Saturday, 2 December 2017

इतिहास सिर्फ पढ़िये नहीं, इतिहास रचिये भी





"है वही सूरमा इस जग में, जो अपनी राह बनाता है।
कोई चलता है पद चिन्हों पर, कोई पद चिन्ह बनाता है।"

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी एक कविता की ये कुछ पंक्तियाँ जो हमारे दिमाग में न जाने कब से काफी उथल पुथल मचाये हुए है। सही ही तो कहा है महाकवि दिनकर जी ने…इस पूरे संसार की अगर जनसंख्या की गणना की जाये तो अरबों खरबों की जनसंख्या होगी लेकिन अगर सफल व्यक्तियों की गणना की जाये तो कुछ मुट्ठी भर लोगों के नाम ही सामने आयेंगे।

हम पैदा होते हैं, स्कूल जाते हैं, दूसरों व्यक्तियों द्वारा रचे इतिहास को बड़े चाव से पढ़ते हैं और गर्व महसूस करते हैं कि हमारी भारत भूमि पर कितने वीर और महापुरुषों ने जन्म लिया है लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि जब आने वाली पीढ़ी आयेगी और इतिहास पढ़ेगी तो क्या आपका भी नाम उस इतिहास में होगा या नहीं ?

शायद नहीं…..क्योंकि हम सिर्फ इतिहास पढ़ते हैं….और इतिहास बनाने वाले वो और ही होते हैं जिनमें जूनून कूट-कूट कर भरा होता है, जिनको हारना किसी भी शर्त पर मंजूर नहीं होता।

जरा याद कीजिये अपने पूर्वराष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद जी का बचपन, जब छोटे थे तो खर्चा चलाने के लिए साईकिल पर अखबार बांटा करते थे। कौन जानता था कि यही बच्चा आगे चलकर मिसाइल मैन बनेगा। ऐसे लोगों के जीवन से ही इतिहास बनता है।

जरा याद कीजिये अरुणिमा सिन्हा को, जिसने एक हादसे में अपने दोनों पैरों की ताकत को गँवा दिया था लेकिन उसके अंदर जूनून था कुछ कर गुजरने का। दोनों पैरों की ताकत गँवा देने के बावजूद अरुणिमा सिन्हा ने सर्वोच्च पर्वतशिखर माउन्ट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की। ऐसे लोगों से सीखिए कि इतिहास का हिस्सा कैसे बना जाता है।

इतिहास पढ़ने वाले तो करोड़ों हैं मेरे दोस्त….आज आप पढ़ते हैं, कल कोई और पढ़ेगा लेकिन इतिहास लिखने वाला कोई कोई ही होता है।

आप भी सफल हो सकते हैं और आप भी कुछ बड़ा कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको अपना नजरिया बदलना होगा। अपने अंदर कुछ बड़ा करने का जूनून पैदा करना होगा। खुद पर आत्मविश्वास रखकर दृढ़ संकल्प लेना होगा कि हम भी कुछ बड़ा करेंगे।

याद रखिये, सफल होना उतना आसान नहीं है लेकिन इतिहास गवाह है कि प्रयास करने वालों ने हमेशा सफलता को प्राप्त किया है। कोशिश करते रहिये दोस्तों ताकि आपकी पहचान भीड़ में कहीं खो कर ना रह जाये। जिसने भी जिन्दगी के मौको का फायदा उठा लिया वह जिन्दगी कि जंग जीत जाता हैं, नहीं तो हर साल इस जिन्दगी के रेगिस्तान में लाखों लोग आते है कोई ........ तो कोई .......... बनने का सपना देखते हैं लेकिन सफल वही होते हैं जो आखरी साँस तक मेहनत करते हैं नहीं तो उनके शरीर के कंकाल को कोई नहीं पहचानता है और वह इस जिन्दगी के रेगिस्तान में खो जाते हैं।

आज आप भी हमारे साथ दृढ़ संकल्प लीजिये कि हम भी कुछ ऐसा करेंगे कि हमारी आने वाली पीढ़ी हमारा नाम भी इतिहास में पढ़े। हम भीड़ का हिस्सा नहीं हैं, वो और हैं जो सिर्फ इतिहास पढ़ते हैं, हम तो इतिहास गढ़ने वालों में से हैं।

चार एशियाई गिद्ध प्रजातियां संरक्षित सूची में शामिल


संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में ‘वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय हेतु पक्षकारों का सम्मेलन’ (CMS COP : Conference of the Parties to the Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals) एक पर्यावरण संधि है। यह प्रवासी जीवों एवं उनके आवासों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग के लिए वैश्विक मंच उपलब्ध कराता है। हाल ही में ‘सीएमएस सीओपी’ के 12वें सत्र का आयोजन मनीला, फिलीपींस में किया गया।
  • यह पहला अवसर है जब सीएमएस सीओपी का आयोजन एशिया में किया गया।
  • सम्मेलन का नारा (Slogan) था ‘उनका भविष्य हमारा भविष्य है-वन्यजीव और लोगों के लिए पोषणीय विकास’ (Their Future is Our Future-Sustainable Development for Wildlife and People)।
  • सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप एवं ओशिनिया (Oceania) से 24 देशों के 34 प्रजातियों के संरक्षण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • सम्मेलन में 91 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
  • सीएमएस सीओपी के 13वें सत्र का आयोजन वर्ष 2020 में भारत में किया जाएगा।
  • सम्मेलन में चार एशियाई गिद्ध प्रजातियों लाल-मुखी गिद्ध (Red-Headed Vulture), सफेद-पूंछ गिद्ध (White-Rumped Vulture), भारतीय गिद्ध और पतली चोंच वाले गिद्ध (Slender-Billed Vulture) -को उच्चतम संरक्षण सूची में शामिल किया गया।
  • उपर्युक्त गिद्ध प्रजातियां विषाक्तता, शिकार, बिजली के तारों के साथ टकराव और निवास स्थान में गिरावट जैसे खतरों का सामना कर रही हैं।
  • भारत समेत 121 देशों के समुद्री क्षेत्रों में पाई जाने वाली व्हेल शार्क (Whale Shark) को भी संरक्षण सूची में शामिल किया गया।
  • सम्मेलन में ब्लू शार्क (Blue Shark) और गिटारफिश (Guitarfish) के संरक्षण के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
  • आसियान (Asean) क्षेत्र के भीतर संरक्षित क्षेत्र नेटवर्कों के विकास और प्रबंधन के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
  • मध्य एशिया की दो दुर्लभ प्रजातियों-प्रजेवाल्सकी के घोड़े (Przewalski’s Horse) और गोबी भालू (Gobi Bear)- के संरक्षण हेतु मंगोलिया के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
  • सम्मेलन में कैस्पियन सील (Caspian Seal) के संरक्षण की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • उल्लेखनीय है कि कैस्पियन सील विश्व के सबसे बड़े अंतःस्थलीय (Inland) समुद्र कैस्पियन सागर में पाया जाने वाला एकमात्र समुद्री स्तनपायी है।
  • सम्मेलन में शेर, चिंपैंजी, जिराफ एवं तेंदुए की प्रजातियों को अतिरिक्त संरक्षण सूची से बाहर कर दिया गया।
  • सम्मेलन में चिंकारा (Indian Gazelle) के अतिरिक्त संरक्षण के प्रस्ताव को वापस ले लिया गया।

"स्त्री" क्या है ........


