Wednesday, 27 February 2019

चिट फण्ड क्या होता है


चिट फंड अधिनियम, 1982 की धारा 2 (बी) के अनुसार:

चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह या पड़ोसी आपस में वित्तीय लेन देन के लिए एक समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाती है और परिपक्वता अवधि पूरी होने पर ब्याज सहित लौटा दी जाती है। चिट फण्ड को कई नामों जैसे चिट, चिट्टी, कुरी से भी जाना जाता है। चिट फण्ड के माध्यम से लोगों की छोटी छोटी बचतों को इकठ्ठा किया जाता है। चिट फंड अक्सर माइक्रोफाइनेंस संगठन होते हैं।

भारत में चिट फंड का रेगुलेशन चिट फंड अधिनियम, 1982 के द्वारा होता है। इस कानून के तहत चिट फंड कारोबार का पंजीयन व नियमन संबद्ध राज्य सरकारें ही कर सकती हैं। चिट फंड एक्ट 1982 के सेक्शन 61के तहत चिट रजिस्ट्रार की नियुक्ति सरकार के द्वारा की जाती है। चिट फंड के मामलों में कार्रवाई और न्याय निर्धारण का अधिकार रजिस्ट्रार और सम्बंधित राज्य सरकार का ही होता है।


चिट फंड क्यों सफल होते हैं?

चिट फण्ड की सफलता का राज यह है कि इन कंपनियों का बिजनेस ऐसे एजेंटों के माध्यम से चलता है जो कि पने आस-पास के लोगों, रिश्तेदारों को जानते हैं इसलिए इन लोगों से पैसा निवेश करवाने में आसानी होती है।

कंपनियां ग्रामीण और टाउन इलाकों में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। बाजार में फैले उनके एजेंट साल, महीनें या फिर दिनों में जमा पैसे पर दोगुने या तिगुने मुनाफे का लालच देते हैं। अर्थात चिट फण्ड कंपनियों द्वारा ललचाऊ और लुभावनी योजनाओं (पॉन्जी स्कीम) के जरिए कम समय में बहुत अधिक मुनाफा देने का दावा किया जाता है। चिट फण्ड कम्पनियाँ कंपनी के विज्ञापन और बुकलेट में बड़ी-बड़ी फिल्मी हस्तियों, बड़े-बड़े नेताओं, के साथ अपने फोटो छपवा देते हैं जिसके कारण निवेशक कंपनी और एजेंटों पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं। कंपनियां निवेश की रकम का 25 से 40 फीसदी तक एजेंट को कमीशन के तौर पर देती हैं। जिसके कारण ये एजेंट अपने सगे सम्बन्धियों का पैसा भी इनमें लगवा देते हैं।

चिट फंड कंपनियां इस काम को मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) में तब्दील कर देती हैं। इन चिट फण्ड कंपनियों में अक्सर मौजूदा एजेंटों को इस स्कीम में अन्य लोगों को जोड़ने पर और भी अधिक कमीशन दिया जाता है जिससे इनका नेटवर्क दिन रात बड़ा होता जाता है।


चिट फण्ड कम्पनियाँ पैसा कहाँ निवेश करतीं हैं;

चिट फण्ड कम्पनियाँ मुख्य रूप से शेयर बाजार, रियल एस्टेट, होटल, मनोरंजन और पर्यटन, माइक्रो फाइनेंस, अखबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, अभिनेताओं और हस्तियों के साथ अनुबंध में पैसा लगातीं हैं।

भारत ने ‘क्विक रिएक्शन मिसाइल’ का सफल परीक्षण किया

India successfully test fires two Quick Reaction Surface to Air Missiles (Author : R. Kumari)


भारत ने 26 फरवरी 2019 को जमीन से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल (QRSAM) का ओडिशा के तट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सेना के लिए विकसित की जा रही इन दो मिसाइलों का परीक्षण किया है।

इस मिसाइल का निर्माण डीआरडीओ ने भारत इलेक्ट्रो्निक लिमिटेड और भारत डायनामिक लिमिटेड के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए किया है। इस मिसाइल को भारतीय रक्षा पंक्ति में बेहद अहम और खास माना जा रहा है।


क्विक रिएक्शन मिसाइल की विशेषताएं

🚀 हर मौसम में काम करने वाली इस स्वदेशी मिसाइल की रेंज 25 से 30 किलोमीटर है, जो तुरंत टारगेट को ध्वस्त  कर सकती है।

🚀 परीक्षण को पूरी तरह से सफल बताते हुए डीआरडीओ के एक अधिकारी ने कहा कि परीक्षण के दौरान मिशन के उद्देश्यों को पूरा किया गया।

🚀 अलग-अलग ऊंचाइयों और स्थितियों से दो मिसाइलों का परीक्षण किया गया।

🚀 दो मिसाइलों का परीक्षण भिन्न परिस्थितियों में किया गया औऱ दोनों कामयाब रहे। इस दौरान मिसाइल की ऐरोडायनामिक्स, प्रोपल्सन, ढांचागत प्रदर्शन और उच्च मैनुवर क्षमता को परखा गया।

🚀 परीक्षण के दौरान मिसाइल के रेडार, इलेक्ट्रोआप्टिकल सिस्टम्स, टेलीमीट्री, आदि के परीक्षण पैमाने सटीक आंके गये।

🚀 इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना जमीन से ही किसी भी संदिग्ध एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, एंटी-शिप मिसाइल, यूएवी, बैलेस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और कॉम्बैट जेट को हवा में ही नेस्तानाबूत कर सकती है।

🚀 इससे पहले डीआरडीओ ने लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली बराक-8 मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।

🚀 बराक-8 मिसाइल को नेवल शिप से लॉन्च किया जा सकता है। यह परीक्षण भी ओडिशा के तटवर्ती इलाकों में किया गया था।


QRSAM क्या है?

