Thursday, 27 September 2018

भारतीय वायु सेना द्वारा स्वदेशी अस्त्र मिसाइल का सुखोई से सफल परीक्षण


वायु सेना ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 26 सितंबर 2018 को देश में ही बनी हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल का सुखोई-30 लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल दृष्टि सीमा से आगे तक मार करने में सक्षम है।

अस्त्र को सेना में शामिल किये जाने से पहले के अंतिम चरण के परीक्षणों का हिस्सा होने के कारण इस परीक्षण की सफलता को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अस्त्र मिसाइल को देश में ही निर्मित और विकसित किया गया है।


अस्त्र मिसाइल का परीक्षण

➤ वायु सेना ने मिसाइल का अपने कलाईकुंडा स्टेशन से परीक्षण किया और मिसाइल ने हवा में तैर रहे लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा।

➤ यह मिसाइल अपनी श्रेणी की हथियार प्रणालियों में श्रेष्ठ है और इसके 20 से भी अधिक परीक्षण किये जा चुके हैं।

➤ मिसाइल ने उच्च मारक क्षमता के साथ सफलतापूर्वक निशाना लगाया जो मिशन के लक्ष्य को पूरा करता है।

➤ अभी तक हुए परीक्षणों में अस्त्र को पूरी तरह सुखोई एसयू-30 विमान से दागा गया है।

➤ विमान परीक्षण इसलिए महत्व रखता है क्योंकि यह रक्षा बेड़े में शामिल किए जाने से पहले अंतिम परीक्षण का हिस्सा था।

➤ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और सहयोगी टीम सदस्यों के प्रयासों की सराहना की जो इस मिशन में शामिल थे। उन्होंने कहा कि उन्नत हथियार प्रणाली के स्वदेशी डिजाइन और विकास में भारत ने उच्च स्तर की क्षमता हासिल कर ली है।


अस्त्र मिसाइल की विशेषताएं


➤ अस्त्र मिसाइल दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।

➤ यह हवा से हवा में मार करने वाला भारत द्वारा विकसित पहला प्रक्षेपास्त्र है।

➤ यह उन्नत प्रक्षेपास्त्र लड़ाकू विमान चालकों को 80 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन के विमानों पर निशाना लगाने और मार गिराने की क्षमता देता है।

➤ रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने प्रक्षेपास्त्र को मिराज 2000 एच, मिग 29, सी हैरियर, मिग 21, एच ए एल तेजस और सुखोई एसयू-30 एमकेआई विमानो में लगाने के लिए विकसित किया है।

➤ यह ठोस ईंधन प्रणोदक इस्तेमाल करती है हालांकि डीआरडीओ इसके लिये आकाश प्रक्षेपास्त्र जैसी प्रणोदन प्रणाली विकसित करना चाहती है।

➤ प्रक्षेपास्त्र पराध्वनि गति से लक्ष्य विमान अवरोधन करने में सक्षम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ अवार्ड’ से सम्मानित


भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को 26 सितंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान, 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भारत के साथ-साथ फ़्रांस को भी इस पुरस्कार के लिए इसलिए सम्मानित किया गया है क्योंकि दोनों ही देशों ने समान प्रयासों के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की है।


मोदी - मैक्रों को चैंपियंस ऑफ अर्थ अवार्ड

➤ प्राप्त जानकारी के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को लेकर अग्रणी एवं उत्साही कार्यों के लिए और पर्यावरणीय कार्यों में सहयोग के नये क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों को 'नीति नेतृत्व' श्रेणी के तहत यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

➤ प्रधानमंत्री को 2022 तक भारत में प्लास्टिक के उपयोग को खत्म करने का संकल्प लेने और मैक्रों को पर्यावरण के लिए वैश्विक समझौते को लेकर सराहना की गयी।

➤ दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने पूरे विश्व में इस बारे में जाग्रति फैलाई तथा अन्य देशों को भी सौर गठबंधन में शामिल करने हेतु सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया।

