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Sunday, 24 March 2019

कजाखस्तान के राजधानी अस्ताना का नाम बदला


कजाखस्तान की संसद ने 20 मार्च 2019 को देश के लंबे समय से राष्ट्रपति रहे नूरसुलतान नजरबायेव के सम्मान में राजधानी अस्ताना का नाम बदल कर नूरसुलतान करने का सर्वसम्मति से फैसला किया। 

सरकारी समाचार एजेंसी ‘काजिन्फॉर्म’ ने संसद में मतदान की सूचना देते हुए कहा की अस्ताना का अब आधिकारिक रूप से नूरसुलतान नाम कर दिया गया है। इसकी घोषणा हाल ही में नए राष्ट्रपति कासिम-जोमात तोकायेव ने की। हाल ही में नूरसुल्तान नजरबायेव ने कजाखस्तान के राष्ट्रपति के पद से तीस वर्ष बाद इस्तीफा दिया था। नजरबायेव के अचानक इस्तीफे के बाद नए अंतरिम राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव ने अस्ताना का नाम बदलने का प्रस्ताव किया था। अस्ताना को पहले अकमोला, त्सेलिनोग्राड और अकमोलिंस्क के नाम से जाना जाता था।


नूरसुल्तान नजरबायेव

नूरसुल्तान नजरबायेव कजाखस्तान के पहले राष्ट्रपति हैं। वे 24 अप्रैल 1990 से 19 मार्च 2019 तक कजाखस्तान के राष्ट्रपति रहे। कजाखस्तान में बहुत से लोग नूरसुल्तान नजरबायेव को हीरो तरह देखते हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जो उन्हें अहंकारी तानाशाह मानते हैं। उन्हें साल 1989 को कम्युनिस्ट पार्टी का प्रथम सचिव चुना गया था।

बाद में सोवियत संघ से कजाखस्तान की स्वतंत्रता के बाद वे देश के पहले राष्ट्रपति बने। गौरतलब है कि अप्रैल 2015 में उन्हें 98 प्रतिशत वोट के साथ पुनः कजाखस्तान का राष्ट्रपति चुना गया था। नूरसुल्तान नजरबायेव का जन्म 6 जुलाई 1940 को भूतपूर्व सोवियत संघ के चेमोलगन में हुआ था।

कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में नूरसुल्तान नजरबायेव की तस्वीरें हर जगह दिख जाती हैं। इसे बड़े से बर्फीले  देश में हवाई अड्डों, सड़कों, स्कूल और चौक-चौराहों पर उनका नाम लिखा हुआ मिलता है। 


कजाखस्तान के बारे में


कजाखस्तान यूरेशिया में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह विश्व का 9वां सबसे बड़ा देश है। यह देश अधिकतर एशिया में स्थित है, इसका पश्चिमी हिस्सा यूरोप में स्थति है. इस देश में तेल और गैस प्रचुर मात्र में उपलब्ध है। कजाखस्तान ने 16 दिसम्बर 1991 को भूतपूर्व सोवियत संघ से स्वतंत्रता की घोषणा की थी। यहाँ के मुख्य निवासी कजाख लोग हैं जो तुर्क मूल के हैं। कजाखस्तान में शुष्क महाद्वीपीय जलवायु है, जिसका अर्थ है कि सर्दी काफी ठंडी होती है और गर्मी गर्म होती है।

Thursday, 28 February 2019

स्मृति ईरानी ने ‘तितानवाला म्यूजियम’ का उद्घाटन किया

Smriti Irani inaugurates Titanwala Museum in Rajasthan's Bagru (Author : R. Kumari)


केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने 26 फरवरी 2019 को बगरू में हैंडब्लॉक प्रिंटिंग के ‘तितानवाला म्यूजियम‘ का उद्घाटन किया। उद्घाटन करने के बाद उन्होंने म्यूजियम की विभिन्न गैलरियों का भी अवलोकन किया। 

तितानवाला म्यूजियम में बड़ी संख्या में पारम्परिक वुडन ब्लॉक, कपड़ों की रंगाई व छपाई के काम आने वाले बर्तन व सहायक उपकरण तथा छीपा समुदाय के इतिहास को दर्शाने वाले पुराने फोटोग्राफ प्रदर्शित किए गये हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘तितानवाला म्यूजियम’ ने यह साबित कर दिया है कि कला व संस्कृति को आगे बढ़ाने अथवा संरक्षित करने के लिए सरकार पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह म्यूजियम बगरू को पूरे विश्व में पहचान दिलाएगा। उन्होंने कहा कि ब्लॉक प्रिंटिंग की विरासत सूरज नारायण तितानवाला जैसे संग्रहकों की पहल के कारण ही संरक्षित है, जो स्वयं छीपा समुदाय से हैं.