जब भगवान स्त्री की रचना कर रहे थे, तब उन्हें काफी समय लग गया। आज छठा दिन था और स्त्री की रचना अभी भी अधुरी थी।  इसिलए देवदुत ने पूछा:- 
भगवन्, आप इसमें इतना समय क्यों ले रहे हो।
भगवान ने जवाब दिया:- क्या तूने इसके सारे गुनधर्म (Specifications) देखे हैं, जो इसकी रचना के लिए जरूरी है। यह हर प्रकार की परिस्थितियों को संभाल सकती है। यह एकसाथ अपने सभी बच्चों को संभाल सकती है एवं खुश रख सकती है। यह अपने प्यार से घुटनों की खरोंच से लेकर टूटे हुये दिल के घाव भी भर सकती है। यह सब सिर्फ अपने दो हाथों से कर सकती है। इसमें सबसे बड़ा "गुणधर्म" यह है कि बीमार होने पर भी अपना ख्याल खुद रख सकती है एवं 18 घंटे काम भी कर सकती है।
देवदूत चकित रह गया और आश्चर्य से पूछा:-
भगवान ! क्या यह सब दो हाथों से कर पाना संभव है।
भगवान ने कहा यह स्टैंडर्ड रचना है (यह गुणधर्म सभी में है) देवदूत ने नजदीक जाकर स्त्री को हाथ लगाया और कहा भगवान यह तो बहुत सॉफ्ट है ।
भगवान ने कहा हाँ यह बहुत ही सॉफ्ट (Soft) है, मगर इसे बहुत स्ट्रोंग (Strong) बनाया है। इसमें हर परिस्थितियों का संभाल ने की ताकत है।
देवदूत ने पूछा क्या यह सोच भी सकती है? 
भगवान ने कहा यह सोच भी सकती है। और मजबूत हो कर मुकाबला भी कर सकती है। 
देवदूत ने नजदीक जाकर स्त्री के गालों को हाथ लगाया और बोला भगवान ये तो गीले हैं। लगता है इसमें से लिकेज हो रहा है।
भगवान बोले : यह लीकेज नहीं है। यह इसके आँसू हैं।
देवदूत : आँसू किस लिए? 
भगवान बोले : यह भी इसकी ताकत हैं। आँसू इसको फरीयाद करने एवं प्यार जताने एवं अपना अकेलापन दुर करने का तरीका है।
देवदूत : भगवान आपकी रचना अदभुत है। आपने सबकुछ सोच कर बनाया है, आप महान है।
भगवान बोले : यह स्त्री रूपी रचना अदभुत है। यही हर पुरुष की ताकत है, जो उसे प्रोत्साहित करती है। वह सभी को खुश देखकर खुश रहती है। हर परिस्थिति में हंसती रहती है। उसे जो चाहिए वह लड़ कर भी ले सकती है। उसके प्यार में कोइ शर्त नहीं है। उसका दिल टूट जाता है जब अपने ही उसे धोखा दे देते है। मगर हर परिस्थितियों से समझोता करना भी जानती है।
देवदुत : भगवान आपकी रचना संपूर्ण है।
भगवान बोले ना, अभी इसमें एक त्रुटि है "यह अपनी "महत्ता" भूल जाती है"।
हाँ यह अपनी महत्ता भूल जाती है।

Friday, 1 December 2017

Current Affairs in Hindi (भाग-76)


  • इस प्रदेश की सरकार ने आगामी दिसम्बर और जनवरी माह में पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है - छत्तीसगढ़
  • आईएफएफआई 2017 में इस फिल्म को सम्मानित गोल्डन पीकॉक पुरस्कार प्रदान किया गया है - 120 बिट्स पर मिनट
  • इस राज्य के गुरुग्राम में कोरिया की समृद्ध कला, संस्कृति और विरासत पर दो दिवसीय ‘कोरिया संस्कृति और पर्यटन महोत्सव’ का उद्घाटन किया गया - हरियाणा
  • इस देश की नेता ऑंन्ग सैन सू की से देश में रोहिंग्या शरणार्थी संकट संभालने में उनकी "निष्क्रियता" और हिंसा को नजरन्दाज करने के लिए फ्रीडम ऑफ ऑक्सफोर्ड पुरस्कार को वापस लिया गया है - म्यांमार
  • भारत सरकार द्वारा इस देश के परिवहन मंत्रालय को 2.87 मिलियन डॉलर (करीब 18.5 करोड़ रूपए) की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी - अफगानिस्तान
  • आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में चेतेश्वर पुजारा की वर्तमान रैंकिंग यह है - दूसरी
  • इंटरनेशनल ओलंपिक समिति (आईओसी) द्वारा एंटी-डोपिंग के नियमों के उल्लंघन पर इस देश के पांच और प्रतियोगियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है - रूसकेंद्र सरकार ने देश के इतने सबसे पिछड़े जिलों में 'प्रधान मंत्री महिला शक्ति केंद्र' की स्थापना को मंजूरी दी है - 115
  • सरकार ने प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य इतने डॉलर प्रति टन तय कर दिया है - 850 डॉलर
  • आईएफएफआई ने इस अवॉर्ड के लिए नौ फिल्मों को मनोनीत किया है - आईसीएफटी यूनेस्को गांधी
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और यह संस्थान सुनामी तैयारियों पर बहु-राज्य मेगा मॉक अभ्यास आयोजित करेगा - भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र
  • पूर्वोत्तर ग्रामीण आजीविका परियोजना इस चार राज्यों के लिए शुरू की गयी है - मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा
  • निर्वाचन आयोग ने एकीकृत एआईएडीएमके को यह चुनाव चिह्न आवंटित किया है - दो पत्ती
  • इस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने योनो (You Need Only One) नामक एक संयुक्त एकीकृत ऐप शुरू किया है - भारतीय स्टेट बैंक
  • केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल में भारतीय वन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 की घोषणा की है जिससे कि गैर वन क्षेत्रों में उगाए गए इस पेड़ को वृक्ष की परिभाषा के दायरे में लाए जाने से छूट मिलेगी - बांस
  • इस संस्थान द्वारा "पूर्वोत्तर ग्रामीण आजीविका परियोजना" का समर्थन किया जा रहा है - विश्व बैंक
  • प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मोबाइल एप्लिकेशन को शुरू किया है, जो कि नागरिक सेवाओं हेतु सरकार के लिए एक एकीकृत मंच है - उमंग (unified mobile app for new age)
  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इस वित्त आयोग की स्थापना को मंजूरी दे दी है - 15वें
  • हाल ही में राष्ट्रपति ने 1500 करोड़ की जोहार योजना इस राज्य में शुरू की है - झारखंड
  • पर्यावरण संगठन जर्मन वॉच द्वारा जारी किए गए जलवायु परिवर्तन परफॉर्मेंस इंडेक्स (CCPI) 2018 में भारत 56 देशों में से इस स्थान पर है - 14वें
  • इस संस्थान को टाइम्स हायर एजुकेशन द्वारा प्रकाशित ग्लोबल यूनिवर्सिटी एम्प्लॉबिलिटी रैंकिंग 2017 में शीर्ष 150 विश्वविद्यालयों में से 29वें स्थान पर रखा गया है - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी)
  • भारत के राष्ट्रपति ने इस शहर में एससी और एसटी विधायक और संसद सदस्यों के फोरम द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय अम्बेडकर निर्वाचिका सभा का उद्घाटन किया - नई दिल्ली
  • महिला और बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने इस शहर में पंचायती राज संस्थानों और मास्टर प्रशिक्षकों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (ईडब्ल्यूआर) के लिए एक गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम लॉन्च किया - नई दिल्ली
  • प्रगति मैदान में आयोजित 37वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2017 में इस मंत्रालय को अपने रचनात्मक और सूचनात्मक प्रदर्शन के लिए कांस्य पदक से सम्मानित किया गया है - स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
  • इस स्कीम के तहत, केंद्र सरकार ने रेडीमेड कपड़ों के निर्यात के लिए प्रोत्साहन दरों को दोगुना कर दिया है और 2% से 4% तक इसे बढ़ा दिया है - भारत से मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स स्कीम (MEIS)
  • इस राज्य के कोरापुट जिले के वार्षिक सांस्कृतिक त्योहार ‘परब-2017’ के तहत आदिवासी कला और संस्कृति का प्रदर्शन शुरू हुआ - उड़ीसा
  • बीएसई लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली बीएसई इंस्टीट्यूट लिमिटेड (बीआईएल) ने इस शहर में भारत की पहली अत्याधुनिक ब्लॉक चेन लैब स्थापित करने के लिए DLT लैब्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं - मुंबई
  • इन्हें हाल ही में राष्ट्रपति के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है – विक्रम सिंह
  • इन्हें हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया – सत्य गोपाल
  • जिस देश के एथलीटों ने दिल्ली हाफ मैराथन के महिला एवं पुरुष दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीता है- इथियोपिया
  • अफगानिस्तान एशिया कप अंडर-19 फाइनल मुकाबले में जिस देश को हराकर पहली बार चैंपियन बना है- पाकिस्तान
  • विश्व कैंसर शिखर सम्मेलन हाल ही में जिस शहर में शुरू हुआ है- मेक्सिको सिटी
  • भारत के जिस बल्लेबाज ने हाल ही में किसी टेस्ट मैच में सभी पांचों दिन बल्लेबाजी करने वाला तीसरा भारतीय बल्लेबाज बन गया है- चेतेश्वर पुजारा
  • विश्व के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट जिस देश की क्रिकेट टीम को कोचिंग देने जा रहे हैं- ऑस्ट्रेलिया
  • जिस राज्य में वैज्ञानिकों ने नए परजीवी पौधे का पता लगाया है- नागालैंड
  • विश्व मत्स्य दिवस जिस तारीख को मनाया जाता है- 21 नवंबर
  • विश्व प्रतिभा रैंकिंग में भारत जितने स्थान पर पहुंचा- 51वें
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम पर अंतर्राष्ट्रीरय सेमिनार का आयोजन स्थल – नई दिल्ली
  • भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह में प्रदर्शित फिल्म - बीआँड द क्लाउड (माजिद माजिदी)
  • वह भारतीय न्यायधीश जिन्हें हाल ही में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का न्यायाधीश चुना गया – दलवीर भंडारी
  • भारत और म्यांमार के मध्य पहले संयुक्त युद्धाभ्यास का आयोजन स्थल – मेघालय
  • ‘सोलर पार्क परियोजना के लिए साझा बुनियादी ढांचा’ हेतु 98 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण के लिए एक गारंटी समझौते पर भारत ने इस अंतरराष्ट्रीय संस्था के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये – विश्व बैंक

