग रुकेगी कैसे? इसमें संदेह नहीं है कि दुनिया में अगला निर्णायक युद्ध साइबर युद्ध होगा क्योंकि सारी जानकारियां कंप्यूटर नेटवर्कों में ही समाई हुई हैं। आज सूचनाओं और जानकारियों का सारा संचालन इंटरनेट के जरिये ही हो रहा है। ऐसी स्थिति में विजेता वही होगा जो दुश्मन के कंप्यूटर नेटवर्क में सेंध लगाने में सक्षम होगा और हैकरों से इंटरनेट पर संचालित की जाने वाली सर्जिकल स्ट्राइक से निपट सकेगा।

जानकारों का मत यह है कि कुछ तकनीकों की वजह से देश से बाहर चल रही गतिविधियों पर निगरानी रखना संभव नहीं हो पाता है, जिसका फायदा विदेशी संगठन और अपराधी-आतंकी उठाने में कामयाब हो जाते हैं। असल मुद्दा विदेशों में स्थित प्रॉक्सी इंटरनेट सर्वर और वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआइपी) जैसी तकनीकों की निगरानी का अभाव है। वीओआइपी की पहचान करना और उसके सही पते-ठिकाने की जानकारी लेना काफी मुश्किल काम है। हालांकि राहत की बात यह है कि हमारे देश में वर्ष 2015 में इंटरनेट के जरिये होने वाली आपराधिक गतिविधियों के नियंत्रण के लिए एक विशेष कार्यबल बनाया जा चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर चौबीसों घंटे काम करने वाली कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन), साइबर सुरक्षा के इमरजेंसी रिस्पांस और क्राइसिस मैनेजमेंट के सभी प्रयासों में तालमेल के लिए नोडल एजेंसी बनाने का प्रस्ताव भी किया गया था। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति में यह प्रस्ताव भी था कि ट्विटर जैसी विदेशी वेबसाइटें किसी भी भारतीय उपभोक्ता से संबंधित सूचनाओं का आवागमन भारत स्थित सर्वरों से ही कर पाएं, अन्यथा नहीं। मुमकिन है कि ये इंतजाम वर्चुअल जंग के हालात पर नियंत्रण करने में हमारी कुछ सहायता कर पाएंगे।

Monday, 11 March 2019

चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से देश में आचार संहिता लागू की

Election Commission has implemented the code of conduct in the country with immediate effect (Author : R. Ranjan)


चुनाव आयोग ने हाल ही में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है साथ ही चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से देशभर में आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी है। चुनाव आयोग के द्वारा की गई घोषणा के अनुसार देशभर में कुल 7 चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जायेंगे। चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा जबकि मतगणना 23 मई को होगी

आचार संहिता के दौरान किसी व्यक्ति, पार्टी या संगठन के लिए कुछ सामाजिक व्यवहार, नियम एवं उत्तरदायित्वों को निर्धारित किया जाता है और इन्हीं सब को आचरण संहिता अथवा आचार संहिता अथवा code of conduct  कहा जाता है. आइये जानते हैं आचार संहिता के बारे में अधिक जानकारी। 


क्या है आचार संहिता

➤ देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के बनाए गए नियमों को ही आचार संहिता कहते हैं। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निष्पक्ष और निर्विवाद चुनाव संपन्न कराना इसका मुख्य मकसद होता है 

 आचार संहिता लागू होते ही शासन और प्रशासन में कई अहम बदलाव हो जाते हैं

 राज्यों और केंद्र सरकार के कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव आयोग के कर्मचारी की तरह काम करते हैं

 आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी ऐसे आयोजन में नहीं किया जा सकता जिससे किसी विशेष दल को फ़ायदा पहुंचता हों

 सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगला का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है

 आचार संहिता लगने के बाद सभी तरह की सरकारी घोषणाएं, लोकार्पण, शिलान्यास या भूमिपूजन के कार्यक्रम नहीं किए जा सकते हैं

 किसी भी पार्टी, प्रत्याशी या समर्थकों को रैली या जुलूस निकालने या चुनावी सभा करने की पूर्व अनुमति पुलिस से लेना अनिवार्य होता है

 राजनीतिक कार्यक्रमों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक भी नियुक्त करता है

 कोई भी राजनीतिक दल जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं से वोट नहीं मांग सकता है

 ऐसा करने पर चुनाव आयोग दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है


आचार संहिता के उल्लंघन पर चुनाव आयोग क्या कर सकता है?

