Friday, 22 June 2018

क्‍या होता है मानसून और इसके कम या ज्‍यादा होने से अर्थव्‍यवस्‍था पर इसका कितना असर पड़ता है (जानिए आसान शब्दों में)

क्‍या होता है मानसून-     मानसून पूरी तरह से हवाओं के बहाव पर निर्भर करता है। आमतौर पर जब ये हवाएं अपनी दिशा को  बदल लेती हैं, तब मानसून आता है। जब ये हवाएं ठंडे से गर्म क्षेत्रों की ओर बहती हैं तो उनमें नमी की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से बारिश होती है। मौसम में इसी परिवर्तन के साथ ही हवा की दिशा भी बदलती है। गर्मियों में ये हवा समुद्र से स्थल की ओर चलती है जो बारिश के अनुकूल होती है। जबकि सर्दियों में हवा स्थल से समुद्र की ओर चलती है जो शांत और सूखी होती है। जहाँ ज्‍यादा गर्मी होती है, वहाँ से हवा गर्म होकर ऊपर उठने लगती है और पूरे क्षेत्र में निम्‍न वायु दबाव का क्षेत्र बन जाता है।     जब ये हवाएं ऊपर की उठती हैं तो इसमें मौजूद वाष्‍पकण ठंडा होकर पानी की बूंदों में बदल जाते हैं। इससे पानी की बूंदे भारी होकर धरती पर गिरने लगती है, जिसे हम बारिश कहते हैं।     चूंकि मानसूनी हवा में वाष्‍पकण भरपूर मात्रा में होते हैं, इसलिए बारिश भी जमकर होती है। आमतौर पर हर साल मई से जून के बीच ये हवाएं गर्मियों में यह हवा भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्‍य  भागों पर दक्षिणी-पश्चिमी हवा के रूप में समुद्र से स्‍थल की ओर बहने लगती है, जिसे हम दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहते हैं। भारत में मानसून सबसे पहले 1 जून तक केरल के तट पर दस्‍तक देता है। इसके बाद यह अन्‍य राज्‍यों में फैल जाता है, जिससे देशभर में बारिश होती है।    मानसून में देरी का अर्थव्‍यवस्‍था पर प्रभाव      सालभर होने वाली बारिश में 70 फीसदी हिस्सेदारी जून-सितंबर के मानसून की होती है। मानसून में देरी का जून-सितंबर की बारिश पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन इससे फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। मानसून आमतौर पर 1 जून तक केरल में दस्तक देता है।     इसमें देरी से यदि कृषि के क्षेत्र पर असर पड़ता है तो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार एवं  आरबीआई की कोशिशों को झटका लगेगा। इसकी वजह यह है कि जहाँ 2016 में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था करीब 2.3 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 15 फीसदी है।     चूंकि कृषि‍ हमारी अर्थव्‍यवस्‍था का एक अहम हिस्‍सा है और इसके प्रभावित होने का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ना लाजिमी है।     क्‍या है अलनीनो व मानूसन पर इसका असर     प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका तथा पेरू के निकटवर्ती इलाकों में विषुवत रेखा के आसपास जब समुद्र की सतह अचानक गर्म होनी शुरू होती है तो अलनीनो प्रभाव उत्पन्न होता है। इस गर्मी से ट्रेड विंड कमजोर पड़ती है, जो मानसूनी हवा के रूप में भारत की ओर पहुँचती है। समुद्री तापमान में यह बढ़ोतरी 0.5 डिग्री से 2.5 डिग्री के बीच हो तो इसका असर भारतीय मानसून पर पड़ता है। इस वजह से बारिश सामान्‍य से बहुत कम होती है और सूखा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। अलनीनो जब भी आता है सूखे का कहर लेकर आता है, जिससे सबसे ज्‍यादा प्रभावित भारत और ऑस्ट्रेलिया होते हैं। भारत में ऐसा पिछले 140 वर्षों में चार बार ही हुआ है।    कमजोर मानसून की वजह से जल संकट    चूंकि भारत के अधिकांश भागों में बारिश केवल मानसून के तीन-चार महीनों में ही होती है। इसलिए बड़े तालाबों, बांधों और नहरों से दूर स्थित गांवों में पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो जाता है। उन इलाकों में भी जहाँ मानसून काल में पर्याप्त बारिश होती है।     मानसून पूर्व काल में भी लोगों को कष्ट सहना पड़ता है, क्योंकि यहाँ पर पानी को संचय करने की व्यवस्था प्रर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं है। इन सब के अलावा भारत में बारिश ज्‍यादा होती है और एक छोटी अवधि में ही होती है।

क्‍या होता है मानसून- 

मानसून पूरी तरह से हवाओं के बहाव पर निर्भर करता है। आमतौर पर जब ये हवाएं अपनी दिशा को  बदल लेती हैं, तब मानसून आता है। जब ये हवाएं ठंडे से गर्म क्षेत्रों की ओर बहती हैं तो उनमें नमी की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से बारिश होती है। मौसम में इसी परिवर्तन के साथ ही हवा की दिशा भी बदलती है। गर्मियों में ये हवा समुद्र से स्थल की ओर चलती है जो बारिश के अनुकूल होती है। जबकि सर्दियों में हवा स्थल से समुद्र की ओर चलती है जो शांत और सूखी होती है। जहाँ ज्‍यादा गर्मी होती है, वहाँ से हवा गर्म होकर ऊपर उठने लगती है और पूरे क्षेत्र में निम्‍न वायु दबाव का क्षेत्र बन जाता है। 

जब ये हवाएं ऊपर की उठती हैं तो इसमें मौजूद वाष्‍पकण ठंडा होकर पानी की बूंदों में बदल जाते हैं। इससे पानी की बूंदे भारी होकर धरती पर गिरने लगती है, जिसे हम बारिश कहते हैं।

चूंकि मानसूनी हवा में वाष्‍पकण भरपूर मात्रा में होते हैं, इसलिए बारिश भी जमकर होती है। आमतौर पर हर साल मई से जून के बीच ये हवाएं गर्मियों में यह हवा भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्‍य  भागों पर दक्षिणी-पश्चिमी हवा के रूप में समुद्र से स्‍थल की ओर बहने लगती है, जिसे हम दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहते हैं। भारत में मानसून सबसे पहले 1 जून तक केरल के तट पर दस्‍तक देता है। इसके बाद यह अन्‍य राज्‍यों में फैल जाता है, जिससे देशभर में बारिश होती है।

मानसून में देरी का अर्थव्‍यवस्‍था पर प्रभाव  

सालभर होने वाली बारिश में 70 फीसदी हिस्सेदारी जून-सितंबर के मानसून की होती है। मानसून में देरी का जून-सितंबर की बारिश पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन इससे फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। मानसून आमतौर पर 1 जून तक केरल में दस्तक देता है। 

इसमें देरी से यदि कृषि के क्षेत्र पर असर पड़ता है तो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार एवं  आरबीआई की कोशिशों को झटका लगेगा। इसकी वजह यह है कि जहाँ 2016 में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था करीब 2.3 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। 

चूंकि कृषि‍ हमारी अर्थव्‍यवस्‍था का एक अहम हिस्‍सा है और इसके प्रभावित होने का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ना लाजिमी है।

क्‍या है अलनीनो व मानूसन पर इसका असर

प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका तथा पेरू के निकटवर्ती इलाकों में विषुवत रेखा के आसपास जब समुद्र की सतह अचानक गर्म होनी शुरू होती है तो अलनीनो प्रभाव उत्पन्न होता है। इस गर्मी से ट्रेड विंड कमजोर पड़ती है, जो मानसूनी हवा के रूप में भारत की ओर पहुँचती है। समुद्री तापमान में यह बढ़ोतरी 0.5 डिग्री से 2.5 डिग्री के बीच हो तो इसका असर भारतीय मानसून पर पड़ता है। इस वजह से बारिश सामान्‍य से बहुत कम होती है और सूखा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। अलनीनो जब भी आता है सूखे का कहर लेकर आता है, जिससे सबसे ज्‍यादा प्रभावित भारत और ऑस्ट्रेलिया होते हैं। भारत में ऐसा पिछले 140 वर्षों में चार बार ही हुआ है।