बगरू की ब्लॉक प्रिंटिंग कैसे होती है?

🏡 बगरू नामक स्थान की ब्लॉक प्रिंटिंग प्राकृतिक रंग के साथ ब्लॉक प्रिटिंग पारंपरिक तकनीकों में से एक है, जिसका श्रेय राजस्थान के छीपा समुदाय को जाता है।

🏡 बगरू की हाथ से की जाने वाली इस ब्लॉक प्रिंटिंग का इतिहास 1,000 वर्षों से भी पुराना है।

🏡 इस तकनीक में पहले कपड़े को मुल्तानी मिट्टी में धोया जाता है फिर इसे हल्दी मिले पानी में डुबोया जाता है ताकि यह पीली आभा हासिल कर सके।

🏡 इसके बाद डाई किये गये इन कपड़ों पर विभिन्न प्रकार के ब्लॉक्स से छपाई की जाती है। यह सारा काम हाथ से किया जाता है.

🏡 सागौन-लकड़ी से बनाये गये लकड़ी के ब्लॉक का उपयोग डिजाइन को प्रिंट करने के लिए किया जाता है। 

🏡 इन ब्लॉक्स को उपयोग से पहले रात भर तेल में भिगोया जाता है और फिर उपयोग में लाने से पहले धोया जाता है।

🏡 जिस कपड़े पर प्रिंटिंग की जाती है उसे चिकनी मिट्टी में भिगोकर तथा कुछ अन्य केमिकल लगाकर नरम किया जाता है।

🏡 कपड़े पर बेहद ध्यान से साफ़-सुथरे तरीके से ब्लॉक प्रिटिंग की जाती है। प्रिटिंग हो जाने के बाद कपड़े को धूप में सूखने के लिए रख दिया जाता है।


छीपा समाज के बारे में जानकारी

छीपा समाज के लोग भारत के पुरातन बुनकर समाज के लोग हैं। छीपा शब्द नेपाली भाषा के दो शब्दों “छी’ अर्थात् डाई करना एवं “पा” अर्थात् धूप में सुखाना से मिलकर बना है। इस समुदाय के लोग राजस्थान में काफी लंबे समय से ब्लॉक प्रिंटिंग करते हैं। इनके ब्लॉक्स पर मिलने वाली बारीक कारीगरी के कारण यह छपाई काफी प्रसिद्ध है।

Saturday, 15 September 2018

गुजरात में शुरू हुआ देश का पहला रेलवे विश्वविद्यालय




गुजरात के वडोदरा में बने देश के पहले राष्ट्रीय रेल तथा परिवहन विश्वविद्यालय ने काम करना शुरू कर दिया है। 05 सितम्बर 2018 को शिक्षक दिवस के दिन गुजरात के वडोदरा में भारत का पहला रेल विश्वविद्यालय शुरू किया गया।

फिलहाल यह वडोदरा स्थित भारतीय रेल राष्ट्रीय अकादमी से ही काम कर रहा है। कैलिफॉर्निया, बर्कले और कॉर्नेल विश्वविद्यालय जैसे विदेशी पार्टनर्स के साथ काम कर रहे इस रेलवे विश्वविद्यालय ने अभी 2 ग्रैजुएट प्रोग्राम शुरू किए हैं। यह प्रोग्राम बीएससी ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी और बीबीए ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट हैं। हर कोर्स में 50 छात्र हैं।