QRSAM अथवा क्विक रिएक्शन मिसाइल डीआरडीओ तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एवं भारत डायनामिक्स द्वारा भारतीय सेना के लिए बनाई गई है। इस मिसाइल का पहला परीक्षण 4 जून 2017 को किया गया था और दूसरा सफल परीक्षण 3 जुलाई 2017 को किया गया था। जमीन से हवा में मार कर सकने के कारण यह भारतीय थल सेना के लिए एक अहम रक्षा उपकरण है।

Monday, 25 February 2019

91वां ऑस्कर पुरस्कार विजेता - 2019

Oscar Awards 2019 (Author : Rajeev Ranjan)


अमेरिका के कैलिफॉर्निया स्थित डॉल्बी थिएटर में सिनेमा जगत के सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर अवॉर्ड्स (Oscar Awards 2019) की घोषणा की गई। इस पुरस्कार समारोह में भारतीय पृष्ठभूमि पर बनी 'पीरियड. एंड ऑफ सेंटेस' को भी बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट का अवॉर्ड मिला है।

बेस्ट फिल्म कैटेगरी में आठ फिल्म को आखिरी सूची में रखा गया था। इनमें ब्लैक पैंथर, ब्लैक लेंसमैन, बोहिमिया रापसोडी, द फेवरेट, ग्रीन बुक, रोमा, ए स्टार इज़ बोर्न, वाइस का नाम शामिल था। सभी फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए 'ग्रीन बुक' ने बेस्ट फिल्म कैटेगरी में ऑस्कर अवॉर्ड अपने नाम किया। फिल्म ‘ग्रीन बुक’ में एक पियानो वादक और उसके पार्ट टाइम ड्राइवर के बीच के रिश्ते को दिखाया गया है। इसी फिल्म के लिए माहेरशाला अली को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का भी अवॉर्ड मिला।

ऑस्कर 2019 (Oscar Awards) की पूरी सूची

🏆 बेस्ट फिल्म: ग्रीन बुक 

🏆 बेस्ट ऐक्टर इन अ लीडिंग रोल: रामी मालेक 

🏆 बेस्ट ऐक्ट्रेस इन अ लीडिंग रोल: ओलिविया कोलमन 

🏆 बेस्ट  फॉरन फिल्मः रोमा 

🏆 बेस्ट डायरेक्टर: अलफॉन्सो क्यूरॉन (रोमा) 

🏆 बेस्ट सपॉर्टिंग ऐक्ट्रेसः रेजिना किंग, फिल्मः इफ बील स्ट्रीट कुड टॉक 

🏆 बेस्ट सपॉर्टिंग ऐक्टर: माहर्शाला अली, फिल्म: ग्रीन बुक 

🏆 बेस्ट ऐनिमेटेड फीचर फिल्म: स्पाइडर-मैन: इनटू द स्पाइडर-वर्स 

🏆 बेस्ट ऐनिमेटेड शॉर्ट फिल्म: बाओ (BAO) 

🏆 बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट: पीरियड. एंड ऑफ सेंटेस 

🏆 बेस्ट विजुअल इफेक्ट: फर्स्ट मैन 

🏆 बेस्ट लाइव ऐक्शन शॉर्ट फिल्म: स्किन 

🏆 बेस्ट ऑरिजनल स्क्रीनप्ले: ग्रीन बुक 

🏆 बेस्ट अडैप्टेड स्क्रीन प्ले: ब्लैकलेंसमैन

🏆 बेस्ट ऑरिजनल स्कोर: ब्लैक पैंथर 

🏆 बेस्ट ऑरिजनल सॉन्ग: शैलो (लेडी गागा)

🏆 कॉस्ट्यूम डिजाइनः रुथ कार्टर 

🏆 बेस्ट सिनेमटॉग्रफीः रोमा


लेडी गागा और ओलिविया कोलमैन को मिला पहला ऑस्कर

लेडी गागा को फिल्म ए स्टार इस बोर्न (A Star is Born) के लिए मिला अवॉर्ड और ये गायिका स्टेज पर रोने लगी।  बतौर अभिनेत्री लेडी गागा ने पहली बार ऑस्कर में शिरकत की थी। ऑस्कर 2019 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला ओलिविया कोलमैन को। फिल्म 'द फेवरेट' के लिए ऑस्कर जीतने वाली ओलिविया के लिए ये पहला ऑस्कर था और जब वो स्टेज पर आई तो लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। 45 साल की इस अदाकारा ने कहा कि शायद ये मौका दोबारा नहीं आएगा लेकिन वो बहुत खुश हैं और इस लम्हे को जीना चाहती हैं। 