 यदि कोई प्रत्याशी या राजनीतिक दल आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो चुनाव आयोग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है

 उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है जरूरी होने पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है

 आचार संहिता के उल्लंघन में जेल जाने तक के प्रावधान भी है।


सामान्य आचार संहिता (general code)-

राजनीतिक पार्टियों को अपने प्रतिद्वंदी पार्टियों की उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर ही आलोचना करनी होगी। वोटरों को लुभाने के लिए जाति और सांप्रदायिक लाभ उठाने से बचना होगा। झूठी जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना नहीं करनी होगी। वोटरों को किसी तरह का रिश्वत नहीं देना होगा। प्रदर्शन और अनशन भी प्रतिबंधित होगा।


मीटिंग (meetings)- 

पार्टियों को अगर कोई बैठक या सभा करनी होगी तो उन्हें उस इलाके के स्थानीय पुलिस को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी ताकि वे सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम कर सकें।


चुनाव प्रचार (processions)-

अगर दो या दो से अधिक पार्टियां एक ही रुट में चुनाव प्रचार के लिए निकली हैं तो आयोजनकर्ताओं को आपस में संपर्क कर ये तय करना होगा ताकि वे आपस में क्लैश ना हो जाएं। एक दूसरे के विरोध में हिंसा का प्रयोग बिल्कुल भी प्रतिबंधित होगा।


पोलिंग डे (polling day)- 

सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को एक पहचान पत्र रखना होगा। इसमें किसी पार्टी का नाम नहीं होगा ना ही चुनाव चिन्ह और ना ही किसी चुनावी उम्मीदवार का नाम होगा।


पोलिंग बूथ (polling booths)-

केवल मतदाता जिनके पास चुनाव आयोग के द्वारा मान्य पास होगा वे ही पोलिंग बूथ के अंदर जा सकते हैं।


निरीक्षक (observers)-

चुनाव आयोग हर पोलिंग बूथ के बाहर एक निरीक्षक तैनात करेगा ताकि अगर आचार संहिता का कोई उल्लंघन कर रहा है तो उसकी शिकायत उनके पास की जा सके।


सत्ताधारी पार्टी (the party in power)- 

इस दौरान सत्ताधारी पार्टी के मंत्रियों को किसी भी तरह की आधिकारिक दौरे की मनाही होगी, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपनी आधिकारिक दौरे पर चुनावी प्रचार ना करें। उन्हें किसी तरह के लोक लुभावने वादे नहीं करने होंगे। सार्वजनिक स्थानों पर किसी तरह का एकाधिकार नहीं होगा।


चुनावी घोषणापत्र (election manifestos)- 

2013 में जारी किए गए नए गाइडलाइन के मुताबिक इस नियम में ये कहा गया है कि चुनावी घोषणापत्र में बताए गए वादों को पूरा करना होगा। 


सामान्य नियम : 

 कोई भी दल ऐसा काम न करे, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले। 

 राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित हो, न ही व्यक्तिगत। 

 धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। 

 मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें। जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि। 

 किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें। 

 किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें। 

 राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएं आहत होती हों। 


राजनीतिक सभाओं से जुड़े नियम

  सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए। 

 दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉं निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है। 

 सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें। 

 सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें। 


जुलूस संबंधी नियम

 जुलूस का समय, शुरू होने का स्थान, मार्ग और समाप्ति का समय तय कर सूचना पुलिस को दें। 

 जुलूस का इंतजाम ऐसा हो, जिससे यातायात प्रभावित न हो। 

 राजनीतिक दलों का एक ही दिन, एक ही रास्ते से जुलूस निकालने का प्रस्ताव हो तो समय को लेकर पहले बात कर लें। 

 जुलूस सड़क के दायीं ओर से निकाला जाए। 

 जुलूस में ऐसी चीजों का प्रयोग न करें, जिनका दुरुपयोग उत्तेजना के क्षणों में हो सके। 