Thursday, 30 November 2017

मन या बुद्धि – कौन सही है?


एक समय एक आश्रम में एक प्रतियोगिता हुई जिसमें जीतने वाले को आश्रम के सर्वश्रेष्‍ठ पुरूष्‍कार से सम्‍मानित किया जाना था। आश्रम के सभी शिष्‍यों को गुरूदेव ने आश्रम के पांडाल में एकत्रित होने के लिए कहा। जब सभी शिष्‍य पांडाल में एकत्रित हो गए तो गुरूजी के एक सेवक द्वारा उनके सामने एक ऐसा रथ लाकर खड़ा कर दिया, जिसमें दो घोड़े बंधे हुए थे अौर रथ का मुँह उत्तर दिशा की ओर था जबकि दोनों घोड़े एक दूसरे की विपरीत दिशा में देख रहे थे।

जब सेवक रथ खड़ा करके चला गया तो गुरूजी ने शिष्‍यों से पूछा कि- शिष्‍यों तुम्‍हारे सामने एक रथ खडा है, जिसमें दो घोड़े बंधे हैं, लेकिन जैसाकि तुम सभी देख सकते हो, कि दोनों घोड़ों  में से एक का मुँह पूर्व की आेर है जबकि दूसरे का पश्चिम की ओर। तुम्‍हें बताना ये है कि अगर सारथी रथ को आगे बढ़ाए, तो रथ किस दिशा में जाएगा?

जब गुरूजी ने अपनी बात पूरी की तो एक शिष्‍य ने  प्रत्युत्तर  दिया कि- रथ पूर्व दिशा की ओर जायेगा।

गुरूदेव ने पूछा- कैसे?

तो शिष्‍य ने इसका उत्तर दिया- पूर्व दिशा का घोड़ा अधिक बलशाली है।

गुरूदेव ने अन्‍य शिष्‍यों से पूछा- कोई और इस प्रश्‍न का उत्तर देना चाहेगा?

ताे एक दूसरे शिष्‍य ने कहा- नहीं  गुरूदेव  घोड़ा पूर्व दिशा की आेर नही बल्कि पश्चिम दिशा की ओर जाएगा क्‍योंकि रथ का झुकाव पश्चिम दिशा की ओर है।

तभी एक तीसरे शिष्‍य ने कहा कि- घोड़ा न पूर्व दिशा की ओर जाएगा, न ही पश्चिम दिशा कि ओर, वह दक्षिण की ओर जाएगा।

तीसरे शिष्‍य का उत्तर सुन कर गुरूदेव व सभी अन्‍य शिष्‍यों को बहुत आश्‍यर्च हुआ। सो गुरूजी ने उससे पूछा कि- तुम यह कैसे कह सकते हो?

तीसरे शिष्‍य ने उत्तर दिया कि- गुरूदेव  ये घोड़े अपनी मर्जी के मालिक हैं। इसलिए इनका जिस ओर मन करेगा, ये उस ओर आगे बढ़ेंगे।

तीसरे शिष्‍य का ये उत्तर सुन कर गुरूदेव सहित वहाँ उपस्थित सभी शिष्‍य हंस पड़े लेकिन गुरूजी किसी भी शिष्‍य के जवाब से संतुष्‍ट दिखाई नहीं दिए। इसलिए  उन्‍होंने फिर से पूछा कि- कोई और इस प्रश्‍न का उत्तर देना चाहेगा?

तभी वहाँ बैठे एक शिष्‍य ने पूछा- गुरूदेव  रथ में कितने सारथी है?

गुरूदेव ने उत्तर दिया कि- रथ में केवल एक ही सारथी है।

शिष्‍य ने कहा कि- गुरूदेव  रथ मे केवल एक ही सारथी है तो दोनों घोड़े उसी दिशा में जाऐंगे जिस ओर सारथी उनको लेकर जायेगा क्‍योंकि दोनों घोड़े, सारथी के अधीन हैं, न कि सारथी घोड़ों के।

इस लघुकथा से हमें ये शिक्षा मिलती है कि हमारा मन और बुद्धि, दो अलग दिशा में भागने वाले घोड़ों के समान हैं। मन कहता है कि हमें किसी अमुक कार्य को करना चाहिए जबकि बुद्धि उसी कार्य को करने से रोक देता है। इस स्थिति में सही निर्णय केवल तभी लिया जा सकता है जबकि आप एक सारथी की तरह दोनों को अपने नियंत्रण में रखें न कि स्‍वयं इन दोनों में से किसी एक के नियंत्रण में होकर निर्णय लें।

मन हमेंशा सरल रास्‍ता चुनते हुए निर्णय लेने हेतु अपना पक्ष रखता है जबकि बुद्धि हमेंशा गुण-दोष का विचार करते हुए निर्णय लेने हेतु अपना पक्ष रखता है। यानी मन और बुद्धि, किसी विषय पर निर्णय नहीं लेते, बल्कि उपयुक्‍त निर्णय लेने हेतु केवल अपना पक्ष रखते हैं और निर्णय हमेंशा हम लेते हैं। लेकिन हमारे निर्णय तब गलत होते हैं, जब हम या तो केवल मन की सुनते हैं या फिर केवल बुद्धि की जबकि निर्णय हमेंशा मन और बुद्धि दोनों की सुनने के बाद विवेक के आधार पर लेना चाहिए।

अक्‍सर लोग मन और बुद्धि के बीच अन्‍तर नहीं कर पाते। यानी ये नहीं समझ पाते कि उनके द्वारा लिया जा रहा निर्णय मन से प्रेरित है अथवा बुद्धि से। इसलिए मन व बुद्धि के बीच अन्‍तर समझने के लिए हम एक उदाहरण देखते हैं।

मान लीजिए कि आप किसी अनजान शहर में हैं और आपको रेलवे स्‍टेशन जाना है। आप किसी रास्‍ते पर चल रहे हैं। चलते-चलते वह रास्‍ता Left व Right दो रास्‍तों में बंट जाता है। अब यदि आप बिना ये जाने हुए कि आप सही रास्‍ते पर जा रहे हैं या नहीं, Left या Right किसी एक रास्‍ते पर चलना शुरू कर देते हैं, क्‍योंकि पहली नजर में वह रास्‍ता आपको अच्‍छा, सरल या सही लगता है, तो आप द्वारा लिया गया ये निर्णय मन से प्रेरि‍त है। जबकि इस दो-राहे पर यदि आप रूक जाते हैं और किसी अाने-जाने वाले से रेलवे स्‍टेशन का सही रास्‍ता पूछने के बाद ही किसी एक रास्‍ते पर आगे बढते हैं, तो आप द्वारा लिया गया ये निर्णय आपकी बुद्धि से प्रेरित है।

क्‍योंकि मन हमेंशा सरल, सुखद व सुविधायुक्‍त रास्‍ता खोजता है, बिना ये सोंचे-समझे कि उस रास्‍ते पर चलने के क्‍या अच्‍छे या बुरे परिणाम हो सकते हैं। जबकि बुद्धि हमेंशा तर्क के आधार पर सही-गलत का अन्‍दाजा लगाने के बाद ही किसी रास्‍ते पर चलने हेतु प्रेरित करती है, फिर भले ही वह रास्‍ता कठिन ही क्‍यों न हो।