कमजोर मानसून की वजह से जल संकट

चूंकि भारत के अधिकांश भागों में बारिश केवल मानसून के तीन-चार महीनों में ही होती है। इसलिए बड़े तालाबों, बांधों और नहरों से दूर स्थित गांवों में पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो जाता है। उन इलाकों में भी जहाँ मानसून काल में पर्याप्त बारिश होती है। 

मानसून पूर्व काल में भी लोगों को कष्ट सहना पड़ता है, क्योंकि यहाँ पर पानी को संचय करने की व्यवस्था प्रर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं है। इन सब के अलावा भारत में बारिश ज्‍यादा होती है और एक छोटी अवधि में ही होती है।

Thursday, 21 June 2018

इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार 2018


इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार 2018: सूरत ‘सिटी अवार्ड’ के लिए चुना गया

‘इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार’ 2018 के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेज गति प्रदर्शित करने पर सूरत स्मार्ट सिटी को ‘सिटी अवार्ड’ के लिए चुना गया।    तीन वर्गों अर्थात परियोजना पुरस्कार, नवोन्मेषी विचार पुरस्कार एवं सिटी अवार्ड में 9 पुरस्कारों की इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार के तहत घोषणा की गई है।    1. सिटी अवार्ड    परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष रूप से शहरी पर्यावरण, परिवहन एवं गंत्यात्मकता तथा टिकाऊ समेकित विकास के वर्गों में परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेज गति प्रदर्शित करने के लिए सूरत स्मार्ट सिटी को सिटी अवार्ड के लिए चुना गया।    2. नवोन्मेषी विचार पुरस्कार    नवोन्मेषी विचार पुरस्कार किसी परियोजना/विचार, विशेष रूप से टिकाऊ समेकित विकास की दिशा में उनके नवोन्मेषी, बॉटम-अप एवं रूपांतरकारी दृष्टिकोण के लिए प्रदान किया जाता है। इस वर्ग में संयुक्त विजेता अपने समेकित कमान एवं नियंत्रण केन्द्र (आईसीसीसी) के लिए भोपाल तथा सुरक्षित एवं भरोसेमंद अहमदाबाद (एसएएसए) परियोजना के लिए अहमदाबाद रहे।    3. परियोजना पुरस्कार    परियोजना पुरस्कार सात वर्गों में सर्वाधिक नवोन्मेषी एवं सफल परियोजनाओं को दिया जाता है, जो 01 अप्रैल 2018 तक पूरी हो चुकी है।    चुनी गई परियोजनाएं:    क्र.सं.     श्रेणी                                परियोजना का नाम    1           अभिशासन                      पुणे से पीएमसी केयर    2            निर्मित पर्यावरण              पुणे से स्मार्ट प्लेस मेकिंग    3           सामाजिक पहलू               एनडीएमसी एवं जबलपुर से स्मार्ट क्लास रूम, विशाखापत्तनम से स्मार्ट                                                            कैम्पस, पुणे से लाईट हाउस    4          संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था   भोपाल से बी नेस्ट इन्क्यूबेशन सेंटर एवं जयपुर से राजस्थान स्कूल ऑफ                                                           आर्ट्स का संरक्षण    5           शहरी पर्यावरण               भोपाल, पुणे, कोयम्बटूर से पब्लिक बाईक शेयरिंग एवं जबलपुर में अपशिष्ट                                                     से ऊर्जा संयंत्र    6          परिवहन एवं गंत्यात्मकता  अहमदाबाद एवं सूरत से समेकित पारगमन प्रबंधन प्रणाली (टीएमएस)    7          जल एवं स्वच्छता              अहमदाबाद से एससीएडीए के माध्यम से स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट       इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार के बारे में  इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार शहरों, परियोजनाओं एवं नवोन्मेषी विचारों को पुरस्कृत करने, नगरों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25 जून 2017 को आरंभ किया गया था। योग्य प्रतिभागियों में केवल स्मार्ट सिटी शामिल थे जहां संबंधित यूएलबी/स्मार्ट सिटी एसपीवी को प्रस्ताव पेश करना था। सिटी अवार्ड पर फैसला 02 मई 2018 (पुरस्कार आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि) को उनके पुरस्कार स्कोर एवं साप्ताहिक रैंकिंग पर नगरों के प्रदर्शन के आधार पर किया गया। संयुक्त राष्ट्र हैबिटेट, एशियाई विकास बैंक एवं एनआईयूए के अंतर्राष्ट्रीय/बहु-स्तरीय विशेषज्ञों की एक तकनीकी समिति ने नवोन्मेषण, प्रभाव एवं प्रतिकृति/अनुमापकता पर आधारित प्रतिवेदनों का मूल्यांकन किया। नगर को कोई प्रस्ताव रखने की जरूरत नहीं है। प्रोजेक्ट अवार्ड’ एवं ‘नवोन्मेषी विचार अवार्ड’ के लिए विविध प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और मूल्यांकन के लिए परियोजना कार्यान्वयन पर विचार किया जाएगा 100वीं स्मार्ट सिटी के रूप में शिलांग का चयन    मेघालय की राजधानी शिलांग का चयन 100वीं स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है। शिलांग के चयन के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अंतिम रूप से चयनित 100 स्मार्ट सिटी में कुल प्रस्तावित निवेश 2,05,018 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

‘इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार’ 2018 के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेज गति प्रदर्शित करने पर सूरत स्मार्ट सिटी को ‘सिटी अवार्ड’ के लिए चुना गया।

तीन वर्गों अर्थात परियोजना पुरस्कार, नवोन्मेषी विचार पुरस्कार एवं सिटी अवार्ड में 9 पुरस्कारों की इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार के तहत घोषणा की गई है।

1. सिटी अवार्ड

परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष रूप से शहरी पर्यावरण, परिवहन एवं गंत्यात्मकता तथा टिकाऊ समेकित विकास के वर्गों में परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेज गति प्रदर्शित करने के लिए सूरत स्मार्ट सिटी को सिटी अवार्ड के लिए चुना गया।

2. नवोन्मेषी विचार पुरस्कार

नवोन्मेषी विचार पुरस्कार किसी परियोजना/विचार, विशेष रूप से टिकाऊ समेकित विकास की दिशा में उनके नवोन्मेषी, बॉटम-अप एवं रूपांतरकारी दृष्टिकोण के लिए प्रदान किया जाता है। इस वर्ग में संयुक्त विजेता अपने समेकित कमान एवं नियंत्रण केन्द्र (आईसीसीसी) के लिए भोपाल तथा सुरक्षित एवं भरोसेमंद अहमदाबाद (एसएएसए) परियोजना के लिए अहमदाबाद रहे।

3. परियोजना पुरस्कार

परियोजना पुरस्कार सात वर्गों में सर्वाधिक नवोन्मेषी एवं सफल परियोजनाओं को दिया जाता है, जो 01 अप्रैल 2018 तक पूरी हो चुकी है।

इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार के बारे में
  • इंडिया स्मार्ट सिटी पुरस्कार शहरों, परियोजनाओं एवं नवोन्मेषी विचारों को पुरस्कृत करने, नगरों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25 जून 2017 को आरंभ किया गया था।
  • योग्य प्रतिभागियों में केवल स्मार्ट सिटी शामिल थे जहां संबंधित यूएलबी/स्मार्ट सिटी एसपीवी को प्रस्ताव पेश करना था।
  • सिटी अवार्ड पर फैसला 02 मई 2018 (पुरस्कार आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि) को उनके पुरस्कार स्कोर एवं साप्ताहिक रैंकिंग पर नगरों के प्रदर्शन के आधार पर किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र हैबिटेट, एशियाई विकास बैंक एवं एनआईयूए के अंतर्राष्ट्रीय/बहु-स्तरीय विशेषज्ञों की एक तकनीकी समिति ने नवोन्मेषण, प्रभाव एवं प्रतिकृति/अनुमापकता पर आधारित प्रतिवेदनों का मूल्यांकन किया।
  • नगर को कोई प्रस्ताव रखने की जरूरत नहीं है।
  • प्रोजेक्ट अवार्ड’ एवं ‘नवोन्मेषी विचार अवार्ड’ के लिए विविध प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और मूल्यांकन के लिए परियोजना कार्यान्वयन पर विचार किया जाएगा

