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Thursday, 4 April 2019

भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य तीसरा नौसैनिक युद्धाभ्यास ऑसीइंडैक्स-19 आरंभ


भारत और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं के बीच तीसरा नौसैनिक युद्धाभ्यास ऑसीइंडैक्‍स-2019 विशाखापतनम के नौसैनिक अड्डे पर 02 अप्रैल 2019 को शुरू हुआ। ऑसीइंडैक्‍स के तीसरे संस्करण में भाग लेने के लिये आस्ट्रेलियाई नौसेना के हेलिकॉप्टर पोत कैनबरा, फ्रिगेट न्यू कैसल और पारामाट्टा, पनडुब्बी कोलिंस और एक तेलवाहक पोत विशाखापतनम अड्डे पर पहुँच चुके हैं।

इस अभ्‍यास का मुख्य उद्देश्‍य भारतीय नौसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियन नौसेना के बीच सम्‍पर्क और व्‍यवसायिक विचारों के आदान-प्रदान के अवसर उपलब्‍ध कराने के माध्‍यम से दोनों नौसेनाओं के बीच परस्‍पर सहयोग और अंतर-संचालन को मजबूती देना और उसमें वृद्धि करना है। भारत  के प्रधानमंत्री और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री द्वारा 2014 में घोषित सुरक्षा सहयोग के लिए फ्रेमवर्क (एफएससी) की परिकल्‍पना के अनुरूप दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के संकेत के रूप में विशाखापत्तनम में सितंबर 2015 में अभ्यास का पहला संस्करण आयोजित किया गया था।

अभ्यास के दूसरे संस्करण की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया ने जून 2017 में फ्रीमैंटल में की थी, जिसमें भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के जहाजों ने रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों के साथ अभ्यास किया।


मुख्य बिंदु

➤ पिछले चार वर्षों में द्विवार्षिक सामुद्रिक अभ्‍यास की जटिलता निरंतर बढ़ती गई है। तीसरे संस्‍करण में एएसडब्‍ल्‍यू पर केन्द्रित तीनों आयामों वाले अभ्‍यास शामिल किये जाएंगे।

➤ द्विप‍क्षीय अभ्‍यास में दोनों देशों की नौसेनाओं द्वारा अब तक की सर्वाधिक इकाइयां भाग ले रही हैं।

➤ दोनों देशों द्वारा भागीदारी के पैमाने में वृद्धि इस अभ्‍यास को दिये जा रहे महत्‍व को दर्शाती है, जबकि बढ़ी हुई जटिलता दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालन का संकेत है।

यह अभ्‍यास भारत के विजन सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और प्रगति) और सामुद्रिक क्षेत्र में अच्‍छी व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करने के प्रति दोनों देशों के साझा उद्देश्‍यों को रेखांकित करता है तथा मित्र एवं सामंजस्यपूर्ण देशों के साथ एकजुटता प्रकट करता है।


पृष्ठभूमि

पहले विश्‍व युद्ध के दौरान गैलीपोली की खाइयों और पश्चिमी मोर्चे के साथ साझा अनुभवों सहित सहयोग के लंबे इतिहास पर आधारित भारत और ऑस्‍ट्रेलिया के बीच सकारात्‍मक रक्षा संबंध रहे हैं, जिन्‍हें साल 2006 के रक्षा सहयोग के ज्ञापन तथा साल 2009 के सुरक्षा सहयोग पर संयुक्‍त घोषणा-पत्र के माध्यम से नया आधार प्रदान किया गया। हालांकि साल 2014 में द्विपक्षीय एफएससी के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा के मामलों को महत्‍वपूर्ण गति मिली और इस प्रकार सचेत और केन्द्रित वृद्धि देखी गई।

Thursday, 28 March 2019

भारत और ओमान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास अल नागाह-2019 का समापन

 
भारतीय सेना और ओमान की शाही सेना के बीच तीसरा संयुक्त सैन्य अभ्यास अल नगाह- 2019 ओमान के जबल अल अखजर ट्रेनिंग कैम्प में 25 जनवरी 2019 को समाप्त हो गया। इस समापन समारोह में भारत की तरफ से ओमान में भारतीय राजदूत मनु महावर और मेजर जनरल एके समनतारा ने हिस्सा लिया।