कोच्चि इंटरनैशनल एयरपोर्ट को अवॉर्ड 

➤ भारत के लिए दूसरी सम्मान की बात है कि केरल के कोच्चि इंटरनैशनल एयरपोर्ट को भी नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ते हुए उद्यमी दृष्टि दिखाने के लिए अवॉर्ड दिया गया है। कोच्चि इंटरनैशनल एयरपोर्ट विश्व को यह सन्देश देता है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये बिना भी वैश्विक विकास में अग्रणी भूमिका निभाई जा सकती है।

➤ इस दौरान कहा गया कि समाज की गति में वृद्धि जारी है, ऐसे में दुनिया का पहला पूर्ण सौर संचालित हवाई अड्डा इस बात का प्रमाण है कि ग्रीन बिजनस ही अच्छा बिजनस है। कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को 'नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में नेतृत्व' के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।


चैंपियंस ऑफ अर्थ अवार्ड


➤ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने वर्ष 2005 में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों से उत्कृष्ट पर्यावरण हितैषी कार्य करने वाले व्यक्तियों को पहचानने के लिए वार्षिक पुरस्कार कार्यक्रम के रूप में ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ’ पुरस्कार की स्थापना की।

➤ आम तौर पर प्रतिवर्ष पांच से सात विजेताओं का चयन किया जाता है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक ट्रॉफी प्राप्त करने के लिए एक पुरस्कार समारोह में आमंत्रित किया जाता है। विजेता पुरस्कार प्राप्ति हेतु भाषण देते हैं और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेते हैं।

➤ वर्ष 2017 में ‘यंग चैंपियंस ऑफ अर्थ’ श्रेणी की भी शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत 18 से 30 वर्ष के उन व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाता है जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक एवं उत्कृष्ट पहल की हो।

भारत बना यौन अपराधियों की रजिस्ट्री करने वाला 9वाँ देश


हाल ही में देश में यौन अपराधों के दोषियों के बारे में जानकारी को डेटा के रूप में उपलब्ध कराने के लिये नेशनल रजिस्ट्री ऑफ सेक्स ऑफेडंर्स की शुरुआत की गई। उल्लेखनीय है कि शुरुआत में इस रजिस्ट्री में देश भर में विभिन्न यौन अपराधों के लिये दोषी ठहराए गए लगभग 4.4 लाख लोगों के नाम और उनका विवरण शामिल हैं।

नेशनल रजिस्ट्री ऑफ सेक्स ऑफेडंर्स 

➤ इस डाटाबेस में 2005 के बाद यौन अपराधों के लिये दोषी पाए गए लोगों के बारे में प्राप्त जानकारियों को संग्रहित किया गया है जिसमें दोषी का नाम, पता, फोटोग्राफ और फिंगरप्रिंट जैसे विवरण शामिल किये गए हैं। 

➤ गृह मंत्रालय के अनुसार, डाटाबेस किसी भी व्यक्ति की गोपनीयता से समझौता नहीं करेगा।

➤ नई दिल्ली में 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के बाद इस तरह की रजिस्ट्री शुरू करने का प्रस्ताव पेश किया था।

➤ डाटाबेस की निगरानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (National Crime Records Bureau- NCRB) द्वारा की जाएगी। NCRB इस पर भी नज़र रखेगा कि राज्य पुलिस समय पर रिकॉर्ड को अपडेट कर रही है या नहीं। 

➤ इसमें पहली बार अपराध करने वालों से लेकर बार-बार अपराध करने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखा गया है।

➤ डाटाबेस में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offenders Act- POCSO) और छेड़खानी के दोषी अपराधियों को शामिल किया जाएगा।


पोर्टल cybercrime.gov.in 

➤ नेशनल रजिस्ट्री ऑफ सेक्स ऑफेडंर्स के साथ-साथ एक अन्य पोर्टल cybercrime.gov.in को भी लॉन्च किया गया जिसमें लोग बाल अश्लीलता, बाल यौन दुर्व्यवहार सामग्री और बलात्कार तथा सामूहिक बलात्कार को बढ़ावा देने वाली सामग्री आदि के बारे में ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।

➤ यह न केवल पीड़ितों/शिकायतकर्त्ताओं की सहायता करेगा बल्कि नागरिक समाज संगठनों और जिम्मेदार नागरिकों को गुप्त रूप से ऐसी शिकायतों की रिपोर्ट करने में मदद करेगा।