100वीं स्मार्ट सिटी के रूप में शिलांग का चयन

मेघालय की राजधानी शिलांग का चयन 100वीं स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है। शिलांग के चयन के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अंतिम रूप से चयनित 100 स्मार्ट सिटी में कुल प्रस्तावित निवेश 2,05,018 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

150 वर्ष पहले विलुप्त मकड़ी प्रजाति वायनाड में मिली



➤ वैज्ञानिकों ने मकड़ी की एक दुर्लभ प्रजाति को पश्चिम घाट स्थित केरल के वायनाड वन्यजीव अभ्यारण्य (Wayanad Wildlife Sanctuary) में खोजा है जिसके बारे में माना जा रहा था कि 150 वर्ष पहले वह विलुप्त हो चुकी है।

➤ जर्मनी के डॉ. फर्डिनेंड एंटन फ़ांस ने 1868 में गुजरात के पेरियेज झील में मकरी के इस प्रजाति के अस्तित्व के बारे में बताया था। परंतु उसके पश्चात यह गायब हो गई।

➤ मकरी की यह प्रजाति ‘जम्पिंग स्पाइडर’ (Salticidae) परिवार की है और इसका वैज्ञानिक नाम ‘क्रिसिला वाल्युप्स’ (Chrysilla volupes) है।

➤ वायनाड वन्यजीव अभ्यारण्य में मकड़ी की इस प्रजाति के नर व मादा, दोनों प्राप्त हुए हैं।

योग के प्रोत्‍साहन और विकास में असाधारण योगदान के लिए प्रधानमंत्री पुरस्‍कार 2018

वर्ष 2018 के लिए योग के प्रोत्‍साहन और विकास में असाधारण योगदान के लिए नासिक के श्री विश्‍वास मांडलिक और योग संस्‍थान, मुम्‍बई को प्रधानमंत्री का पुरस्‍कार (Prime Minister’s Award for outstanding contribution for promotion and development of Yoga for the year 2018.) दिया जाएगा।    21 जून 2016 को चंडीगढ़ में आयोजित दूसरे अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने योग के प्रोत्‍साहन और विकास के लिए पुरस्‍कार गठित करने की घोषणा की थी। आयुष मंत्रालय ने पुरस्‍कारों के लिए दिशा निर्देशों को विकसित किया।    2017 के लिए यह पुरस्‍कार राममणि आयंगर स्‍मारक योग संस्‍थान, पुणे को दिया गया था। पुरस्‍कार विजेताओं को एक ट्रॉफी, प्रमाण पत्र तथा नकद पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। नकद पुरस्‍कार राशि 25 लाख रूपये की होगी।     श्री विश्‍वास मांडलिक    श्री विश्‍वास मांडलिक ने प्रमाणिक पतंजलि और हठ योग का गूढ ज्ञान प्राप्‍त किया है। उन्‍होंने अध्‍ययन के जरिए भागवत गीता और उपनिषद का ज्ञान प्राप्‍त किया और पिछले 55 वर्षों के प्राचीन हस्‍तलिपियों का अध्‍ययन किया। उन्‍होंने 1978 में योग विधा धाम की पहली शाखा की स्‍थापना की। आज देश में इसके 160 केन्‍द्र हैं। उन्‍होंने योग शिक्षा के लिए 1983 में योग संस्‍थान – योग विद्या गुरूगुल की स्‍थापना की। उन्‍होंने 1994 में भारत के दूर दराज के हिस्‍सों में योग को लोकप्रिय बनाने के लिए योग चैतन्‍य सेवा प्रतिष्‍ठान, ट्रस्‍ट की स्‍थापना की। उन्‍होंने 42 पुस्‍तके लिखी और विभिन्‍न प्रशिक्षण पाठयक्रमों को कवर करते हुए 300 सीडी बनाये।     योग संस्‍थान, मुम्‍बई    श्री योगेन्‍द्र जी द्वारा 1918 में स्‍थापित योग संस्‍थान, मुम्‍बई के 100 वर्ष पूरे हो गये हैं और संस्‍थान ने अपनी इस यात्रा में 10 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को छुआ है। संस्‍थान ने 5000 से अधिक योग शिक्षक तैयार किये हैं और 500 से अधिक प्रकाशन कार्य किये हैं। योग संस्‍थान ने पिछले 10 दशकों में समग्र योग के प्रोत्‍साहन और विकास में योगदान दिया है और स्‍थानीय तथा विश्‍व स्‍तर पर समाज के प्रत्‍येक वर्ग की सेवा की है।

वर्ष 2018 के लिए योग के प्रोत्‍साहन और विकास में असाधारण योगदान के लिए नासिक के श्री विश्‍वास मांडलिक और योग संस्‍थान, मुम्‍बई को प्रधानमंत्री का पुरस्‍कार (Prime Minister’s Award for outstanding contribution for promotion and development of Yoga for the year 2018.) दिया जाएगा।

21 जून 2016 को चंडीगढ़ में आयोजित दूसरे अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने योग के प्रोत्‍साहन और विकास के लिए पुरस्‍कार गठित करने की घोषणा की थी। आयुष मंत्रालय ने पुरस्‍कारों के लिए दिशा निर्देशों को विकसित किया।

2017 के लिए यह पुरस्‍कार राममणि आयंगर स्‍मारक योग संस्‍थान, पुणे को दिया गया था। पुरस्‍कार विजेताओं को एक ट्रॉफी, प्रमाण पत्र तथा नकद पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। नकद पुरस्‍कार राशि 25 लाख रूपये की होगी। 

श्री विश्‍वास मांडलिक

श्री विश्‍वास मांडलिक ने प्रमाणिक पतंजलि और हठ योग का गूढ ज्ञान प्राप्‍त किया है। उन्‍होंने अध्‍ययन के जरिए भागवत गीता और उपनिषद का ज्ञान प्राप्‍त किया और पिछले 55 वर्षों के प्राचीन हस्‍तलिपियों का अध्‍ययन किया। उन्‍होंने 1978 में योग विधा धाम की पहली शाखा की स्‍थापना की। आज देश में इसके 160 केन्‍द्र हैं। उन्‍होंने योग शिक्षा के लिए 1983 में योग संस्‍थान – योग विद्या गुरूगुल की स्‍थापना की। उन्‍होंने 1994 में भारत के दूर दराज के हिस्‍सों में योग को लोकप्रिय बनाने के लिए योग चैतन्‍य सेवा प्रतिष्‍ठान, ट्रस्‍ट की स्‍थापना की। उन्‍होंने 42 पुस्‍तके लिखी और विभिन्‍न प्रशिक्षण पाठयक्रमों को कवर करते हुए 300 सीडी बनाये। 

योग संस्‍थान, मुम्‍बई

श्री योगेन्‍द्र जी द्वारा 1918 में स्‍थापित योग संस्‍थान, मुम्‍बई के 100 वर्ष पूरे हो गये हैं और संस्‍थान ने अपनी इस यात्रा में 10 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को छुआ है। संस्‍थान ने 5000 से अधिक योग शिक्षक तैयार किये हैं और 500 से अधिक प्रकाशन कार्य किये हैं। योग संस्‍थान ने पिछले 10 दशकों में समग्र योग के प्रोत्‍साहन और विकास में योगदान दिया है और स्‍थानीय तथा विश्‍व स्‍तर पर समाज के प्रत्‍येक वर्ग की सेवा की है।

मेघालय की राजधानी शिलांग का चयन 100वीं स्मार्ट सिटी


मेघालय की राजधानी शिलांग का चयन 100वीं स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है।