ओमान की शाही सेना का प्रतिनिधित्व मेजर जनरल मातर बिन सालिम बिन रशीद अल बलूशी और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने किया. दोनों देशों के सैन्य दलों के कमांडरों ने प्रतिनिधिमंडल को अभ्यास की प्रगति की जानकारी दी। इस अभ्यास में दोनों देशों की ओर से 60-60 सैनिकों ने हिस्सा लिया था। इस अभ्यास का आरम्भ 12 मार्च 2019 को हुआ था। अभ्यास अल-नगाह से दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे और संयुक्त राष्ट्र के तहत सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ेगा।


उद्देश्य

इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच मैत्री संबंध स्थापित करना, संयुक्त ऑपरेशन परिचालित करने की क्षमता को बढ़ावा देना तथा कौशल एवं अनुभव का आदान-प्रदान करना है।


संयुक्त सैन्य अभ्यास अल नगाह

➽ इस युद्ध अभ्यास के द्वारा विभिन्न परिस्थितियों में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन को पूरा करने के लिए अभ्यास किया गया।

➽ इस युद्ध अभ्यास में भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व गढ़वाल राइफल्स की 10वीं बटालियन द्वारा किया गया. जबकि ओमान की रॉयल आर्मी का प्रतिनिधित्व जबल रेजिमेंट द्वारा किया गया।

➽ इस चौदह दिवसीय अभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं ने रणनीति तथा हथियार चलाने जैसी कई विधाओं में अपने अनुभवों को एक-दूसरे से साझा किया।

➽ इस प्रकार के सैन्य अभ्यास से संयुक्त ऑपरेशन परिचालित करने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

➽ अल नागाह प्रथम का आयोजन जनवरी 2015 में ओमान के मस्कट में किया गया था। जबकि अल नागाह द्वितीय का आयोजन हिमाचल प्रदेश में मार्च 2017 में किया गया था। भारत और ओमान सुरक्षा संबंधी पिछले कुछ वर्षों से मजबूत हो रहे हैं तथा यह संयुक्त सैन्य अभ्यास इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

खाड़ी क्षेत्र में मौजूद ओमान भारत का महत्वपूर्ण मित्र राष्ट्र है। दोनों देशों के बीच लम्बे समय से ऐतिहासिक एवं वाणिज्यिक संबंध रहे हैं। देशों के बीच वर्तमान समय में आर्थिक सहयोग भी बेहतर हुआ है तथा व्यपारिक आदान-प्रदान तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में सीमाओं की रक्षा के लिए खाड़ी क्षेत्र के इस देश के साथ सैन्य अभ्यास करना महत्वपूर्ण कदम है।

Tuesday, 11 December 2018

एक्स एवियइंद्रा 2018: भारत और रूस के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास जोधपुर में शुरू


भारत और रूस की वायुसेनाएं सैन्‍य सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास ‘एक्स एवियइंद्रा-2018’ का आयोजन जोधपुर में शुरू हो चूका हैं। इसका मकसद ऑपरेशन स्किल बढ़ाना है।

एक्स एवियइंद्रा भारतीय वायु सेना एवं रशियन फेडेरेशन एयरोस्पेस फोर्स (आरएफएसएफ) के बीच एक सेना विशिष्ट अभ्यास है। इस अभ्यास का संचालन 10 दिसंबर  से 21 दिसंबर 2018 के बीच वायु सेना केंद्र जोधपुर से किया जा रहा है।


उद्देश्य

भारत और रूस की वायुसेनाएं अभियान संबंधी समन्वय बढाने के उद्देश्य से यह युद्धाभ्यास किया जा रहा है।


संयुक्त युद्धाभ्यास से संबंधित मुख्य तथ्य

➤ इस संयुक्त युद्धाभ्यास में रूस की वायुसेना अपना साजोसामान लेकर नहीं आएगी और वह इस युद्धाभ्यास में भारतीय उपकरणों का इस्तेमाल करेगी।

➤ भारतीय वायुसेना द्वारा इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर लड़ाकू विमान रूसी मूल के ही हैं और दोनों देशों की वायुसेनाएं आपसी तालमेल के महत्वपूर्ण स्तरों को छू चुकी हैं।