➤ इस पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत शिकायतों की जाँच संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाएगी। 

➤ इसके अलावा पीड़ित या शिकायतकर्त्ता अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके 'रिपोर्ट और ट्रैक' विकल्प चुनकर अपनी रिपोर्ट को ट्रैक कर सकते हैं।


यौन उत्पीड़न पर राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करने वाला 9वाँ देश 

➤ भारत NDSO (National Database on Sexual Offenders) कि शुरुआत करने वाला दुनिया का नौवाँ देश बन गया है। 

➤ यौन उत्पीड़न पर राष्ट्रीय डाटाबेस रखने वाले अन्य देश हैं- अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका,  न्यूजीलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो। 

➤ उल्लेखनीय है कि इन सभी देशों में मात्र अमेरिका ही ऐसा देश हैं जहाँ इस प्रकार का डाटाबेस आम जनता के लिये उपलब्ध है, अन्य देशों में यह डाटाबेस "जाँच और निगरानी" के उद्देश्य से केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिये सुलभ है। 

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की वैधता को मान्यता प्रदान की


सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।  सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आधार आम आदमी की पहचान है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार की संवैधानिकता कुछ बदलावों के साथ बरकरार रहेगी। 

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में जस्टिस एके सीकरी, एएम खानविलर, डीवाई चंद्रचूण और अशोक भूषण ने आधार की अनिवार्यता पर बुधवार को अहम फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट का आधार पर फैसला

➤ सीबीएसई, नीट (NEET) में आधार जरूरी नहीं है।  इसके आलावा स्कूल में एडमिशन के लिए भी आधार कार्ड जरूरी नहीं है। 

➤ आधार को मोबाइल से लिंक करना आवश्यक नहीं हैं। बैंक खाते से आधार को लिंक करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। 

➤ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से पैन कार्ड को जोड़ने का फैसला बरकरार रहेगा। 

➤ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार के पीछे तार्किक सोच। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑथेंटिकेशन डाटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है. कम से कम डेटा होना चाहिए। 

➤ सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पढ़ते वक्त कहा कि आधार से समाज के बिना पढ़े-लिखे लोगों को पहचान मिली है। 

➤ सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आधार आम आदमी की पहचान है। 

➤ पैन कार्ड के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए भी आधार नंबर आवश्यक बना रहेगा। 

➤ सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि आधार अन्य आईडी प्रमाणों से भी अलग है क्योंकि इसे डुप्लीकेट नहीं किया जा सकता। 

➤ फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 99.76 प्रतिशत लोगों को सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता है।  समाज को इससे फायदा हो रहा है तथा दबे कुचले तबके को इससे फायदा मिल रहा है। 

➤ सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, सुरक्षा मामलों में एजेंसियां आधार की मांग कर सकती हैं। सुरक्षा लहजे से आधार की मांग करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए मान्य होगा। 


पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2018 में आधार और इससे जुड़ी 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी। 38 दिन तक चली सुनवाई के बाद 10 मई को पांच न्यायाधीशों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था। पीठ ने उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तस्वामी की याचिका सहित 31 याचिकाओं पर सुनवाई की थी। 


यूआईडीएआई

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) एक सांविधिक प्रा‍धिकरण है, जिसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 (“आधार अधिनियम, 2016”) के प्रावधानों के अंतर्गत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत् दिनांक 12 जुलाई, 2016 को की गई। 

यूआईडीएआई की स्थापना भारत के सभी निवा‍सियों को “आधार” नाम से एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) प्रदान करने हेतु की गई थी ताकि इसके द्वारा (क) दोहरी और फर्जी पहचान समाप्त की जा सके और (ख) उसे आसानी से एवं किफायती लागत में सत्यापित और प्रमाणित किया जा सके। प्रथम यूआईडी नम्बर महाराष्ट्र के नन्दूरबार की निवासी रंजना सोनवाने को 29 सितम्बर 2010 को जारी किया गया। 