➤ शिलांग द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्ताव के आकलन के बाद ही इस शहर का चयन किया गया है।    ➤ अब तक संबंधित प्रतिस्पर्धा के चार दौर में 99 स्मार्ट सिटी का चयन किया गया था और शिलांग का चयन की घोषणा के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 स्मार्ट सिटी के चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।    ➤ इससे पहले जनवरी 2016 में 20 शहरों, मई 2016 में 13 शहरों, सितम्बर 2016 में 27 शहरों, जून 2017 में 30 शहरों और जनवरी 2018 में 9 शहरों का चयन किया गया था।    ➤ शिलांग के चयन के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अंतिम रूप से चयनित 100 स्मार्ट सिटी में कुल प्रस्तावित निवेश 2,05,018 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

➤ शिलांग द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्ताव के आकलन के बाद ही इस शहर का चयन किया गया है।

➤ अब तक संबंधित प्रतिस्पर्धा के चार दौर में 99 स्मार्ट सिटी का चयन किया गया था और शिलांग का चयन की घोषणा के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 स्मार्ट सिटी के चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई है।

➤ इससे पहले जनवरी 2016 में 20 शहरों, मई 2016 में 13 शहरों, सितम्बर 2016 में 27 शहरों, जून 2017 में 30 शहरों और जनवरी 2018 में 9 शहरों का चयन किया गया था।

➤ शिलांग के चयन के साथ ही स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अंतिम रूप से चयनित 100 स्मार्ट सिटी में कुल प्रस्तावित निवेश 2,05,018 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

Wednesday, 20 June 2018

जीवनसाथी चुनने का अधिकार

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मार्च, 2018 को दिए एक निर्णय के तहत ‘चुनने के अधिकार’ (Right to Choose) को मौलिक अधिकार माना है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश ए.एम. खानविल्कर और न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड की तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा है कि एक बार जब दो वयस्क व्यक्ति विवाह में प्रवेश करने के लिए सहमत हों तो परिवार या समुदाय या कबीले की सहमति जरूरी नहीं। राज्य या पितृसत्तात्मक सर्वोच्चता द्वारा विवाह करने की सहमति व्यक्त करने वाले वयस्कों को रोकना अवैध है। जब दो वयस्क एक-दूसरे को जीवन-साथी के रूप में चुनते हैं, तो यह उनकी पसंद की एक अभिव्यक्ति है, जो संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत शामिल है।    पृष्ठभूमि    शक्तिवाहिनी नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को सम्मान के लिए अपराधों (Honour Killings) से निपटने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाने के लिए निर्देश मांगा गया था। देश में विशेषकर उत्तर-भारत में बढ़ रही इस प्रकार की हिंसक गतिविधियों को देखते हुए इस संस्था ने एक याचिका दाखिल की थी।    सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय    शक्तिवाहिनी बनाम भारत संघ एवं अन्य (Shakti Vahini Versus Union of India and Others) वाद में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा स्वयं का फैसला फ्रांसीसी दार्शनिक और चिंतक सिमोन वेल (Simone Weil) के एक उद्धरण से शुरू होता है, ‘‘स्वतंत्रता शब्द को ठोस अर्थ में लेने पर इसमें चयन करने की क्षमता शामिल होती है’’ (Liberty, taking the word in its concrete sense consists in the ability to choose)। वर्ग सम्मान, जो कुछ भी माना जाता है, वह किसी व्यक्ति की पसंद को कम नहीं कर सकता, जिसे वह हमारे अनुकंपित संविधान के तहत आनंद लेने का हकदार है।    दो वयस्कों द्वारा विवाह करने के लिए परिवार/समुदाय/कबीले की अनावश्यक सहमति पर न्यायालय ने यह भी कहा कि एक बार दो वयस्क व्यक्ति के विवाह में प्रवेश करने के लिए सहमत हो जाने पर परिवार या समुदाय या कबीले की सहमति जरूरी नहीं है। खंडपीठ ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं-    निवारक उपाय (Preventive Steps)    राज्य सरकारों को तुरंत उन जिलों, उप-प्रभागों और/या गांवों की पहचान करनी चाहिए जहां पिछले पांच वर्षों में ऑनर किलिंग अथवा खाप पंचायत की सभा के उदाहरण देखने को मिले हैं। संबंधित राज्यों के गृह विभाग के सचिव यह सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को यह निर्देश दे कि चिह्नित क्षेत्रों के पुलिस स्टेशन के प्रभावी अतिरिक्त सतर्कता बरतें, यदि कोई अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह का मामला सामने आता है। यदि कहीं खाप पंचायत की प्रस्तावित सभा के बारे में किसी पुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को सूचना प्राप्त हो, तो उसे तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करेंगे। ऐसी जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस उपाधीक्षक तुरंत खाप पंचायत के सदस्यों के साथ सहभागिता करके यह बताएंगे कि ऐसी बैठक/सभा आयोजित करने की कानून द्वारा अनुमति नहीं है। इसके बावजूद भी अगर खाप पंचायत की बैठक आयोजित की जाती है, तो पुलिस उपाधीक्षक व्यक्तिगत रूप से बैठक के दौरान उपस्थित रहेंगे और सभा पर यह प्रभाव डालेंगे कि उस दंपति अथवा जोड़े के परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। सभा के सदस्यों की चर्चा और भागीदारी की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए, जिसके आधार पर कानून लागू करने वाली मशीनरी उचित कार्रवाई कर सके। पुलिस उपाधीक्षक को ऐसा लगता है कि दंपति या उसके परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, तो वह तुरंत जिला मजिस्ट्रेट/उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को संबंधित क्षेत्र के सक्षम प्राधिकारी सी.आर.पी.सी. की धारा 144 के तहत निवारक कदम उठाने के आदेश देने के लिए प्रस्ताव करेगा, साथ  ही सी.आर.पी.सी. की धारा 151 के तहत सभा में भागीदारी करने वालों की गिरफ्तारी भी।  उपचारात्मक उपाय (Remedial Measures)  राज्य पुलिस द्वारा उठाए गए निवारक उपायों के बावजूद यदि स्थानीय पुलिस के संज्ञान में आता है कि खाप पंचायत ने किसी अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े/परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आदेश दिया है, तो उस क्षेत्र के पुलिस अधिकारी के पास तुरंत भारतीय दंड संहिता के अधीन धारा 141, 143 तथा धारा 506 के साथ पठित धारा 503 के तहत एफ.आई.आर. दर्ज करने का कारण होगा। एफ.आई.आर. के बाद पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक को एक साथ सूचना प्रदान की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगा कि अपराध की प्रभावी जांच हो रही है और तर्कसंगत निर्णय लिया गया है। युगल/परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस अधीक्षक को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ इस तरह के युगल/परिवार के लिए खतरे से संबंधित शिकायत का निपटारा करना चाहिए।  दंडात्मक उपाय (Punitive Measures)  कोई भी पुलिस अधिकारी या जिला अधिकारी/अधिकारियों द्वारा निर्देशों का पालन करने की विफलता को जानबूझकर लापरवाही या कदाचार माना जाएगा, जिसके लिए सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। यह 6 महीने के अंदर ही कर ली जाएगी। अंतर-जातीय विवाह वाले 4 युगलों के लिए उत्पीड़न की शिकायतों के लिए राज्य सरकार प्रत्येक जिले में विशेष सेल बनाएगी, जिसमें पुलिस अधीक्षक, जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला आदि-द्रविड़ कल्याण अधिकारी शामिल होंगे। ये विशेष सेल इस तरह की शिकायतों को प्राप्त करने और पंजीकरण करने के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन सुविधा प्रदान करेंगे तथा युगलों को आवश्यक सहायता/सलाह और सुरक्षा प्रदान करेंगे। युगलों के खिलाफ ऑनर किलिंग अथवा हिंसा के लिए निर्धारित न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष मुकदमा चलाया जाएगा। मुकदमे को अपराध के संज्ञान लेने की तिथि से 6 महीने के अंदर निस्तारित किया जाएगा।  निष्कर्ष    निरंतर बढ़ रही ऑनर किलिंग की घटनाओं के मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय है। वर्ष 2014 से 2016 के मध्य ऑनर किलिंग के 288 मामले संज्ञान में आए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में  ऑनर किलिंग के 28 मामले, वर्ष 2015 में 192 मामले तथा वर्ष 2016 में 68 मामले संज्ञान में आए। ऐसी स्थिति में जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चुनने के अधिकार (Right to Choose) को मौलिक अधिकार घोषित किया गया है, उम्मीद की जानी चाहिए ऑनर किलिंग जैसे आपराधिक कृत्यों को नियंत्रित किया जा सकेगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मार्च, 2018 को दिए एक निर्णय के तहत ‘चुनने के अधिकार’ (Right to Choose) को मौलिक अधिकार माना है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश ए.एम. खानविल्कर और न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड की तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा है कि एक बार जब दो वयस्क व्यक्ति विवाह में प्रवेश करने के लिए सहमत हों तो परिवार या समुदाय या कबीले की सहमति जरूरी नहीं। राज्य या पितृसत्तात्मक सर्वोच्चता द्वारा विवाह करने की सहमति व्यक्त करने वाले वयस्कों को रोकना अवैध है। जब दो वयस्क एक-दूसरे को जीवन-साथी के रूप में चुनते हैं, तो यह उनकी पसंद की एक अभिव्यक्ति है, जो संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत शामिल है।