➤ भारत में 'रशियन फेडरेशन ऐयरोस्पेस फोर्स' के पायलट भारतीय वायुसेना के विमानों में भारतीय पायलटों के साथ उड़ान भरेंगे जो दोनों वायुसेनाओं में समान हैं।


एक्स एवियइंद्रा के बारे में

एक्स एवियइंद्रा 2018 एक्स एवियइंद्रा भारतीय वायु सेना एवं रशियन फेडेरेशन एयरोस्पेस फोर्स के बीच द्विपक्षीय संयुक्त अभ्यास की श्रृंखला में दूसरा अभ्यास है। इस अभ्यास की योजना दो चरणों में बनाई गई है।

यह एक अनूठा अभ्यास है जिसमें विदेशी प्रतिभागी अपनी वायु परिसंपत्तियां नहीं लाता। यह अभ्यास दोनों वायु सेना बलों के लिए समान है। आरंभिक भारतीय वायु सेना और रशियन फेडेरेशन एयरोस्पेस फोर्स (आरएफएसएफ) एक्स एवियइंद्रा का संचालन वर्ष 2014 में किया गया था।


पृष्ठभूमि

रूस रक्षा क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साथी रहा है और दोनों के बीच सहयोग में बहुत बढोत्तरी हुई है। अक्टूबर 2017 में, भारत और रूस ने दस दिन के युद्धाभ्यास में भाग लिया था जिसमें उनकी थलसेनाएं, नौसेनाएं और वायुसेनाएं शामिल हुई थीं। इससे पहले दोनों देशों की तीनों सेनाओं ने रूस में युद्धाभ्यास 'इंडर' में भाग लिया था।


अन्य जानकारी

भारत ने रूस के साथ 09 दिसंबर 2018 को विशाखापट्टनम में नौसेना का अभ्यास भी शुरू किया। इसमें रूस की नौसेना के जहाज वरयाग, पैंटेलेयेव और बोरिस बुटोमा शामिल हुए। दोनों देशों की नौसेना का यह दसवां संयुक्त सैन्य अभ्यास है।

इसका मकसद दोनों देशों में सांस्कृतिक और खेलों के लिए बेहतर तालमेल बनाना है।


भारत-रूस सम्बन्ध

भारत की आजादी के बाद से ही भारत और रूस के सम्बन्ध बहुत अच्छे रहे हैं। शीत युद्ध के समय भारत और सोवियत संघ में मजबूत रणनीतिक, सैनिक, आर्थिक, एवं राजनयिक सम्बन्ध रहे हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी दोनों के सम्बन्ध पूर्ववत बने रहे।

Tuesday, 4 December 2018

ट्रांसफैट के दुष्प्रभावों के खिलाफ FSSAI ने ‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ नामक अभियान आरंभ किया


भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने औद्योगिक रूप से उत्पन्न ट्रांसफैट के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये 'हार्ट अटैक रिवाइंड' नामक अभियान की शुरुआत की है।

हार्ट अटैक रिवाइंड नामक अभियान अपनी तरह का पहला मीडिया अभियान है जो कि 30 सेकंड की एक सार्वजनिक घोषणा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कहा कि ट्रांस फैट लेने से हृदय संबंधी बीमारियों के कारण हर साल विश्वभर में पांच लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है।

‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ अभियान

➤ एफएसएसएआई के अनुसार, हार्ट अटैक रिवाइंड अभियान विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ट्रांस फैट के पूर्ण रूप से उन्मूलन के लिये निर्धारित वर्ष से एक वर्ष पहले अर्थात् 2022 तक भारत में ट्रांस फैट को खत्म करने के वैश्विक लक्ष्य का समर्थन करेगा।

➤ ‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ को यूट्यूब, फेसबुक, हॉटस्टार और वूट जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चार सप्ताह की अवधि के लिये 17 भाषाओं में प्रसारित किया जाएगा।

➤ यह अभियान नागरिकों को ट्रांस फैट के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में चेतावनी देता है और स्वस्थ विकल्पों के माध्यम से उनसे बचने के तरीके प्रस्तुत करता है।

➤ इस अभियान को रेडियो चैनलों पर प्रसारित किया जाएगा तथा दिल्ली/एनसीआर की आउटडोर होर्डिंग पर भी प्रदर्शित किया जाएगा।

➤ एफएसएसएआई का उद्देश्य भारत की खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट के स्तर को पांच प्रतिशत से दो प्रतिशत तक लाना है।
ट्रांस फैट क्या होता है?