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की अनुमति दी


सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितम्बर 2018 को दिशानिर्देश जारी करते हुए देश भर की अदालती कार्यवाही का अब सीधा प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीधा प्रसारण सेवा की शुरुआत वह अपने यहां से करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण एवं वीडियो रिकॉर्डिंग करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये जनहित में जारी है, और इससे पारदर्शिता आएगी।

लाइव स्ट्रीमिंग से संबंधित मुख्य तथ्य

➤ कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी जिससे न्यायिक व्यवस्था की जवाबदेही बढ़ेगी।

➤ हालांकि, कोर्ट ने अयोध्या और आरक्षण जैसे मुद्दों को संवेदनशील बताते हुए इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।

➤ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि वह कोर्ट की कार्यवाही के लाइव प्रसारण के लिए नियम बनाएगी।

➤ न्यायालय ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत लाइव स्ट्रीमिंग के नियम-कानून बनाए जाएं।

➤ हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर ही लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

➤ कोर्ट ने कहा कि अदालत की कार्यवाही के सीधे प्रसारण से ''जनता का जानने का अधिकार पूरा होगा।

केंद्र सरकार ने दी थी यह दलील

➤ केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण के दिशा-निर्देशों पर अपने सुझाव अदालत में दिए थे। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को बताया था कि लाइव प्रसारण का पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले देश के मुख्य न्यायाधीश की अदालत में शुरू किया जा सकता है।

➤ वेणुगोपाल ने यह भी बताया था कि लाइव स्ट्रीमिंग 70 मिनट की देरी से भी किया जा सकता है। ताकि जज को राष्ट्रीय सुरक्षा या व्यक्तिगत निजता के मामलों में वकील के गलत आचरण पर या किसी संवेदनशील मामले में प्रसारण के दौरान आवाज को बंद (Mute) करने का अवसर मिल सके।

➤ गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त को राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर फैसला सुरक्षित रखा था। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा की इसे सुप्रीम कोर्ट से शुरू किया जाएगा पर इसके लिए कुछ नियमों का पालन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की विडियो रिकॉर्डिंग और उसके सीधे प्रसारण को लेकर केंद्र से जवाब मांगा था।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SC/ ST को प्रमोशन में आरक्षण की जरूरत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने नागराज मामले में फैसले को सही बताते हुए फैसले पर फिर से विचार की जरूरत को खारिज किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण के लिए कोई डेटा जमा करने की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण मामले में बेहद अहम फैसला दिया है। प्रमुख न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए ये भी कहा कि यह मामला 7 जजों की बेंच को नहीं भेजा जाएगा।
प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नागराज जजमेंट में दी व्यवस्था को बैड इन लॉ कहा जिसमें आरक्षण से पहले पिछड़ेपन का डेटा सरकार से एकत्र करने को कहा गया था।

क्या था साल 2006 का फैसला?
➤ वर्ष 2006 में नागराज से संबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने कहा था कि सरकार एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है, लेकिन शर्त लगाई थी कि प्रमोशन में आरक्षण से पहले यह देखना होगा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं।
➤ गौरतलब है कि सरकार और आरक्षण समर्थकों ने वर्ष 2006 के एम नागराज के फैसले को पुनर्विचार के लिए सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजे जाने की मांग की थी।
➤ मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मांग पर सभी पक्षों की बहस सुनकर गत 30 अगस्त 2018 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सरकार और आरक्षण समर्थकों का कहना है कि एम नागराज फैसले में दी गई व्यवस्था सही नहीं है।

एससी/एसटी
एससी एसटी अपने आप में पिछड़े माने जाते हैं। राष्ट्रपति द्वारा जारी सूची में शामिल होने के बाद उनके पिछड़ेपन के अलग से आंकड़े जुटाने की जरूरत नहीं है। जबकि आरक्षण विरोधियों ने एम नागराज फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि उस फैसले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी गई व्यवस्था सही कानून है।उनका कहना था कि आरक्षण हमेशा के लिए नहीं है ऐसे में पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाए बगैर यह कैसे पता चलेगा कि सरकारी नौकरियों में एससी/एसटी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसलिए इन्हें प्रोन्नति में आरक्षण देने की जरूरत है।

