Wednesday, 5 September 2018

नीति आयोग के विशेषज्ञ समूह द्वारा हिमालयी झरनों को बचाने का आग्रह


चर्चा में क्यों?

नीति आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञों के एक समूह ने सरकार से देश के हिमालयी राज्यों में झरना जल प्रणालियों को नुकसान से बचाने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिये एक समर्पित मिशन स्थापित करने का आग्रह किया है, क्योंकि ये क्षेत्र के निवासियों के लिये पीने और सिंचाई दोनों कार्य हेतु जल के स्रोत के रूप में शीर्ष प्राथमिकता रखते हैं।

प्रमुख बिंदु

देश के उत्तर और पूर्वोत्तर राज्यों में फैला हुआ और लगभग 5 करोड़ लोगों को आवास प्रदान करने वाला भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) इन प्राकृतिक भूजल स्रोतों पर काफी हद तक निर्भर है, जो विकास और जलवायु परिवर्तन से निरंतर प्रेरित शहरीकरण के कारण बढ़े हुए खतरे के अंतर्गत आता है। 

विशेषज्ञ समूह ने “जल सुरक्षा के लिये हिमालय में झरनों की सूची और पुनरुद्धार” नामक अपनी रिपोर्ट में कहा, "लगभग आधे बारहमासी झरने पहले ही सूख गए हैं या मौसम आधारित हो गए हैं और हजारों गाँवों को वर्तमान में पीने तथा अन्य घरेलू उद्देश्यों के लिये पानी की कमी की विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।"

रिपोर्ट के लेखकों, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे, ने रिपोर्ट में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में छोटे आवासों के लिये जल प्रदान करने वाले लगभग 60% निम्न-निर्वहन वाले झरनों ने पिछले कुछ दशकों में स्पष्ट गिरावट दर्ज की है। 

इसके अलावा हिमालय में कृषि क्षेत्र के लगभग 64% भाग को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही ये प्राकृतिक झरने अक्सर इस क्षेत्र में सिंचाई के एकमात्र स्रोत होते हैं। 

इस रिपोर्ट के अनुसार, 3,810 गाँवों में झरनों की उपस्थिति के साथ मेघालय में सभी पूर्वी हिमालयी राज्यों की तुलना में इन जल स्रोतों की सबसे ज्यादा संख्या थी, वहीं सबसे अधिक घनत्व सिक्किम में था जहाँ 94% गाँवों में झरने थे। पश्चिमी हिमालय में  सबसे ज़्यादा 3,313 गाँवों में झरने और 50.6% का सर्वाधिक घनत्व, दोनों जम्मू-कश्मीर में थे। 

शिमला का संकट

हाल ही में पहाड़ी क्षेत्र में विकट संकट की स्थिति तब स्पष्ट रूप से देखी गई जब हिमाचल प्रदेश के आधे दर्जन जिलों और राज्य की राजधानी शिमला को मुख्य जल स्रोतों के पूर्णतः या आंशिक रूप से सूख जाने के बाद इसी वर्ष मई माह में गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। 

जबकि राज्य अधिकारियों के अनुसार, खराब जल प्रबंधन को मुख्य कारण माना गया, लेकिन इस संकट के योगदानकर्त्ता के रूप में उन्होंने झरनों से निम्न जल प्रवाह और कम बर्फ के पिघलने को भी ज़िम्मेदार ठहराया। 

झरनों में प्रदूषण 

रिपोर्ट में कहा गया है कि झरनों में प्रदूषण के कई स्रोत पाए गए और यह भूगर्भीय या 'प्राकृतिक' और मानवजनित या मानव निर्मित दोनों के कारण हुआ। माइक्रोबियल सामग्री, सल्फेट्स और नाइट्रेट का कारण मुख्य रूप से मानवजनित स्रोत थे एवं फ्लोराइड, आर्सेनिक व लौह से प्रदूषण का कारण मुख्य रूप से भूगर्भीय स्रोत थे। 

झरनों के पानी में कोलिफोर्म बैक्टीरिया (Coliform Bacteria) सेप्टिक टैंक, घरेलू अपशिष्ट जल, पशुधन और स्रोत क्षेत्र में खाद से या झरने को जलीय चट्टानी परत से जल प्राप्त होने के कारण उत्पन्न हो सकते हैं। इसी तरह झरनों में नाइट्रेट के स्रोत का कारण सेप्टिक टैंक, घरेलू अपशिष्ट जल, कृषि उर्वरक और पशुओं से है। 

झरनों के प्रंबंधन हेतु कार्य-योजना

विशेषज्ञ समूह, झरनों के प्रबंधन हेतु बहुआयामी, सहयोगी दृष्टिकोण जिसमें झरना जल प्रबंधन के मौजूदा कार्यों के साथ-साथ निकाय को व्यवस्थित रूप से और अधिक  मज़बूती प्रदान करना शामिल होगा, की सिफारिश करता है। 

इस कार्यक्रम को झरना जल प्रबंधन पर जल-भूविज्ञान आधारित, सामुदायिक-समर्थन प्रणाली के हिस्से के रूप में एक एक्शन-रिसर्च प्रोग्राम की अवधारणा पर प्रारूपित किया जा सकता है। 

समूह ने इस पर विशेष ध्यान दिया कि “500 कस्बों और 10 शहरों की वज़ह से विकसित होते शहरीकरण के कारण भारतीय हिमालयी क्षेत्र के 60,000 से अधिक गाँवों के जल संसाधनों पर जनसांख्यिकीय दबाव बढ़ रहा है।” 

यह कार्यबल झरना जल प्रबंधन का कायापलट करने के लिये 8 साल के कार्यक्रम अपनाए जाने हेतु विचार करता है। इसमें शामिल हैं: देश के झरनों के लिये डिजिटल एटलस तैयार करना, 'पैरा-हाइड्रोजियोलॉजिस्ट' को प्रशिक्षण देना जो 'झरना स्वास्थ्य कार्ड' के जमीनी स्तर पर संरक्षण और भूमिका का नेतृत्व कर सकते हैं।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक क्या है और इससे आम आदमी को क्या सुविधाएँ मिलेगीं




भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार देश के लगभग 60% लोग अभी भी बैंकिंग क्षेत्र से नही जुड़े हैं।  इसमें बहुत से वे लोग शामिल हैं जो कि भारत के ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जिनकी आमदनी बहुत कम है और असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं ऐसे लोगों को वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय समायोजन की नीति के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में पेमेंट बैंकों को स्थापित करना शुरू कर दिया।

