Friday, 12 January 2018

ऑपरेशन एंतेब्बे: इजराइल का डेयरिंग ‘मिशन’


इजराइल की सुरक्षा दुनिया में अचूक मानी जाती है। इसकी दो वजह हैं- पहली इजराइल के कमांडोज और दूसरी यहां की सुरक्षा एजेंसी मोसाद।

मोसाद के नाम से दुनिया की बड़ी-बड़ी सुरक्षा एजेंसियां भी थर्राती हैं। एजेंसी के एजेंट्स दुनिया में सबसे खतरनाक माने जाते हैं। मोसाद अपनी बनाई गई साहसिक योजनओं के कारण जितनी ख्याति पाती है, उतनी ही बदनाम है उन तरीकों के लिए जिसके जरिए वह अपने दुश्मनों से सच उगलवाते हैं।

खैर आज बात होगी उनकी उस खतरनाक योजना आॅपरेशन एंतेब्बे के बारे में जिसके जरिए इजराइल के कमांडोज ने 1976 में अपने 102 अपहृत नागरिकों को फिलिस्तीनी लड़ाकों से बचाकर उस मिशन को अंजाम दिया गया, जिसको आज तक नहीं दोहराया जा सका।

आखिर कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी इजराइल ने जीत दर्ज की आइए जानते हैं–

प्लेन को कर लिया गया था हाइजैक

27 जून 1976 को इसराइल के तेल अवीव से पेरिस जा रही एक फ्लाइट ने थोड़ी देर एथेंस में रुकने के बाद उड़ान भरी ही थी कि पिस्टल और ग्रेनेड लिए चार यात्री उठे और विमान को पहले लीबिया के बेनगाजी और फिर युगांडा के एंतेब्बे हवाई अड्डे ले गए। यात्री कुछ समझ पाते इसके पहले उन्होंने अपनी पहचान जाहिर करते हुए बताया कि वह ‘पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन फॉर फिलिस्तीन‘ के सदस्य हैं।

मतलब साफ था इसराइल और फिलिस्तीन की दुश्मनी एक बार फिर सिर उठा चुकी थी। खास बात यह थी कि युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन की सहानुभूति अपहरणकर्ताओं के साथ थी। ईदी ने आतंकियों को अपनी सेना के जरिए सुरक्षा देने का वादा तक किया था।

इजराइल को युगांडा से इस साथ की उम्मीद नहीं थी। अपहरणकर्ताओं ने 47 गैर यहूदी यात्रियों को रिहा कर दिया। इसके बाद मांग हुई कि इजराइल, केन्या और पश्चिमी जर्मनी की जेलों में रह रहे 54 फिलस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाए नहीं तो वे बंधकों को एक-एक करके मारना शुरू कर देंगे।

इजराइल के इतिहास में हुआ यह अभी तक का सबसे खतरनाक हाइजैक था। बहुत बड़ी संख्या में इजराइली नागरिक प्लेन में थे। अगर आतंकी उन्हें मार देते तो इजराइल की सुरक्षा पर यह सदैव के लिए एक दाग बन के लग जाता।

तैयार किया गया ‘नकली टर्मिनल’

मोसाद को अचानक हुई फिलिस्तीनी लड़ाकों की इस हरकत का जरा भी अंदाजा नहीं था, पर देर न करते हुए एजेंसी ने घटनाक्रम को बिंदुवार समझना शुरू किया। जिन गैर-यहूदी यात्रियों को रिहा किया गया था उन्हें विशेष विमान से पेरिस ले जाया गया। वहाँ मोसाद के जासूसों ने उनसे बात कर एंतेब्बे के बारे में छोटी से छोटी जानकारी जुटाने की कोशिश की।

एक साथ कई लोगों की जान खतरे में थी इसलिए इजराइल कोई भी गलती नहीं करना चाहता था। कैदियों को वह छोड़ तो सकते थे, लेकिन इससे आतंकियों के हौसले और भी बढ़ जाते। इजराइल ने तुरंत ही फैसला किया कि वह लड़ेंगे और अपने सभी लोगों को वापस लेकर आएँगे।

मोसाद के एक एजेंट ने केन्या में एक विमान किराए पर लेकर एंतेब्बे के ऊपर उड़ान भरकर उसकी बहुत सारी तस्वीरें खींची। दिलचस्प बात यह थी कि एंतेब्बे हवाई अड्डे के टर्मिनल को जहाँ बंधकों को रखा गया था, एक इसराइली कंपनी ने ही बनाया था। कंपनी ने उस टर्मिनल का नक्शा उपलब्ध कराया और रातों रात इसराइल में एक नकली टर्मिनल खड़ा कर लिया गया, ताकि इसराइली कमांडो उस पर हमले का अभ्यास कर सकें।

कमांडोज ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी इस मिशन के लिए

वह भी जानते थे कि एक छोटी गलती का कितना बड़ा दुष्परिणाम हो सकता था। इजराइल की सुरक्षा से जुड़े हर व्यक्ति ने इस मिशन को सफल बनाने के लिए अपने आप को इसमें झोंक दिया था। मोसाद ने प्लान बना लिया था कि उनके कमांडो टर्मिनल की ट्रेनिंग पूरी करके उसी के हिसाब से अपने इस मिशन को अंजाम देंगे।

बनाया गया अचूक प्लान

मोसाद को अब तक इस बात का अंदाजा लग चुका था कि विमान में यात्रियों की स्थिति क्या है और अपहरणकर्ताओं के पास कैसे हथियार हैं। सैनिकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका था. अब तक 4 दिन निकल चुके थे। मोसाद ने तीन विकल्प तैयार किए। पहला हमले के लिए विमानों का सहारा लिया जाए। दूसरा नौकाओं से वहाँ पहुंचा जाए और तीसरा केन्या के सड़क मार्ग से युगांडा में घुसा जाए।

बाद में एजेंसी ने पुख्ता प्लान तैयार किया और तय हुआ कि एंतेब्बे पहुंचने के लिए विमानों का इस्तेमाल होगा और युगांडा के सैनिकों को ये आभास दिया जाएगा कि इन विमानों में राष्ट्रपति ईदी अमीन विदेश यात्रा से लौट रहे हैं।

इसके लिए एजेंसी ने हूबहू वैसी ही कार का इंतजाम किया, जैसी राष्ट्रपति ईदी अमीन के पास थी. मिशन में एक बड़ी परेशानी यह भी थी कि इजराइली सैनिकों को अपने इस मिशन के दौरान ही अपने प्लेनों में ईंधन भी भरना था। हर पल यह मिशन और भी मुश्किल होता जा रहा था।