Tuesday, 25 September 2018

इलेक्ट्रिक वाहन भारत की संवृद्धि को बढ़ावा देने में सक्षम


Electric vehicle capable of promoting India's growth (Author: Rajeev Ranjan)


विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। उल्लेखनीय है कि परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन ने भारत के प्रदूषण के स्तर को बढ़ाया है। 

परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन का भारत के प्रदूषण स्तर में योगदान

➤ केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुमानों के मुताबिक, इस क्षेत्र में 2010 तक 188 मीट्रिक टन CO2 का उत्सर्जन हुआ जिसमें अकेले सड़क परिवहन का 87% योगदान था।

➤ यह क्षेत्र तेल का एक बड़ा उपभोक्ता भी है और वर्तमान में भारत की तेल आयात निर्भरता लगभग 80% है।

➤ पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल के मुताबिक डीज़ल और पेट्रोल क्रमश: 40% और 13% तेल खपत में योगदान देते हैं।वर्ष 2014 में इस सेल ने अनुमान लगाया कि 70% डीज़ल और 100% पेट्रोल की मांग परिवहन क्षेत्र से थी।

इलेक्ट्रिक वाहन (ईवीएस) गेम चेंजर कैसे?

➤ ईवीएस भारत के लिये गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

➤ दरअसल ईवीएस नियमित संचालन के लिये पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन-आधारित वाहनों की तुलना में कम-से-कम 3 से 3.5 गुना अधिक ऊर्जा कुशल होते हैं।

➤ इसके अलावा, ईवीएस से किसी तरह काउत्सर्जन नहीं होता है, इसलिये स्थानीय प्रदूषण भी नहीं होता है।

➤ इस प्रकार ईवीएस को अपनाना न केवल तेल आयात को कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा, बल्कि ये स्थानीय वायु की गुणवत्ता में सुधार करने में भी सहायता कर सकते हैं।

विभिन्न स्तरों पर किये गये प्रयास 

➤ वैश्विक स्तर पर ईवीएस को बढ़ावा देने के लिये कई प्रयास किये गए हैं (अंतिम उपयोगकर्त्ताओं को वित्तीय/गैर-वित्तीय प्रोत्साहन सहित)।

➤ कई देशों ने ईवी 30 @ 30 अभियान की ओर कदम बढ़ाए हैं, जिनका उद्देश्य वर्ष 2030 तक ईवीएस की बिक्री हिस्सा 30% तक बढ़ाना है

➤ नीदरलैंड, आयरलैंड और नॉर्वे जैसे देश इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं जिन्होंने वर्ष 2030 तक पैसेंजर लाइट ड्यूटी वाहनों और बसों के मामले में 100% ईवी की बिक्री का लक्ष्य रखा है।

➤ भारत में राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (एनईएमएमपी) और इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों के फेम-इंडिया (एफएएम इंडिया) जैसे पहल भी ईवी बाज़ार के निर्माण के लिये  ठोस प्रयास कर रहे हैं।

➤ भारत एक सतत ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिये भी कदम उठा रहा है।

➤ भारी उद्योग विभाग, भारतीय मानक ब्यूरो और भारत के ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति उपकरण (ईवीएसई) के डिज़ाइन और निर्माण के लिये विभिन्न तकनीकी मानकों की स्थापना या बुनियादी ढाँचे को मजबूत बनाने के लिये काम कर रहे हैं।

➤ हालाँकि, ईवीएस को व्यवस्थित रूप से अपनाने के लिये सक्षम शहरी नियोजन, परिवहन और बिजली क्षेत्रों के बीच समन्वय की आवश्यकता है।

➤ घरेलू क्षेत्र में विनिर्माण तकनीकी की विशेषज्ञता हमारे युवा जनसांख्यिकीय को रोज़गार प्रदान करने के लिये भी महत्त्वपूर्ण है।

➤ कर्नाटक राज्य द्वारा अपनी ईवी नीति (2017) को जारी करने के बाद अन्य राज्य भी इस प्रक्रिया में हैं।