‘रोमा’ 10 अलग-अलग श्रेणियों में नॉमिनेट हुई 

वर्ष 2019 के ऑस्कर पुरस्कारों में हॉलिवुड फिल्म ‘रोमा’ को सबसे ज्यादा 10 अलग-अलग श्रेणियों में नॉमिनेट किया गया। पिछले साल ऑस्कर में ‘द शेप ऑफ वॉटर’ को सबसे ज्यादा नॉमिनेशन मिले थे। इस फिल्म को ऑस्कर पुरस्कारों के इतिहास में सबसे ज्यादा कैटिगरी में नॉमिनेट होने वाली फिल्मों में गिना जाता है। साल 2018 के ऑस्कर अवार्ड्स में इसे 13 अलग-अलग कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया था जिसमें से 4 अवार्ड इस फिल्म ने अपने नाम किए थे। इसके अलावा 'ऑल अबाउट ईव', 'टाइटैनिक' और 'ला ला लैंड' ऑस्कर में सबसे ज्यादा कैटिगरी में नॉमिनेट होने वाली फिल्मों के क्लब में शामिल हैं। 

ऑस्कर 2019 में भारत

भारतीय पृष्ठभूमि पर बनीं फिल्म 'पीरियड. एंड ऑफ सेंटेस' को भी बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट का अवॉर्ड मिला है।  यह फिल्म भारतीय पृष्ठभमि पर आधारित फिल्म है जिसमें पीरियड्स के मुद्दे को उठाया गया है। इस फिल्म को रयाक्ता जहताबची और मैलिसा बर्टन ने निर्देशित किया है।  भारतीय फिल्म प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा की फिल्म पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस को बेस्ट डॉक्युमेंटरी शॉर्ट कैटेगरी फिल्म के ऑस्कर अवॉर्ड 2019 से नवाजा गया है। 

अब तक के भारतीय ऑस्कर विजेता
1. भानु अथैया - वर्ष 1982 में आई रिचर्ड एटनबरो की फिल्म 'गांधी' में सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा के लिए। 
2. सत्यजीत रॉय - वर्ष 1992 में सिनेमा में जीवनर्पयत योगदान के लिए मानद 'लाइफटाइम अचीवमेंट' ऑस्कर। 
3. ए.आर. रहमान - वर्ष 2009 में फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के गीत 'जय हो' के लिए दो ऑस्कर, सर्वश्रेष्ठ संगीत और सर्वश्रेष्ठ गीत (संयुक्त रूप से)। 
4. गुलजार - वर्ष 2009 में फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर (संयुक्त रूप से), रहमान के साथ। 
5. रेसुल पोक्कुट्टी - वर्ष 2009 में फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए सर्वश्रेष्ठ साउंड मिक्सिंग का ऑस्कर।

Sunday, 24 February 2019

पत्नी जयजीत बनीं टॉपर और पति भी हुए पास (UP PCS)

UPPSC PCS 2016 final results declared, Jaijeet Kaur Hora tops (Author : Rajeev Ranjan)


उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने पीसीएस-2016 परीक्षा के फाइनल रिजल्ट जारी कर दिए हैं। इस परीक्षा में कानपुर की रहने वाली जयजीत कौर होरा ने पहला स्थान हासिल किया है। खास बात ये है कि उनके साथ उनके पति आशुतोष को भी इस परीक्षा में सफलता हासिल हुई है। बताया जा रहा है कि जयजीत कौर ने पहले प्रयास में ही ना सिर्फ सफलता हासिल की, बल्कि पूरे प्रदेश में पहला स्थान भी हासिल किये हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जयजीत और पति आशुतोष इससे पहले आईटी सेक्टर में नौकरी करते थे और साल 2015 में दोनों ने ही इस परीक्षा के लिए नौकरी छोड़ दी थी। उसके बाद इस परीक्षा की तैयारी की और दोनों ने सफलता हासिल की है। उन्होंने बीटेक, एमबीए की पढ़ाई की थी और उसके बाद प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए इस परीक्षा में हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि जयजीत कौर कानपुर की रहने वाली हैं और वो अपने पति के साथ लखनऊ में रहती हैं।

अपने आस पास बहुत से ऐसे लोगों को देखें होंगे, बहुत से ऐसे लोगों के बारें में सुने या पढ़ें होंगे जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, गरीबों की सेवा करते हैं, धर्म की दीवार को तोड़कर सभी धर्मों की एकता की बात करते हैं, गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं, अनाथ बच्चों की पढ़ाई या खाने पीने का खर्च उठाते हैं, जानवरों की सुरक्षा या देखभाल करते हैं, बहुत ही गरीबी या मुश्किल स्थिति से गुजरते हुए भी हार नहीं मान रहे हैं, कोई सुविधा न होने के बावजूद भी पढ़ना नहीं छोड़ रहें हैं, सामाजिक सन्देश देने के लिए कोई नया काम कर रहे हैं, आदि-आदि। इस पहल में उन सभी लोगों की जिंदगी से जुड़ी और प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत की जाती है जो समाज के लिए एक प्रेरणा हैं या एक मिसाल हैं।