जानलेवा होता जा रहा था मिशन…

मिशन के लिए 100 इजराइली स्पेशल सैनिकों की एक बड़ी टीम बनाई गई। सैनिकों के अलग-अलग गुट बनाए गए ताकि सभी अलग-अलग कामों को अंजाम दे सकें। कुछ को हमला करना था तो कुछ को बंदियों को बचाना था. इजराइल से एंतेब्बे तक जाने के लिए उन्हें चार सी-130 विमान दिए गए। इसके साथ ही दो बोइंग 707 भी जिसमें सैनिकों को बंधकों को लाना था। सभी चीजों को ले कर इजराइली सैनिक निकल गए इस खतरनाक मिशन पर।

3 जुलाई को करीब रात के 11 बजे इजराइली प्लेन एंतेब्बे हवाई अड्डे के पास पहुंचे। उन्होंने गाड़ियाँ निकाली और ऐसा प्रतीत करवाया कि ईदी अमीन का काफिला आ रहा है। गेट पर खड़े ईदी अमीन के सैनिकों को इजराइली सैनिकों ने बेवकूफ बना दिया था अब समय था उन्हें मार गिराने का। गाड़ी के अंदर से एक सैनिक ने सिलेंसर लगी बंदूक से गार्ड को मारना चाहा मगर वह चूक गया। मजबूरन दूसरे कमांडो को उसे मारना पड़ा।कमांडो की बंदूक में सिलेंसर नहीं था, इसलिए उसकी आवाज से आतंकी चौकन्ने हो गए। इजराइली सैनिकों ने जल्दी ही गाड़ियाँ टर्मिनल में घुसाई और अपने मिशन को शुरू कर दिया।

गोलियों की आवाज से बहुत से आतंकी बाहर आ गए थे। इजराइली कमांडो नहीं चाहते थे कि मुठभेड़ में उनका कोई भी सैनिक और नागरिक घायल हो इसलिए उन्होंने तुरंत ही हमला शुरू कर दिया। एक के बाद एक आतंकी ढेर होने लगे। पूरे एयरपोर्ट पर गोलियों की आवाज गूंजने लगी। हर तरफ बस खून ही खून था।कुछ कमांडो जल्दी से उस जगह तक गए जहां पर बंदियों को रखा गया था और उन्हें जल्द ही वहाँ के आतंकियों को ढेर करके उनको आजाद करवाया। इस दौरान कमांडो टीम के कमांडर योनाटन को गोली लग गई थी।

एयरपोर्ट के कोने-कोने से आतंकी और युगांडा के सैनिक आकर गोलियां बरसाने लगे मगर इजराइली कमांडोज ने भी हिम्मत नहीं हारी और वह डंटे रहे।

जैसे ही एयरपोर्ट के आतंकियों को मार दिया गया जल्दी से सभी इजराइली नागरिकों को प्लेन में बैठाया गया कमांडो ने एअरपोर्ट पर खड़े बाकि प्लेनों को आग लगा दी ताकि उनका पीछा न किया जा सके। मिशन सफल रहा मगर उसमें कमांडर योनाटन और कुछ बंधकों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

पूरा मिशन करीब 90 मिनट तक चला। यह बहुत ही लंबा और खतरनाक मिशन था। आखिरकार इजराइली कमांडोज ने इसे पूरा करके दिखा ही दिया था। जैसे ही सब बंधक प्लेन में बैठे वह एयरपोर्ट से उड़ गए। एक लंबी उड़ान के बाद सभी सैनिक और बंधक अपने वतन वापस लौटे।

इस मिशन के साथ ही इजराइल ने बहादुरी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया

कोई नहीं कर सका नकल…

मोसाद की योजना और इजराइली कमांडोज के साहस से भरे इस आॅपरेशन की नकल आज तक कोई सुरक्षा एजेंसी नहीं कर पाई। एक बार ऐसा ही प्रयास अमेरिका में भी किया गया था पर वह विफल रहा। सन 1979 में अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान में 53 बंदियों को बचाने के लिए ऑपरेशन ईगल क्लॉ चलाया।

इस आॅपरेशन को मोसाद के प्लान के हिसाब से ही अंजाम दिया जाना था, लेकिन अमेरिकी स्पेशल फोर्स के कमांडो रेत के तूफान में फंस गए और उनका हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया जिसमें 8 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई और एक भी बंधक बरी नहीं हो पाया।

इजराइल ने जिस हिसाब से अपना मिशन पूरा किया था वह आज तक एक मिसाल बना हुआ है। उन्होंने आतंकियों को दिखाया कि आखिर क्यों उन्हें इजराइल के साथ दुश्मनी नहीं करनी चाहिए।

Thursday, 11 January 2018

भारत का पहला सबसे तेज चलने वाला सुपर कंप्यूटर 'प्रत्यूष' लॉन्च



केन्‍द्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 08 जनवरी 2018 को पुणे में भारत का सबसे तेज और पहला मल्‍टीपेटाफ्लोप्‍स सुपर कम्‍प्‍यूटर देश को समर्पित कियाI इस सुपर कम्‍प्‍यूटर को सूर्य के नाम पर प्रत्‍यूष नाम दिया गया हैI

इसे भारतीय मौसम विज्ञान संस्‍थान पुणे में लगाया गया है जिससे पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय से सटीक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान में और सुधार होगाI

अन्य जानकारी
भारत इस श्रेणी में ब्रिटेन, जापान और अमेरिका के बाद मौसम तथा जलवायु की निगरानी जैसे कार्यों के लिए एचपीसी क्षमता वाला चौथा प्रमुख देश बन गया हैI
फिलहाल के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार ब्रिटेन 20.4 पेटाफ्लॉप अंकों के साथ सर्वाधिक एचपीसी क्षमता वाला देश हैI इसके बाद जापान की एचपीसी क्षमता 20 पेटाफ्लॉप और अमेरिका की 10.7 पेटाफ्लॉप हैI
भारत इससे पूर्व एक पेटाफ्लॉप की क्षमता के साथ आठवें स्थान पर मौजूद थाI प्रत्यूष सुपर कंप्यूटर के आने के बाद भारत ने कोरिया (4.8 पेटाफ्लॉप), फ्रांस (4.4 पेटाफ्लॉप) और चीन (2.6 पेटाफ्लॉप) को भी पीछे छोड़ दिया हैI
इस सुपर कंप्यूटर की हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) क्षमता 6.8 पेटाफ्लॉप है, जो मात्र एक सेकेंड में कई अरब गणनाएं कर सकता हैI
पिछले दस वर्षों के दौरान एचपीसी की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. यह क्षमता वर्ष 2008 में 40 टेराफ्लॉप थी, जो बढ़कर वर्ष 2013-14 में एक पेटाफ्लॉप हुई और अब यह बढ़कर अपने मौजूदा स्तर तक पहुंची हैI
सुपर कंप्यूटर की 6.8 पेटाफ्लॉप एचपीसी क्षमता में से चार पेटाफ्लॉप पुणे के उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान और शेष 2.8 पेटाफ्लॉप कंप्यूटिंग क्षमता पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत नोएडा स्थित राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र में स्थापित की गई हैI