तरल वनस्पति तेलों को अधिक ठोस रूप में परिवर्तित करने तथा खाद्य के भंडारण एवं उपयोग अवधि में वृद्धि करने के लिये इन तेलों का हाइड्रोजनीकरण किया जाता है. इस प्रकार ट्रांस फैट का निर्माण होता है। ट्रांस फैट बड़े पैमाने पर वनस्पति, नकली या कृत्रिम मक्खन, विभिन्न बेकरी उत्पादों में मौजूद होते हैं तथा ये तले हुए या पके हुए खाद्य पदार्थों में भी पाए जा सकते हैं।


ट्रांसफैट के खिलाफ WHO का REPLACE अभियान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2023 तक ग्लोबल फ़ूड सप्लाई से आर्टिफिशियल ट्रांस फैट को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 'REPLACE' नामक पहल को लॉन्च किया है। यह एक छह सूत्रीय कार्यक्रम 
है, जो इस प्रकार है:

RE- (Review) : औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा के आहार स्रोतों और आवश्यक नीति परिवर्तन हेतु परिदृश्य की समीक्षा।

P- (Promote) : स्वस्थ वसा और तेलों के माध्यम से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के प्रतिस्थापन को बढ़ावा देना।

L- (Legislate) : औद्योगिक तौर पर उत्पादित ट्रांसफैट को खत्म करने के लिये कानून या विनियामक कार्यवाही को लागू करना।

A- (Assess) : खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट सामग्री तथा लोगों द्वारा ट्रांस फैट के उपभोग का आकलन और निगरानी करना।

C- (Create) : नीति निर्माताओं, उत्पादकों, आपूर्तिकर्त्ताओं और जनता के बीच ट्रांस फैट के नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करना।

E- (Enforce) : नीतियों और विनियमों के अनुपालन को लागू करना।

Wednesday, 14 November 2018

नौसौनिक अभ्यास ‘समुद्र शक्ति’


भारत और इंडोनेशिया के मध्य पहला दिवपक्षीय नौसौनिक अभ्यास ‘समुद्र शक्ति’ इंडोनेशिया के द्वीप सुराबाया पर आरंभ किया गया। यह नौसेनिक अभ्यास 12 नवम्बर 2018 से शुरू हुआ है जो 18 नवम्बर तक चलेगा।

यह माना जा रहा है कि इस संयुक्त अभ्यास से भारत और इंडोनेशिया के बीच नौसैनिक सहयोग का एक नया दौर शुरु होगा। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य आपसी रिश्तों को विस्तार देना, समुद्री सहयोग को गहरा करना और एक-दूसरे की श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाना है।

समुद्र शक्ति संयुक्त अभ्यास के मुख्य बिंदु

➽ अभ्यास का हार्बर फेज 12 से 15 नवम्बर तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के नौसैनिक एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा करेंगे और आपसी वार्ता करेंगे।

➽ इसके बाद 15 से 18 नवम्बर तक सी- फेज चलेगा।

➽ इस दौरान पनडुब्बी नाशक अभ्यास, हेलीकाप्टर आपरेशन, सतही युद्ध अभ्यास औऱ समुद्री डाकाजनी के खिलाफ कार्रवाई आदि के अभ्यास होंगे।

➽ इस अभ्यास में भाग लेने के लिए भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस राणा इंडोनेशिया के समुद्र तट पर पहुंच चुका है।

➽ यह युद्धपोत इन दिनों दक्षिण पूर्व एशिया के समु्द्री इलाके के दौरे पर है।

➽ आईएनएस राणा विशाखापतनम स्थित पूर्वी नौसैनिक अड्डे का युद्धपोत है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे में दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी के रिश्तों को समग्र सामरिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। इंडोनेशिया के लिये भारतीय युद्धपोत का दौरा इंडोनेशिया के इलाके में समुद्री व्यवस्था को प्रोत्साहन देना है।