सरल शब्‍दों में कहें तो यदि आपका निर्णय तुक्‍के पर आधारित है, तो आपका निर्णय मन से प्रेरित है। जबकि यदि आपका निर्णय निश्चित तथ्‍यों पर आधारित है, तो आपका निर्णय बुद्धि से प्रेरित है।

Tuesday, 28 November 2017

आईएफएफआई-2017 (भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह-2017) में ‘120 बिट्स पर मिनट’ को स्वर्ण मयूर ट्रॉफी


रोबिन केम्पिलो द्वारा निर्देशित फ्रांस की फिल्म ‘120 बिट्स पर मिनट’ ने आईएफएफआई 2017 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हासिल किया। इस पुरस्कार में स्वर्ण मयूर ट्रॉफी, प्रमाण पत्र एवं 40,00,000 रुपये का नकद पुरस्कार, जिसे निर्देशक एवं निर्माता में समान रूप से विभाजित किया गया, शामिल हैं। नहुएल पेरेज बिक्सायार्ट को ‘120 बिट्स पर मिनट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला और उन्हें रजत मयूर प्रदान किया गया। ‘120 बिट्स पर मिनट’ 1990 के दशक में पेरिस में कार्यकर्ताओं के एक समूह की कहानी है, जो एचआईवी/एड्स मरीजों के पक्ष में संघर्ष करने के दौरान सरकारी एजेंसियों एवं फॉर्मास्यूटिकल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों का मुकाबला करते हैं।

संघर्ष और वकालत


पिकासो (Picasso) स्पेन में जन्मे एक अति प्रसिद्ध चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग्स दुनिया भर में करोड़ों और अरबों रुपयों में बिका करती थीं।

एक दिन रास्ते से गुजरते समय एक महिला की नजर पिकासो पर पड़ी और संयोग से उस महिला ने उन्हें पहचान लिया। वह दौड़ी हुई उनके पास आयी और बोली, 'सर, मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूँ। आपकी पेंटिंग्स मुझे बहुत ज्यादा पसंद हैं। क्या आप मेरे लिए भी एक पेंटिंग बनायेंगे?'
पिकासो हँसते हुए बोले, 'मैं यहाँ खाली हाथ हूँ। मेरे पास कुछ भी नहीं है। मैं फिर कभी आपके लिए एक पेंटिंग बना दूंगा।'
लेकिन उस महिला ने भी जिद पकड़ ली, 'मुझे अभी एक पेंटिंग बना दीजिये, बाद में पता नहीं मैं आपसे मिल पाऊँगी या नहीं।'
पिकासो ने जेब से एक छोटा सा कागज निकाला और अपने पेन से उसपर कुछ बनाने लगे। करीब 10 मिनट के अंदर पिकासो ने पेंटिंग बनायीं और कहा, 'यह लो, यह मिलियन डॉलर की पेंटिंग है।'
महिला को बड़ा अजीब लगा कि पिकासो ने बस 10 मिनट में जल्दी से एक काम चलाऊ पेंटिंग बना दी है और बोल रहे हैं कि मिलियन डॉलर की पेंटिग है। उसने वह पेंटिंग ली और बिना कुछ बोले अपने घर आ गयी।
उसे लगा पिकासो उसको पागल बना रहा है। वह बाजार गयी और उस पेंटिंग की कीमत पता की। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि वह पेंटिंग वास्तव में मिलियन डॉलर की थी।
वह भागी-भागी एक बार फिर पिकासो के पास आयी और बोली, 'सर आपने बिलकुल सही कहा था। यह तो मिलियन डॉलर की ही पेंटिंग है।'
पिकासो ने हँसते हुए कहा,'मैंने तो आपसे पहले ही कहा था।'
वह महिला बोली, 'सर, आप मुझे अपनी स्टूडेंट बना लीजिये और मुझे भी पेंटिंग बनानी सिखा दीजिये। जैसे आपने 10 मिनट में मिलियन डॉलर की पेंटिंग बना दी, वैसे ही मैं भी 10 मिनट में न सही, 10 घंटे में ही अच्छी पेंटिंग बना सकूँ, मुझे ऐसा बना दीजिये।'
पिकासो ने हँसते हुए कहा, 'यह पेंटिंग, जो मैंने 10 मिनट में बनायी है, इसे सीखने में मुझे 30 साल का समय लगा है। मैंने अपने जीवन के 30 साल सीखने में दिए हैं। तुम भी दो, सीख जाओगी। वह महिला अवाक् और निःशब्द होकर पिकासो को देखती रह गयी।

भारत का इतिहास एवं संस्कृति (GK Q & A, भाग-116)

  • इलाहबाद स्थित अषोक स्तम्भ किस साम्राज्य के सम्बन्ध में सूचना देता है - समुन्द्रगुप्त
  • मौर्यकाल में षिक्षा का सर्वाधिक प्रसिद्ध केन्द्र था - तक्षषिला
  • ‘बीजक’ किसके द्वारा रचित है - कबीर
  • किस चित्रकार को  ‘षीरी कलम’ की उपाधि अकबर द्वारा दी गई थी - अब्दुस समद
  • भारतीय राष्ट्रिय काँग्रेस क्षरा किसकी असफलता के बाद भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ किया गया - क्रिप्स मिशन
  • हिन्दू और मुसलमानों की एकता स्थापित करने के सम्बन्ध में ऐसा अवसर अगले 100 वर्षों तक नहीं मिलेगा-खिलाफत आन्दोलन के सम्बन्ध में किसने सोचा था - गाँधी
  • भारतीय संगीत का मूल किस वेद को कहा जाता है - सामवेद को
  • सैधव सभ्यता के किस स्थल की प्रमुख उपलब्धि जहाजों को गोदी है - लोथल की
  • बौद्ध धर्म में भिक्षुओं का कल्याण मित्र किसे कहा जाता है - अष्टागिंक मार्ग को
  • निकैया एवं बुकाफेला नामक नगरों की स्थापना किसके द्वारा की गई - सिकन्दर महान्
  • किस गुप्त शासक को कविराज की उपाधि से विभूषित किया गया है - समुन्द्रगुप्त
  • ‘दुनिया का खान’ दिल्ली सल्तनत के किस सुल्तान को कहा गया - मुहम्मद बिन तुगलक
  • अकबर ने तीर्थ-यात्रा कर को कब समाप्त किया - 1563 ईस्वी में
  • 1612 इस्वी में किस मुगल बादषाह ने पहली बार रक्षाबंधन का त्योहार मनाया - जहाँगीर ने
  • कर्नल टाॅड ने ‘राठौड़ों का यूलिसीज’ किसे कहा है - वीर राठौड़ दुर्गादास को
  • 1893 ईस्वी में न्यूयार्क में स्वामी विवेकानन्द द्वारा दिए गए भाषण के बारे में किस समाचार-पत्र ने लिखा, ‘उनको सुनने के बाद हम यह अनुभव करते है कि ऐसे ज्ञान सम्पन्न देष में अपने धर्म प्रचारक भेजना कितना मूर्खतापूर्ण है। - न्यूयार्क हेराल्ड
  • किसने जलियावाला बाग हत्याकांड के बाद अपनी नाइट की उपाधि ब्रिटिष शासन को वापस कर दी - रविन्द्र नाथ टैगोर ने
  • भारतीय चित्रकला का पावन तीर्थ अजन्ता को कहा जाता है, जहां कुल 30 गुफाऐं है, अजन्ता   कहाँ  स्थित है - औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
  • वृहदारण्यक उपनिषद् अन्य उपनिषदों में सबसे विषाल है, इसके प्रधान प्रवक्ता कौन है - महर्षि याज्ञवल्क्य
  • महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन-काल में सर्वाधिक उपदेष कहां दिए - श्रावस्ती (कोषल प्रदेष की राजधानी)
  • महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद जैन संघ का प्रथम अध्यक्ष कौन बना - सुधर्मन
  • कंदरिया महादेव का मन्दिर कहां स्थित है - खजुराहो (मध्यप्रदेश)
  • वासुदेव कृष्ण को किस जैन तीर्थंकर के समकालीन बताया गया है - अरिष्टनेमि के
  • बंगाल में सहजिया सम्प्रदाय की स्थापना किसने की - कवि चण्डीदास ने
  • मोहिनीअट्टम नृत्य का स्वरूप एकल होता है, यह नृत्य किस राज्य से संबंधित है - केरल से
  • भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण कहां स्थित है - कोलकाता में
  • प्रेस ट्रस्ट आॅफ इंडिया भारत के सबसे बड़ी समाचार एजेन्सी है जिसकी स्थाना की गई - 1947 में
  • अलाई दरवाजा दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलती के द्वारा बनवाया गया, जिसके बारे में किस कला मर्मज्ञ ने कहा कि ‘अलाई दरवाजा इस्लामी स्थापत्य के खजाने का सबसे सुन्दर हीरा है - मार्शल