मतदान के दिन संबंधी नियम : 

 अधिकृत कार्यकर्ताओं को बिल्ले या पहचान पत्र दें। 

 मतदाताओं को दी जाने वाली पर्ची सादे कागज पर हो और उसमें प्रतीक चिह्न, अभ्यर्थी या दल का नाम न हो। 

 मतदान के दिन और इसके 24 घंटे पहले किसी को शराब वितरित न की जाए। 

 मतदान केन्द्र के पास लगाए जाने वाले कैम्पों में भीड़ न लगाएं। 

 कैम्प साधारण होने चाहिए। 

 मतदान के दिन वाहन चलाने पर उसका परमिट प्राप्त करें। 


सत्ताधारी दल के लिए नियम 

 कार्यकलापों में शिकायत का मौका न दें। 

 मंत्री शासकीय दौरों के दौरान चुनाव प्रचार के कार्य न करें। 

 इस काम में शासकीय मशीनरी तथा कर्मचारियों का इस्तेमाल न करें। 

 सरकारी विमान और गाड़ियों का प्रयोग दल के हितों को बढ़ावा देने के लिए न हो। 

 हेलीपेड पर एकाधिकार न जताएं। 

 विश्रामगृह, डाक-बंगले या सरकारी आवासों पर एकाधिकार नहीं हो। 

 इन स्थानों का प्रयोग प्रचार कार्यालय के लिए नहीं होगा। 

 सरकारी धन पर विज्ञापनों के जरिये उपलब्धियां नहीं गिनवाएंगे। 

 मंत्रियों के शासकीय भ्रमण पर उस स्थिति में गार्ड लगाई जाएगी जब वे सर्किट हाउस में ठहरे हों। 

 कैबिनेट की बैठक नहीं करेंगे। 

 स्थानांतरण तथा पदस्थापना के प्रकरण आयोग का पूर्व अनुमोदन जरूरी। 


ये काम नहीं करेंगे मुख्यमंत्री-मंत्री : 

 शासकीय दौरा (अपवाद को छोड़कर) 

 विवेकाधीन निधि से अनुदान या स्वीकृति 

 परियोजना या योजना की आधारशिला 

 सड़क निर्माण या पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन 


अधिकारियों के लिए नियम

 शासकीय सेवक किसी भी अभ्यर्थी के निर्वाचन, मतदाता या गणना एजेंट नहीं बनेंगे। 

 मंत्री यदि दौरे के समय निजी आवास पर ठहरते हैं तो अधिकारी बुलाने पर भी वहॉं नहीं जाएंगे। 

 चुनाव कार्य से जाने वाले मंत्रियों के साथ नहीं जाएंगे। 

 जिनकी ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें छोड़कर सभा या अन्य राजनीतिक आयोजन में शामिल नहीं होंगे। 

 राजनीतिक दलों को सभा के लिए स्थान देते समय भेदभाव नहीं करेंगे। 


लाउडस्पीकर के प्रयोग पर प्रतिबंध : चुनाव की घोषणा हो जाने से परिणामों की घोषणा तक सभाओं और वाहनों में लगने वाले लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इसके मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में सुबह 6 से रात 11 बजे तक और शहरी क्षेत्र में सुबह 6 से रात 10 बजे तक इनके उपयोग की अनुमति होगी। 


आचार संहिता में मतदान के दिन संबंधी नियम

 राजनीतिक दलों द्वारा अधिकृत कार्यकर्ताओं को बिल्ले या पहचान पत्र दिए जाने चाहिए

 मतदाताओं को पोलिंग बूथ से पहले दी जाने वाली पर्ची सादे कागज पर होनी चाहिए तथा उस पर पार्टी का प्रतीक चिह्न, अभ्यर्थी या दल का नाम आदि लिखा नहीं होना चाहिए

 मतदान के दिन अथवा इससे 24 घंटे पूर्व राजनीतिक दलों द्वारा किसी को शराब वितरित नहीं की जानी चाहिए

 मतदान केन्द्रों के पास किसी प्रकार की सभा लाउडस्पीकर या भीड़ नहीं लगाए जाने चाहिए