पृष्ठभूमि
कंप्यूटिंग क्षमता का लाभ अन्य संस्थानों को भी मिल सकेगाI इस तंत्र की मदद से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र के अंतर्गत कार्यरत सुनामी चेतावनी केंद्र द्वारा की जाने वाली सुनामी से जुड़ी भविष्यवाणी में भी सुधार हो सकेगाI कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि होने से मौसम, जलवायु एवं महासागरों पर केंद्रित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा दी जा रही सेवाओं में सुधार हो सकेगाI
भारतीय मौसम विभाग इस तरह की कंप्यूटिंग क्षमता की मदद से वर्ष 2005 में मुंबई की बाढ़, वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा तथा वर्ष 2015 में चेन्नई की बाढ़ जैसी जटिल मौसमी घटनाओं के बारे में सटीक पूर्वानुमान आसानी से लगा पाएगाI इसकी मदद से समुद्री तूफानों का पूर्वानुमान भी समय रहते लगाया जा सकेगाI

प्रवासी भारत दिवस: आइये जाने क्यों मनाया जाता हैं और 9 जनवरी को ही क्यों?



आज 9 जनवरी हैं! क्या आप जानते हैं कि ये दिन आज भारत में किस रूप में मनाया जाता हैं? विदेश में रह रहें भारतीयों का भारत के विकास में योगदान को पहचान देने के लिए, 2003 के बाद से हर वर्ष 9 जनवरी ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ के रूप में मनाया जाता हैं।

इस दिन के मौके पर भारत सरकार विदेश में रह रहे उन भारतीयों को समान्नित करती हैं जिन्‍होंने अपने-अपने क्षेत्र में विशेष उपलब्‍धि हासिल कर भारत का नाम विश्व पटल पर गौरवान्‍वित किया हो। देश का नाम रौशन करने वाले ऐसे लोगों को राष्‍ट्रपति के हाथों प्रवासी भारतीय सम्‍मान से नवाजा जाता है।

वर्ष 2018 में प्रवासी भारतीय दिवस सम्‍मेलन सिंगापुर में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मलेन का आयोजन विदेश मामलों की मंत्रालय कर रही हैं। सिंगापुर में प्रवासी भारतीय दिवस 2018 का आयोजन भारत के ASEAN देशों के साथ 25 वर्षों के एक मजबूत संबंधों को दर्शाता हैं। इस वर्ष का विषय हैं “Ancient Route, New Journey: Diaspora in the Dynamic ASEAN INDIA Partnership”.

प्रवासी भारीतय दिवस: क्यों मनाया जाता हैं 9 जनवरी को?
इसी दिन वर्ष 1915 में राष्ट्र पिता महात्‍मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्‍वदेश वापस लौटे थे। महात्‍मा गांधी को सबसे बड़ा प्रवासी माना जाता है जिन्‍होंने न सिर्फ भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम का नेतृत्‍व किया बल्‍कि भारतीयों के जीवन को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।

प्रवासी भारतीय दिवस का उद्देश्‍य
  • अप्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति सोच, भावना की अभिव्यक्ति, देशवासियों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए एक मंच उपलब्ध कराना।
  • विश्व के सभी देशों में अप्रवासी भारतीयों का नेटवर्क बनाना।
  • युवा पीढ़ी को अप्रवासियों से जोड़ना।
  • विदेशों में रह रहे भारतीय श्रमजीवियों की कठिनाइयां जानना त‍था उन्हें दूर करने की कोश‍िश करना।
  • भारत के प्रति अनिवासियों को आकर्षित करना।
  • निवेश के अवसर को बढ़ाना।

2003 से प्रवासी भारतीय दिवस कहाँ-कहाँ मनाया गया: पूर्ण लिस्ट

S.No Year Place
पहला 2003 नई दिल्ली
दूसरा 2004 नई दिल्ली
तीसरा 2005 मुंबई
चौथा 2006 हैदराबाद
पांचवा 2007 नई दिल्ली
छठां 2008 नई दिल्ली
सातवां 2009 चेन्नई
आठवां 2010 नई दिल्ली
नवां 2011 नई दिल्ली
दसवां 2012 जयपुर
ग्‍यारहवां 2013 केरल
बारहवां 2014 नई दिल्ली
तेरहवां 2015 गांधीनगर
चौदहवां 2016 नई दिल्ली
पंद्रहवां 2017 बेंगलुरु
सोलहवां 2018 सिंगापुर

Wednesday, 10 January 2018

Current Affairs in Hindi (भाग-80)