भारत में ऊर्जा के संसाधन (GK Q & A, भाग-115)


  • N.T.P.C. का पूरा नाम क्या है— नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन 
  • N.T.P.C. की स्थापना कब हुई— 1975 ई. 
  • N.H.P.C. का पूरा नाम क्या है— नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रो पावर कॉर्पोरेशन 
  • N.H.P.C. की स्थापना कब हुई— जून 1976 ई. 
  • A.E.C. का पूरा नाम क्या है— एटॉमिक एनर्जी कमीशन (परमाणु ऊर्जा आयोग)
  • A.E.C. का स्थापना कब हुई— 1948 ई. 
  • D.A.C. का पूरा नाम क्या है— डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (परमाणु ऊर्जा विभाग)
  • D.A.C. की स्थापना कब हुई— 1954 ई. 
  • कौन-सा स्त्रोत गैर परंपरागत स्त्रोत की श्रेणी में आता है— बायोगैस 
  • किस प्रकार की ऊर्जा से वायु प्रदूषण सबसे कम होता है— सौर ऊर्जा 
  • भारत में सबसे अधिक ऊर्जा किससे प्राप्त की जाती है— ताप विद्युत 
  • भारत में पहली लहर ऊर्जा परियोजना कहाँ स्थापित की गई— विझिनजाम (त्रिवेंद्रम के पास)
  • काकरापार परमाणु शक्ति केन्द्र किस राज्य में है— गुजरात 
  • भारत का प्रथम परमाणु रिएक्टर कौन-सा है और यह कब शुरू हुआ— अप्सरा, 1956 ई. 
  • शून्य ऊर्जा एक्सपैरीमेंटल थर्मल रिएक्टर कौन-सा है— जरलीना 
  • भारत का पहला न्यूट्रॉन रिएक्टर कौन-सा है— कामिनी (1988 ई.)
  • भारत में परमाणु ऊर्जा का उत्पादन कब आरम्भ हुआ— 1969 ई. 
  • भारत में परमाणु ऊर्जा का शुभारम्भ कहाँ से हुआ— तारापुर 
  • तारापुर परमाणु केंद्र कहाँ है— महाराष्ट्र 
  • रावतभाटा परमाणु केंद्र कहाँ है— राजस्थान 
  • कैगा परमाणु शक्ति केंद्र किस राज्य में है— कर्नाटक 
  • भारत में वर्तमान में कितने परमाणु रिएक्टर कार्यरत हैं— 20 
  • भारत के परमाणु रिएक्टरों में कितने मेगावाट विद्युत पैदा होती है— 4780 
  • भारत में उत्पादित परमाणु ऊर्जा देश में कुल उत्पादित विद्युत का कितने % है— 3% 
  • भारत में भूतापीय ऊर्जा का संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया है— हिमाचल प्रदेश 
  • चूखा जलविद्युत परियोजना किन देशों की संयुक्त परियोजना है— भारत व भूटान 
  • भारत की प्रथम जलविद्युत परियोजना कौन-सी है व किस नदी पर है— शिवसमुद्रम परियोजना, कावेरी नदी पर 
  • भारत व एशिया की एकमात्र अधोभौमिक संचय जलविद्युत परियोजना किस राज्य में है— हिमाचल प्रदेश 
  • भारत में विद्युत आपूर्ति सर्वप्रथम कहाँ हुई— दार्जिलिंग में 
  • पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत का कौन-सा स्थान है— पांचवाँ 
  • भारत में वाणिज्यिक ऊर्जा की कितने % पूर्ति कोयले से होती है— 67% 
  • भारत में ओबरा शहर क्यों प्रसिद्ध है— थर्मल पावर प्लांट के लिए 
  • भारत में भूतापीय ऊर्जा संयंत्र कहाँ है— हिमालय प्रदेश के मणिकर्ण में 
  • देश के कुल विद्युत उत्पादन में ताप विद्युत का योगदान कितना है— 70% 
  • तालचेर एवं इन्नौर किसके लिए विख्यात है— तापीय शक्ति संयंत्रों हेतु 
  • मुंद्रा अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना कहाँ स्थित है— गुजरात 
  • N.T.P.C. सिंगरौली कहाँ स्थित है— उत्तर प्रदेश 
  • लोकटक शक्ति परियोजना किस राज्य में स्थित है— मणिपुर 
  • टनकपुर परियोजना किस राज्य में है— उत्तराखंड में 
  • उत्तराखंड राज्य पूर्णतया किस प्रकार की ऊर्जा पर निर्भर है— जलविद्युत ऊर्जा पर 
  • B.A.R.C. का पूरा नाम क्या है— भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर 
  • B.A.R.C. का मुख्यालय कहाँ है— ट्रॉम्बे (महाराष्ट्र)
  • परमाणु शोध के इंदिरा गाँधी केंद्र की स्थापना कब व कहाँ की गई— 1971 ई., कलपक्कम् (चेन्नई) 
  • भारत विश्व का कौन-से नंबर का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादक देश है और यह कुल ऊर्जा का कितना उत्पादन करता है— 11 वां और 2.4% 
  • विश्व के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में भारत का स्थान कौन-सा है— छठा 
  • भारत विश्व की कुल ऊर्जा का कितने % उपभोग करता है— 3.7% 
  • भारत में ऊर्जा की विकास दर कितने % प्रतिवर्ष है— 3.6%
  • कोयला उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में अमेरिका और चीन के बाद कौन-सा है— तीसरा 
  • भारत में कोयले के उत्पादन का कितने % से भी अधिक गैर-कोककारी कोयले का उत्पादन होता है— 90% 
  • कोयले की सर्वाधिक खपत किसमें होती है— विद्युत उत्पादन में 
  • भारत कोयले का कुछ निर्यात अपने किन समीपवर्ती देशों को करता है— म्यांमार, श्रीलंका, पाकिस्तान व सिंगापुर 
  • भारत अच्छे किस्म का कुकिंग कोयला किस देश से आयात करता है— ऑस्ट्रेलिया 
  • भारत के कुल सिंचित भंडार का कितने % कोयला गोंडवाना काल का है— 96% 
  • भारत के कुल उत्पादन का लगभग कितने % भाग गोंडवाना काल के कोयले से प्राप्त होता है— 98% 
  • भारत में मिलने वाला गोंडवाना काल का कोयला मुख्यतः किस प्रकार का है— बिटुमिनस 
  • कोयला उत्पादन में अग्रणी 5 राज्य कौन-कौन से हैं— क्रमशः झारखंड, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, मध्य प्रदेश व आंध्र प्रदेश 
  • असम में पहली बार 1835 ई. में पेट्रोलियम किस क्षेत्र में मिला— माकूम 
  • असम में वास्तविक उत्पादन कार्य 1890 ई. में कहाँ से प्रारंभ हुआ— डिग्बोई 
  • असम के नाहरकटिया एवं हुगरीजान-मोरान क्षेत्र का तेल पाइपलाइन द्वारा कहाँ भेजा जाता है— नून एवं बरौनी (बिहार) 
  • भारत में प्राकृतिक गैस के भंडार कहाँ-कहाँ स्थित हैं— खंभात की खाड़ी (गुजरात); अंकलेश्वर (गुजरात); बोम्बे हाई (महाराष्ट्र); मोराह, नाहरकटिया (असोम); नामटिक नियाओपंग और लाप्टांग पंग  (अरुणाचल प्रदेश); बारामुरा श्रेणी (त्रिपुरा); कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश);  फिरोजपुर (पंजाब); मिदनापुर (पश्चिम बंगाल); नौसर-मुरादपुर  (जम्मू-कश्मीर); तंजावुर और चिंगलपेट (तमिलनाडु) 
  • अंकलेश्वर किस राज्य का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तेल क्षेत्र है— गुजरात 
  • गुजरात का दूसरा प्रमुख तेल क्षेत्र कौन-सा है— खंभात (लुनेज) क्षेत्र 
  • कृष्णा-गोदावरी के तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक गैसे के विशाल भंडारों की खोज किसके द्वारा की गई है— रिलायंस इंडस्ट्रीज 
  • आंध्र प्रदेश राज्य में किन क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का उत्पादन हो रहा है— रखा, लक्ष्मी और गौरी 
  • भारत के कुल ऊर्जा संसाधन में प्राकृतिक गैस का योगदान कितना है— 9-10%
  • वर्तमान में भारत अपनी आवश्यकता का लगभग कितने % पेट्रोलियम एवं पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है— 70% 
  • सौर ऊर्जा के दोहन के लिए सरकार ने जवाहरलाल नेहरू नेशनल सोलर मिशन की शुरूआत कब की— 11 जनवरी, 2009 