भारत – इंडोनेशिया संबंध

भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो के बीच मैत्री के कारण दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का बीज बोया गया था। जिस समय इंडोनेशिया डच साम्राज्यवाद को समाप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा था उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इंडोनेशिया के उद्देश्य का भरपूर समर्थन किया था। वर्तमान समय में भारत और इंडोनेशिया के मध्य रक्षा और सुरक्षा सहयोग सुदृढ़ हुए हैं। व्यापारिक एवं आर्थिक क्षेत्र में भारतीय कम्पनियों ने इंडोनेशिया में अवसंरचना, विद्युत, कपड़ा, इस्पालत, ऑटोमोटिव, खनन, बैंकिंग तथा एफएमजीसी क्षेत्रों में निवेश किया है।

Friday, 5 October 2018

‘ऑपरेशन समुद्र मैत्री’


भारत ने भूकंप और सूनामी प्रभावित इंडोनेशिया की सहायता हेतु बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। भारत द्वारा इंडोनेशिया के लिए आरंभ किये गये इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन समुद्र मैत्री’ रखा गया है। 

इसके तहत दो विमानों और तीन नौसैनिक पोतों से राहत सामग्री भेजी गई है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद ‘ऑपरेशन समुद्र मैत्री’ लॉन्च किया गया है। 


भारत का ‘ऑपरेशन समुद्र मैत्री’

➤ भारतीय वायुसेना के दो विमानों सी-130 जे और सी-17 से राहत सामग्री के साथ चिकित्सा दल को रवाना किया गया है। 

➤ इन विमानों में एक अस्पताल बनाने के उपकरण, दवाएं, जनरेटर, टेंट और पानी ले जाया गया है। 

➤ सी-130 जे विमान से तंबुओं और उपकरणों के साथ एक मेडिकल टीम भेजी गई है। इन उपकरणों की मदद से अस्थायी अस्पताल भी बनाए जा सकते हैं। 

➤ भारतीय नौसेना के तीन पोतों आइएनएस तीर, आइएनएस सुजाता और आइएनएस शार्दुल से मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजी गई है। 

➤ यह पोत छह अक्टूबर को इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पहुँचेगे। 


इंडोनेशिया में प्राकृतिक आपदा

➤ इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर भूकंप और सुनामी से मरने वालों की संख्या लगभग  1500 हो गई है। 

➤ यहाँ आये 7.5 की तीव्रता के भूकंप के बाद आई सुनामी से समुद्र में छह मीटर ऊंची लहरें उठी थीं। इस प्राकृतिक आपदा में द्वीप पर भारी तबाही हुई। 

➤ इस दोहरी आपदा से 24 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 141 स्थानों पर बनाए गए शिविरों में 70 हजार से ज्यादा लोगों ने शरण ली है जबकि प्रभावित इलाकों में लोगों को भोजन और पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। 

➤ समाचार पत्रों के अनुसार यहाँ पर खाद्य सामग्री की इतनी गंभीर किल्लत हो गई है कि लोग मलबों में भोजन तलाशने को मजबूर हैं। 

Wednesday, 12 September 2018

रूस ने शीत युद्ध के बाद सबसे बड़ा युद्ध अभ्यास 'वोस्टोक -2018' लॉन्च किया


रूस ने पूर्वी साइबेरिया में लगभग 300,000 सेवा कर्मियों के साथ शीत युद्ध के बाद से अपना सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास "वोस्टोक-2018" शुरू किया है। 

चीन कई चीनी बख्तरबंद वाहनों और विमानों के साथ "वोस्टोक-2018" में भाग लेने के लिए 3,200 सैनिक भेज रहा है। मंगोलिया भी कुछ इकाइयों को भी भेज रहा है।

शीत युद्ध के दौरान 1981 में इसी पैमाने का अंतिम रूसी अभ्यास आयोजित किया गया था, लेकिन वोस्टोक-2018 में अधिक सैनिक शामिल है। नाटो-रूस तनाव बढ़ने के समय सप्ताह लंबे युद्धाभ्यास होते हैं। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य हजारों मील की दूरी पर पश्चिमी रूस से पूर्वी क्षेत्रों तक हजारों सैनिकों के साथ-साथ विमान और वाहनों का त्वरित तैनाती सहित अभ्यास करना है।