  • स्कूलों की सुरक्षा को लेकर इस सरकारी संस्था द्वारा दिशा-निर्देश जारी किये हैं – एनसीपीसीआर
  • वह देश जिसने अपने प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाये जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है – ईरान
  • जिस राज्य के हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया की महिलायें टेरीटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना) में काम करने के लिए पात्र हैं- दिल्ली
  • ट्रंप प्रशासन ने जिस देश की सीमा पर दीवार बनाने हेतु 18 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रस्ताव रखा है- मेक्सिको
  • केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत जिस देश की कंपनी कंगनाम के साथ 32,640 करोड़ रुपये का माइन काउंटर-मेज़र वेसल्स (एमसीएमवी) रक्षा सौदा रद्द कर दिया है- दक्षिण कोरिया
  • जिस देश के बल्लेबाज़ ऐलिस्टर कुक ऐशेज़ ने सचिन तेंदुलकर को पछाड़कर टेस्ट क्रिकेट में 12,000 रन बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए- इंग्लैंड
  • वह अंतरराष्ट्रीय गठबंधन जिसके साथ भारतीय मैत्री के 25 वर्ष पूरे हुए – आसियान
  • इसरो द्वारा बनाए गये अब तक के सबसे वजनी सेटेलाईट का नाम है – जीसैट-11
  • खेलों से सम्बंधित इस योजना का लोगो हाल ही में राज्यवर्धन सिंह राठौर ने लॉन्च किया – खेलो इंडिया
  • वह राज्य जिसमें बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया – उत्तर प्रदेश
  • केंद्र सरकार ने संकटग्रस्त बैंको को बचाने हेतु जितने कमजोर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 7,577 करोड़ रुपए का निवेश किया है- छह
  • केंद्र सरकार ने नागालैंड को और जितने महीनों के लिए 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया- छह
  • हाल ही में जिस देश ने लक्ष्यों पर बारीक नजर रखने के साथ अपनी पनडुब्बियों की मदद के लिए पानी के भीतर एक नया निगरानी तंत्र विकसित किया है- चीन
  • किस राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य के किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है- तेलंगाना सरकार
  • मेनका गांधी ने महिला सशक्तिकरण हेतु यह ऑनलाइन पोर्टल आरंभ किया – नारी
  • वह कंपनी जिसने हाल ही में उत्तर प्रदेश में देश का दूसरा सबसे बड़ा रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाया – गेल इंडिया
  • हाल ही में दक्षिण भारत के इस सुपर स्टार ने राजनीति में प्रवेश की घोषणा की – रजनीकांत
  • वह खाड़ी देश जिसने हाल ही में वैट लगाए जाने तथा पेट्रोल की कीमत में 127 प्रतिशत वृद्धि करने की घोषणा की – सऊदी अरब
  • इन्हें हाल ही में भारत का नया विदेश सचिव नियुक्त किया गया है – विजय केशव गोखले
  • भारत और जिस देश ने 01 जनवरी 2018 को एक समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया है- पाकिस्तान
  • जिस देश के क्रिकेट बोर्ड ने एक प्रशंसक से मारपीट को लेकर बल्लेबाज़ शब्बीर रहमान के घरेलू क्रिकेट खेलने पर 6 महीने का बैन और करीब 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है- बांग्लादेशी क्रिकेट बोर्ड
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने घोषणा कि वह दस जनवरी को एक साथ इतने कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में भेजेगा - 31
  • जम्मू कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद ने वर्ष 2018 के लिए इस थीम के अंतर्गत 10 'कमांडमेंट्स' जारी किए गए - 'शांतिपूर्ण जम्मू और कश्मीर के लिए पुलिस'
  • सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना के तहत 400 किलोमीटर पाइपलाइन के लिये ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) दे दिये हैं - गेल इंडिया
  • 30 दिसंबर 2017 को यह केंद्र शासित प्रदेश प्रथम ध्वजारोहण की 74वीं सालगिरह का जश्न मनायेगा - अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
  • इस देश ने औपचारिक रूप से यूनेस्को को संगठन से अपनी वापसी के बारे में अधिसूचित किया है - इजराइल
  • एक रहस्यमयी लेखिका जिन्होंने वर्णमाला आधारित (एल्फाबेट बेस्ड) शीर्षकों के साथ बेस्ट-सेलिंग उपन्यास लिखे हैं, का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया है - सू ग्रेफटन
  • इन्हें अफ्रीकी संरक्षण समूह के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है - प्रिन्स हैरी
  • इन्होंने केरल के तिरुवनंतपुरम में चल रही 61वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले के 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत लिया है - जीतू राय ने
  • इन्हें वर्ष 2017 के लिए ‘ग्लोब सॉकर’ के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार प्राप्त हुआ - क्रिस्टियानो रोनाल्डो
  • वर्तमान समय में यह देश दुनिया में पेट्रोल और डीजल का 6 वां सबसे बड़ा उपभोक्ता है - भारत

Monday, 8 January 2018

पश्चिमी मध्य रेलवे सबसे पहले ड्रोन कैमरा प्रयोग करने वाला मंडल

ट्रेनों के संचालन में सुरक्षा और कुशलता बढ़ाने के लिए रेलवे ने अपने सभी जोन/डिवीजन में ड्रोन कैमरों की तैनाती का निर्णय लिया

भारतीय रेल ने अपनी गतिविधियों विशेषकर परियोजनाओं की निगरानी, पटरियों की मरम्मत और रेलवे ढांचे पर नजर बनाए रखने के लिए ड्रोन कैमरों की तैनाती का निर्णय लिया है। रेलवे ने अपने सभी मंडलों को ऐसा करने के निर्देश जारी कर दिये हैं। रेलवे तकनीक के प्रयोग से ट्रेनों के संचालन को और सुरक्षित और बेहतर करने के लिए प्रयासरत है।

ड्रोन कैमरो के माध्यम से राहत और बचाव अभियानों की निगरानी करने में मदद मिलगी साथ ही महत्वपूर्ण कार्यों, पटरियों की स्थिति और निरीक्षण कार्यों पर नजर रखी जाएगी। इन कैमरों के जरिए नॉन इंटरलॉकिंग कार्यों के मूल्यांकन की तैयारियों, मेलों के दौरान भीड़ के प्रबंधन, स्टेशनों के हवाई सर्वेक्षण और किसी गड़बड़ी को तुरंत चिन्हित करने में मदद मिलेगी। रेलवे के ढांचे, सुरक्षा और पटरियों की मरम्मत से जुड़ी किसी भी सूचना को रियल टाइम यानि वास्तविक समय प्राप्त करने में यह कैमरे बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

इस पहल के तहत भारत में सबसे पहले ड्रोन की तैनाती पश्चिमी मध्य रेलवे ने की है जिसका मुख्यालय मध्य प्रदेश जबलपुर में है। पश्चिमी मध्य रेलवे ने पिछले सप्ताह इन कैमरों का अपने सभी तीन खंडो के निम्न स्थानों पर परीक्षण किया।

जबलपुर खंड- भिटोनी के नजदीक नर्मदा पुल
भोपाल खंड- (1)- निशातपुरा पुल (2) एचबीजे और मिसरोद के मध्य तीसरी लाइन कार्य
कोटा खंड- (1) कोटा के नजदीक चंबल पुल (2)- कोटा के पास डकनिया तलाव यार्ड
पश्चिमी मध्य रेलवे की भविष्य में बीना-कटनी तीसरी लाइन, कटनी-सिंगरौली लाइन के दोहरीकरण परियोजना की निगरानी के लिए ड्रोन को तैनात करने की योजना है।  महत्वपूर्ण पुलों के निरीक्षण, भोपाल और जबलपुर घाट प्रखंडो में मॉनसून तैयारियों से जुड़े कार्यों में भी ड्रोन की मदद ली जाएगी। इससे पहले जबलपुर यार्ड की विद्युतिकरण परियोजना की निगरानी हेतु ड्रोन कैमरों का प्रयोग किया गया था।

वर्ष 2017 में प्रमुख उपलब्धियां (इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय)


  • वर्ष 2017 के दौरान इलेक्‍ट्रॉनिक विनिर्माण में निवेश 27 प्रतिशत बढ़ा।
  • पिछले एक वर्ष के दौरान डिजिटल लेन-देन में 300 प्रतिशत से भी ज्‍यादा की वृद्धि।
  • अनूठी पहचान ‘आधार’ के दायरे में अब भारत की 99 प्रतिशत से भी अधिक की वयस्‍क आबादी आ चुकी है।
  • 197 करोड़ से भी अधिक दस्‍तावेजों को ‘डिजिलॉकर’ में रखा जा चुका है।