Monday, 27 November 2017

अनुशासन ही बनाता है आपको सफल (The Importance of Discipline in Our Life)


जरा आप खुद से एक सवाल करें – क्या अनुशासन के बगैर एक एथलीट दौड़ की प्रतियोगिता को जीत सकता है? क्या एक कप्तान जहाज को सही ढंग से चला सकता है? एक वायलिन वादक किसी संगीत समारोह में अच्छी तरह से वायलिन बजा सकता है? बिल्कुल नहीं। तो फिर अपने निजी काम में हमें अनुशासन की कमी क्यों नजर आती है? कहने का तात्पर्य यह है कि काम चाहे आसान हो या मुश्किल, व्यक्तिगत हो या सेवा संबंधी, अनुशासन के बगैर उसका सफल संचालन नामुमकिन है, यानी कि उसमें गलती होने की आशंका हमेशा ही बनी रहेगी।

अनुशासन का मतलब है, किसी काम को सही तरीके से संपादित करना। ऐसा करने में हमें अतिरिक्त मेहनत करने की जरूरत पड़ सकती है, पर यह भी सच है कि मंजिल तक पहुंचने का यही एक रास्ता है। जो अनुशासित रहते हुए अपने काम में अथक परिश्रम करते हैं, सफलता उनको ही नसीब होती है। अनुशासन का पालन करना आपके लिए कई बार कष्टप्रद हो सकता है, पर अंततः वह आपको सफलता की ओर ही ले जाता है।

व्यक्ति का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वह नतीजे की परवाह किए बिना ही अपनी इच्छा के अनुसार काम करना पसंद करता है और नियमानुसार काम करने की बजाय शॉर्ट कट तरीका अपनाता है या गलत ढंग से सफलता प्राप्त करने की कोशिश करता है। अनुशासन रहित ऐसा प्रयास हो सकता है कि व्यक्ति को क्षणिक सफलता दिला दे, पर आखिरकार इससे नाकामी ही हासिल होती है। इसलिए अपने काम में अनुशासन जरूरी है। तभी काम को पूरा करने का दृढ़ संकल्प भी हमारे मन में बना रहता है। अनुशासन व्यक्ति, समाज और देश दोनों के लिए बेहद जरूरी है।

अगर किसी बच्चे को आप उसकी इच्छानुसार चॉकलेट खाने की आजादी दे दें, तो क्या आप इससे होने वाले दुष्परिणामों की कल्पना कर सकते हैं? लगभग सभी बच्चे चॉकलेट खाना पसंद करते हैं। चॉकलेट खाने की आजादी का परिणाम होता है कि वे बस चॉकलेट खाते ही चले जाते हैं। ऐसे में चॉकलेट खाने की उनकी आदत में अनुशासन कमी नजर आने लगती है। फलस्वरूप वे बीमार पड़ जाते हैं। स्पष्ट है कि यदि अनुशासित ढंग से वे एक या दो चॉकलेट रोजाना खाएं, तो चॉकलेट खाने का सही आनंद उठा सकते हैं। उपर्युक्त उदाहरण जीवन में अनुशासन की जरूरत और महत्ता को दर्शाता है।

अनुशासन का पालन करने का अर्थ यह नहीं है कि आप नियमों और तौर-तरीकों के गुलाम हो गए और आपकी आजादी छिन गई। यह सोच गलत है। अगर ट्रेन को पटरी से उतार दें, तो वह आजाद हो जाएगी। लेकिन जरा सोचिए, ऐसे में क्या वह चल पाएगी? अगर इंसान खुद ही अपना ट्रैफिक कानून बनाने लगे, तो फिर ट्रैफिक का क्या हाल होगा, आप इसका सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। अनुशासन आजादी में खलल नहीं है, बल्कि नियम-कानून के अनुसार किसी काम को करने की सीख है। इसलिए अनुशासित बनें और लक्ष्य पर निगाह रखें, आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता।

Sunday, 26 November 2017

अनुरक्ति – संस्कृत में पहली 3D फिल्म



संस्कृत भाषा में पहली बार बनी 3 डी फिल्म अनुरक्ति है, जिसे हाल ही में गोवा में आयोजित 48वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में दिखाया गया है। इसे अशोकम पी.के ने डायरेक्ट और विजित पीके ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म अगले साल फरवरी तक रिलीज होगी।

फिल्म की कहानी ‘वसुधा’ नाम की लड़की के चारों ओर घूमती है, नायिका वसुधा जो एक पंजाबी नृत्यांगना हैं और केरल कुडीयाट्टम नृत्य सीखने आती है, यह नृत्य नाटक का एक आला रूप है। वसुधा को यहां उसके गुरु के बेटे से प्यार हो जाता है। किसी बात को लेकर दोनों के बीच एक गलतफहमी होती है और कहानी आगे बढ़ती है। फिल्म की अवधि 80 मिनट है। फिल्म में कोई भाषाई गलती ना हो इसलिए फिल्म बनाते समय 10 शिक्षकों की मदद ली गई है।

कर्नाटक में अंधविश्वास निरोधक विधेयक, 2017


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(A) के अनुसार, ‘यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि, वह वैज्ञानिकता और मानवतावाद की भावना को बढ़ावा दे।’ इसी के मद्देनजर कर्नाटक सरकार ने राज्य में प्रचलित अंधविश्वास एवं कुरीतियों के खिलाफ अमानवीय प्रथाओं और काला जादू की रोकथाम और उन्मूलन विधेयक, 2017 (अंधविश्वास विरोधी विधेयक) को हाल ही में पारित किया है। जिसके सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की जा रही है। विदित हो कि, ऐसा कानून महाराष्ट्र में बहुत पहले से है और अब कर्नाटक में इसे मजबूती से लागू करने के लिए राज्य सरकार गंभीर है।
  • 27 सितंबर, 2017 को कर्नाटक सरकार ने बहुप्रतिक्षित अमानवीय प्रथाओं और काला जादू की रोकथाम और उन्मूलन विधेयक, 2017 (अंधविश्वास विरोधी विधेयक) को मंजूरी प्रदान की।
  • हालांकि विधेयक में, केश लोचन (बालों को तोड़ने), वास्तु, ज्योतिष, धार्मिक स्थानों पर पूजा, प्रदक्षिणा, यात्रा, कीर्तन, प्रवचन आदि पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
  • इस विधेयक में कुछ गंभीर मामलों में मौत की सजा का भी प्रावधान है।
  • कर्नाटक में उरुली सिवे, मडेस्नान, माता-मंत्र, बाईबिगा प्रथा, सिदी ओखली जैसे कई रिवाज आपराधिक माने गए हैं।
  • विधेयक के मुताबिक, अगर ऐसी दकियानुसी प्रथा से इंसान की जान चली जाती है, तो दोषियों को मौत की सजा दी जा सकती है।
  • विधेयक में अंधविश्वास को फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने का भी प्रावधान है।
  • यदि गांव का ओझा ग्रामीणों को झाड़-फूंक के जाल में फसाएंगा, तो उसके अलावा उस व्यक्ति के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी जो उसका प्रचार-प्रसार कर रहा है।
  • अंधविश्वास विरोधी विधेयक में नर बलि पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव किया गया है।
  • इस विधेयक में नर बलि के साथ-साथ पशु की गर्दन पर आघात कर उसकी बलि पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
  • इस विधेयक में ‘बाइबिगा प्रथा’ के नाम पर लोहे की रॉड को मुंह के आर-पार करते हुए करतब करने, ‘बनामाथी प्रथा’ के नाम पर पथराव करना, तंत्र-मंत्र से प्रेत या आत्मा बुलाने की मान्यता पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
  • विधेयक में उंगलियों द्वारा सर्जरी करने का दावा तथा किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बदलने का दावा करने वालों पर कठोर कार्यवाही की बात कही गई है।
  • विधेयक में बेथेल सेव (Betthale Seve) के नाम पर महिलाओं को पूजा के समय नग्न रहने की प्रथा को प्रतिबंधित किया गया है।
  • विधेयक में माता मंत्र, गंदरा डोरा जैसी उपचार व्यवस्था पर भी रोक लगाया गया है, जिसमें किसी व्यक्ति को कुत्ते, सांप या बिच्छु के काटने पर चिकित्सकीय उपचार लेने से रोका जाता है और इसके बदले उसे माता-मंत्र, गंदरा-डोरा जैसे अन्य उपचार दिए जाते हैं।
  • विधेयक में धर्म के नाम पर महिलाओं और लड़कियों के यौन शोषण को रोकने और खत्म करने का प्रावधान किया गया है।
  • अंधविश्वास विरोधी विधेयक में धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चियों को देवदासी बनाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