Tuesday, 28 August 2018

शांति मिशन 2018 संयुक्त युद्धाभ्यास रूस में आयोजित किया गया


शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) द्वारा पीस (शांति) मिशन अभ्यास 2018 चेबरकुल, रूस में 24 अगस्त 2018 को औपचारिक तौर पर शुरू हुआ। इस अभ्यास में सभी आठ एससीओ सदस्य देशों की सैनिक टुकड़ियों ने भाग लिया।

इन टुकड़ियों को रूस के सेन्ट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के चीफ कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्जेंदर पावलोविच लेपिन ने संबोधित किया। सैनिक टुकड़ियों द्वारा औपचारिक परेड चेबरकुल, रूस में कंबाइंड आर्मस रेंज में हुई।

शांति मिशन अभ्यास 2018 
  • यह अभ्यास एससीओ देशों की सशस्त्र सेनाओं को बहुराष्ट्रीय और संयुक्त माहौल के शहरी परिदृश्य में आतंकवाद की कार्रवाइयों से निपटने के प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करेगा।
  • अभ्यास के दायरे में पेशागत बातचीत, ड्रिलों और अन्य प्रक्रियाओं की आपसी समझ, संयुक्त कमान और नियंत्रण अवसंरचनाओं की स्थापना तथा आतंकवाद के खतरे का सफाया शामिल है।
  • इस अभ्यास में सबसे अधिक रूसी सेना के 1700 जवान, चीन के 700 और भारत के 200 जवान शामिल हैं।
  • भारतीय दल में 167 जवान थल सेना (4 महिला अफसर) तथा 33 वायुसेना के जवान शामिल थे। इस अभ्यास के पाकिस्तान के 110 सैनिक शामिल थे।
  • स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर था जब भारत और पाकिस्तान की सेनाओं ने संयुक्त सैन्य अभ्यास में साथ भाग लिया।
  • एससीओ शांति मिशन एससीओ देशों के बीच रक्षा सहयोग की प्रमुख पहल है और एससीओ रक्षा सहयोग के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक घटना है।
  • संयुक्त सैन्य अभ्यास में शहरी क्षेत्र में आतंकवादियों के विरुद्ध ऑपरेशन का अभ्यास किया गया। इसमें सभी देशों में अपनी दक्षता व युद्ध कुशलता का आदान प्रदान किया। 


स्मरणीय तथ्य

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शांति मिशन अभ्यास का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष बाद किया जाता है। इसके आरंभिक दौर में इस अभ्यास में मध्य एशियाई देश ही हिस्सा लेते थे। जून, 2017 में भारत और पाकिस्तान को भी इस अभ्यास में शामिल किया गया।

शंघाई सहयोग संगठन के बारे में

शंघाई सहयोग संगठन राजनीतिक व सुरक्षा सहयोग संगठन है, इस संगठन के आठ सदस्य देश हैं। शंघाई के पूर्णकालिक सदस्य चीन, रूस, कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्ता, किर्गिज़स्तान, भारत और पाकिस्तान हैं। इसका मुख्यालय चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित है। सदस्य देशों की जनसँख्या विश्व की कुल जनसँख्या का 40% तथा सदस्य देशों की जीडीपी वैश्विक जीडीपी का 20% हिस्सा है।

एससीओ का उदय 'शंघाई फाइव' नामक संगठन से हुआ है, इसकी स्थापना 1996 में चीन ने की थी। इसमें रूस, कजाखस्तान, किर्गिजस्तान और ताजीकिस्तान शामिल थे। वर्ष 2001 में उज्बेकिस्तान को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। इसके पश्चात् शंघाई सहयोग संगठन का जन्म हुआ। वर्ष 2005 में अस्ताना शिखर सम्मेलन की घोषणा के बाद यह एक क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन के रूप में उभरा।

Sunday, 29 July 2018

भारतीय रेलवे द्वारा ‘मिशन सत्यनिष्ठा’ की शुरूआत



भारतीय रेलवे ने 27 जुलाई, 2018 को ‘मिशन सत्यनिष्ठा’ (Mission Satyanishtha) का शुभारंभ किया। नई दिल्ली के रेल संग्रहालय में लोक शासन में इथिक्स विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस मिशन की शुरूआत की। इस कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री श्री पियुष गोयल अधिकारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई।यह मिशन सभी रेल कर्मचारियों को अच्छी इथिक्स के प्रति समर्पण की आवश्यकता तथा कार्य के दौरान सत्यनिष्ठा के उच्च मानक रखने के लिए आरंभ किया गया है।