पृष्ठभूमि

शक्तिवाहिनी नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को सम्मान के लिए अपराधों (Honour Killings) से निपटने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाने के लिए निर्देश मांगा गया था। देश में विशेषकर उत्तर-भारत में बढ़ रही इस प्रकार की हिंसक गतिविधियों को देखते हुए इस संस्था ने एक याचिका दाखिल की थी।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

शक्तिवाहिनी बनाम भारत संघ एवं अन्य (Shakti Vahini Versus Union of India and Others) वाद में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा द्वारा स्वयं का फैसला फ्रांसीसी दार्शनिक और चिंतक सिमोन वेल (Simone Weil) के एक उद्धरण से शुरू होता है, ‘‘स्वतंत्रता शब्द को ठोस अर्थ में लेने पर इसमें चयन करने की क्षमता शामिल होती है’’ (Liberty, taking the word in its concrete sense consists in the ability to choose)। वर्ग सम्मान, जो कुछ भी माना जाता है, वह किसी व्यक्ति की पसंद को कम नहीं कर सकता, जिसे वह हमारे अनुकंपित संविधान के तहत आनंद लेने का हकदार है।

दो वयस्कों द्वारा विवाह करने के लिए परिवार/समुदाय/कबीले की अनावश्यक सहमति पर न्यायालय ने यह भी कहा कि एक बार दो वयस्क व्यक्ति के विवाह में प्रवेश करने के लिए सहमत हो जाने पर परिवार या समुदाय या कबीले की सहमति जरूरी नहीं है। खंडपीठ ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं-

निवारक उपाय (Preventive Steps)
  • राज्य सरकारों को तुरंत उन जिलों, उप-प्रभागों और/या गांवों की पहचान करनी चाहिए जहां पिछले पांच वर्षों में ऑनर किलिंग अथवा खाप पंचायत की सभा के उदाहरण देखने को मिले हैं।
  • संबंधित राज्यों के गृह विभाग के सचिव यह सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को यह निर्देश दे कि चिह्नित क्षेत्रों के पुलिस स्टेशन के प्रभावी अतिरिक्त सतर्कता बरतें, यदि कोई अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह का मामला सामने आता है।
  • यदि कहीं खाप पंचायत की प्रस्तावित सभा के बारे में किसी पुलिस अधिकारी या जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को सूचना प्राप्त हो, तो उसे तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करेंगे।
  • ऐसी जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस उपाधीक्षक तुरंत खाप पंचायत के सदस्यों के साथ सहभागिता करके यह बताएंगे कि ऐसी बैठक/सभा आयोजित करने की कानून द्वारा अनुमति नहीं है।
  • इसके बावजूद भी अगर खाप पंचायत की बैठक आयोजित की जाती है, तो पुलिस उपाधीक्षक व्यक्तिगत रूप से बैठक के दौरान उपस्थित रहेंगे और सभा पर यह प्रभाव डालेंगे कि उस दंपति अथवा जोड़े के परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। सभा के सदस्यों की चर्चा और भागीदारी की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए, जिसके आधार पर कानून लागू करने वाली मशीनरी उचित कार्रवाई कर सके।
  • पुलिस उपाधीक्षक को ऐसा लगता है कि दंपति या उसके परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, तो वह तुरंत जिला मजिस्ट्रेट/उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को संबंधित क्षेत्र के सक्षम प्राधिकारी सी.आर.पी.सी. की धारा 144 के तहत निवारक कदम उठाने के आदेश देने के लिए प्रस्ताव करेगा, साथ  ही सी.आर.पी.सी. की धारा 151 के तहत सभा में भागीदारी करने वालों की गिरफ्तारी भी।

उपचारात्मक उपाय (Remedial Measures)
  • राज्य पुलिस द्वारा उठाए गए निवारक उपायों के बावजूद यदि स्थानीय पुलिस के संज्ञान में आता है कि खाप पंचायत ने किसी अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े/परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आदेश दिया है, तो उस क्षेत्र के पुलिस अधिकारी के पास तुरंत भारतीय दंड संहिता के अधीन धारा 141, 143 तथा धारा 506 के साथ पठित धारा 503 के तहत एफ.आई.आर. दर्ज करने का कारण होगा।
  • एफ.आई.आर. के बाद पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक को एक साथ सूचना प्रदान की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगा कि अपराध की प्रभावी जांच हो रही है और तर्कसंगत निर्णय लिया गया है।
  • युगल/परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
  • जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस अधीक्षक को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ इस तरह के युगल/परिवार के लिए खतरे से संबंधित शिकायत का निपटारा करना चाहिए।

दंडात्मक उपाय (Punitive Measures)
  • कोई भी पुलिस अधिकारी या जिला अधिकारी/अधिकारियों द्वारा निर्देशों का पालन करने की विफलता को जानबूझकर लापरवाही या कदाचार माना जाएगा, जिसके लिए सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। यह 6 महीने के अंदर ही कर ली जाएगी।
  • अंतर-जातीय विवाह वाले 4 युगलों के लिए उत्पीड़न की शिकायतों के लिए राज्य सरकार प्रत्येक जिले में विशेष सेल बनाएगी, जिसमें पुलिस अधीक्षक, जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला आदि-द्रविड़ कल्याण अधिकारी शामिल होंगे।
  • ये विशेष सेल इस तरह की शिकायतों को प्राप्त करने और पंजीकरण करने के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन सुविधा प्रदान करेंगे तथा युगलों को आवश्यक सहायता/सलाह और सुरक्षा प्रदान करेंगे।
  • युगलों के खिलाफ ऑनर किलिंग अथवा हिंसा के लिए निर्धारित न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष मुकदमा चलाया जाएगा। मुकदमे को अपराध के संज्ञान लेने की तिथि से 6 महीने के अंदर निस्तारित किया जाएगा।

निष्कर्ष

निरंतर बढ़ रही ऑनर किलिंग की घटनाओं के मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय है। वर्ष 2014 से 2016 के मध्य ऑनर किलिंग के 288 मामले संज्ञान में आए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में  ऑनर किलिंग के 28 मामले, वर्ष 2015 में 192 मामले तथा वर्ष 2016 में 68 मामले संज्ञान में आए। ऐसी स्थिति में जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चुनने के अधिकार (Right to Choose) को मौलिक अधिकार घोषित किया गया है, उम्मीद की जानी चाहिए ऑनर किलिंग जैसे आपराधिक कृत्यों को नियंत्रित किया जा सकेगा।