और इस शुरुआत का मकसद सिर्फ लोगों को दूसरों की मदद करने के लिये, मुश्किलों और निराशाओं से बाहर निकलने के लिए, अपनी और दूसरों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना हैं। और मुझे विश्वास हैं कि मेरा ये प्रयास अपने मकसद में जरुर सफल होगा।

अगर आपके आसपास भी कोई ऐसे शख्स हैं, ऐसे कोई उदाहरण हैं, जो किसी भी तरह से अपनी और दूसरों की जिंदगी में बदलाव ला रहें हैं और दूसरों के लिए एक प्रेरणा हैं और आप उस शख्स की प्रेरणादायक कहानी लोगों को बताना चाहते हैं तो अपनी एक फोटो और अपने बारे में थोड़ी जानकारी जैसे- आपका नाम, जगह, क्या करते हैं? आदि के साथ उस शख्स की कहानी और सम्बंधित Image हमें ekawaz18@gmail.com पर भेज सकते हैं। पसंद आने पर उस शख्स की कहानी आपके नाम और फोटो के साथ पोस्ट की जाएगी    

"आप की कहानी, आप की ज़ुबानी। अपनी आपबीती हमें बताएँ, हम दुनिया को बताएँगे।"
                                                           
                                                                                                                       @ekawaz18

भारत में 4 करोड़ ग्रामीण लोग धातु-प्रदूषित पानी पीते हैं: सर्वेक्षण रिपोर्ट


हाल ही में पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि भारत में लगभग 4 करोड़ ग्रामीण लोग धातु-प्रदूषित जल ग्रहण कर रहे हैं। यह लोग उस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं जिसमें किसी न किसी रूप में धातु मिली हुई होती है।

इस सर्वेक्षण में पाया गया कि प्रदूषित जल में पाए जाने वाली प्रमुख धातुएं फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट हैं. धातु प्रदूषित जल के आंकड़ों में पश्चिम बंगाल और राजस्थान टॉप पर पाए गये हैं।


सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु

🚰 मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में सबसे अधिक धातु से प्रदूषित पानी पीने वाला राज्य पश्चिम बंगाल है। यहाँ 39 प्रतिशत लोग इस जल का सेवन करने को मजबूर है।

🚰 इसी क्रम में राजस्थान दूसरे स्थान पर आता है जहाँ 65 लाख ग्रामीण पीने के लिये प्रदूषित जल का प्रयोग करते हैं. इस जल से उनका उनका स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है, जबकि बिहार में 43 लाख लोग दूषित जल का सेवन कर रहे हैं।

🚰 इस सर्वेक्षण में जुटाए गये आंकड़ों में 16 राज्यों में एक लाख से अधिक ग्रामीण आबादी प्रभावित है। जबकि केवल सात राज्यों पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा में 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।

🚰 इसे अलग-अलग श्रेणी के अनुसार बांटते हुए कहा गया है कि फ्लोराइड प्रदूषण के क्षेत्र में 33 लाख, लवणता प्रदूषण के क्षेत्र में 25 लाख तथा नाइट्रेट प्रदूषण के क्षेत्र में 7 लाख आबादी के साथ राज्यों की सूची में राजस्थान टॉप पर है।

🚰 आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में लगभग 96 लाख लोग आर्सेनिक और 49 लाख लोग आयरन से प्रदूषित जल का सेवन कर रहे हैं।

🚰 पीने के पानी में सबसे अधिक प्रकार की धातुएं पंजाब में पाई गईं। यहाँ सभी तरह की धातुओं को पानी में देखा गया जबकि पश्चिम बंगाल में नाइट्रेट की मिलावट नहीं मिली थी।


पृष्ठभूमि

मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र ने आर्सेनिक और फ्लोराइड संदूषण से निपटने के लिये सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों और पाइपलाइन की अनंतिम आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये मार्च 2016 में 1,000 करोड़ रुपए जारी किये हैं। वर्ष 2017 में मंत्रालय ने 27,544 आर्सेनिक / फ्लोराइड प्रभावित ग्रामीण बस्तियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिये राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप-मिशन शुरू किया था। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति राज्य सूची का विषय है, इसलिये पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ग्रामीण आबादी हेतु सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के माध्यम से राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

Sunday, 17 February 2019

हर महीने 3000 रु. पेंशन वाली प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना लागू, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

  भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, घरेलू कामगारों, सिर-पीठ पर बोझा ढोने वाले मजदूरों तथा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कार्यकर्ताओं को 3000 रुपये प्रति माह की पेंशन सुनिश्चित करने वाली केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन’ योजना 15 फरवरी 2019 से औपचारिक रुप से लागू हो गई है।    केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने बताया कि हाल में बजट में घोषित की गई इस योजना से असंगठित क्षेत्र के तकरीबन 42 करोड़ लोगों को लाभ होगा। इस योजना में वे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जिनकी आय 15 हजार रुपए प्रति माह तक है और 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में हैं. इस योजना के पात्र व्यक्ति नई पेंशन योजना (एनपीएस), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) योजना या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के लाभ के अंतर्गत कवर नहीं किए जाने चाहिए और उसे आयकर दाता नहीं होना चाहिए।      पीएम-एसवाईएम की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं    न्यूनतम निश्चित पेंशनः पीएम-एसवाईएम के अंतर्गत प्रत्येक अभिदाता को 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद प्रति महीने 3,000 रुपये न्यूनतम निश्चित पेंशन मिलेगा।    परिवार पेंशनः यदि पेंशन प्राप्ति के दौरान अभिदाता की मृत्यु होती है तो परिवार पेंशन के रूप में लाभार्थी को मिलने वाले पेंशन का 50 प्रतिशत लाभार्थी के जीवनसाथी को मिलेगा। परिवार पेंशन केवल जीवनसाथी के मामले में लागू होता है। यदि लाभार्थी ने नियमित अंशदान दिया है और किसी कारणवश उसकी मृत्यु (60 वर्ष की आयु से पहले) हो जाती है तो लाभार्थी का जीवनसाथी योजना में शामिल होकर नियमित अंशदान करके योजना को जारी रख सकता है या योजना से बाहर निकलने और वापसी के प्रावधानों के अनुसार योजना से बाहर निकल सकता है।    अभिदाता द्वारा अंशदानः अभिदाता का अंशदान उसके बचत बैंक खाता/जनधन खाता से “ऑटो डेबिट” सुविधा के माध्यम से किया जाएगा. पीएम-एसवाईएम योजना में शामिल होने की आयु से 60 वर्ष की आयु तक अभिदाता को निर्धारित अंशदान राशि देनी होगी।    केन्द्र सरकार द्वारा बराबर का अंशदानः पीएम-एसवाईएम 50:50 के अनुपात आधार पर एक स्वैच्छिक तथा अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें निर्धारित आयु विशेष अंशदान लाभार्थी द्वारा किया जाएगा और तालिका के अनुसार बराबर का अंशदान केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति 29 वर्ष की आयु का होता है तो उसे 60 वर्ष की आयु तक प्रति महीने 100 रुपये का अंशदान करना होगा। केन्द्र सरकार द्वारा बराबर का यानी 100 रुपये का अंशदान किया जाएगा।      कैसे करें रजिस्ट्रेशन  अभिदाता के पास मोबाइल फोन, बचत बैंक खाता तथा आधार संख्या होना अनिवार्य है। पात्र अभिदाता नजदीकी सीएससी जाकर आधार नम्बर तथा बचत बैंक खाता/जनधन खाता संख्या को स्वप्रमाणित करके पीएम-एसवाईएम के लिए नामांकन करा सकते हैं। बाद में अभिदाता को पीएम-एसवाईएम वेब पोर्टल पर जाने तथा मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सुविधा दी जाएगी और अभिदाता आधार संख्या /स्वप्रमाणित आधार पर बचत बैंक खाता/जनधन खाता का इस्तेमाल करते हुए अपना पंजीकरण करा सकते हैं। नामांकन कार्य सामुदायिक सेवा केन्द्रों (सीएससी) द्वारा चलाया जाएगा। असंगठित श्रमिक आधार कार्ड तथा बचत बैंक खाता, पासबुक/जनधन खाता के साथ नजदीकी सीएससी जाकर योजना के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पहले महीने की अंशदान राशि का भुगतान नकद रूप में होगा और इसकी रसीद दी जाएगी। एलआईसी के सभी शाखा कार्यालयों, ईएसआईसी/ईपीएफओ के कार्यालयों तथा केन्द्र तथा राज्य सरकारों के सभी श्रम कार्यालयों द्वारा असंगठित श्रमिकों को योजना, उसके लाभों तथा प्रक्रियाओं के बारे में बताया जाएगा।    योजना से बाहर निकलना और वापसी     असंगठित मजदूरों के रोजगार के अनिश्चित स्वभाव को देखते हुए योजना से बाहर निकालने के प्रावधान लचीले रखे गए हैं। योजना से बाहर निकलने के प्रावधान निम्नलिखित हैं:-  यदि अभिदाता 10 वर्ष से कम की अवधि में योजना से बाहर निकलता है तो उसे केवल लाभार्थी के अंशदान के हिस्से को बचत बैंक ब्याज दर के साथ दिया जाएगा। यदि अभिदाता 10 वर्षों या उससे अधिक की अवधि के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु होने से पहले योजना से बाहर निकलता है तो उसे लाभार्थी के अंशदान के हिस्से के साथ कोष द्वारा अर्जित संचित ब्याज के साथ या बचत बैंक ब्याज, दर जो भी अधिक हो, के साथ दिया जाएगा। यदि लाभार्थी ने नियमित अंशदान किया है और किसी कारणवश उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी नियमित अंशदान करके इस योजना को आगे जारी रख सकता है या कोष द्वारा अर्जित एकत्रित वास्तविक ब्याज या बचत बैंक ब्याज दर, जो भी अधिक हो, के साथ लाभार्थी का अंशदान लेकर योजना से बाहर निकल सकता है।

भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, घरेलू कामगारों, सिर-पीठ पर बोझा ढोने वाले मजदूरों तथा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कार्यकर्ताओं को 3000 रुपये प्रति माह की पेंशन सुनिश्चित करने वाली केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन’ योजना 15 फरवरी 2019 से औपचारिक रुप से लागू हो गई है।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने बताया कि हाल में बजट में घोषित की गई इस योजना से असंगठित क्षेत्र के तकरीबन 42 करोड़ लोगों को लाभ होगा। इस योजना में वे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जिनकी आय 15 हजार रुपए प्रति माह तक है और 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में हैं। इस योजना के पात्र व्यक्ति नई पेंशन योजना (एनपीएस), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) योजना या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के लाभ के अंतर्गत कवर नहीं किए जाने चाहिए और उसे आयकर दाता नहीं होना चाहिए।