इस मिशन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैंः

निजी एवं सार्वजनिक जिंदगी में प्रत्येक कर्मचारी को इथिक्स की आवश्यकता व मूल्य में प्रशिक्षण देना, जीवन व लोक शासन नैतिक दुविधा का समाधान खोजना, इथिक्स व सत्यनिष्ठा पर भारतीय रेलवे की समझ बढ़ाना तथा इनके अनुपालन में रेलवे कर्मचारियों की भूमिका को समझाना व आंतरिक संसाधनों के द्वारा आंतरिक शासन विकसित करना।

Saturday, 9 June 2018

ऑपरेशन निस्तार


ऑपरेशन निस्तार द्वारा भारतीय नौसेना ने सोकोट्रा द्वीप से 38 भारतीय को सकुशल बचाया। 

भारतीय नौसेना ने यमन के सोकोट्रा द्वीप पर फंसे 38 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला। दस दिन पहले इस इलाके में आये चक्रवात के कारण यह लोग इस क्षेत्र में फंस गए थे, जिन्हें बचाने के लिए भारत ने यह अभियान आरंभ किया था।     'ऑपरेशन निस्तार' के तहत भारतीयों को बाहर निकाला गया। यह ऑपरेशन सोकोट्रा तट पर चलाया गया और उन्हें वापस भारत लाने के लिए भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुनयना को भेजा गया।     ऑपरेशन निस्तार के स्मरणीय तथ्य  भयानक चक्रवाती तूफान मेकेनु में यमन के सोकोट्रा द्वीप पर 38 भारतीय सीमित भोजन और पानी के साथ फंसे हुए थे।  नौसेना को यह जानकारी मिली थी कि तीन भारतीय जहाज इलाके में चक्रवात के टकराने के बाद सोकोट्रा में क्षतिग्रस्त हो गए हैं, बंदरगाह के समीप डूब गए हैं।  नौसेना को जब 12 भारतीयों के लापता होने के साथ अन्य जहाज एमएसवी सफीना अल खिजर के बारे में सूचना मिली तो भारतीय नौसेना ने 27 और 28 मई को लापता भारतीयों की तलाश के लिए दो हवाई अभियान भी चलाए थे।  आईएनएस सुनयना को सोकोट्रा से 38 भारतीय नागरिकों को निकालने का दायित्व सौंपा गया।  निकाले गए भारतीयों को तुरंत चिकित्सा देखभाल, खाना, पानी और टेलीफोन सुविधा मुहैया कराई गई, ताकि वे अपने परिवार को बता सकें कि वे सुरक्षित हैंभारतीय नौसेना ने यमन के सोकोट्रा द्वीप पर फंसे 38 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला। दस दिन पहले इस इलाके में आये चक्रवात के कारण यह लोग इस क्षेत्र में फंस गए थे, जिन्हें बचाने के लिए भारत ने यह अभियान आरंभ किया था।  बचाव कार्य के बाद जहाज गुजरात के पोरबंदर की ओर रवाना हो गया।   चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं?    हिन्द महासगर क्षेत्र में यह व्यवस्था वर्ष 2004 में शुरू हुई जब भारत की पहल पर 8 तटीय देशों ने इसको लेकर समझौता किया. इन देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यामां, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड शामिल हैं।  अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार सदस्य देशों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया गया है और उसी क्रम के अनुसार हर देश अपनी बारी आने पर नाम सुझाता है।  अब तक चक्रवात के करीब 64 नामों को सूचीबद्ध किया जा चुका है।

भारतीय नौसेना ने यमन के सोकोट्रा द्वीप पर फंसे 38 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला। दस दिन पहले इस इलाके में आये चक्रवात के कारण यह लोग इस क्षेत्र में फंस गए थे, जिन्हें बचाने के लिए भारत ने यह अभियान आरंभ किया था। 

'ऑपरेशन निस्तार' के तहत भारतीयों को बाहर निकाला गया। यह ऑपरेशन सोकोट्रा तट पर चलाया गया और उन्हें वापस भारत लाने के लिए भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुनयना को भेजा गया। 