अनुकृति वास ने जीता मिस इंडिया 2018 का खिताब

तमिलनाडु की अनुकृति वास ने 19 जून 2018 को ‘फेमिना मिस इंडिया 2018’ का खिताब जीता। अनुकृति वास ने 29 प्रतियोगियों को हरा कर इस खिताब को जीता। इस प्रतियोगिता में मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने अनुकृति वास को ताज पहनाया। अनुकृति वास इससे पहले मिस तमिलनाडू 2018 का खिताब जीता था।    मुंबई में आयोजित हुए इस कॉन्टेस्ट में हरियाणा की रहने वाली मीनाक्षी चौधरी फर्स्ट रनर-अप बनीं और सेकेंड रनर-अप आंध्र प्रदेश की रहने वाली श्रेया राव बनीं। वहीं दिल्ली की रहने वाली गायत्री भारद्वाज, झारखंड की रहने वाली स्टेफी पटेल टॉप 5 में शामिल थीं।    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व    मिस इंडिया की विजेता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। कांटेस्ट की दोनों रनरअप भी मिस ग्रैंड इंटरनेशनल 2018 और मिस यूनाइटेड कॉन्टिनेंट्स 2018 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इससे पहले मिस इंडिया 2017 की विजेता मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड का ताज जीत चुकी हैं। प्रियंका चोपड़ा के ताज जीतने के 17 साल बाद किसी भारतीय ने यह उपलब्धि हासिल किया था।    इस समारोह के जज पैनल में बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा, अभिनेता बॉबी देओल, कुनाल कपूर, क्रिकेटर इरफान पठान और के.एल राहुल शामिल थे।    अनुकृति वास  अनुकृति वास तमिलनाडु की रहने वाली हैं। अनुकृति वास पेशे से खिलाड़ी और डांसर हैं। अनुकृति वास फिलहाल फ्रेंच भाषा में बीए कर रही हैं। उन्हें संगीत और नृत्य पसंद है और राज्य स्तर पर खेल प्रतिस्पर्धाओं में भी हिस्सा ले चुकी हैं। वे एक सफल सुपर मॉडल बनना चाहती हैं। मॉडलिंग और एक्टिंग में दिलचस्पी रखने वाली अनुकृति अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।  फेमिना मिस इंडिया    मिस इंडिया अथवा फेमिना मिस इंडिया भारत का राष्ट्रीय सौन्दर्यता पिगेंट है जो वर्ष में एकबार होता है। इसमें  विजेता बनने के पश्चात ही भारतीय सुन्दरी को अन्तर्राष्ट्रीय सौन्दर्य प्रतियोगिता मे भाग लेने की अनुमति दी जाती है। विजेता को ब्रह्माण्ड सुन्दरी प्रतियोगिता, उपविजेता को विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति मिलती है।

तमिलनाडु की अनुकृति वास ने 19 जून 2018 को ‘फेमिना मिस इंडिया 2018’ का खिताब जीता। अनुकृति वास ने 29 प्रतियोगियों को हरा कर इस खिताब को जीता। इस प्रतियोगिता में मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने अनुकृति वास को ताज पहनाया। अनुकृति वास इससे पहले मिस तमिलनाडू 2018 का खिताब जीता था।

मुंबई में आयोजित हुए इस कॉन्टेस्ट में हरियाणा की रहने वाली मीनाक्षी चौधरी फर्स्ट रनर-अप बनीं और सेकेंड रनर-अप आंध्र प्रदेश की रहने वाली श्रेया राव बनीं। वहीं दिल्ली की रहने वाली गायत्री भारद्वाज, झारखंड की रहने वाली स्टेफी पटेल टॉप 5 में शामिल थीं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व

मिस इंडिया की विजेता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। कांटेस्ट की दोनों रनरअप भी मिस ग्रैंड इंटरनेशनल 2018 और मिस यूनाइटेड कॉन्टिनेंट्स 2018 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इससे पहले मिस इंडिया 2017 की विजेता मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड का ताज जीत चुकी हैं। प्रियंका चोपड़ा के ताज जीतने के 17 साल बाद किसी भारतीय ने यह उपलब्धि हासिल किया था।

इस समारोह के जज पैनल में बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा, अभिनेता बॉबी देओल, कुनाल कपूर, क्रिकेटर इरफान पठान और के.एल राहुल शामिल थे।

अनुकृति वास
  • अनुकृति वास तमिलनाडु की रहने वाली हैं।
  • अनुकृति वास पेशे से खिलाड़ी और डांसर हैं।
  • अनुकृति वास फिलहाल फ्रेंच भाषा में बीए कर रही हैं।
  • उन्हें संगीत और नृत्य पसंद है और राज्य स्तर पर खेल प्रतिस्पर्धाओं में भी हिस्सा ले चुकी हैं।
  • वे एक सफल सुपर मॉडल बनना चाहती हैं।
  • मॉडलिंग और एक्टिंग में दिलचस्पी रखने वाली अनुकृति अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।

फेमिना मिस इंडिया

मिस इंडिया अथवा फेमिना मिस इंडिया भारत का राष्ट्रीय सौन्दर्यता पिगेंट है जो वर्ष में एकबार होता है। इसमें  विजेता बनने के पश्चात ही भारतीय सुन्दरी को अन्तर्राष्ट्रीय सौन्दर्य प्रतियोगिता मे भाग लेने की अनुमति दी जाती है। विजेता को ब्रह्माण्ड सुन्दरी प्रतियोगिता, उपविजेता को विश्व सुन्दरी प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति मिलती है।

विश्व की सबसे उम्रदराज सुमात्रा ओरंगटैन पुआन का निधन

विश्व का सबसे उम्रदराज सुमात्राई ओरंगटैन ‘पुआन’ ( world’s oldest known Sumatran orangutan Puan) का 62 वर्ष की आयु में आस्ट्रेलिया के पर्थ जैविक उद्यान में निधन हो गया।  पुआन, जिसका इंडोनेशियाई में अर्थ होता है लेडी, अपने पीछे 54 उत्तराधिकारियों छोड़ गई है जिनमें 11 बच्चे शामिल हैं। पुआन के बच्चे यूरोप, यूएसए, आस्ट्रेलिया तथा सुमात्र के जंगलों में फैले हुए हैं। पुआन का जन्म 1956 में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर हुआ था। मलेशिया ने 1968 में इसे पर्थ जैविक उद्यान को उपहार के रूप में दिया था। ज्ञातव्य है कि मादा ओरंगटैन शायद ही 50  वर्ष से अधिक जीवित रहती हैं और इसी कारण 2016 में इसे गिनिज बुक ऑफ रिकॉर्ड में सबसे प्राचीनतम सुमात्राई ओरंगटैन का दर्जा दिया गया था। ओरंगटैन की तीन प्रजातियां हैं; सुमात्राई, बोर्नियाई व तापानुली। ओरंगटैन की सबसे नई प्रजाति पोंगो तापानुलिएनसिस (तापानुली ओरंगटैन) की नवंबर 2017 में इंडोनेशिया के तापानुली पर्वतीय क्षेत्र में खोज की गई थी।

विश्व का सबसे उम्रदराज सुमात्राई ओरंगटैन ‘पुआन’ (world’s oldest known Sumatran orangutan Puan) का 62 वर्ष की आयु में आस्ट्रेलिया के पर्थ जैविक उद्यान में निधन हो गया।
  • पुआन, जिसका इंडोनेशियाई में अर्थ होता है लेडी, अपने पीछे 54 उत्तराधिकारियों छोड़ गई है जिनमें 11 बच्चे शामिल हैं।
  • पुआन के बच्चे यूरोप, यूएसए, आस्ट्रेलिया तथा सुमात्र के जंगलों में फैले हुए हैं।
  • पुआन का जन्म 1956 में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर हुआ था। मलेशिया ने 1968 में इसे पर्थ जैविक उद्यान को उपहार के रूप में दिया था।
  • ज्ञातव्य है कि मादा ओरंगटैन शायद ही 50  वर्ष से अधिक जीवित रहती हैं और इसी कारण 2016 में इसे गिनिज बुक ऑफ रिकॉर्ड में सबसे प्राचीनतम सुमात्राई ओरंगटैन का दर्जा दिया गया था।
  • ओरंगटैन की तीन प्रजातियां हैं; सुमात्राई, बोर्नियाई व तापानुली।
  • ओरंगटैन की सबसे नई प्रजाति पोंगो तापानुलिएनसिस (तापानुली ओरंगटैन) की नवंबर 2017 में इंडोनेशिया के तापानुली पर्वतीय क्षेत्र में खोज की गई थी।