कमियाँ 

➤ विभिन्न सक्रिय कदमों के बावजूद भारत में अभी भी कई व्यवस्थित, तकनीकी और भौतिक विभिन्नताएँ हैं।

➤ हमारी बिजली वितरण ग्रिड प्रणाली वर्तमान में बड़े पैमाने पर ईवी ऊर्जा आवश्यकताओं को संभालने में असमर्थ है।

➤ भारत में लिथियम के बहुत कम ज्ञात भंडार हैं साथ ही, हम निकल, कोबाल्ट और बैटरी-ग्रेड ग्रेफाइट भी आयात करते हैं, जो बैटरी निर्माण में महत्त्वपूर्ण घटक हैं।

➤ अतः भारत को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये उपयुक्त देशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर विचार करना चाहिये।

➤ अन्य तकनीकी क्षमताओं में अर्द्धचालक विनिर्माण सुविधाओं की कमी  और नियंत्रक डिज़ाइन क्षमताओं की कमी भी शामिल है।

➤ ये उद्योग ईवीएस के लिये इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण हेतु आधार बनाते हैं, अतः नीतियों के अंतराल को दूर करना चाहिये जो इनके विकास में बाधा डाल रहे हैं।

क्या किये जाने की आवश्यकता है?

➤ भारत और फ्राँस द्वारा शुरू किये गए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) जैसे संगठन, इस तरह के व्यापार को सुविधाजनक बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

➤ उदाहरण के लिये ऑस्ट्रेलिया, चिली, ब्राज़ील, घाना और तंजानिया जैसे आईएसए सदस्य देश लिथियम भंडार में समृद्ध हैं।

➤ इसी तरह कांगो, मेडागास्कर और क्यूबा जैसे राष्ट्र कोबाल्ट की आपूर्ति के लिये भागीदार हो सकते हैं तो वहीं बुरुंडी, ब्राज़ील और ऑस्ट्रेलिया निकल भंडार में समृद्ध हैं।

➤ गौरतलब है कि तकनीकी रूप से लिथियम बैटरी विनिर्माण में हमें कम जानकारी है।

➤ खास बात यह है कि इसरो ने अपने इन-हाउस प्रौद्योगिकी को गैर-विशेष रूप से योग्य उत्पादन एजेंसियों को स्थानांतरित करने की इच्छा व्यक्त की है जो एक स्वागत योग्य कदम है।

➤ इसके अलावा, केंद्रीय इलेक्ट्रो केमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (कराईकुडी, तमिलनाडु) और रासी (RAASI) सौर ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जल्द ही इन-हाउस लिथियम आयन बैटरी का निर्माण किये जाने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

➤ उपर्युक्त बाधाओं के बावजूद, ईवीएस को अपनाना एक महत्त्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी कदम साबित होगा। 

➤ यह राजकोषीय से लेकर स्वास्थ्य तथा रोज़गार तक विभिन्न मोर्चों पर संभावित गेम चेंजर साबित हो सकता है। 

➤ अतः आवश्यकता है इस दिशा में उचित नीति-निर्माण को प्रमुखता दी जाए और सही दिशा में कार्य को आगे बढ़ाया जाए।

स्वास्थ्य बीमा योजना-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई)


Health Insurance Scheme - Prime Minister Jan Arogya Yojana (Author: Rajeev Ranjan)


भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 सितबंर 2018 को रांची, झारखंड में स्वास्थ्य बीमा योजना-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) की शुरूआत की। प्रधानमंत्री ने पीएमजेएवाई को एक विशाल सार्वजनिक सभा में शुभारंभ करने के लिए मंच पर पहुँचने से पहले इस योजना पर एक प्रदर्शनी का दौरा भी किया। इसी कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री ने चाईबासा और कोडरमा में मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला की पट्टिका का अनावरण भी किया। उन्होंने 10 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों का भी उद्घाटन किया।

विशेष तथ्य

➤ इस योजना के तहत प्रति वर्ष प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की कल्पना की गई है, इससे 50 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा होगा, और यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है।

➤ इस योजना के लाभार्थियों की संख्या यूरोपीय संघ की आबादी के बराबर है, या अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त जनसंख्या के करीब है।