ऑपरेशन निस्तार के स्मरणीय तथ्य
  • भयानक चक्रवाती तूफान मेकेनु में यमन के सोकोट्रा द्वीप पर 38 भारतीय सीमित भोजन और पानी के साथ फंसे हुए थे। 
  • नौसेना को यह जानकारी मिली थी कि तीन भारतीय जहाज इलाके में चक्रवात के टकराने के बाद सोकोट्रा में क्षतिग्रस्त हो गए हैं, बंदरगाह के समीप डूब गए हैं। 
  • नौसेना को जब 12 भारतीयों के लापता होने के साथ अन्य जहाज एमएसवी सफीना अल खिजर के बारे में सूचना मिली तो भारतीय नौसेना ने 27 और 28 मई को लापता भारतीयों की तलाश के लिए दो हवाई अभियान भी चलाए थे। 
  • आईएनएस सुनयना को सोकोट्रा से 38 भारतीय नागरिकों को निकालने का दायित्व सौंपा गया। 
  • निकाले गए भारतीयों को तुरंत चिकित्सा देखभाल, खाना, पानी और टेलीफोन सुविधा मुहैया कराई गई, ताकि वे अपने परिवार को बता सकें कि वे सुरक्षित हैंभारतीय नौसेना ने यमन के सोकोट्रा द्वीप पर फंसे 38 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला। दस दिन पहले इस इलाके में आये चक्रवात के कारण यह लोग इस क्षेत्र में फंस गए थे, जिन्हें बचाने के लिए भारत ने यह अभियान आरंभ किया था। 
  • बचाव कार्य के बाद जहाज गुजरात के पोरबंदर की ओर रवाना हो गया। 

चक्रवातों के नाम कैसे रखे जाते हैं?

हिन्द महासगर क्षेत्र में यह व्यवस्था वर्ष 2004 में शुरू हुई जब भारत की पहल पर 8 तटीय देशों ने इसको लेकर समझौता किया. इन देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यामां, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड शामिल हैं।  अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार सदस्य देशों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया गया है और उसी क्रम के अनुसार हर देश अपनी बारी आने पर नाम सुझाता है। अब तक चक्रवात के करीब 64 नामों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। 

Friday, 25 May 2018

सैन्य अभ्यास ‘सूर्य किरण-XIII’ (भारत और नेपाल)



भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास ‘सूर्य किरण-XIII’ का आयोजन 30 मई से 12 जून 2018 तक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया जायेगा।

यह भारत और नेपाल के बीच सैन्य अभ्यास का तेरहवां संस्करण होगा।

उद्देश्‍य:- सूर्य किरण सैन्‍य अभ्‍यास का उद्देश्‍य संयुक्‍त रूप से पहाड़ी क्षेत्र में आतंकवादरोधी अभियानों को ध्‍यान में रखकर जवानों को प्रशिक्षित करना है।

सूर्य किरण-XIII
  • इस सैन्‍य अभ्‍यास के दौरान दोनों ही देशों के सेनाओं के जवान विभिन्‍न जवाबी कार्रवाइयों और आतंकवादरोधी अभियानों से जुड़े अपने पूर्व अनुभवों को साझा करेंगे।
  • इस दौरान सैनिक आपस में अपने अनुभवों को साझा करेंगे।
  • सैन्‍य अभ्‍यास में दोनों देशों के करीब 300 जवान हिस्‍सा लेंगे।
  • इस सैन्य युद्धाभ्यास में आपदा प्रबन्धन सहित राहत एवं बचाव के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया जायेगा।
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सूर्य किरण अभ्‍यास
  • सूर्य किरण सैन्‍य अभ्‍यास साल में दो बार होता है, जो कि क्रमबद्ध रूप से दोनों ही देशों में आयोजित होता है।
  • भारत कई देशों के साथ प्रशिक्षण अभ्‍यासों में भाग लेता है, लेकिन सैनिकों की संख्‍या के लिहाज से सूर्य किरण सैन्‍य अभ्‍यास सबसे बड़ा होता है।
  • संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास से दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा और द्विपक्षीय संबंध सुदृढ होंगे।
  • भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास सूर्य किरण-XII का शुभारंभ नेपाल के सलझंडी स्थित नेपाल आर्मी बैटल स्कूल (एनएबीएस) में किया गया था।