पेमेंट बैंक का अर्थ

पेमेंट बैंक भारत में मौजूद कमर्शियल बैंकों से अलग प्रकार के बैंक है।पेमेंट बैंकों की स्थापना के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 24 नवम्बर 2014 को दिशा निर्देश जारी कर दिए थे।

पेमेंटबैंक; जनता की सामान्य बैंकिंग की जरूरतों को तो पूरा करेंगे लेकिन कुछ प्रतिबंधों के साथ; जैसे पेमेंट बैंक लोगों के चालू और बचत खाते खोल सकेंगे लेकिन लोगों को क्रेडिट कार्ड और लोन नहीं दे सकेंगे। ये बैंक प्रवासी कर्मचारियों के रुपयों को जमा कर सकेंगे और प्रवासी श्रमिक द्वारा भेजी गई रकम को उसको परिवार वालों को देने का काम भी करेंगे।

मोदी सरकार ने वित्तीय समायोजन की नीति के तहत गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए 1 सितम्बर 2018 को ‘इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक’ की शुरुआत की है। इस बैंक का गठन डाक विभाग के अधीन सार्वजनिक कंपनी के रूप में किया जाएगा।  इस बैंक में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार की होगी। डाक विभाग का पेमेंट्स बैंक डाकघरों के एक नेटवर्क के जरिये काम करेगा। इसमें  3 लाख डाकिये और ग्रामीण डाक सेवक शामिल होंगे।

अभी फिलहाल पेमेंट्स बैंक की सुविधा देशभर में 650 शाखाओं और 3250 सेवा केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी। 31 दिसंबर 2018 तक यह बैंक पूरी तरह से डाक विभाग के नेटवर्क इस्तेमाल करने लगेगा।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक क्या सुविधाएँ देगा?

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक स्कीम दूसरे बैंकों की तुलना में छोटे स्तर की होगी। इस पेमेंट बैंक के माध्यम से लोन और क्रेडिट कार्ड को छोड़कर बैंकिंग से सम्बंधित सभी काम जैसे; बैंक में पैसा जमा कर सकते हैं, पैसे भेजे सकते हैं, किसी और के द्वारा भेजे पैसे लिए जा सकते हैं और आप किसी सम्बन्धी को पैसे भेज भी सकते हैं।

इसके अलावा निम्न सुविधाएँ भी मिलेगीं

1. इस योजना के तहत ई-कॉमर्स साइटों से खरीदी गई चीजें भी आपके पास पहुँचाई जाएंगी। लोग ई-कॉमर्स वेबसाइट जैसे फ्लिप्कार्ट/अमेजॉन से खरीदारी कर सकेंगे। इसके लिए डाक विभाग ने अमेजन से करार किया है।

2. खाताधारक को  निःशुल्क एटीएम या डेबिट कार्ड मिलेगा।

3. खाताधारक को निःशुल्क नेट बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध होगी।

4. खाताधारक को  निःशुल्क मोबाइल अलर्ट सेवा मिलेगी

5. इंश्योरेंस सेवा, म्युचअल फंड, करंट अकाउंट और अन्य वित्तीय सेवाएँ भी इसके माध्यम से हासिल की जा सकेगीं।

 6. बैंक के माध्यम से बेसिक बैंकिंग, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण भुगतान (Direct Benefit Transfer), विभिन्न प्रकार के बिलों का भुगतान और टैक्स जमा करने जैसी सुविधाएं प्राप्त की जा सकेंगी।

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की सेवाएँ कैसे हासिल होंगी

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक अकाउंट खोलने के लिए आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल करेगा। बैंकिंग सेवाएं आपको डाकघर के काउंटर पर भी मिलंगी और माइक्रो एटीएम के जरिये भी। इसके अलावा घर तक सर्विस देने के लिए डाकिये के पास स्मार्टफोन और बायोमैट्रिक डिवाइस होंगे. पोस्टल पेमेंट बैंक हर ट्रांस्जेक्शन चार्ज के तौर पर 1 पैसा लेगा। हालाँकि घर पर सेवाएँ लेने के लिए आपको ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। दिसंबर, 2018 तक इन सेवाओं के लिए 1.55 लाख एक्सेस प्वाइंट बनाए जाएंगे। इनमें से 1.30 लाख ग्रामीण इलाके में होंगे।

डाक घर बचत खाता (Post Office Saving Account)

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक में बचत खाता खोलने के लिए न्यूनतम 20 रुपये की आवश्यकता होगी और यदि कोई चेक की सुविधा के साथ बचत खाता खोलता है तो उसे न्यूनतम 500 रुपये जमा करने होंगे।  बचत खाता धारकों (चेक सुविधा के बिना) के लिए 50 रुपये प्रति माह और चेक सुविधा के साथ 500 रुपये की न्यूनतम राशि बनाए रखनी होगी।

पेमेंट बैंक में पैसे जमा करने की सीमा एक लाख लाख रुपये होगी. इससे ज्यादा पैसा जमा होने पर यह अपने आप पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट में चला जाएगा. लेकिन सामान्य बचत खाता धारकों को खाते में कोई भी मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी नहीं है। लेकिन इस प्रकार के खाता धारक को सेवाओं की होम डिलीवरी नहीं मिलेगी।

जमा राशि पर कितना ब्याज मिलेगा

पेमेंट बैंक के तहत एक लाख रुपये तक का सेविंग अकाउंट खुलवाया जा सकेगा। पेमेंट बैंक 25 हजार रुपए की जमा राशि पर 4.5% का ब्याज, 25 हजार से 50 हजार रुपए की जमा राशि पर 5% ब्याज और 50 हजार से 1 लाख रुपए की जमा राशि पर 5.5% की दर से ब्याज देगा।