      भारत सरकार की प्रमुख परियोजना ‘डिजिटल इंडिया’ ने वर्ष 2017 में उल्‍लेखनीय प्रग‍ति की है। भारत सरकार के एक प्रमुख मंत्रालय और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के क्रियान्‍वयनकर्ता के रूप में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी/आईटीईएस और इलेक्‍ट्रॉनिक विनिर्माण के क्षेत्र में अनेक क्रांतिकारी पहल की हैं, जिनकी बदौलत भारत ने भी अब वैश्विक मानचित्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है। यही नहीं, इन्‍हें अब विश्‍व भर के प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालयों में केस स्‍टडी के रूप में स्‍वीकार कर लिया गया है। अनूठी पहचान ‘आधार’ के जरिए देश की 99 प्रतिशत से भी अधिक वयस्‍क आबादी को इसके दायरे में लाने के बाद भारत अब डिजिटल इंडिया के दूसरे चरण का काम शुरू करने पर विचार कर रहा है।

     वर्ष 2017 के दौरान इलेक्‍ट्रॉनिक विनिर्माण में निवेश में 27 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल निवेश राशि वर्ष 2016 के 1.43 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2017 में 1.57 लाख करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गई। यह निवेश राशि वर्ष 2014 में केवल 11,000 करोड़ रुपये ही थी। वर्ष 2017 के दौरान मोबाइल फोन का उत्‍पादन लगभग 60 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय बढ़ोतरी के साथ 17.5 करोड़ के आंकड़े को छू गया, जबकि इससे पिछले वर्ष यह आंकड़ा 11 करोड़ था। इसके फलस्‍वरूप इस क्षेत्र में 4 लाख प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रोजगारों का सृजन हुआ। वर्ष 2014-15 में मोबाइल फोन के उत्‍पादन का आंकड़ा केवल 6 करोड़ ही था। वर्ष 2017 के दौरान डिजिटल लेन-देन में 300 प्रतिशत से भी ज्‍यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्ष 2017 में भारत सरकार ने अनेक जन अनुकूल आईटी पहल की हैं, जिनकी बदौलत गवर्नेंस प्रणाली में व्‍यापक बदलावा आया है। इनमें से कुछ महत्‍वपूर्ण पहलों में भारत बीपीओ संवर्धन योजना, सेवाओं की त्‍वरित डिलीवरी एवं कारगर निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर खरीद नीति, ग्रामीण भारत में कानूनी सहायता को मुख्‍य धारा में लाने के लिए सीएससी के जरिए टेली-लॉ शामिल हैं। अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंचने और डिजिटल सुविधा उपलब्‍ध होने के मामले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई तथा डिजिटल सुविधा प्राप्‍त लोगों एवं डिजिटल सुविधा से वंचित लोगों के बीच की खाई को पाटने के लिए साझा सेवा केंद्र (सीएससी) का कारगर ढंग से इस्‍तेमाल किया गया है।

   मजबूत डिजिटल व्‍यवस्‍था की ओर भारत के अग्रसर होने की पुष्टि के लिए कुछ महत्‍वपूर्ण आंकड़ों का उल्‍लेख नीचे किया गया है :

मोबाइल फोन क्रांति : आज भारत में 121 करोड़ मोबाइल फोन उपयोगकर्ता (यूजर) हैं, जबकि वर्ष 2016 में यह संख्‍या 103 करोड़ थी।

स्‍मार्टफोन यूजर्स : स्‍मार्टफोन उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) की संख्‍या वर्ष 2016 के 30 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2017 में 40 करोड़ के स्‍तर पर पहुंच गई है।

इंटरनेट यूजर्स : इंटरनेट उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) की संख्‍या वर्ष 2016 के 40 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2017 में 50 करोड़ के स्‍तर पर जा पहुंची है।

मोबाइल फोन के निर्माण में वृद्धि
निर्मित मोबाइल फोन की संख्‍या में 60 प्रतिशत की वृद्धि। मोबाइल फोन के निर्माण का आंकड़ा वर्ष 2015-16 के 11 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2016-17 में 17.5 करोड़ के स्‍तर  पर पहुंच गया है।
105 मोबाइल/सहायक उपकरण निर्माण इकाइयां
वर्ष 2014 से लेकर अब तक 4 लाख प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रोजगारों का सृजन हुआ, जिनमें से 2.4 लाख रोजगार वर्ष 2017 में सृजित हुए।

इलेक्‍ट्रॉनिक विनिर्माण में निवेश:
इलेक्‍ट्रॉनिक विनिर्माण में निवेश       2016                         2017                        वृद्धि (प्रतिशत में)

एमएसआईपीएस: प्रस्‍तावों की संख्‍या    217                           242                           11.5 प्रतिशत

एमएसआईपीएस: निहित निवेश          1.23 लाख करोड़ रुपये 1.57 लाख करोड़ रुपये  27 प्रतिशत


डिजिटल भुगतान में वृद्धि : विमुद्रीकरण के बाद सरकार द्वारा की गई अनेक पहलों की बदौलत डिजिटल भुगतान के विभिन्‍न स्‍वरूपों में उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस रुझान की व्‍याख्‍या निम्‍नलिखित तालिका के जरिए की जा सकती है :
क्रम संख्‍या    मोड                  8  नवम्‍बर, 2016        18 अक्‍टूबर, 2017

1               भीम/यूपीआई        4000 प्रति दिन             25.6 लाख प्रति दिन

2               मोबाइल वॉलेट      22 लाख प्रति दिन          88.43 लाख प्रति दिन

3               डेबिट कार्ड          40 लाख प्रति दिन           82 लाख प्रति दिन

आधार : किसी भी समय एवं कहीं भी सत्‍यापन के लिए अनूठी पहचान और डिजिटल प्‍लेटफॉर्म के साथ भारत के नागरिकों को सशक्‍त करने के उद्देश्‍य से शुरू किया गया ‘आधार’ आज दुनिया की सबसे बड़ी बायोमीट्रिक आधारित डिजिटल पहचान प्रणाली है। वर्ष 2017 में आधार खाताधारकों की कुल संख्‍या बढ़कर 119 करोड़ के स्‍तर पर पहुंच गई, जबकि वर्ष 2016 में यह संख्‍या 104 करोड़ थी। ‘आधार’ का इस्‍तेमाल गवर्नेंस में वृद्धि करने के उद्देश्‍य से एक डिजिटल प्‍लेटफॉर्म के रूप में किया जा रहा है।

‘आधार’ की प्रगति :  

क्रम संख्‍या   मद                                                            2016 में  स्थिति      2017 में  स्थिति

1.             सृजित ‘आधार’ की कुल संख्‍या                            104 करोड़            119 करोड़

2.             ‘आधार’ के दायरे में वयस्‍क आबादी का प्रतिशत     86.6 प्रतिशत          99.9 प्रतिशत

3.            ‘आधार’ ई-केवाईसी का उपयोग करके                 सितंबर, 2016          32 करोड़
               जारी की गई कुल मोबाइल सिम सितंबर,               से क्रियान्वित