Monday, 18 June 2018

विश्व स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन द्वारा पहली बार फ्लूक्वाड्री इन्फ्लूएंजा टीका को मंजूरी

सनोफी पास्त्युर ने फ्लूक्वाड्री नाम से इन्फ्लूएंजा का ऐसी टीका विकसित किया है जिसमें दो ए वारयस स्ट्रेन -H1N1 and H3N2, एवं दो बी वायरस स्ट्रेन-विक्टोरिया एवं यामागाता (Victoria and Yamagata) है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडियाा (डीसीजीआई) ने 18 से 64 वर्ष के वयस्कों के सक्रिय टीकाकरण के लिए इसे मई 2018 में अनुमति प्रदान की थी।    ➤ सनोफी की क्वाड्रीवैलेंट इन्फ्लूएंजा टीका को यूएसएफडीए (यूएस खाद्य एवं औषधि प्रशासन) ने वर्ष 2013 में अनुमति दे थी। फिलहाल इसे विश्व के 26 देशों में लाइसेंस मिला हुआ है।    ➤ ज्ञातव्य है कि इन्फ्लूएंजा की ट्रिवैलेंट टीका में दोनों ए सब-टाइप वारयस तथा एक बी सब-टाइप वायरस होता है किंतु क्वाड्रीवैलेंट, इन्फ्लूएंजा के खिलाफ क्वाड्रीवैलेंट अधिक सुरक्षा प्रदान करता है क्योंकि इसमें दोनों बी सब-टाइप वायरस निहित होता है। -विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मंजूरी दिए जाने से पहले इन्फ्लूएंजा के खिलाफ अधिकांश टीकाएं ट्रिवैलेंट हुआ करती थी और विकल्प के रूप में अलग से एक बी सब-टाइप वायरस स्ट्रेन टीका की अनुमति दी जाती थी। किंतु फरवरी 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार क्वाड्रीवैलेंट टीका को आधिकारिक तौर पर अनुमति प्रदान की थी।    ➤एच1एन1 के दो स्ट्रेन हैं; कैलिफोर्निया एवं मिशिगन (California and Michigan) जो इन्फ्लूएंजा के लिए उत्तरदायी हैं। भारत में आरंभ में मिशिगन स्ट्रेन सर्कुलेशन में था जिसका स्थान बाद में कैलिफोर्निया ने लिया। वर्ष 2018 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत सहित दक्षिणी गोलार्द्ध के लिए मिशिगन स्ट्रेन वाली टीका की संस्तुति दी है।    ➤ समन्वित रोग निगरानी परियोजना (Integrated Disease Surveillance Project: IDSP)) डेटा के अनुसार वर्ष 2011 से अब तक भारत में एच1एन1 के 97,000 मामले सामने आ चुके हैं और 71,00 लोगों की मौत हो चुकी है।

सनोफी पास्त्युर ने फ्लूक्वाड्री नाम से इन्फ्लूएंजा का ऐसी टीका विकसित किया है जिसमें दो ए वारयस स्ट्रेन -H1N1 and H3N2, एवं दो बी वायरस स्ट्रेन-विक्टोरिया एवं यामागाता (Victoria and Yamagata) है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडियाा (डीसीजीआई) ने 18 से 64 वर्ष के वयस्कों के सक्रिय टीकाकरण के लिए इसे मई 2018 में अनुमति प्रदान की थी।

➤ सनोफी की क्वाड्रीवैलेंट इन्फ्लूएंजा टीका को यूएसएफडीए (यूएस खाद्य एवं औषधि प्रशासन) ने वर्ष 2013 में अनुमति दे थी। फिलहाल इसे विश्व के 26 देशों में लाइसेंस मिला हुआ है।

➤ ज्ञातव्य है कि इन्फ्लूएंजा की ट्रिवैलेंट टीका में दोनों ए सब-टाइप वारयस तथा एक बी सब-टाइप वायरस होता है किंतु क्वाड्रीवैलेंट, इन्फ्लूएंजा के खिलाफ क्वाड्रीवैलेंट अधिक सुरक्षा प्रदान करता है क्योंकि इसमें दोनों बी सब-टाइप वायरस निहित होता है। -विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मंजूरी दिए जाने से पहले इन्फ्लूएंजा के खिलाफ अधिकांश टीकाएं ट्रिवैलेंट हुआ करती थी और विकल्प के रूप में अलग से एक बी सब-टाइप वायरस स्ट्रेन टीका की अनुमति दी जाती थी। किंतु फरवरी 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार क्वाड्रीवैलेंट टीका को आधिकारिक तौर पर अनुमति प्रदान की थी।

➤एच1एन1 के दो स्ट्रेन हैं; कैलिफोर्निया एवं मिशिगन (California and Michigan) जो इन्फ्लूएंजा के लिए उत्तरदायी हैं। भारत में आरंभ में मिशिगन स्ट्रेन सर्कुलेशन में था जिसका स्थान बाद में कैलिफोर्निया ने लिया। वर्ष 2018 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत सहित दक्षिणी गोलार्द्ध के लिए मिशिगन स्ट्रेन वाली टीका की संस्तुति दी है।

➤ समन्वित रोग निगरानी परियोजना (Integrated Disease Surveillance Project: IDSP)) डेटा के अनुसार वर्ष 2011 से अब तक भारत में एच1एन1 के 97,000 मामले सामने आ चुके हैं और 71,00 लोगों की मौत हो चुकी है।

मेसेडोनिया ने देश का नाम बदलकर 'उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य' रखा

मेसेडोनिया ने 17 जून 2018 को अपने देश का नाम बदलकर उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य (Republic of North Macedonia) रखने की घोषणा की है। मेसेडोनिया के इस निर्णय से ग्रीस के साथ उसका पिछले कई वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। दोनों देशों के मध्य हुई बातचीत से इस निर्णय पर समझौता किया गया।    उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम रखे जाने पर यूरोपियन यूनियन, संयुक्त राष्ट्र, यूनान एवं अन्य वैश्विक शक्तियों ने मेसेडोनिया के इस कदम का स्वागत किया है।    क्या होगा प्रभाव?  ग्रीस और उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम को लेकर हुए समझौते में स्पष्ट किया गया है कि नये मेसेडोनिया को पुरानी ग्रीक सभ्यता से संबंधित नहीं माना जाएगा। मेसेडोनिया को अब 'रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मेसेडोनिया' के नाम से जाना जाएगा। मेसेडोनियन भाषा में इसे सेवेर्ना मकदूनिया कहा जाएगा। नए नाम की आधिकारिक घोषणा से पहले मेसेडोनिया की जनता और ग्रीस की संसद की मंजूरी जरूरी होगी।  क्या था विवाद?  यूरोप के दो देशों ग्रीस और मेसेडोनिया ने 27 वर्ष से जारी विवाद सुलझाते हुए यह निर्णय लिया है। वर्ष 1991 में यूगोस्लाविया से अलग होकर नया देश रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया बना था। इसके दक्षिण में स्थित ग्रीस के कुछ हिस्सों को भी मेसेडोनिया के नाम से जाना जाता है। इस पर दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया था। ग्रीस के उत्तरी क्षेत्र का नाम भी मेसेडोनिया है और सिकंदर भी इसी क्षेत्र का रहने वाला था। इसी वजह से ग्रीस के नागरिक इस नाम को लेकर क्षुब्ध थे। ग्रीस का कहना था कि उसके हिस्से में आने वाला मेसेडोनिया यूनानी संस्कृति का प्रमुख भाग है। एक जैसे दो नामों की होने से लोगों को सही जानकारी प्रदान करने की दिशा में भ्रामक स्थिति पैदा होती है।