Friday, 24 November 2017

दृढ निश्‍चय – सफलता के लिए आज भी उतना ही जरूरी है


हिन्‍दु धर्म ग्रंथो में मृत्यु के देव यमराज से जुड़े केवल दो ही ऐसे प्रसंग हैं जहाँ यमराज को भी मनुष्‍य की जिद के आगे मजबूर होना पड़ा था।

पहला प्रसंग सावित्री से सम्बंधित है, जहाँ यमराज को सावित्री के हठ पर मजबूर होकर उसके पति सत्यवान को पुनः जीवित करना पड़ा। जबकि दूसरा प्रसंग एक बालक नचिकेता से सम्बंधित है, जहाँ यमराज को एक बालक की जिद के आगे मजबूर होकर उसे मृत्यु से जुड़े गूढ़ रहस्य बताने पड़े।

नचिकेता के इस प्रसंग का वर्णन हिन्दू धर्मग्रन्थ कठोपनिषद में निम्‍नानुसार मिलता है:-

शाम का समय था। पक्षी अपने-अपने घोसले की ओर लौट रहे थे, लेकिन नचिकेता नाम का वह बालक आगे बढ़ा जा रहा था, जिसे न तो र्को थकान का अनुभव हो रहा था न ही कोई पछतावा था। उसे अपनी मंजिल तक पहुंचना ही था और यही उसके पिता की आज्ञा भी थी। उसका लक्ष्य था यमपुरी, जहां यमराज निवास करते थे और उसे यमराज से ही मिलना था क्‍योंकि यही उसके पिता का आदेश था।

लगातार तीन पहर तक चलने के बाद नचिकेता यमपुरी के द्वार पर जा पहुंचा, जहां दो यमदूत पहरा दे रहे थे। उन्होंने जब उस बालक नचिकेता को देखा तो आश्चर्यचकित रह गए और दोनों सोंचने लगे- कौन है यह बालक, जो मौत के मुंह में चला आया?

सहसा दोनों में से एक यमदूत ने गरजती आवाज में नचिकेता से पूछा- हे बालक, तू कौन है और यहां क्या करने आया है?

उस बालक ने धीरता के साथ उत्तर दिया- मेरा नाम नचिकेता है और मैं अपने पिता की आज्ञा से यमराजजी के पास आया हूं।

दूसरे यमदूत ने प्रश्न किया- लेकिन क्यों मिलना चाहते हो तुम यमराज से?

नचिकेता ने उत्तर दिया- क्योंकि मेरे पिताश्री ने उन्हें मेरा दान कर दिया है।

नचिकेता की बात सुनकर दोनों यमदूत हैरान रह गए। ये कैसा अजीब बालक है, जिसे मृत्यु का भी भय नहीं और यमराज से मिलने चला आया। उन्होंने उसे डराना चाहा, पर नचिकेता दृढ निश्‍चय के साथ अपने निर्णय पर अडिग रहा और बराबर यमराज से मिलने की इच्‍छा प्रकट करता रहा। बालक की जिद को देख अन्‍त में एक यमदूत बोला- वे इस समय यमपुरी में नहीं हैं। तीन दिन बाद लौटेंगे। इसलिए तुम भी तीन दिन बाद ही आना।

नचिकेता ने उत्तर दिया- कोई बात नहीं, मैं तीन दिन तक प्रतीक्षा कर लूंगा।

और वह वहीं द्वार के पास बैठ गया। सहसा उसकी आंखों के आगे पिछले कुछ समय के दौरान बीती हुई एक-एक घटना चित्र की भांति घूमने लगी।

नचिकेता के पिता ऋषि वाजश्रवा उद्दालक ऋषि ने विश्वजीत नामक एक ऐसे यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें अपना सब कुछ दान करना होता था। इसलिए उन्‍होंने विद्वानों, ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों को दान ग्रहण करने हेतु उस यज्ञ में आमंत्रित किया।

ब्राह्मणों को आशा थी कि यज्ञ की समाप्ति पर उद्दालक ऋषि की ओर से उन्हें अच्छी दक्षिणा मिलेगी, लेकिन जब यज्ञ समाप्त हुआ और वाजश्रवा ने दक्षिणा देनी शुरू की तो सभी आश्चर्यचकित रह गए। दक्षिणा में वह उन्‍हें वे गायें दे रहा था, जो कि कमजोर थीं, बूढ़ी हो चुकी थीं और दूध भी नहीं देती थीं। सम्‍भवतया वे अधिक जीवित भी नहीं रहने वाली थीं।

यज्ञ के प्रारंभ होने से पूर्व वाजश्रवा ने घोषणा की थी वह यज्ञ में अपनी समस्त सं‍पत्ति दान कर देगा। इसी कारण यज्ञ में कुछ ज्यादा ही लोग उपस्‍थित हुए थे। पर जब उन्होंने दान का स्तर देखा तो सभी मन ही मन काफी दु:खी व नाराज हुए लेकिन उनमें से किसी ने उद्दालक ऋषि को कुछ कहा नहीं।

लेकिन वाजश्रवा (उद्दालक ऋषि) के पुत्र नचिकेता से यह सब न देखा गया। संपत्ति के प्रति अपने पिता का यह मोह उसे सहन नहीं हुआ। इसलिए वह अपने पिता के पास जाकर बोला- पिताजी, ये आप क्या कर रहे हैं?

उद्दालक ऋषि ने कहा- देखते नहीं हो, मैं ब्राह्मणों को दान दे रहा हूँ।

तो नचिकेता ने विनम्रतापूर्वक कहा- लेकिन ये गायें तो कमजोर और बूढ़ी हैं और सम्‍भवतया दूध भी नहीं देतीं, जबकि आपको अच्छी गायें दान में देनी चाहिए, ताकि जिसे दान दिया जाए, उसके लिए वे उपयोगी हों।

वाजश्रवा नाराज होकर झल्लाते हुए कहने लगा- क्या तुम मुझसे ज्यादा जानते हो कि कौन सी चीज दान में देनी चाहिए, कौन सी नहीं?

नचिकेता ने कहा- हाँ पिताजी। दान में वह वस्तु दी जानी चाहिए, जो व्यक्ति को सबसे ज्यादा प्रिय हो और आपको तो सबसे ज्‍यादा प्रिय मैं ही हूँ। इसलिए आप मुझे किसको दान में देंगे?

नचिकेता की इस बात का वाजश्रवा ने कोई उत्तर न दिया लेकिन नचिकेता ने हठ ही पकड़ ली। वह बार-बार अपने पिता ये यही प्रश्न करता रहा कि- पिताजी आप मुझे किसको दान में देंगे?

काफी देर तक वाजश्रवा, अपने पुत्र नचिकेता की बातों को अनसुना करता रहा, लेकिन जब नचिकेता न माना तो झल्लाहट में वाजश्रवा ने कह दिया कि- जा, मैं तुझे यमराज को दान में देता हूँ।

अगले ही पल वाजश्रवा को अपनी गलती का अहसास हुआ कि ये उसने क्या कह दिया? अपने इकलौते पुत्र को ही यमराज को दान में दे दिया?

लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था क्‍योंकि नचिकेता भी बहुत दृढ़ निश्चयी था इसलिए वह भी पीछे हटने वाला नहीं था। उसने पिता की ये बात सुनकर कहा- मैं आपकी आज्ञा का पालन करूंगा पिताजी, आप बिलकुल चिंतित न रहें।

अपनी गलती समझ में आते ही वाजश्रवा ने नचिकेता को बहुत समझाया, लेकिन नचिकेता नहीं माना और अपने सभी परिजनों से अंतिम भेंट करके वह यमराज से मिलने के लिए निकल पड़ा।

जिसने भी यह सुना कि वाजश्रवा ने अपने इकलौते पुत्र नचिकेता को यमराज को दान कर दिया है, वह आश्चर्यचकित हुए बिना न रह सका जबकि सभी नचिकेता के साहस की प्रशंसा करने लगे क्‍योंकि मृत्‍यु से सभी भयभीत होते हैं, जबकि नचिकेता स्‍वयं ही मृत्‍यु के देवता यमराज से मिलने चला जा रहा था।

यमपुरी के द्वार पर बैठा नचिकेता इन्‍हीं सब बीती बातों को याद कर रहा था। लेकिन उसे इस बात का संतोष था कि वह अपने पिता की आज्ञा का पालन कर रहा था और वह लगातार तीन दिन तक यमपुरी के बाहर बैठा यमराज की प्रतीक्षा करता रहा।

तीसरे दिन जब यमराज आए तो नचिकेता को द्वार पर बैठा देखकर वे चौंके और जब द्वारपालों ने उन्‍हें बताया कि नचिकेता पिछले तीन दिनों से यमराज से मिलने के लिए ही द्वार पर बैठा है, तो वे भी आश्चर्यचकित रह गए और उन्होंने नचिकेता को अपने कक्ष में बुला भेजा।

यमराज के कक्ष में पहुंचते ही नचिकेता ने उन्हें प्रणाम किया। उसे देखकर यमराज बोले- वत्स, मैं तुम्हारी पितृभक्ति और दृढ़ निश्चयी इच्‍छाशक्ति से बहुत प्रसन्न हुआ। इसलिए तुम मुझसे कोई भी तीन वरदान मांग सकते हो।

यमराज के मुख से ये बात सुनकर नचिकेता को भी बडी प्रसन्नता हुई और अपने पहले वरदान के रूप में उसने ये मांगा कि- मेरे पिता का क्रोध शांत हो जाएं और वे मुझे पहले कि तरह स्‍वीकार करें।

यमराज ने तथास्‍तु यानी ‘ऐसा ही होगा‘ कहकर उसे पहला वरदान दिया और कहा- दूसरा वरदान मांगो।

इस बार नचिकेता थोडा सोच में पड़ गया कि अब वह क्या मांगे क्‍योंकि उसे स्‍वयं तो किसी चीज की इच्‍छा थी ही नहीं। लेकिन अचानक उसे ध्यान आया कि उसके पिता ने जो यज्ञ किया था वह स्वर्ग की प्राप्ति के लिए ही किया था। सो क्यों न पिताजी के लिए स्‍वर्ग प्राप्ति का उपाय ही मांग लिया जाए? यह सोचकर वह बोला- मुझे स्वर्ग की प्राप्ति किस प्रकार हो सकती है?

अब यमराज सोंच में पड़ गए, लेकिन क्‍योंकि वे वचन दे चुके थे, इसलिए उन्होंने स्‍वर्ग प्राप्ति से सम्‍बंधित सभी जरूरी बातें सविस्‍तार नचिकेता को बता दीं और तीसरा व अंतिम वरदान मांगने के लिए कहा। नचिकेता फिर से कुछ समय के लिए सोच में डूबा रहा। फिर मौन तोडते हुए बोला- आत्मा का रहस्य क्या है? कृपया समझाएं।

नचिकेता के मुख से इस प्रश्न की आशा यमराज को बिलकुल न थी। यम ने आखिरी वर को टालने की भरपूर कोशिश की और नचिकेता को आत्मज्ञान के बदले कई सांसारिक सुख-सुविधाओं को देने का लालच दिया तथा टालमटोल करते हुए नचिकेता को कोई और वरदान मांगने के लिए कहा और बोले- यह विषय इतना गूढ़ है‍ कि हर कोई इसे नहीं समझ सकता, इसलिए कोई और वर मांग लो।

लेकिन नचिकेता को मृत्यु का रहस्य जानना था। अत: नचिकेता ने सभी सुख-सुविधाओं को नाशवान जानते हुए नकार दिया और अपनी बात पर अड़ा रहा तथा निर्णायक स्वर में बोला- अगर आपको कुछ देना ही है तो मेरे इस प्रश्न का उत्तर दें, क्योंकि मुझे अन्य कोई भी वस्तु नहीं चाहिए।

अंत में विवश होकर यमराज ने नचिकेता को जन्म-मृत्यु से जुड़े सभी रहस्य बताए और आशीर्वाद देते हुए उसे फिर से पृथ्‍वी पर अपने पिता वाजश्रवा के पास भेज दिया।

अक्‍सर नचिकेता और यम की इस कहानी को पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध करने वाले लाेग पढते-सुनते हैं और ऐसी मान्‍यता है कि इस कहानी को श्राद्ध के दौरान पढने-सुनने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

लेकिन नचिकेता की इस कहानी में एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण Moral भी छिपा है कि यदि अापमें दृढ इच्‍छाशक्ति है, तो आप मृत्‍यु के देवता यम से भी सवाल-जवाब कर सकते हैं और यमराज से भी वरदान के रूप में मनचाहा फल प्राप्‍त कर सकते हैं तो इस दुनियां का कौनसा ऐसा काम है, जिसमें दृढ इच्‍छाशक्ति द्वारा सफलता नहीं पाई जा सकती।

हो सकता है कि इन पौराणिक कहानियों का कभी कोई औचित्‍य न रहा हो या ये सभी झूठी हों, लेकिन इन कहानियों में जो Message जो Moral छिपा है, वो झूठ नहीं है। इस संसार में हम आज जितने भी वैज्ञानिक आविष्‍कार देखते हैं, उनके पीछे सिर्फ और सिर्फ दृढ इच्‍छाशक्ति ही है।

यदि दृढ इच्‍छाशक्ति न होती, तो राईट बंधु कभी भी हवाईजहाज का आविष्‍कार न कर पाते, क्‍योंकि राईट बंधुओं के अलावा किसी को विश्‍वास नहीं था कि हवा में उड़ा जा सकता है।

यदि दृढ इच्‍छाशक्ति न होती, तो इंसान कभी चांद पर कदम न रख पाता, कभी आसमान में उपग्रह न छोड़ पाता, जिसकी वजह से हम आज Internet क्रांति को जी रहे हैं और Mobile जैसी तकनीक को Use करते हुए किसी भी समय किसी के भी संपर्क में रह रहे हैं।

यदि दृढ इच्‍छाशक्ति न होती, तो क्‍या सैकड़ों सालों की गुलामी से महात्‍मा गांधी इस भारत देश को कभी आजाद न हो पाता और क्‍या लाल बहादुर शास्‍त्री इस देश का नेतृत्‍व करते हुए 1965 के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध में भारत को विजय दिलवा पाते?

बिल गेट्स के अलावा किसे विश्‍वास था कि एक दिन हर घर के डेस्‍क पर एक कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम होगा, जिसमें Microsoft Company का Operating System Run होगा। क्‍या बिल गेट्स की दृढ इच्‍छाशक्ति के बिना ये सम्‍भव था?

दृढ इच्‍छाशक्ति अथवा दृढ निश्‍चय के कारण सफलता प्राप्‍त होने के संदर्भ में लाखों उदाहरण दिए जा सकते हैं लेकिन कोई भी उदाहरण ऐसा नहीं हो सकता, जहाँ किसी कार्य को सफल करने के पीछे दृढ इच्‍छाशक्ति न रही हो और वह कार्य सफल हो गया हो।

तो इस कहानी से दृढ इच्‍छाशक्ति की सीख लीजिए, और आप जो कुछ भी करना चाहते हैं, जिस किसी भी कार्य में सफलता प्राप्‍त करना चाहते हैं, उसमें दृढ निश्‍चय के साथ लग जाईए क्‍योंकि जहां चाह है वहीं राह है और अवसर किसी की प्रतिक्षा नहीं करता।