जीवन प्रमाण : यह पेंशनभोगियों एवं वरिष्‍ठ नागरिकों के बायोमीट्रिक सत्‍यापन के लिए ‘आधार’ पर आधारित एक प्‍लेटफॉर्म है। 10 नवम्‍बर, 2014 को इसे लांच करने के बाद से लेकर अब तक 150.15 लाख से भी अधिक पेंशनभोगी अब तक इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। यह संख्‍या वर्ष 2016 में 16.54 लाख थी।
⇒ डिजिटल लॉकर प्रणाली (डिजिलॉकर) : जुलाई, 2016 में लांच किया गया डि‍जिलॉकर एक ऐसा प्‍लेटफॉर्म है, जहां देश के नागरिक इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से अपने दस्‍तावेजों को सुरक्षापूर्वक स्‍टोर कर सकते हैं और इसके साथ ही अपने दस्‍तावेजों को सेवाप्रदाताओं के साथ साझा कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए संबंधित व्‍यक्ति की यथोचित अनुमति जरूरी है। अब तक 197 करोड़ से भी अधिक दस्‍तावेजों को डिजिलॉकर में रखा जा चुका है, जिससे 88 लाख से भी अधिक उपयोगकर्ताओं की पहुंच इस लॉकर तक हो गई है। पहली बार सीबीएसई की 10वीं कक्षा के परिणामों और ‘नीट’ के परिणामों को भी डिजिटल लॉकर में डिजिटल ढंग से भेजा गया।

आधार पेमेंट ब्रिज (एपीबी) के जरिए प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) : ‘आधार’ पर आधारित डीबीटी के जरिए कुल मिलाकर 2.43 लाख करोड़ रुपये की राशि 394 सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भेजी गई है, जिसके परिणामस्‍वरूप पिछले तीन वर्षों में 57,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। फर्जी दावेदारों को सफलतापूर्वक निकाल देने से यह संभव हो पाया है। इस प्रक्रिया के जरिए कुल मिलाकर 2.33 करोड़ बोगस राशन कार्डों और 3 करोड़ फर्जी एलपीजी कनेक्‍शनों की पहचान की गई है।

ई-ताल (इलेक्‍ट्रॉनिक लेन-देन एकत्रीकरण एवं विश्‍लेषण पटल) : वर्ष 2017 के दौरान विभिन्‍न ई-गवर्नेंस सेवाओं के तहत ई-लेनदेन में उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आज ई-ताल के तहत प्रति दिन 4.5 करोड़ लेन-देन दर्ज किये जाते हैं, जो वर्ष 2016 के 2.07 करोड़ लेन-देन के मुकाबले काफी अधिक है। इस तरह 3506 से भी अधिक ई-सेवाओं को एकीकृत किया गया है।

साझा सेवा केंद्र (सीएससी) : सीएससी विश्‍व का सबसे बड़ा डिजिटल सेवा डिलीवरी नेटवर्क है। ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से युक्‍त इन सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित कियोस्‍क के जरिए लोगों के घरों पर जाकर विभिन्‍न सरकारी, निजी एवं सामाजिक सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
⇒ आज लगभग 2.7 लाख सीएससी सक्रिय हैं और वे देशवासियों को विभिन्‍न डिजिटल सेवाएं जैसे कि आधार नामांकन, टिकट बुकिंग, विभिन्‍न उपक्रमों की सेवाएं और अन्‍य ई-गवर्नेंस सेवाएं मुहैया करा रहे हैं।

माईगव : यह नागरिक केन्द्रित डिजिटल गठबंधन प्‍लेटफॉर्म है, जो लोगों को सरकार से जोड़ता है और इसके साथ ही सुशासन में महत्‍वपूर्ण योगदान करता है। इसका शुभारंभ 26 जुलाई, 2014 को किया गया। प्रथम वर्ष में इसके केवल 8.74 लाख उपयोगकर्ता (यूजर) थे, जबकि आज 64 समूहों के तहत ‘माईगव’ के 50 लाख से भी ज्‍यादा सक्रिय यूजर्स हैं, जो 756 परिचर्चा समूहों के जरिए अपने विचारों का योगदान करते हैं और 701 निर्धारित कार्यों के जरिए भागीदारी करते हैं। यह संख्‍या वर्ष 2016 के 36 लाख सक्रिय यूजर्स की तुलना में अधिक है।

अन्‍य उल्‍लेखनीय उपलब्धियां :

भारत बीपीओ संवर्धन योजना : बीपीओ की 18,160 सीटों का पहले ही आवंटन हो चुका है। 13,822 और सीटों के आवंटन को जल्‍द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
जन धन खाते : 30 करोड़
जन सुरक्षा योजनाओं का पंजीकरण : 15 करोड़
मुद्रा : नौ लाख लोगों को ऋण के रूप में 4 लाख करोड़ रुपये मिले।
मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड : 5 करोड़ कार्ड बनाए गए।
ई-नाम : 50 लाख पंजीकृत किसान, 455 कृषि बाजारों को लिंक किया गया।
राष्‍ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल : 4 करोड़ छात्र पंजीकृत किए गए।
जीईएम : 4600 क्रेता और 14512 विक्रेता पंजीकृत किए गए।    

Sunday, 7 January 2018

आई.यू.सी.एन. (International Union for Conservation of Nature - IUCN)





आईयूसीएन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाला विश्व का सबसे पुराना और सबसे बड़ा संगठन है। आईयूसीएन की स्थापना 5 अक्तूबर, 1948 को फ्राँस में हुई थी। इसकी पहली बैठक में दुनिया के 18 देशों के सरकारी प्रतिनिधियों, 7 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले 107 राष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया था। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ग्लांड शहर में अवस्थित है।

लक्ष्य
  • इसका मूल लक्ष्य एक ऐसे विश्व का निर्माण करना है, जहाँ मूल्यों और प्रकृति का संरक्षण हो सके। इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये आईयूसीएन प्रकृति की अखंडता और विविधता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिये वैश्विक समाज को प्रोत्साहित करता है।
  • साथ ही, यह प्राकृतिक संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग और पारिस्थितीकीय संरचना को बेहतर बनाने की दिशा में भी सक्रिय है।

रेड लिस्ट
  • रेड लिस्ट इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1963 में की गई थी। इसके अतिरिक्त, जैव विविधता, सतत् ऊर्जा, हरित अर्थव्यवस्था आदि भी इसके महत्त्वपूर्ण कार्यक्षेत्र हैं।
  • आईयूसीएन हर चौथे वर्ष पृथ्‍वी पर उपस्थित उन सभी प्रजातियों की सूची प्रकाशित करता है जो संकट में हैं। इस सूची को ‘आईयूसीएन रेड लिस्‍ट ऑफ थ्रेटेंड स्पीसीज’ (IUCN Red List of Threatened Species) कहा जाता है।
  • गौरतलब है कि रेड लिस्ट दुनिया भर में फैले हजारों वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की जाती है, इसलिये दुनिया में जैव विविधता पर इसे सबसे प्रामाणिक और विश्‍वसनीय सूची माना जाता है।
  • आईयूसीएन द्वारा जारी की जाने वाली इसी रेड लिस्ट के अंतर्गत भारत में उड़ने वाली गिलहरी, एशियाई सिंह, काले हिरण, गेंडे, गंगा डॉल्फिन, बर्फीले तेंदुए सहित अनेक जीवों को संकटग्रस्‍त करार दिया गया है।