Tuesday, 4 September 2018

2030 तक बैंकॉक का 40% हिस्सा डूब सकता है

  विश्व बैंक द्वारा हाल ही में वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बैंकॉक के बारे में विशेष उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि बैंकॉक तेज़ी से समुद्र में समा रहा है।    इसके अतिरिक्त रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र से बढ़ते जलस्तर की वजह से मुंबई और कोलकाता पर भी खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2050 तक इन दोनों शहरों के कई इलाकों के समुद्र में समाने का खतरा है जिससे चार करोड़ लोगों को विस्थापित करना पड़ेगा।    विश्व बैंक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट  वैज्ञानिकों के मुताबिक बैंकॉक शहर पुराने दलदली जमीन पर बसा है, समुद्री तल से ऊंचाई महज 1.5 मीटर है। प्रत्येक वर्ष समुद्र के जलस्तर में प्रति वर्ष चार मिलीमीटर की वृद्धि हो रही है। यह बढ़ोतरी दुनिया के अन्य समुद्री तटों के मुकाबले सबसे अधिक है। जलप्रलय की आशंका से जूझ रहा बैंकॉक जलवायु परिवर्तन पर बातचीत की मेजबानी के लिए भी तैयार हो रहा है।  वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन की यही गति रही और समुद्र का जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो अगले 12 वर्ष में शहर का 40 प्रतिशत हिस्सा समुद्रा में समा जाएगा। वर्ष 2018 के अंत में पोलैंड में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा के लिए बैंकॉक में बैठक आयोजित की गई है।    बैंकॉक द्वारा उठाये जा रहे कदम    बैंकॉक में लगभग 2600 किलोमीटर लंबी नहरों का जाल बिछाने की योजना पर काम चल रहा है ताकि बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित की जा सके। वर्ष 2017 में चुलालोंगकोर्म यूनिवर्सिटी ने 11 एकड़ में एक पार्क विकसित किया गया, जिसे खासतौर पर लाखों लीटर बारिश का पानी निकाल अन्य स्थलों पर भेजने के लिए डिजाइन किया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में आई बाढ़ में बैंकॉक में 500 से अधिक लोग मारे गये थे।

विश्व बैंक द्वारा हाल ही में वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बैंकॉक के बारे में विशेष उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि बैंकॉक तेज़ी से समुद्र में समा रहा है।

इसके अतिरिक्त रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र से बढ़ते जलस्तर की वजह से मुंबई और कोलकाता पर भी खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2050 तक इन दोनों शहरों के कई इलाकों के समुद्र में समाने का खतरा है जिससे चार करोड़ लोगों को विस्थापित करना पड़ेगा।

विश्व बैंक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक बैंकॉक शहर पुराने दलदली जमीन पर बसा है, समुद्री तल से ऊंचाई महज 1.5 मीटर है।
  • प्रत्येक वर्ष समुद्र के जलस्तर में प्रति वर्ष चार मिलीमीटर की वृद्धि हो रही है। यह बढ़ोतरी दुनिया के अन्य समुद्री तटों के मुकाबले सबसे अधिक है।
  • जलप्रलय की आशंका से जूझ रहा बैंकॉक जलवायु परिवर्तन पर बातचीत की मेजबानी के लिए भी तैयार हो रहा है। 
  • वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन की यही गति रही और समुद्र का जलस्तर इसी तरह बढ़ा तो अगले 12 वर्ष में शहर का 40 प्रतिशत हिस्सा समुद्रा में समा जाएगा।
  • वर्ष 2018 के अंत में पोलैंड में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा के लिए बैंकॉक में बैठक आयोजित की गई है।


बैंकॉक द्वारा उठाये जा रहे कदम

बैंकॉक में लगभग 2600 किलोमीटर लंबी नहरों का जाल बिछाने की योजना पर काम चल रहा है ताकि बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित की जा सके। वर्ष 2017 में चुलालोंगकोर्म यूनिवर्सिटी ने 11 एकड़ में एक पार्क विकसित किया गया, जिसे खासतौर पर लाखों लीटर बारिश का पानी निकाल अन्य स्थलों पर भेजने के लिए डिजाइन किया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में आई बाढ़ में बैंकॉक में 500 से अधिक लोग मारे गये थे।

वोडाफोन-आइडिया का विलय पूरा; बनी देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी

  वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर का विलय 31 अगस्त 2018 को पूरा हो गया। आइडिया और वोडाफोन के विलय के बाद 408 मिलियन सब्सक्राइबर्स के साथ ये देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई है।    वोडाफोन-आईडिया के विलय के बाद कंपनी का नया नाम 'वोडाफोन आईडिया लिमिटेड' रखा गया है।वोडाफोन और आईडिया ब्रांड दोनों ही पहले की तरह काम करेंगे।.    इस कंपनी के आने से भारतीय टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाएगी। रिलायंस जियो के आने से टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी बढ़ गई और अब वोडाफोन-आईडिया के विलय के बाद इसके और बढ़ने की उम्मीद है।    नए बोर्ड का गठन    इस विलय के लिए नए बोर्ड का गठन किया गया है, जिसमें 12 निदेशक (छह स्वतंत्र निदेशक शामिल) और कुमारमंगलम बिड़ला चेयरमैन होंगे। निदेशक मंडल ने बालेश शर्मा को सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) नियुक्त किया है।    वोडाफोन आइडिया लिमिटेड  इस नई कंपनी के पास भारत के रिवेन्यू मार्केट शेयर का 32.2 फिसदी हिस्सा है और ये 9 दूरसंचार सर्किल में पहले पायदान पर है। इसके पास 17 लाख रिटेल आउटलेट के साथ 3.4 लाख साइटों और वितरण नेटवर्क का ब्रॉडबैंड नेटवर्क होगा। कंपनी द्वारा जारी स्टेटमेंट के अनुसार, विलय से 14,000 करोड़ रुपये की वार्षिक सिनर्जी उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिसमें 8,400 करोड़ रुपये के ओपेक्स सिनर्जी शामिल हैं, जो लगभग 70,000 करोड़ रुपये के नेट प्रेजेंट वैल्यू के बराबर है। विलय के बाद आइडिया सेल्यूलर की चुकता शेयर पूंजी बढ़कर 8,735.13 करोड़ रुपये होगी। वोडाफोन का नए कारोबार में 45.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वहीं आदित्य बिड़ला समूह की 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिये 3,900 करोड़ रुपए के भुगतान के बाद 26 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। विलय के बाद बनी इकाई के पास 3,40,000 ब्राडबैंड साइट होंगे जिसके दायरे में 84 करोड़ भारतीय हैं।    आइडिया सेल्युलर    आइडिया सेल्युलर भारत के विभिन्न राज्यों में एक वायरलेस टेलीफोन सेवाओं को संचालित करने वाली एक कंपनी है। इसका शुभारंभ 1995 में टाटा, आदित्य बिड़ला समूह और एटी एंड टी के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में हुआ था।    वोडाफोन समूह    वोडाफोन समूह दुनिया की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक है। यह कंपनी इंग्लैंड में वर्ष 1991 में बनी जिसके बाद धीरे धीरे यह अपना कारोबार अन्य देशों में फैलाने लगा। भारत में व्यापार शुरू करने और सभी प्रकार के व्यापारिक अधिकार के लिए इसने हच एस्सार नामक कंपनी को खरीद लिया। इसके बाद इसने इसका नाम बदल कर इसे वोडाफ़ोन कर दिया। इसे बाद में वोडाफ़ोन इंडिया एलटीडी नाम से पंजीकृत करा दिया।

वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर का विलय 31 अगस्त 2018 को पूरा हो गया। आइडिया और वोडाफोन के विलय के बाद 408 मिलियन सब्सक्राइबर्स के साथ ये देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई है।

वोडाफोन-आईडिया के विलय के बाद कंपनी का नया नाम 'वोडाफोन आईडिया लिमिटेड' रखा गया है।वोडाफोन और आईडिया ब्रांड दोनों ही पहले की तरह काम करेंगे।.