पीएम-एसवाईएम की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं

न्यूनतम निश्चित पेंशनः पीएम-एसवाईएम के अंतर्गत प्रत्येक अभिदाता को 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद प्रति महीने 3,000 रुपये न्यूनतम निश्चित पेंशन मिलेगा।

परिवार पेंशनः यदि पेंशन प्राप्ति के दौरान अभिदाता की मृत्यु होती है तो परिवार पेंशन के रूप में लाभार्थी को मिलने वाले पेंशन का 50 प्रतिशत लाभार्थी के जीवनसाथी को मिलेगा। परिवार पेंशन केवल जीवनसाथी के मामले में लागू होता है। यदि लाभार्थी ने नियमित अंशदान दिया है और किसी कारणवश उसकी मृत्यु (60 वर्ष की आयु से पहले) हो जाती है तो लाभार्थी का जीवनसाथी योजना में शामिल होकर नियमित अंशदान करके योजना को जारी रख सकता है या योजना से बाहर निकलने और वापसी के प्रावधानों के अनुसार योजना से बाहर निकल सकता है।

अभिदाता द्वारा अंशदानः अभिदाता का अंशदान उसके बचत बैंक खाता/जनधन खाता से “ऑटो डेबिट” सुविधा के माध्यम से किया जाएगा. पीएम-एसवाईएम योजना में शामिल होने की आयु से 60 वर्ष की आयु तक अभिदाता को निर्धारित अंशदान राशि देनी होगी।

केन्द्र सरकार द्वारा बराबर का अंशदानः पीएम-एसवाईएम 50:50 के अनुपात आधार पर एक स्वैच्छिक तथा अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें निर्धारित आयु विशेष अंशदान लाभार्थी द्वारा किया जाएगा और तालिका के अनुसार बराबर का अंशदान केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति 29 वर्ष की आयु का होता है तो उसे 60 वर्ष की आयु तक प्रति महीने 100 रुपये का अंशदान करना होगा। केन्द्र सरकार द्वारा बराबर का यानी 100 रुपये का अंशदान किया जाएगा।


कैसे करें रजिस्ट्रेशन
  • अभिदाता के पास मोबाइल फोन, बचत बैंक खाता तथा आधार संख्या होना अनिवार्य है।
  • पात्र अभिदाता नजदीकी सीएससी जाकर आधार नम्बर तथा बचत बैंक खाता/जनधन खाता संख्या को स्वप्रमाणित करके पीएम-एसवाईएम के लिए नामांकन करा सकते हैं।
  • बाद में अभिदाता को पीएम-एसवाईएम वेब पोर्टल पर जाने तथा मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सुविधा दी जाएगी और अभिदाता आधार संख्या /स्वप्रमाणित आधार पर बचत बैंक खाता/जनधन खाता का इस्तेमाल करते हुए अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
  • नामांकन कार्य सामुदायिक सेवा केन्द्रों (सीएससी) द्वारा चलाया जाएगा।
  • असंगठित श्रमिक आधार कार्ड तथा बचत बैंक खाता, पासबुक/जनधन खाता के साथ नजदीकी सीएससी जाकर योजना के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
  • पहले महीने की अंशदान राशि का भुगतान नकद रूप में होगा और इसकी रसीद दी जाएगी।
  • एलआईसी के सभी शाखा कार्यालयों, ईएसआईसी/ईपीएफओ के कार्यालयों तथा केन्द्र तथा राज्य सरकारों के सभी श्रम कार्यालयों द्वारा असंगठित श्रमिकों को योजना, उसके लाभों तथा प्रक्रियाओं के बारे में बताया जाएगा।


योजना से बाहर निकलना और वापसी 

असंगठित मजदूरों के रोजगार के अनिश्चित स्वभाव को देखते हुए योजना से बाहर निकालने के प्रावधान लचीले रखे गए हैं। योजना से बाहर निकलने के प्रावधान निम्नलिखित हैं:-
  • यदि अभिदाता 10 वर्ष से कम की अवधि में योजना से बाहर निकलता है तो उसे केवल लाभार्थी के अंशदान के हिस्से को बचत बैंक ब्याज दर के साथ दिया जाएगा।
  • यदि अभिदाता 10 वर्षों या उससे अधिक की अवधि के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु होने से पहले योजना से बाहर निकलता है तो उसे लाभार्थी के अंशदान के हिस्से के साथ कोष द्वारा अर्जित संचित ब्याज के साथ या बचत बैंक ब्याज, दर जो भी अधिक हो, के साथ दिया जाएगा।
  • यदि लाभार्थी ने नियमित अंशदान किया है और किसी कारणवश उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी नियमित अंशदान करके इस योजना को आगे जारी रख सकता है या कोष द्वारा अर्जित एकत्रित वास्तविक ब्याज या बचत बैंक ब्याज दर, जो भी अधिक हो, के साथ लाभार्थी का अंशदान लेकर योजना से बाहर निकल सकता है।