मुख्य तथ्य
  • यह विश्‍वविद्यालय यूसीजी की नोवो श्रेणी (मानित विश्‍वविद्यालय संस्‍थान) नियमन, 2016 के अंतर्गत मानित विश्‍वविद्यालय के रूप में स्‍थापित हुआ है।
  • यह विश्‍वविद्यालय भारतीय रेल को आधुनिकीकरण के रास्‍ते पर ले जाएगा और उत्‍पादकता बढ़ाकर तथा ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्‍साहन देकर परिवहन क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेता बनाने में सहायक होगा।
  • विश्‍वविद्यालय कुशल मानव शक्ति संसाधन का पूल बनाएगा और भारतीय रेल में बेहतर सुरक्षा, गति और सेवा प्रदान करने के लिए अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिक का लाभ उठायेगा।
  • विश्‍वविद्यालय टेक्‍नोलॉजी को सक्रिय करके तथा टेक्‍नोलॉजी प्रदान करके ‘स्‍टार्ट अप इंडिया’ तथा ‘स्किल इंडिया’ को समर्थन देगा तथा उद्यमियता को बढ़ावा देने के साथ-साथ बड़े स्‍तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। इससे रेलवे तथा परिवहन क्षेत्र में परिवर्तन होगा तथा लोगों और वस्‍तुओं की आवाजाही में तेजी आएगी।


पृष्ठभूमि

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मानव संसाधन कौशल और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए गुजरात के वडोदरा में देश की पहली रेल यूनिवर्सिटी की स्थापना को 20 दिसम्बर 2017 को मंजूरी दी थी। इस विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए वडोदरा स्थित भारतीय रेल की राष्ट्रीय अकादमी (एनएआईआर) की मौजूदा जमीन का इस्तेमाल किया गया है।

बता दें 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की रेलवे प्रणाली के रिसर्च और आधुनिकीकरण के लिए रेलवे यूनिवर्सिटी की घोषणा की थी। इसे आतंरिक रूप से राष्ट्रीय रेल परिवहन यूनिवर्सिटी के नाम से जाता है।

Sunday, 29 July 2018

कंचनजंगा को यूनेस्को बायोस्फेयर का दर्जा


यूनस्को के मैन एंड बायोस्फेयर रिजर्व (एमएबी) कार्यक्रम की इंडोनेशिया के पालेमबांग में 23-28 जुलाई, 2018 को रही बैठक के दौरान विश्व के 24 नए स्थलों को ‘यूनेस्को के वर्ल्ड बायोस्फेयर रिजर्व नेटवर्क’ में शामिल किया गया जिनमें भारत के सिक्किम स्थित कंचनजंगा स्थित बायोस्फेयर रिजर्व भी शामिल है।

कंचनजंगा के अलावा जिन अन्य 23 स्थलों को बायोस्फेयर रिजर्व घोषित किया गया, वे हैंः अर्ली (बुर्किना फासो), माउंट हुआंगशान (चीन), माउंट कुमगांग (उत्तर कोरिया), चोको एंडिनो डी पिचेंचा (इक्वाडोर), बरबक-सेम्बेलांग, बेटुंग केरीहुन दानौ सेंटारम कपुआस हूलू और रिनजानी-लंबोक (इंडोनेशिया), कोपेट-डैग (ईरान), मोंट पेग्लिया और वैल कैमोनिका-अल्टो सेबिनो (इटली), सिमानैम्पसोटसे-नोसी वी एंड्रोक (मेडागास्कर), लोअर प्रट (मोल्दोवा), क्विरंबस (मोजाम्बिक), माशेहेगेन (नीदरलैंड), चेरिन बायोस्फीयर रिजर्व और झोंगर बायोस्फीयर रिजर्व (कज़ाखस्तान), सनचेन बायोस्फीयर रिजर्व (दक्षिण कोरिया), माउंटेन यूराल्स (रूस), मुरा नदी (स्लोवेनिया), मैरिको (दक्षिण अफ्रीका), पोंगा (स्पेन), वाडी वारायह (संयुक्त अरब अमीरात) और गोम्बे मासिटो उगाल्ला (तंजानिया )। 