इस कंपनी के आने से भारतीय टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ जाएगी। रिलायंस जियो के आने से टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी बढ़ गई और अब वोडाफोन-आईडिया के विलय के बाद इसके और बढ़ने की उम्मीद है।

नए बोर्ड का गठन

इस विलय के लिए नए बोर्ड का गठन किया गया है, जिसमें 12 निदेशक (छह स्वतंत्र निदेशक शामिल) और कुमारमंगलम बिड़ला चेयरमैन होंगे। निदेशक मंडल ने बालेश शर्मा को सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) नियुक्त किया है।

वोडाफोन आइडिया लिमिटेड
  • इस नई कंपनी के पास भारत के रिवेन्यू मार्केट शेयर का 32.2 फिसदी हिस्सा है और ये 9 दूरसंचार सर्किल में पहले पायदान पर है।
  • इसके पास 17 लाख रिटेल आउटलेट के साथ 3.4 लाख साइटों और वितरण नेटवर्क का ब्रॉडबैंड नेटवर्क होगा।
  • कंपनी द्वारा जारी स्टेटमेंट के अनुसार, विलय से 14,000 करोड़ रुपये की वार्षिक सिनर्जी उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिसमें 8,400 करोड़ रुपये के ओपेक्स सिनर्जी शामिल हैं, जो लगभग 70,000 करोड़ रुपये के नेट प्रेजेंट वैल्यू के बराबर है।
  • विलय के बाद आइडिया सेल्यूलर की चुकता शेयर पूंजी बढ़कर 8,735.13 करोड़ रुपये होगी।
  • वोडाफोन का नए कारोबार में 45.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वहीं आदित्य बिड़ला समूह की 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिये 3,900 करोड़ रुपए के भुगतान के बाद 26 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
  • विलय के बाद बनी इकाई के पास 3,40,000 ब्राडबैंड साइट होंगे जिसके दायरे में 84 करोड़ भारतीय हैं।

आइडिया सेल्युलर

आइडिया सेल्युलर भारत के विभिन्न राज्यों में एक वायरलेस टेलीफोन सेवाओं को संचालित करने वाली एक कंपनी है। इसका शुभारंभ 1995 में टाटा, आदित्य बिड़ला समूह और एटी एंड टी के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में हुआ था।

वोडाफोन समूह

वोडाफोन समूह दुनिया की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक है। यह कंपनी इंग्लैंड में वर्ष 1991 में बनी जिसके बाद धीरे धीरे यह अपना कारोबार अन्य देशों में फैलाने लगा। भारत में व्यापार शुरू करने और सभी प्रकार के व्यापारिक अधिकार के लिए इसने हच एस्सार नामक कंपनी को खरीद लिया। इसके बाद इसने इसका नाम बदल कर इसे वोडाफ़ोन कर दिया। इसे बाद में वोडाफोन इंडिया एलटीडी नाम से पंजीकृत करा दिया।

गंगा विश्व की सबसे संकटग्रस्त नदियों में से एक

  वर्ल्ड वाइड फंड फोर नेचर (WWF) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियों में से एक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है।    देश के सबसे पवित्र स्थानों में शामिल ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग और काशी, गंगा के तट पर स्थित हैं। इसके अलावा केदारनाथ, बद्रीनाथ और गोमुख गंगा और उसकी उपनदियों के किनारे स्थित तीर्थ स्थानों में से एक हैं।जिन चार स्थानों पर कुंभ मेला लगता है, उनमें से दो शहर हरिद्वार और प्रयाग गंगा तट पर स्थित हैं।    गंगा नदी के बारे में WWF की रिपोर्ट  रिपोर्ट के अनुसार गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है। गंगा के किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं।इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है। कानपुर की ओर 400 किलोमीटर विपरीत जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है। ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है। गंगा के पानी में विषैले हानिकारक तत्व मिलकर इसे विश्व की सबसे भयावह नदियों में से एक बनाते हैं। इसका एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण कारण इसमें प्रत्येक वर्ष भारी बाढ़ आना तथा फिर सूखे की स्थिति झेलना है।    गंगा नदी के बारे में जानकारी    देश की सबसे प्राचीन और लंबी नदी गंगा उत्तराखंड के कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है। गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है। उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचती है. गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बंदरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखण्ड से निकलती है। गंगा उत्तराखंड में 110 किमी, उत्तर प्रदेश में 1,450 किलोमीटर , बिहार में 445 किमी और पश्चिम बंगाल में 520 किमी का सफर तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है।    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बारे में जानकारी  पर्यावरण संरक्षण हेतु विश्वव्यापी कोष का गठन वर्ष 1961 में हुआ तथा उसी वर्ष इसका पंजीकरण एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में हुआ। यह संगठन पर्यावरण के संरक्षण, अनुसंधान एवं रख-रखाव संबंधी मामलों पर कार्य करता है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रमुख उद्देश्य हैं - आनुवंशिक जीवों और पारिस्थितिक विभिन्नताओं का संरक्षण करना। यह सुनिश्चित करना कि नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग पृथ्वी के सभी जीवों के वर्तमान और भावी हितों के अनुरूप हो रहा है अथवा नहीं। इसका अन्य उद्देश्य प्रदूषण, संसाधनों और उर्जा के अपव्ययीय दोहन और खपत को न्यूनतम स्तर पर लाना भी है।

वर्ल्ड वाइड फंड फोर नेचर (WWF) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियों में से एक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है।