भारत ने पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिया, जानिए क्या होगा इसका असर


भारत ने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर आत्मघाती आतंकी हमले के विरोध में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस लेने की घोषणा की है।

हमले के मद्देनजर 15 फरवरी 2019 को पीएम मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक हुई। बैठक में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, तीनों सेनाध्यक्ष और सीआरपीएफ (CRPF) के डीजी ने भाग लिया। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा।


घटना

पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमले में शहीद होने वाले जवानों की संख्या मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 44 हो गई है। बतौर रिपोर्ट्स, सीआरपीएफ के करीब 70 वाहनों का काफिला 2547 जवानों को लेकर जा रहा था और उससे टकराने वाली एसयूवी में 350 किलोग्राम आईईडी विस्फोटक था। रिपोर्ट के अनुसार उरी के बाद यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। बता दें कि यह हमला श्रीनगर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर हुआ है।

इनमें से अधिकतर सीआरपीएफ जवान अपनी छुट्टियां बिताने के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे। जम्मू कश्मीर राजमार्ग पर अवंतिपोरा इलाके में लाटूमोड पर इस काफिले पर अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे घात लगाकर हमला किया गया।


मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन)  का दर्जा कब दिया गया?

भारत 01 जनवरी 1995 को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का सदस्य बना था। डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने पाकिस्तान को वर्ष 1996 में मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा दिया था लेकिन पाकिस्तान की ओर से भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया गया था।


मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन)  का दर्जा लेने की प्रक्रिया

बता दें कि विश्व व्यापार संगठन के आर्टिकल 21बी के तहत कोई भी देश उस सूरत में किसी देश से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले सकता है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर विवाद उठ गया हो। हालांकि इसके लिए तमाम शर्तें पूरी करनी होती हैं।


मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) क्या है?

दरअसल एमएफएन (एमएफएन) का मतलब है मोस्ट फेवर्ड नेशन, यानी सर्वाधिक तरजीही देश। विश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश (एमएफएन) का दर्जा दिया जाता है। एमएफएन का दर्जा मिल जाने पर दर्जा प्राप्त देश को इस बात का आश्वासन रहता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।


एमएफएन के दर्जा से क्या लाभ है?

एमएफएन का दर्जा कारोबार में दिया जाता है। इसके तहत आयात-निर्यात में आपस में विशेष छूट मिलती है। यह दर्जा प्राप्त देश कारोबार सबसे कम आयात शुल्क पर होता है. डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश खुले व्यापार और बाजार से बंधे हैं मगर एमएफएन के नियम के तहत देशों को विशेष छूट दी जाती है। सीमेंट, चीनी, ऑर्गेनिक केमिकल, रुई, सब्जियों और कुछ चुनिंद फलों के अलावा मिनरल ऑयल, ड्राई फ्रूट्स, स्टील जैसी कमोडिटीज और वस्तुओं का कारोबार दोनों देशों के बीच होता है। भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 2012 के आंकड़े के अनुसार लगभग 2.60 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है।


क्या भारत को होगा पाकिस्तान से यह दर्जा छीनने का नुकसान?

भारत अगर मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा खत्म करता है तो हो सकता है कि पाकिस्तान अपनी तरफ से भारत के साथ व्यापार ही रोक दे। भारत को ऐसे में घाटा हो सकता है लेकिन आतंकवाद से निपटने और देश की सुरक्षा के मद्देनजर भारत घाटे की कीमत पर भी ऐसा करने को तैयार हो गया है।


भारत में अब तक हुए बड़े आतंकवादी हमले पर

1993 मुंबई बम धमाका

12 मार्च 1993 को मुंबई में आंतकियों ने एक बम धमाके को अंजाम दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंतकियों ने कुल 12 बम धमाके किए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस धमाके में कुल 257 लोगों की मौत हुई जबकि 717 नागरिक घायल हुए थे।

1998 कोयम्बटूर बम विस्फोट

कोयम्बटूर में 14 फरवरी 1998 को 11 जगहों पर बम धमाके हुए. इस जगह पर कुल 12 बम धमाके हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल 58 नागरिकों की मौत हुई जबकि 200 नागरिक घायल हुए।

2001 संसद हमला

भारत की राजधानी दिल्ली में 13 दिसंबर 2001 को संसद पर बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 5 आतंकवादी मारे गए थे. जबकि दिल्ली पुलिस के 6 सहित संसद के 2 सुरक्षाकर्मी  शहीद हो गए थे।

2002 अक्षरधाम मंदिर हमला

गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम मंदिर में दो आंतकियों ने 24 सितंबर 2002 को बड़ा हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 30 लोगों की मौत हुई थी जबकि 80 नागरिक घायल हो गए थे।

2005 दिल्ली सिरियल ब्लास्ट

दिल्ली में दिवाली के दो दिन पहले 29 अक्टूबर 2005 को सीरियल बम ब्लास्ट करके राजधानी दिल्ली को दहला दिया गया था। आंतकियों ने 3 जगह बम धमाके किए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 62 लोगों की मौत हुई थी जबकि 210 नागरिक घायल हो गए थे।