कंचनजंगा बायोस्फेयर रिजर्व
  • कंचनजंगा बायोस्फेयर रिजर्व जिसे कंचनचेंदजोंगा भी कहा जाता है, नेपाल एवं तिब्बत की सीमा पर सिक्किम राज्य में स्थित है।
  • यह विश्व के सबसे ऊंचे पारितंत्रें में से एक है जिसकी ऊंचाई 1220 से 8586 मीटर तक है।
  • यह विश्व के 34 बायोडायवर्सिटी हॉट-स्पॉट में से एक है।
  • कंचनजंगा नेशनल पार्क को यूनेस्को ने वर्ष 2016 में विश्व विरासत स्थल का भी दर्जा प्रदान किया था।
  • यहां का भूदृश्य बौद्ध (बेयुल) एवं लेप्चा (मायेल ल्यांग) के लिए पवित्र है।
  • विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा भी यहीं स्थित है।

कंचनजंगा को मिलाकर भारत में यूनेस्को के कुल 11 बायोस्फेयर रिजर्व हो गये हैं। इनकी सूची इस प्रकार हैंः

निलगिरी: 2000
मन्नार की खाड़ीः 2001
सुंदरबन: 2001
नंदा देवी: 2004
नोकरेक: 2009
पंचमढ़ी: 2009
सिम्लीपाल: 2009
अचनकमार-अमरकंटकः 2012
ग्रेट निकोबाररः 2013
अगस्त्यमाला:  2016
कंचनजंगा: 2018 

मैन एंड बोयोस्फेयर कार्यक्रम

➤ मैन एंड बाायोस्फेयर कार्यक्रम यूनेस्को ने 1970 के दशक में आरंभ किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों एवं उनके प्राकृतिक पर्यावरण के बीच संबंध को बढ़ाना है। इसके तहत प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के द्वारा जैव विविधता के संरक्षण व मानव गतिविधियों के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है।

➤विश्व में अभी 686 यूनेस्को बायोस्फेयर रिजर्व हैं जो 122 देशों में हैं जिनमें 20 एक से अधिक देशों में फैला है।

Thursday, 21 June 2018

मेघालय की राजधानी शिलांग का चयन 100वीं स्मार्ट सिटी


मेघालय की राजधानी शिलांग का चयन 100वीं स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है।

➤ शिलांग द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्ताव के आकलन के बाद ही इस शहर का चयन किया गया है।    ➤ अब तक संबंधित प्रतिस्पर्धा के चार दौर में 99 स्मार्ट सिटी का चयन किया गया था और शिलांग का चयन की घोषणा के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 स्मार्ट सिटी के चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।    ➤ इससे पहले जनवरी 2016 में 20 शहरों, मई 2016 में 13 शहरों, सितम्बर 2016 में 27 शहरों, जून 2017 में 30 शहरों और जनवरी 2018 में 9 शहरों का चयन किया गया था।    ➤ शिलांग के चयन के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अंतिम रूप से चयनित 100 स्मार्ट सिटी में कुल प्रस्तावित निवेश 2,05,018 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

➤ शिलांग द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्ताव के आकलन के बाद ही इस शहर का चयन किया गया है।

➤ अब तक संबंधित प्रतिस्पर्धा के चार दौर में 99 स्मार्ट सिटी का चयन किया गया था और शिलांग का चयन की घोषणा के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 स्मार्ट सिटी के चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।

➤ इससे पहले जनवरी 2016 में 20 शहरों, मई 2016 में 13 शहरों, सितम्बर 2016 में 27 शहरों, जून 2017 में 30 शहरों और जनवरी 2018 में 9 शहरों का चयन किया गया था।

➤ शिलांग के चयन के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अंतिम रूप से चयनित 100 स्मार्ट सिटी में कुल प्रस्तावित निवेश 2,05,018 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

Monday, 18 June 2018

मेसेडोनिया ने देश का नाम बदलकर 'उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य' रखा