देश के सबसे पवित्र स्थानों में शामिल ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग और काशी, गंगा के तट पर स्थित हैं। इसके अलावा केदारनाथ, बद्रीनाथ और गोमुख गंगा और उसकी उपनदियों के किनारे स्थित तीर्थ स्थानों में से एक हैं।जिन चार स्थानों पर कुंभ मेला लगता है, उनमें से दो शहर हरिद्वार और प्रयाग गंगा तट पर स्थित हैं।

गंगा नदी के बारे में WWF की रिपोर्ट
  • रिपोर्ट के अनुसार गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है।
  • गंगा के किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं।इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है।
  • कानपुर की ओर 400 किलोमीटर विपरीत जाने पर गंगा की दशा सबसे दयनीय दिखती है।
  • ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है।
  • गंगा के पानी में विषैले हानिकारक तत्व मिलकर इसे विश्व की सबसे भयावह नदियों में से एक बनाते हैं।
  • इसका एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण कारण इसमें प्रत्येक वर्ष भारी बाढ़ आना तथा फिर सूखे की स्थिति झेलना है।


गंगा नदी के बारे में जानकारी

देश की सबसे प्राचीन और लंबी नदी गंगा उत्तराखंड के कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है। गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है। उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचती है. गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बंदरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखण्ड से निकलती है। गंगा उत्तराखंड में 110 किमी, उत्तर प्रदेश में 1,450 किलोमीटर , बिहार में 445 किमी और पश्चिम बंगाल में 520 किमी का सफर तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बारे में जानकारी
  • पर्यावरण संरक्षण हेतु विश्वव्यापी कोष का गठन वर्ष 1961 में हुआ तथा उसी वर्ष इसका पंजीकरण एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में हुआ।
  • यह संगठन पर्यावरण के संरक्षण, अनुसंधान एवं रख-रखाव संबंधी मामलों पर कार्य करता है।
  • डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रमुख उद्देश्य हैं - आनुवंशिक जीवों और पारिस्थितिक विभिन्नताओं का संरक्षण करना। यह सुनिश्चित करना कि नवीकरण योग्य प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग पृथ्वी के सभी जीवों के वर्तमान और भावी हितों के अनुरूप हो रहा है अथवा नहीं।
  • इसका अन्य उद्देश्य प्रदूषण, संसाधनों और उर्जा के अपव्ययीय दोहन और खपत को न्यूनतम स्तर पर लाना भी है।

एलिस्टर कुक ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की


इंग्लैंड के प्रसिद्ध सलामी बल्लेबाज एवं पूर्व कप्तान एलिस्टर कुक ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है। वे भारत के खिलाफ होने वाले टेस्ट सीरीज के पांचवें व अंतिम मुकाबले के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे।

एलिस्टर कुक इंग्लैंड की तरफ से सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। भारत के खिलाफ ओवल में होने वाला सीरीज का पांचवां टेस्ट उनका 161वां मैच होगा।

एलिस्टर कुक के बारे में
  • 32 वर्षीय एलिस्टर कुक ने 160 टेस्ट मैचों की 289 पारियों में 44.88 की औसत से कुल 12254 रन बनाए।
  • इसमें 32 शतक और 56 अर्द्धशतक शामिल हैं। 
  • वे बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं तथा उन्हें स्लिप का बेहतरीन फील्डर माना जाता है. उनके नाम कुल 173 कैच दर्ज हैं। 
  • एलिस्टर कुक ने वर्ष 2006 में टेस्ट डेब्यू नागपुर में भारत के खिलाफ ही किया था और आखिरी टेस्ट भी वे भारत की टीम के खिलाफ ही खेलेंगे. डेब्यू टेस्ट की दूसरी पारी में कुक ने 104 रन बनाए थे।
  • कुक ने इंग्लैंड के लिए 92 वनडे मैच भी खेले हैं, जिनमें उन्होंने 36.41 की औसत से 3204 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने केवल चार टी-20 मैच खेले हैं।
  • एलिस्टर कुक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भी एसेक्स के लिए काउंटी क्रिकेट खेलते रहेंगे।

वर्ष 2018 में एलिस्टर कुक की परफॉरमेंस

वर्ष 2018 में एलिस्टर कुक ने अब तक 9 टेस्ट मैच खेले हैं. उन्होंने लगभग 18.62 की औसत से केवल 298 रन बनाए हैं। इसमें सिर्फ एक अर्द्धशतक शामिल है. वर्ष 2010 के बाद यह उनका सबसे खराब प्रदर्शन है।पिछले चार टेस्ट में एक भी बार 50 रन का आंकड़ा पार नहीं कर पाए। इससे पूर्व  कुक 2014 में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। वर्ष 2014 में उन्होंने 12 टेस्ट में 36.09 के औसत से सिर्फ 758 रन बनाए थे। इसमें 8 अर्द्धशतक शामिल थे।

Monday, 3 September 2018

कौन बनते है आईएएस और आईपीएस




यूपीएससी से IAS या IPS इंसान ही बनते हैं। कई सवाल जो हम अप्रेन्टिस को असमंजस में डालते आये है, कई नये अप्रेन्टिस दोस्तों ने साईट पर पूछा कि आईएएस बनने के लिए इंसान के अन्दर क्या होना चाहिए, क्या IAS सिर्फ अच्छे पढ़ने वाले, मेधावी विद्यार्थी ही बन सकते हैं जिनका पास्ट अकेडमिक रिकॉर्ड अच्छा रहा हो?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप भी आईएएस बन सकते हैं। यह बिल्कुल मैटर नहीं करता कि आपने 10वीं या 12वीं में क्या स्कोर किया है …. भले आपने ग्रेजुएशन थर्ड डिवीजन से पास की हो …. पास्ट पास्ट होता है। पास्ट को भूलकर आपको आगे देखना चाहिए। यदि आप पास्ट की गलतियों को देखकर अपने आज को ख़राब कर रहे हैं तो आपको अपने भविष्य में अन्धकार ही अन्धकार मिलेगा। इसलिए अच्छा है कि पीछे मुड़ कर कभी न देखें।

पढ़ाई के दौरान एकाग्रचित कैसे हों? क्या आपने अपने शहर में घोड़ा को चलते देखा है? 