➤ आयुष्मान भारत के पहले हिस्से - स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र-की शुरूआत बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती पर किया गया था, और दूसरा भाग - स्वास्थ्य बीमा योजना-दीन दयाल उपाध्याय की जयंती से दो दिन पहले शुरू किया गया था।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई)

➤ पीएमजेएवाई की व्यापकता के बारे में विस्तार से बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों सहित 1300 बीमारियां शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल भी इस योजना का हिस्सा होंगे।

➤ इस योजना में 5 लाख की राशि में सभी जांच, दवा, अस्पताल में भर्ती के खर्च आदि भी शामिल होंगे।

➤ इसके तहत यह पूर्व बीमारियों भी आएंगी। लोग 14555 डायल करके या सेवा केंद्र के माध्यम से इस योजना के बारे में अधिक जान सकते हैं।

➤ उन राज्यों के लिए जो पीएमजेएवाई का हिस्सा हैं, लोग इन राज्यों में से किसी भी राज्य में जा रहे हैं, तो भी इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

➤ देश भर में 13,000 से ज्यादा अस्पताल इस योजना में शामिल किए गए हैं।

➤ प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पीएमजेएवाई से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों और डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य प्रदाताओं, आशा, एएनएम आदि के समर्पण के माध्यम से, यह योजना सफल होगी।

आयुष्मान योजना के लिए पंजीकरण

➤ आयुष्मान योजना के पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री की तरफ से पत्र भेजे गए हैं।

➤ इसके साथ ही लाभार्थियों को कार्ड भी दिए गए हैं जिसमें क्यूआर कोड है।

➤ 2.50 लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर हैं देश भर में योजना की जानकारी के लिए।

➤ अगर योजना में जिन परिवारों का नाम नहीं है वे कॉमन सर्विस सेंटर पर पता कर सकते हैं।

➤ हेल्पलाइन नंबर 14555 से भी योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती हैं।

➤ पंचायत और जिला मुख्यालय में भी योजना से जुड़े लाभार्थियों की सूची भेजी गई हैं.

➤ आशा कर्मियों के पास भी योजना में शामिल लोगों की सूची भेजी गई है.

➤ नेशनल हेल्थ एजेंसी ने 14,000 आरोग्य मित्रों को अस्पतालों में तैनात किया गया है.

➤ इसके अतिरिक्त mera.pmjay.gov.in वेबसाइट पर लोग चेक कर सकते हैं कि उनका नाम है कि नहीं।

आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आयुष्मान मित्र की क्या भूमिका है?

➤ आयुष्मान भारत योजना, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है।

➤ इस योजना के लांच के तहत आयुष्मान मित्रों की नियुक्ति किये जाने का फैसला लिया गया था। किन्तु हाल ही में इस योजना को लागू करने के लिए  की घोषणा की गई और इसके तहत ‘आरोग्य मित्रों’ की नियुक्ति की जायेगी, जोकि इस योजना को लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

➤ शुरुआत में लगभग 1 लाख आरोग्य मित्रों को इसका प्रशिक्षण देकर उनकी नियुक्ति करने का प्रावधान है।

➤ आरोग्य मित्रों के पास इस योजना के बारे में सभी तरह की जानकारी होगी। 

➤ यह जानकारी वे सभी आवेदकों और अस्पतालों को प्रदान करेंगे।

➤ इसके अलावा उनका यह काम होगा कि वे आवेदकों की सभी जानकारी को सॉफ्टवेयर में फीड करें।

➤ प्रत्येक सूचीबद्ध अस्पतालों में एक आरोग्य मित्र की नियुक्ति की जाएगी।

➤ अतः कोई भी आवेदक यदि इस योजना का हिस्सा बनना चाहता है, तो वह किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में जाकर आरोग्य मित्र से मिलकर आवेदन की प्रक्रिया एवं इसकी जानकारी प्राप्त कर सकता है।

➤ वे उनके द्वारा किये गए आवेदन की जाँच करेंगे और उन्हें योजना कार्ड प्रदान कर देंगे, जिससे वे ईलाज प्राप्त करने में सक्षम होंगे।