मेसेडोनिया ने 17 जून 2018 को अपने देश का नाम बदलकर उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य (Republic of North Macedonia) रखने की घोषणा की है। मेसेडोनिया के इस निर्णय से ग्रीस के साथ उसका पिछले कई वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। दोनों देशों के मध्य हुई बातचीत से इस निर्णय पर समझौता किया गया।    उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम रखे जाने पर यूरोपियन यूनियन, संयुक्त राष्ट्र, यूनान एवं अन्य वैश्विक शक्तियों ने मेसेडोनिया के इस कदम का स्वागत किया है।    क्या होगा प्रभाव?  ग्रीस और उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम को लेकर हुए समझौते में स्पष्ट किया गया है कि नये मेसेडोनिया को पुरानी ग्रीक सभ्यता से संबंधित नहीं माना जाएगा। मेसेडोनिया को अब 'रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मेसेडोनिया' के नाम से जाना जाएगा। मेसेडोनियन भाषा में इसे सेवेर्ना मकदूनिया कहा जाएगा। नए नाम की आधिकारिक घोषणा से पहले मेसेडोनिया की जनता और ग्रीस की संसद की मंजूरी जरूरी होगी।  क्या था विवाद?  यूरोप के दो देशों ग्रीस और मेसेडोनिया ने 27 वर्ष से जारी विवाद सुलझाते हुए यह निर्णय लिया है। वर्ष 1991 में यूगोस्लाविया से अलग होकर नया देश रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया बना था। इसके दक्षिण में स्थित ग्रीस के कुछ हिस्सों को भी मेसेडोनिया के नाम से जाना जाता है। इस पर दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया था। ग्रीस के उत्तरी क्षेत्र का नाम भी मेसेडोनिया है और सिकंदर भी इसी क्षेत्र का रहने वाला था। इसी वजह से ग्रीस के नागरिक इस नाम को लेकर क्षुब्ध थे। ग्रीस का कहना था कि उसके हिस्से में आने वाला मेसेडोनिया यूनानी संस्कृति का प्रमुख भाग है। एक जैसे दो नामों की होने से लोगों को सही जानकारी प्रदान करने की दिशा में भ्रामक स्थिति पैदा होती है।

मेसेडोनिया ने 17 जून 2018 को अपने देश का नाम बदलकर उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य (Republic of North Macedonia) रखने की घोषणा की है। मेसेडोनिया के इस निर्णय से ग्रीस के साथ उसका पिछले कई वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। दोनों देशों के मध्य हुई बातचीत से इस निर्णय पर समझौता किया गया।

उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम रखे जाने पर यूरोपियन यूनियन, संयुक्त राष्ट्र, यूनान एवं अन्य वैश्विक शक्तियों ने मेसेडोनिया के इस कदम का स्वागत किया है।

क्या होगा प्रभाव?
  • ग्रीस और उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम को लेकर हुए समझौते में स्पष्ट किया गया है कि नये मेसेडोनिया को पुरानी ग्रीक सभ्यता से संबंधित नहीं माना जाएगा।
  • मेसेडोनिया को अब 'रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मेसेडोनिया' के नाम से जाना जाएगा।
  • मेसेडोनियन भाषा में इसे सेवेर्ना मकदूनिया कहा जाएगा।
  • नए नाम की आधिकारिक घोषणा से पहले मेसेडोनिया की जनता और ग्रीस की संसद की मंजूरी जरूरी होगी।

क्या था विवाद?
  • यूरोप के दो देशों ग्रीस और मेसेडोनिया ने 27 वर्ष से जारी विवाद सुलझाते हुए यह निर्णय लिया है।
  • वर्ष 1991 में यूगोस्लाविया से अलग होकर नया देश रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया बना था।
  • इसके दक्षिण में स्थित ग्रीस के कुछ हिस्सों को भी मेसेडोनिया के नाम से जाना जाता है। इस पर दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया था।
  • ग्रीस के उत्तरी क्षेत्र का नाम भी मेसेडोनिया है और सिकंदर भी इसी क्षेत्र का रहने वाला था। इसी वजह से ग्रीस के नागरिक इस नाम को लेकर क्षुब्ध थे।
  • ग्रीस का कहना था कि उसके हिस्से में आने वाला मेसेडोनिया यूनानी संस्कृति का प्रमुख भाग है। एक जैसे दो नामों की होने से लोगों को सही जानकारी प्रदान करने की दिशा में भ्रामक स्थिति पैदा होती है।