घोड़े के दोनों आँखों के बगल में चमड़े की पट्टी लगा दी जाती है। ऐसा इसीलिए क्योंकि वह सीधा देख पाए। चलते वक्त उसके बगल में होने वाली सड़क की गतिविधियों पर उसका ध्यान न जा पाए और वह सिर्फ सीधा देख कर अपने लक्ष्य की ओर चले। ऐसा विद्यार्थी जीवन में होना चाहिए। आप अपने अगल-बगल की गतिविधियों पर ध्यान मत दें। कौन आपके बारे में क्या कह रहा है, आपके बारे में क्या विचार रखता है, आपके फूफा आपका मजाक उड़ाते हैं, आपके पड़ोसी आपके घर पर बैठने को लेकर तंज कसते हैं …. यदि आपका ध्यान इन सब पर चला गया तो आप अपने लक्ष्य को पाने से चूक जायेंगे।

आप सफल हो जायेंगे तो यही लोग आपको बधाई भी देंगे। दूसरों को कहते फिरेंगे कि देखिए मेरा भतीजा/भाँजा आईएएस/आईपीएस है। अन्दर ही अन्दर वे भले ही कुढ़ते रहें पर शान से आपकी तारीफ दूसरों के सामने करेंगे ताकि उनका स्टेटस भी ऊँचा हो। इसीलिए इन मामूली फैक्टर से अपने जीवन को नष्ट मत कीजिए। लोगों को कहते रहने दीजिए, मैं भी आप ही लोगों में से यूँही एक तरह से इसी तरह सुनता आया हूँ बेफिक्र रहिये बेवाक रहिये हमारी तरह।

UPSC की परीक्षा कोई बैंकिंग या SSC की परीक्षा नहीं है। यह एक high-level परीक्षा है। इनके सवाल अच्छे-अच्छों की छुट्टी कर देते हैं। आपने लाख तैयारी की हो, 24 घंटे ही क्यों न पढ़ लिया हो, पर आप जनरल नॉलेज के 200 के 200 सवाल कभी सही नहीं कर सकते जैसा CAT या अन्य MBA परीक्षा में लोग कर लेते हैं। इसलिए आपकी मंजिल टेढ़ी-मेढ़ी है और न ही इसका कोई शोर्ट-कट है। हम अपनी मंजिल तभी पूरी कर पायेंगे जब हम स्वयं में यह दृढ़संकल्प करें कि हम किसी भी बाहरी नकारात्मक शक्तियों को अपने आस-पास भी नहीं फटकने देंगे और दिन-रात एक कर के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे। 

आईएएस की तैयारी के लिए एक साल पर्याप्त माना जाता है। वैसे ये विद्यार्थी के क्षमता पर निर्भर करता है। किसी के लिए 6 महिने की पढ़ाई भी काफी है और किसी के लिए 2 साल की पढ़ाई भी काफी नहीं।पर इसमें निराश होने की जरुरत नहीं। क्षमता को बढ़ाया और घटाया जा सकता है। आप ठान लें कि आज से और अभी से आप अगले साल तक रोजाना 6 घंटे की पढ़ाई करेंगे तो आप इस टेढ़े-मेढ़े सफर को सरलता से पार कर जायेंगे। पर ऐसा अक्सर होता नहीं. हर लोगों का मोटिवेशन लेवल अलग-अलग होता है और यही मोटिवेशन लेवल हार और जीत का फैसला करता है। आप हो सकता है आज यह आर्टिकल पढ़ कर कसम खा लें कि मैं रोजाना आईएएस की पढ़ाई के लिए अगले मेंस तक 6 घंटे दूंगा …. और यह भी हो सकता है कि आप आज और कल तक अपने संकल्प पर कायम भी रहें …. मगर तीसरे दिन आते-आते तक .… कुछ ऐसा होगा कि आप फिर वापस वहीं पर चले जायेंगे जहाँ पहले थे।सब छूट जायेगा. किसी की गर्लफ्रेंड नाराज हो जाएगी, कभी व्हाट्सएप गुनगुनाने लगेगा, कभी पिताजी की डांट पड़ने से उदास हो जाओगे …. कुछ न कुछ ऐसा हो ही जायेगा कि आप अपने लक्ष्य से भटक जाओगे।


वहीं जिसका सफल होना लिखा है …. वह अपने लक्ष्य पर डटा रहेगा। चाहे आँधी आए, चाहे तूफान …. चाहे गर्लफ्रेंड ने बात करना बंद कर दिया, चाहे पापा की डांट ही क्यूँ न पड़ गयी हो .... उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।वह दिन रात एक कर देगा। इन्टरनेट पर भी वही चीजें देखेगा जो उसकी काम की हों, जो उसे प्रोत्साहित करती हों .… जो उसके नोट्स बनाने के काम आए या फिर कुछ उपयोगी बिषय वस्तु लगे अवगत रहें।

हो सकता है आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं .… ! मेरी भी नहीं, यही सवाल प्रारंभ में मेरा भी था, लेकिन सवाल को करने से मुझे आजतक कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि नुकसान ही हुआ है। कईओं का यही सवाल... उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वे कैसे आगे बढ़ें? हाँ, हमारे नसीब में हर कुछ नहीं होता। किसी के पास किताबें खरीदने के पैसे-ही-पैसे हैं …. हजारों की किताबें वह खरीद सकता है मगर दुर्भाग्य है कि उन्हें पढ़ने का उसके पास समय ही नहीं। किन्हीं को एक किताब को खरीदने के लिए 100 बार सोचना पड़ता है। पुरानी किताबों को बेचकर उन्हें नयी किताबें लेनी पड़ती हैं। पर सोचिए, आपके पास सिर्फ पैसे नहीं हैं, किन्हीं-किन्हीं के पास लिखने के लिए हाथ भी नहीं है, किन्हीं की आँखें कमजोर हैं, उन्हें कुछ दिखता नहीं …. ! 

इसलिए पीड़ा की कोई सीमा नहीं है। आप गरीब हैं, अमीर हैं .… फर्क तो पड़ता है। पर उतना नहीं जितना हम सोच लेते हैं। किताबें उधार भी ली जा सकती हैं, पुरानी किताबों को भी कम दामों में खरीदा जा सकता है …. बस दिमाग में यह रहना चाहिए कि हमें रुकना नहीं है, चलते रहना है .… चलते रहना है …. जितना कठिन संघर्ष होगा उतनी ही शानदार जीत होगी। अपनी सोंच को संकुचित नहीं कीजिए।मेरे पास ये नहीं है, वो नहीं है से अच्छा है कि जो है उसका पूर्ण प्रयोग करना सीखें। छोटी सोच और पैर में पड़ी मोच से आगे कभी नहीं बढ़ा जा सकता।