मेसेडोनिया ने 17 जून 2018 को अपने देश का नाम बदलकर उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य (Republic of North Macedonia) रखने की घोषणा की है। मेसेडोनिया के इस निर्णय से ग्रीस के साथ उसका पिछले कई वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। दोनों देशों के मध्य हुई बातचीत से इस निर्णय पर समझौता किया गया।

उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम रखे जाने पर यूरोपियन यूनियन, संयुक्त राष्ट्र, यूनान एवं अन्य वैश्विक शक्तियों ने मेसेडोनिया के इस कदम का स्वागत किया है।

क्या होगा प्रभाव?
  • ग्रीस और उत्तरी मेसेडोनिया गणराज्य नाम को लेकर हुए समझौते में स्पष्ट किया गया है कि नये मेसेडोनिया को पुरानी ग्रीक सभ्यता से संबंधित नहीं माना जाएगा।
  • मेसेडोनिया को अब 'रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मेसेडोनिया' के नाम से जाना जाएगा।
  • मेसेडोनियन भाषा में इसे सेवेर्ना मकदूनिया कहा जाएगा।
  • नए नाम की आधिकारिक घोषणा से पहले मेसेडोनिया की जनता और ग्रीस की संसद की मंजूरी जरूरी होगी।

क्या था विवाद?
  • यूरोप के दो देशों ग्रीस और मेसेडोनिया ने 27 वर्ष से जारी विवाद सुलझाते हुए यह निर्णय लिया है।
  • वर्ष 1991 में यूगोस्लाविया से अलग होकर नया देश रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया बना था।
  • इसके दक्षिण में स्थित ग्रीस के कुछ हिस्सों को भी मेसेडोनिया के नाम से जाना जाता है। इस पर दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया था।
  • ग्रीस के उत्तरी क्षेत्र का नाम भी मेसेडोनिया है और सिकंदर भी इसी क्षेत्र का रहने वाला था। इसी वजह से ग्रीस के नागरिक इस नाम को लेकर क्षुब्ध थे।
  • ग्रीस का कहना था कि उसके हिस्से में आने वाला मेसेडोनिया यूनानी संस्कृति का प्रमुख भाग है। एक जैसे दो नामों की होने से लोगों को सही जानकारी प्रदान करने की दिशा में भ्रामक स्थिति पैदा होती है।

Saturday, 16 June 2018

14 जून को विश्व रक्तदान दिवस

पूरी दुनिया में कहीं भी जरुरतमंद व्यक्ति के लिये रक्त-आधान और रक्त उत्पाद आधान की जरुरत को पूरा करने के लिये विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है। ये अभियान प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों की जान बचाता है और रक्त प्राप्त करने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक प्राकृतिक मुस्कुराहट देता है।    रक्त-आधान लंबे और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिये उन्हें प्रेरित करता है और कई प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी जीवन से जुड़े खतरों से पीड़ित मरीज को मदद प्रदान करता है।    रक्तदान को लेकर गलतफहमी    रक्त से आपकी जिन्दगी तो चलती ही है साथ ही कितने अन्य के जीवन को भी बचाया जा सकता है। विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अभी भी बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है और उस रक्त की भरपाई होने में महिनों लग जाते हैं।    इतना ही नहीं यह गलतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित रक्त देने से लोगों की रोगप्रतिकारक क्षमता कम होती है और उसे बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं। यहाँ भ्रम इस क़दर फैला हुआ है कि लोग रक्तदान का नाम सुनकर ही कॉप उठते हैं।    भारत में रक्तदान की स्थिति    विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी करीब 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज दम तोड़ देते हैं।

पूरी दुनिया में 14 जून 2018 को विश्व रक्तदान दिवस मनाया गया। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रक्त रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है।

इस दिन जागरूकता अभियान चलाया जाता है और लोगों को मुफ्त रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है। विश्व रक्तदान दिवस 2018 का थीम- “बी देयर फॉर समवन एल्स. गिभ ब्लड. शेयर लाइफ.” (Be there for someone else. Give blood. Share life).

विश्व रक्तदान दिवस

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1997 से प्रत्येक वर्ष 14 जून को 'विश्व रक्तदान दिवस' मनाया जाता है। वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली थी। इसके अंतर्गत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दें।इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़े। अबतक विश्व के लगभग 49 देशों ने ही इस पर अमल किया है।

14 जून ही रक्तदान दिवस क्यों?

महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्‍म 14 जून 1868 को हुआ था। उन्होंने मानव रक्‍त में उपस्थित एग्‍ल्‍युटिनि‍न की मौजूदगी के आधार पर रक्‍तकणों का ए, बी और ओ समूह में वर्गीकरण किया। इस वर्गीकरण ने चिकित्‍सा विज्ञान में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया। उनकी इसी खोज से आज करोड़ों से ज्यादा रक्तदान रोजाना होते हैं और लाखों की जिंदगियां बचाई जाती हैं। इस महत्‍वपूर्ण खोज के लिए ही कार्ल लैंडस्‍टाईन को वर्ष 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था।

रक्तदान कौन कर सकता हैं

18 से 65 साल की आयु के सभी स्वस्थ जिनका वजन 45 किग्रा और उससे अधिक है वह रक्तदान कर सकते हैं।

रक्तदान के फायदे

नियमित रक्तदान की आदत व्यक्ति को हाई कॉलेस्टोल, हार्ट प्रॉब्लम, हिमोग्लोबिन की कमी और मोटापा जैसी बीमारियों से बचा सकती है। इसके साथ ही रक्तदान से शरीर को आंतरिक रूप से भी स्वस्थ्य रखा जा सकता है। एक रक्तदाता चार लोगों की जिंदगियों को बचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित ब्लड डोनेशन करना हैल्दी रहने का एक अच्छा तरीका भी माना जाता है। ब्लड डोनेशन के बाद एक माह में ही नया ब्लड बन जाता है। नियमित रक्तदान करने से यूरिक एसिड और कोलेस्ट्रोल की मात्रा पर नियंत्रण रहता है। शरीर के अंदर से पुराना रक्त निकल जाने से नए खून का संचार होने लगता है, साथ ही नई लाल रक्त कोषिकाओं का उत्पादन होना शुरू हो जाता है।

स्वस्थ व्यक्ति हर तीसरे महीने रक्तदान

रक्तदान करने से शरीर में कोई कमी नहीं आती और कोई भी स्वस्थ व्यक्ति हर तीसरे महीने रक्तदान कर सकता है।

विश्व रक्त दाता दिवस क्यों मनाया जाता है?

पूरी दुनिया में कहीं भी जरुरतमंद व्यक्ति के लिये रक्त-आधान और रक्त उत्पाद आधान की जरुरत को पूरा करने के लिये विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है। ये अभियान प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों की जान बचाता है और रक्त प्राप्त करने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक प्राकृतिक मुस्कुराहट देता है।

रक्त-आधान लंबे और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिये उन्हें प्रेरित करता है और कई प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी जीवन से जुड़े खतरों से पीड़ित मरीज को मदद प्रदान करता है।

रक्तदान को लेकर गलतफहमी

रक्त से आपकी जिन्दगी तो चलती ही है साथ ही कितने अन्य के जीवन को भी बचाया जा सकता है। विश्व के इस सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अभी भी बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है और उस रक्त की भरपाई होने में महिनों लग जाते हैं।

इतना ही नहीं यह गलतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित रक्त देने से लोगों की रोगप्रतिकारक क्षमता कम होती है और उसे बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं। यहाँ भ्रम इस क़दर फैला हुआ है कि लोग रक्तदान का नाम सुनकर ही कॉप उठते हैं।

भारत में रक्तदान की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी करीब 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज दम तोड़ देते हैं।