Wednesday, 6 June 2018

ब्लू फ्लैग प्राप्त करने वाला चंद्रभागा तट (ओडिशा), एशिया का प्रथम तट


ओडिशा के कोणार्क तट पर स्थित चंद्रभागा तट देश का पहला समुद्र तट (beach) है जिसे ‘ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन’ प्राप्त हुआ है। यह प्रमाणपत्र वैसे समुद्री तटों को प्रदान किया जाता है जो पर्यावरणानुकूल हो, साफ हो और पर्यटकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला हो।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय के अधीन ‘समन्वित तटीय प्रबंधन समाज’ यानी एसआईसीएम (Society for Integrated Coastal Management: SICOM) देश के 13 समुद्री तटों को भी ब्लू फ्रलैग मानकों के तहत ब्लू फ्रलैग प्रमाणन हेतु विकसित कर रही है। इनमें से एक चंद्रभागा तट (ओडिशा) को प्रमाणपत्र दिया जा चुका है।

ब्लू फ्लैग प्रमाण हासिल करने के लिए समुद्री तट को 33 पर्यावरण व पर्यटन संबंधित स्थितियों का अनुपालन करना जरूरत है। इनमें प्लास्टिक मुक्त के साथ-साथ अपशिष्ट प्रबंधन से युक्त शामिल हैं। पानी स्वच्छ होना चाहिए। उस समुद्री तट के आसपास पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अध्ययन की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

ब्लू फ्लैग मानक की स्थापना कोपेनहेगेन स्थित ‘फाउंडेशन फॉर एनवायर्नमेंटल एजुकेशन’ (Foundation for Environmental Education: FEE) द्वारा 1985 में की गई थी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय ने दिसंबर 2017 में ब्लू फ्रलैग परियोजना आरंभ किया था।

Saturday, 26 May 2018

गुवाहाटी रेलवे स्टेशन भारत का पहला सौर ऊर्जा संचालित रेलवे स्टेशन बना

भारत का पहला सौर ऊर्जा संचालित रेलवे स्टेशन  मई, 2018 में गुवाहाटी रेलवे स्टेशन, असम, भारत का पहला सौर ऊर्जा संचालित रेलवे स्टेशन बना। सौर पैनलों को स्थापित करने की परियोजना विगत वर्ष अप्रैल, 2017 में शुरू की गई थी। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन की छत पर लगभग 2352 सौर मॉड्यूल (विद्युत उत्पादन क्षमता 700 किलोवाट) स्थापित किए गए हैं। सौर-संचालित स्टेशन का लक्ष्य कार्बन-पद चिन्ह (Carbon Foot Print) को कम करने के साथ ही बिजली की लागत में भी कमी लाना है। 12 अप्रैल, 2017 से 10 मई, 2018 तक लगभग 6.3 लाख किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत राशि 6.7 करोड़ रुपये होगी। इस सौर ऊर्जा संयंत्र से 67 लाख रुपए की बिजली बचत होगी। संयंत्र की प्रतिदिन औसत बिजली उत्पादन क्षमता 2048 किलोवाट/घंटा है। अभी तक सौर पैनलों से कुल 7,96,669 किलोवाट बिजली उत्पादित की जा चुकी है।

मई, 2018 में गुवाहाटी रेलवे स्टेशन, असम, भारत का पहला सौर ऊर्जा संचालित रेलवे स्टेशन बना। सौर पैनलों को स्थापित करने की परियोजना विगत वर्ष अप्रैल, 2017 में शुरू की गई थी। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन की छत पर लगभग 2352 सौर मॉड्यूल (विद्युत उत्पादन क्षमता 700 किलोवाट) स्थापित किए गए हैं। सौर-संचालित स्टेशन का लक्ष्य कार्बन-पद चिन्ह (Carbon Footprint) को कम करने के साथ ही बिजली की लागत में भी कमी लाना है। 12 अप्रैल, 2017 से 10 मई, 2018 तक लगभग 6.3 लाख किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत राशि 6.7 करोड़ रुपये होगी। इस सौर ऊर्जा संयंत्र से 67 लाख रुपए की बिजली बचत होगी। संयंत्र की प्रतिदिन औसत बिजली उत्पादन क्षमता 2048 किलोवाट/घंटा है। अभी तक सौर पैनलों से कुल 7,96,669 किलोवाट बिजली उत्पादित की जा चुकी है।