क्या दिल्ली जाना जरुरी है? सबसे बड़ा सवाल 

यूपीएससी परीक्षा में सफल होने के लिए दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं है। आप बेशक घर बैठे भी तैयारी कर सकते हैं। घर में बैठने से बहुत बार मन टूटता है। कभी चीनी ले आओ, कभी सब्जियाँ ..…पढ़ाई के बीच-बीच में आपको कई बार उठना पड़ता है। आप अन्दर से चिढ़ जाते हैं और यही चिढ़ आपमें नकारात्मकता लाता है जो आपके लक्ष्य के लिए खतरनाक है। घर के कुछ काम कर देने से आपका बहुत सारा समय बर्बाद नहीं होता, हद से हद 2 घंटे, वह भी रोज नहीं ..… कभी-कभी। मगर इसको लेकर स्वयं को स्ट्रेस मत दें ..… पॉजिटिव सोचें …. आपको इस परीक्षा के लिए समाज के बारे में भी जानना है। याद कीजिए UPSC आपसे decision making से भी सवाल पूछती है। जैसे कि आप किसी दवाई की दुकान गए, आप गौर करते हैं कि दवाई वाले भैया ने आपको दवाई की खरीद पर रसीद नहीं दिया, कच्चा चिट्ठा दे कर पैसे ले लिए ..… तो ऐसे में आप क्या करेंगे? 
(i) उसे इस बात से अवगत करायेंगे कि आपको रसीद देनी चाहिए और रसीद देने की माँग करेंगे 
(ii) बगल के थाने में रिपोर्ट कर देंगे 
(iii) उसे डरायेंगे-धमकाएंगे 
(iv) चुप-चाप दवा ले कर घर लौट जायेंगे।

इसलिए जब तक आप समाज को जानोगे नहीं, बाहर घूमोगे नहीं .… तो इन सवालों का जवाब आप दोगे कैसे? इसलिए हर चीजों को पॉजिटिव वे में लें …. आपको कोई डिस्टर्ब भी कर रहा है तो उसमें भी कोई पोसिटिवनेस  ढूँढिए। दिल्ली जाना तभी ठीक है, जब आपके पास पर्याप्त पैसे हों या आप घर में बैठ कर बिल्कुल पढ़ नहीं सकते या आपके अगल-बगल परिवार में कोई भी इस बैकग्राउंड  से न हो। 

मैं नया अप्रेन्टिस हूँ, शुरुआत कहाँ से करे?

बेहतर है पहले सिलेबस को ध्यान से देखिए। फिर पिछले साल आये सवालों को देखिए। उन पर रिसर्च कीजिए। यह भी एक अभ्यास है। धीरे-धीरे आप UPSC में पूछे जाने वाले सवालों के पैटर्न को अच्छी तरह समझने लगेंगे। आपको पता लग जायेगा कि UPSC डायरेक्ट सवाल नहीं पूछती …. जैसे- वर्तमान वित्त मंत्री कौन हैं, यह सब SSC लेवल के सवाल हैं। UPSC को पूछना होगा तो वह वित्त मंत्री के कार्यक्षेत्र क्या-क्या हैं .… यह पूछेगी। 

इस तरह आप पैटर्न को समझेंगे। पैटर्न को जब आप समझ जायेंगे और फिर जा कर किताबों को पढ़ेगें तो आप पायेंगे कि आप किताब को अलग ढंग से पढ़ रहे हैं। आपको सिर्फ वही चीज उस किताब में दिखेगी जो आपके काम की हो। किताबों में वाक्यों पर पेंसिल से लाइन भी ड्रा करिए जो वाक्य आपको इम्पोर्टेन्ट लगे।

UPSC में लेखन अभ्यास का क्या रोल है?

आपको पढ़ने के साथ-साथ लिखने का भी अभ्यास करते रहना चाहिए क्योंकि लेखन के क्षेत्र में जब तक आपका हाँथ नहीं खुलेगा आप मेंस में अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाओगे। किसी भी टॉपिक को संक्षेप में (लगभग 200 शब्द) लिखने का रोज अभ्यास करें। यदि आपकी लेखन शैली को कोई जाँच करने वाला या व्याकरण चेक करने वाला हो तो सोने पर सुहागा है।

मैं लगातार मिल रही विफलता से टूट चुका हूँ

विफलता मिलने से टूटना स्वभाविक है। विफलता परेशान ही करती है और अन्दर से विचलित भी। पर अब तो आपके पास attempts भी कई सारे हैं। जरुरी नहीं कि हर कोई पहली या दूसरी बार में ही सफलता प्राप्त कर ले क्योंकि हमारे जीवन में भाग्य का भी रोल होता है। आपने कई बार देखा होगा कि आपका दिन कभी-कभी जरुरत से ज्यादा अच्छा जाता है और जिस दिन कुछ खराब होना रहता है तो उस दिन सब कुछ लगातार खराब ही खराब होता है। हिम्मत मत हारिये। कभी-कभी गुच्छे की आखरी चाभी भी ताला खोल देती है इसलिए डटे रहिए।


हर यूपीएससी अप्रेन्टिस के लिए यह काफी मोटीवेशन पोस्ट है सो बेहतर है आप इस पोस्ट को अधिक से अधिक "शेयर" ताकि अन्य भी इन शब्दों से रूबरू हो सके !  

                                                                                 आपने पूरा लेख पढ़ा, धन्यवाद।

आजाद भारत में पहली बार होगी ओबीसी की जनगणना


केंद्र सरकार ने जनगणना 2021 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आंकड़े जुटाने का फैसला किया है। आजाद भारत में यह पहला मौका होगा जब देश में ओबीसी वर्ग के अलग से आंकड़े जुटाए जाएंगे। इससे पहले 1931 में ओबीसी की जनगणना की गई थी। इसी के आधार पर वीपी सिंह सरकार ने ओबीसी को 27% आरक्षण दिया था।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को जनगणना 2021 की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान राजनाथ ने जनगणना की प्रक्रिया में तेजी लाने और आंकड़ों को तीन साल में पेश करने के लिए कहा। अभी इस प्रक्रिया में सात से आठ साल लगते हैं। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि राजनाथ सिंह के साथ हुई बैठक में जनगणना 2021 के रोडमैप पर चर्चा हुई। जनगणना के लिए 25 लाख कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

★ 2006 तक देश में 41% थे ओबीसी 

1931 के बाद से देश में अलग से ओबीसी के आंकड़े नहीं जुटाए गए। सरकारी संस्था नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन ने 2006 में देश में जाति के आधार पर एक रिपोर्ट पेश की थी। इसके मुताबिक, देश में तब तक 41% ओबीसी थे। ओबीसी के 79 हजार 306 परिवार ग्रामीण और 45 हजार 374 परिवार शहरी क्षेत्रों में थे।