हन्टर शिक्षा आयोग


हन्टर शिक्षा आयोग की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में लॉर्ड रिपन (1880-1884 ई.) द्वारा 1882 ई. में की गई थी। चार्ल्स वुड के घोषणा पत्र द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए सरकार ने विलियम विलसन हन्टर की अध्यक्षता में इस आयोग की नियुक्ति की थी। इस आयोग में आठ भारतीय सदस्य भी थे। 'हन्टर शिक्षा आयोग' को प्राथमिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा की समीक्षा तक ही सीमित कर दिया गया था।

आयोग के सुझाव
'हन्टर शिक्षा आयोग' ने जो महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए, वे निम्नलिखित थे-
  • हाई स्कूल स्तर पर दो प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था हो, जिसमें एक व्यवसायिक एवं व्यापारिक शिक्षा दिये जाने पर बल दिया जाये तथा दूसरी ऐसी साहित्यिक शिक्षा दी जाये, जिससे विश्वविद्यालय में प्रवेश हेतु सहायता मिले।
  • प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के महत्व पर बल एवं स्थानीय भाषा तथा उपयोगी विषय में शिक्षा देने की व्यवस्था की जाये।
  • शिक्षा के क्षेत्र में निजी प्रयासों का स्वागत हो, लेकिन प्राथमिक शिक्षा उसके बगैर भी दी जाये।
  • प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का नियंत्रण जिला व नगर बोर्डों को सौंप दिया जाये।

शिक्षा में सुधार
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार से अनुरोध किया गया कि वह इन संस्थाओं पर अपने नियंत्रण के अधिकार को वापस ले ले। आयोग ने महिला शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण चिन्ता व्यक्त की। आयोग के सुझाव के बाद माध्यमिक एवं कॉलेज स्तर की शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आये। 1882 ई. में पंजाब एवं 1887 ई. में 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय' की स्थापना हुई। 1882 से 1902 ई. के मध्य शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार को निम्नलिखित आंकड़ों से देखा जा सकता है-
  • 1881-1882 ई. में जहाँ माध्यमिक पाठशालाओं की संख्या 3,916 थी, वहीं 1901-1902 ई. में यह बढ़कर 5,124 हो गई।
  • इन पाठशालाओं में छात्रों की संख्या, जो 1881-1882 ई. में 2,14,077 थी, 1901-1902 ई. में बढ़कर 4,90,129 हो गई।
  • व्यवसायिक एवं तकनीक कॉलेजों की संख्या, जो 1881-1882 ई. में मात्र 72 थी, 1901-1902 ई. में बढ़कर 191 हो गई।

सैडलर आयोग


सैडलर आयोग का गठन 1917 ई. में 'कलकत्ता विश्वविद्यालय' की समस्याओं के अध्ययन के लिए डॉक्टर एम.ई. सैडलर के नेतृत्व में किया गया था। इस आयोग में दो भारतीय भी, डॉक्टर आशुतोष मुखर्जी एवं डॉक्टर जियाउद्दीन अहमद, सदस्य थे। इस आयोग ने कलकत्ता विश्विद्यालय के साथ-साथ माध्यमिक स्नातकोत्तरीय शिक्षा पर भी अपना मत व्यक्त किया।

प्रमुख सुझाव
सैडलर आयोग ने 1904 ई. के 'विश्विद्यालय अधिनियम' की कड़े शब्दों में निंदा की। आयोग ने अपने सुझाव भी दिए, जो निम्नलिखित थे-
  • इंटर व उत्तर माध्यमिक परीक्षा को माध्यमिक तथा विश्वविद्यालयी शिक्षा के मध्य विभाजन रेखा मानना चाहिए।
  • स्कूली शिक्षा 12 वर्ष की होनी चाहिए।
  • ऐसी शिक्षण संस्थायें स्थापित करने का सुझाव दिया गया, जो इण्टरमीडिएट महाविद्यालय कहलायें। ये महाविद्यालय चाहे तो स्वतन्त्र रहें या फिर हाई स्कूल से सम्बद्ध हो जायें।
  • इन संस्थाओं के प्रशासन हेतु माध्यमिक तथा उत्तर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निर्माण की सिफारिश की गई।
  • इण्टरमीडिएट के बाद स्नातक स्तर की शिक्षा तीन वर्ष की होनी चाहिए।
  • आयोग ने पास तथा ऑनर्स व साधारण तथा प्रवीण्य पाठ्यक्रम शुरू करने का भी सुझाव दिया।
  • विश्वविद्यालयों को यह सुझाव भी दिया गया था, कि बहुत सख्त नियम न बनाये जायें।
  • प्राचीन सम्बद्ध विश्वविद्यालयों की जगह पूर्ण स्वायत्त आवासीय एवं एकात्मक स्वरूप के विश्वविद्यालयों की स्थापना का सुझाव दिया गया।
  • 'कलकत्ता विश्वविद्यालय' के कार्य के भार को कम करने के लिए आयोग ने ढाका में 'एकाकी विश्वविद्यालय' की स्थापना का सुझाव दिया।
  • आयोग ने ढाका एवं कलकत्ता विश्वविद्यालयों में अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए शिक्षा विभाग खोलने की सलाह दी।
  • आयोग ने व्यावसायिक कॉलेज खोलने की ओर भी सरकार का ध्यान खींचा।
  • 'सैडलर आयोग' के सुझाव पर उत्तर प्रदेश में एक 'बोर्ड ऑफ सेंकेडरी एजूकेशन' की स्थापना हुई।

विश्वविद्यालयों की स्थापना
1913 ई. की 'शिक्षा सम्बन्धी नीति' एवं 1917 ई. के 'सैडलर आयोग' के सुझावों के बाद 1916 ई. में 'मैसूर विश्वविद्यालय', 1916 ई. में 'बनारस विश्वविद्यालय', 1917 ई. में 'पटना विश्वविद्यालय', 1918 ई. में 'उस्मानिया विश्वविद्यालय', 1920 ई. में 'अलीगढ़ विश्वविद्यालय' एवं 1921 ई. में 'लखनऊ विश्वविद्यालय' की स्थापना हुई। विश्वविद्यालय के संचालन का जिम्मा प्रांतों का हो गया।