2006 बांबे बम ब्लास्ट

मुंबई की लोकल ट्रेन में आंतकियों ने 11 मिनट के अंदर 7 जगहों पर लगातार हमले हए थे। 11 जुलाई 2006 में हुआ ये हमला 1993 के धमाके के बाद से सबसे बड़ा धमाका था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस धमाके में 209 लोगों की  मौत हुई थी जबकि 700 लोग घायल हुए थे।

2007 समझौता एक्सप्रेस धमाका

दिल्ली से लाहौर को जोड़ने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को एक बड़ा धमाका हुआ था। बम धमाका यात्रियों से भरी दो बोगियों में हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में 68 नागरिकों  की मौत हुई थी जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे।

26/11 मुंबई विस्फोट 2008

मुंबई में 26 नवम्बर 2008 को हुआ ये हमला इतिहास में अब तक सबसे बड़े हमलों में शुमार है। कुछ आंतकी समुद्र के रास्ते से मुंबई में घुसे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में कुल 164 लोगों की मौत हुई थी जबकि 308 लोग जख्मी हो गए थे।

2008 जयपुर ब्लास्ट

जयपुर में 13 मई 2008 को 15 मिनट के भीतर 9 बम ब्लास्ट हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में 63 लोगों की मौत सहित 216 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

2008 असम ब्लास्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असम में 30 अक्टूबर 2008 को हुए इस हमले में 81 लोगों की मौत हुई थी जबकि 470 लोग घायल हुए थे।

2016 पठानकोट हमला

पंजाब के पठानकोट एयरफोर्स बेस में 02 जनवरी 2016 को कुछ आंतकवादियों ने हमला कर दिया था। आंतकी सेना की वर्दी में घुसे थे। भारतीय सेना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सभी हमलावरों को मार गिराया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मुठभेड़ में 3 जवान शहीद हो गए थे।

2016 उरी हमला

जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में LOC के पास आंतकियों ने 18 सितंबर 2016 को आर्मी हेडक्वार्टर पर बड़ा हमला किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में सेना के 18 जवान शहीद हुए थे। इस मुठभेड़ में भारतीय सेना ने सभी आंतकियों को मार गिराया था।

यूनिसेफ ने ‘बाल विवाह-2019 फैक्टशीट’ नामक रिपोर्ट जारी की


हाल ही में संयुक्त राष्ट्र बाल निधि (UNICEF) ने एक रिपोर्ट, 'फैक्टशीट चाइल्ड मैरिजेज 2019' जारी की है जिसके अंतर्गत कहा गया है कि भारत के कई क्षेत्रों में अब भी बाल विवाह हो रहा है। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ दशकों के दौरान भारत में बाल विवाह की दर में कमी आई है लेकिन बिहार, बंगाल और राजस्थान में यह प्रथा अब भी जारी है।

भारत के संदर्भ में यूनिसेफ की रिपोर्ट

➦ यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार, बंगाल और राजस्थान में बाल विवाह की यह कुप्रथा आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों सहित कुछ विशेष जातियों के बीच प्रचलित है।

➦ रिपोर्ट में कहा गया है कि बालिका शिक्षा की दर में सुधार, किशोरियों के कल्याण के लिये सरकार द्वारा किये गए निवेश व कल्याणकारी कार्यक्रम और इस कुप्रथा के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रभावी संदेश देने जैसे कदमों के चलते बाल विवाह की दर में कमी देखने को मिली है।

➦ रिपोर्ट के अनुसार 2005-2006 में जहाँ 47 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी, वहीं 2015-2016 में यह आँकड़ा 27 फीसदी था।

➦ यूनिसेफ के अनुसार, अन्य सभी राज्यों में बाल विवाह की दर में गिरावट लाए जाने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है किंतु कुछ ज़िलों में बाल विवाह का प्रचलन अब भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।


वैश्विक संदर्भ में यूनिसेफ की रिपोर्ट

➦ मौजूदा समय में विश्व भर में लगभग 65 करोड़ ऐसी लड़कियाँ/महिलाएँ हैं जिनकी शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले ही कर दी गई है, जबकि बचपन में लड़कियों की शादी कर दिये जाने के मामले में यह संख्या प्रतिवर्ष करीब 1.2 करोड़ है।

➦ दक्षिण एशिया में बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत (वैश्विक दर की) है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में बाल विवाह की दर 18 प्रतिशत (वैश्विक दर की) है।

➦ लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में बाल विवाह की स्थिति में बदलाव नहीं आया है।

➦ पिछले एक दशक में बाल विवाह की दर में 15 प्रतिशत की कमी आई है जिसके तहत लगभग 2.5 करोड़ बाल विवाह होने से रोके गए हैं।


बाल विवाह के कारण

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी, लड़कियों की शिक्षा का निम्न स्तर, लड़कियों को आर्थिक बोझ समझना, सामाजिक प्रथाएँ एवं परंपराएँ बाल विवाह के प्रमुख कारण हैं। भारत में बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया था। बाद में सन् 1949, 1978 और 2006 में इसमें संशोधन किये गए। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के नए कानून के तहत बाल विवाह कराने पर 2 साल की जेल एक लाख रुपए का दंड निर्धारित किया है।