जलपद चिन्ह क्या है


सम्पूर्ण पृथ्वी का लगभग 71% भाग पर जलमंडल का विस्तार है। उत्तरी गोलार्द्ध का 60.7%  और दक्षिणी गोलार्द्ध का 80.9% भाग महासागरो से ढँका हुआ है। पृथ्वी पर उपस्थित जल की कुल मात्र का 97.5% जल महासागरो में है, जो खारा है। जल राशी का मात्र 2.5% भाग ही स्वच्छ जल या मीठा जल है। जल का उपयोग समर्पण और शुद्धता के प्रतीक के रूप में पुरातनकाल से किया जाता है। लेकिन आज हम जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं के कारण जल संरक्षण के प्रति हमारे सामाजिक नजरिए को बदलना बहुत जरुरी है। हमारी प्राकृतिक विरासत (नदियों, समुद्रों और महासागरों) का तेजी से आबादी, औद्योगीकरण, शहरीकरण, जीवन स्तर के बढ़ते मानकों और विभिन्न अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण दोहन और दूषित किया जा रहा है।


जल पदचिह्न (Water Footprint) क्या है?

जल पदचिह्न को स्वच्छ जल या मीठा जल की कुल मात्रा के रूप में संदर्भित किया जाता है जिसका उपयोग व्यक्ति या समुदाय द्वारा उत्पादित सामानों और सेवाओं के उत्पादन के लिए किया जाता है या व्यवसाय द्वारा उत्पादित किया जाता है। यह पानी उपभोग के विनियमन का एक उपाय है जो मानव के जल उपभोग की मात्रा घन मीटर / प्रति व्यक्ति / प्रति वर्ष के सन्दर्भ में बताता है। 1240 घन मीटर / व्यक्ति / वर्ष वैश्विक जल पदचिह्न है।

जल पदचिह्न (Water Footprint) के प्रकार

उपयोग और स्रोतों के आधार पर, जल पदचिह्न (Water Footprint) को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है जिसको नीचे व्याख्या की गयी है:

1. ग्रीन जल पदचिह्न (Green Water Footprint):  यह उस ताजा पानी की मात्रा को संदर्भित करता है जो वैश्विक हरीत जल संसाधनों जैसे नम भूमि, आर्द्रभूमि, मिट्टी, खेतों आदि से वाष्पित होता है, जो व्यक्ति या समुदाय द्वारा उपभोग किए जाने वाले सामानों और सेवाओं के उत्पादन में होता है। यह कृषि, बागवानी और वानिकी उत्पादों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।

2. ब्लू जल पदचिह्न (Blue Water Footprint): यह उस ताजा पानी की मात्रा को संदर्भित करता है जो वैश्विक नीले पानी के संसाधनों जैसे झीलों, नदियों, तालाबों, जलाशयों और कुओं को उत्पादित करने वाले सामानों और सेवाओं या उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग सेवाओं में वाष्पित में होता है।

3. ग्रे जल पदचिह्न (Grey Water Footprint): यह उस ताजा पानी की मात्रा को संदर्भित करता है जो व्यक्ति या समुदाय द्वारा उपभोग किये गए सामानों और सेवाओं के उत्पादन करने के दौरान प्रदूषित होता है।

एक व्यक्ति जल पदचिह्न को कैसे कम कर सकता है?

1. बचत शौचालय स्थापित करके, एक व्यक्ति पानी की बचत कर सकता है।

2. बचत फव्वारा स्थापित करके एक व्यक्ति पानी की बचत कर सकता है।

3. अपने दांतों की सफाई के दौरान पानी का नलका करके पानी के नुक़सान को बचा सकते हैं।

4. बगीचे में कम पानी का उपयोग करके भी एक व्यक्ति पानी की बचत कर सकता है।

5. परनाले में हमें दवाओं, पेंट या अन्य प्रदूषक अपशिष्ट का निपटान नहीं करना चाहिए।

हम अपने जीवन के हर पहलू में पानी का उपयोग करते हैं, जैसे कि फसल की खेती, घरों की सफाई, स्नान, पीने और उद्योगों में। जल चक्र का अध्ययन न केवल हमें बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि इस दुनिया में कुछ भी स्थिर नहीं है। इसलिए हमे जल के उपभोग के साथ साथ उसके संरक्षण के बारे में सोचना जरुरी है नहीं जल बिना या प्रदूषित जल से मानव जीवन पर कैसी-कैसी आपदा आ सकती है जगजाहीर है।

Sunday, 2 September 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक’ का शुभारंभ किया गया


प्रधानमंत्री  नरेन्द्र  मोदी ने 01 सितंबर 2018 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) का शुभारंभ किया।

मुख्य बिंदु
  • शुभारंभ के दिन, आईपीपीबी की देश भर में 650 शाखाएं और 3250 एक्सेस प्वाटइंट (पहुँच केन्द्र/कार्यकलाप केन्द्र) खोले गये, जहाँ समानांतर रूप से शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किए गये।
  • देश भर में सभी 1.55 लाख डाकघर 31 दिसंबर, 2018 तक आईपीपीबी प्रणाली से जुड़ जाएंगे।
  • आईपीपीबी बचत और चालू खातों, धन हस्तांतरण, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, बिल और उपयोगिता भुगतान और उद्यम एवं वाणिज्यिक भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
  • आईपीपीबी का शुभारंभ तेजी से विकास की ओर बढ़ते भारत का लाभ देश के दूरस्थ कोनों में सुलभ कराने संबंधी केन्द्र सरकार के प्रयासों को मजबूती देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उद्देश्य

आईपीपीबी को आम आदमी के लिए एक सुगम, किफायती और भरोसेमंद बैंक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि केन्द्र सरकार के वित्तीय समावेश उद्देश्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिल सके। देश के हर कोने में फैले डाक विभाग के 3,00,000 से अधिक डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के विशाल नेटवर्क से इसे काफी लाभ मिलेगा. इसलिए आईपीपीबी भारत में लोगों तक बैंकों की पहुंच बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगा।

इन सुविधाओं एवं इससे जुड़ी अन्य संबंधित सेवाओं को बैंक के अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्लेुटफॉर्म का उपयोग करते हुए बहु-विकल्प माध्यमों (काउंटर सेवाएं, माइक्रो-एटीएम, मोबाइल बैंकिंग एप, एसएमएस और आईवीआर) के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।