अकबर के नवरत्न



जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर भारत का महानतम मुगल शंहशाह बादशाह था। जिसने मुगल शक्ति का भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में विस्तार किया। अकबर को अकबर-ऐ-आजम, शहंशाह अकबर तथा महाबली शहंशाह के नाम से भी जाना जाता है। अकबर के दरबार में 9 विशेष दरबारी थे जिन्हें अकबर के 'नवरत्न' के नाम से भी जाना जाता है। अबुलफजल (1551-1602 ) ने अकबर के काल को कलमबद्ध किया था। उसने अकबरनामा और आइना-ए-अकबरी की भी रचना की थी। फैजी (1547-1595) अबुल फजल का भाई था। वह फारसी में कविता करता था। राजा अकबर ने उसे अपने बेटे के गणित शिक्षक के पद पर नियुक्त किया था। मिंया तानसेन अकबर के दरबार में गायक थे। वह कविता भी लिखा करते थे। राजा बीरबल (1528-1583) दरबार के विदूषक और अकबर के सलाहकार थे। राजा टोडरमल अकबर के वित्त मन्त्री थे। राजा मान सिंह आम्बेर (आमेर, जयपुर) के कच्छवाहा राजपूत राजा थे। वह अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे। अब्दुल रहीम खान-ए-खाना एक कवि थे और अकबर के संरक्षक बैरम खान के बेटे थे। हक़ीम हुमाम अकबर के सलाहकार थे। मुल्ला दो पिआजा अकबर के सलाहकार थे। अकबर के दरबार को सुशोभित करने वाले 9 रत्न निम्न थे-

बीरबल
नवरत्नों में सर्वाधिक प्रसिद्ध बीरबल का जन्म कालपी में 1528 ई. में ब्राह्मण वंश में हुआ था। बीरबल के बचपन का नाम 'महेशदास' था। यह अकबर के बहुत ही नजदीक था। उसकी छवि अकबर के दरबार में एक कुशल वक्ता, कहानीकार एवं कवि की थी। अकबर ने उसकी योग्यता से प्रभावित होकर उसे (बीरबल) कविराज एवं राजा की उपाधि प्रदान की, साथ ही 2000 का मनसब भी प्रदान किया। बीरबल पहला एवं अन्तिम हिन्दू राजा था, जिसने दीन-ए-इलाही धर्म को स्वीकार किया था। अकबर ने बीरबल को नगरकोट, कांगड़ा एवं कालिंजर में जागीरें प्रदान की थीं। 1583 ई. में बीरबल को न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी बनाया गया। 1586 ई. में युसुफजइयों के विद्रोह को दबाने के लिए गये बीरबल की हत्या कर दी गई। अबुल फजल एवं बदायूंनी के अनुसार-अकबर को सभी अमीरों से अधिक बीरबल की मृत्यु पर शोक पहुँचा था।

अबुल फजल
सूफी शेख मुबारक के पुत्र अबुल फजल का जन्म 1550 ई. में हुआ था। उसने मुगलकालीन शिक्षा एवं साहित्य में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। 20 सवारों के रूप में अपना जीवन आरम्भ करने वाले अबुल फजल ने अपने चरमोत्कर्ष पर 5000 सवार का मनसब प्राप्त किया था। वह अकबर का मुख्य सलाहकार व सचिव था। उसे इतिहास, दर्शन एवं साहित्य पर पर्याप्त जानकारी थी। अकबर के दीन-ए-इलाही धर्म का वह मुख्य पुरोहित था। उसने अकबरनामा एवं आइने अकबरी जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना की थी। 1602 ई. में सलीम (जहाँगीर) के निर्देश पर दक्षिण से आगरा की ओर आ रहे अबुल फजल की रास्ते में बुन्देला सरदार ने हत्या कर दी।

टोडरमल
उत्तर प्रदेश के एक क्षत्रिय कुल में पैदा होने वाले टोडरमल ने अपने जीवन की शुरुआत शेरशाह सूरी के जहाँ नौकरी करके की थी। 1562 ई. में अकबर की सेवा में आने के बाद 1572 ई. में उसे गुजरात का दीवान बनाया गया तथा बाद में 1582 ई. में वह प्रधानमंत्री बन गया। दीवान-ए-अशरफ के पद पर कार्य करते हुए टोडरमल ने भूमि के सम्बन्ध में जो सुधार किए, वे नि:संदेह प्रशंसनीय हैं। टोडरमल ने एक सैनिक एवं सेना नायक के रूप में भी कार्य किया। 1589 ई. में टोडरमल की मृत्यु हो गई।

तानसेन
संगीत सम्राट तानसेन का जन्म ग्वालियर में हुआ था। उसके संगीत का प्रशंसक होने के नाते अकबर ने उसे अपने नौ रत्नों में शामिल किया था। उसने कई रागों का निर्माण किया था। उनके समय में ध्रुपद गायन शैली का विकास हुआ। अकबर ने तानसेन को ‘कण्ठाभरणवाणीविलास’ की उपाधि से सम्मानित किया था। तानसेन की प्रमुख कृतियाँ थीं-मियां की टोड़ी, मियां की मल्हार, मियां की सारंग, दरबारी कान्हड़ा आदि। सम्भवत: उसने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था।

मानसिंह
आमेर के राजा भारमल के पौत्र मानसिंह ने अकबर के साम्राज्य विस्तार में बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मानसिंह से सम्बन्ध होने के बाद अकबर ने हिन्दुओं के साथ उदारता का व्यवहार करते हुए जजिया कर को समाप्त कर दिया। काबुल, बिहार, बंगाल आदि प्रदेशों पर मानसिंह ने सफल सैनिक अभियान चलाया।

अब्दुर्रहीम खानखाना
बैरम खाँ का पुत्र अब्दुर्रहीम उच्च कोटि का विद्वान् एवं कवि था। उसने तुर्की में लिखे बाबरनामा का फारसी भाषा में अनुवाद किया था। जहाँगीर अब्दुर्रहीम के व्यक्तित्व से सर्वाधिक प्रभावित था, जो उसका गुरु भी था। रहीम को गुजरात प्रदेश को जीतने के बाद अकबर ने खानखाना की उपाधि से सम्मानित किया था।

मुल्ला दो प्याजा
अरब का रहने वाला प्याज़ा हुमायूँ के समय में भारत आया था। अकबर के नौ रत्नों में उसका भी स्थान था। भोजन में उसे दो प्याज अधिक पसन्द था। इसीलिए अकबर ने उसे दो प्याजा की उपाधि प्रदान की थी।

हकीम हुमाम
यह अकबर के रसोई घर का प्रधान था।

फैजी
अबुल फजल का बड़ा भाई फैजी अकबर के दरबार में राज कवि के पद पर आसीन था। वह दीन-ए-इलाही धर्म का कट्टर समर्थक था। 1595 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।