Sunday, 22 July 2018

टोक्यो ओलंपिक 2020 का शुभंकर ‘मिराइतोवा’

  जापान की राजधानी टोक्यो में वर्ष 2020 में आयोजित होने वाले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक व पैरालंपिक खेलों के शुभंकरों (Mascot) की घोषणा 22 जुलाई, 2018 को गई।  टोक्यो ओलंपिक का शुभंकर है ‘मिराइतोवा’ (Miraitowa)। यह मिराइ व तोवा शब्दों से बना है। मिराइ का मतलब है भविष्य व तोवा का मतलब है अनंत या शाश्वत। इस प्रकार मिराइतोवा का मतलब है अनंत भविष्य। यह शुभंकर नीले रंग का है।  टोक्यो पैरालिंपिक 2020 का शुभंकर है ‘सोमाइटी’ (Someity)। यह गुलाबी रंग का चेरी ब्लॉसम है।  33वें टोक्यो ओलंपिक खेल 24 जुलाई से 9 अगस्त 2020 तक आयोजित होगा।

➤ जापान की राजधानी टोक्यो में वर्ष 2020 में आयोजित होने वाले ग्रीष्मकालीन ओलंपिक व पैरालंपिक खेलों के शुभंकरों (Mascot) की घोषणा 22 जुलाई, 2018 को गई।


➤ टोक्यो ओलंपिक का शुभंकर है ‘मिराइतोवा’ (Miraitowa)। यह मिराइ व तोवा शब्दों से बना है। मिराइ का मतलब है भविष्य व तोवा का मतलब है अनंत या शाश्वत। इस प्रकार मिराइतोवा का मतलब है अनंत भविष्य। यह शुभंकर नीले रंग का है।

➤ टोक्यो पैरालिंपिक 2020 का शुभंकर है ‘सोमाइटी’ (Someity)। यह गुलाबी रंग का चेरी ब्लॉसम है।

➤ 33वें टोक्यो ओलंपिक खेल 24 जुलाई से 9 अगस्त 2020 तक आयोजित होगा।

गवर्नेंस इंडेक्स: केरल टॉप पर, बिहार सबसे नीचे


देश में सबसे बेहतर तरीके से शासित राज्यों की सूची में केरल ने टॉप किया है। थिंक टैंक पब्लिक अफेयर्स सेंटर (पीएसी) द्वारा जारी पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स 2018 में केरल सबसे ऊपर तथा बिहार सबसे निचले स्थान पर है। 

बेंगलुरु स्थित पीएसी ने कहा, 'केरल ने लगातार तीसरे वर्ष सबसे बेहतर तरीके से शासित राज्यों की सूची में टॉप किया है।' इसमें केरल के बाद तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात सूची में क्रमश: दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें नंबर पर हैं। वहीं मध्य प्रदेश, झारखंड तथा बिहार सबसे निचले पायदानों पर हैं।

पीएसी के चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए विकास संबंधी चुनौतियों का समाधान करना जरुरी है। वहीं इसरो के पूर्व चेयरमैन कस्तूरीरंगन ने कहा, 'पीएआई के जरिए भारत के राज्यों के प्रदर्शन का आंकलन किया जाता है।' 

इस लिस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव विकास को सपॉर्ट, सामाजिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, महिलाओं-बच्चों की स्थिति का आंकलन किया जाता है। वहीं बच्चों के लिए बेहतर जीवनयापन परिस्थितियों की लिस्ट में केरल, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम टॉप पर रहे।

वैश्विक दासता सूचकांक 2018-भारत की 53वीं रैंकिंग

  वाक फ्री फाउंडेशन द्वारा जारी ‘वैश्विक दासता सूचकांक 2018’ के अनुसार पूरे विश्व में उत्तर कोरिया में सर्वाधिक आधुनिक दासता (प्रतिशत दृष्टिकोण से) है। उत्तर कोरिया की 26 मिलियन आबादी में से 2.6 मिलियन यानी आबादी का 10 प्रतिशत आधुनिक दासता का शिकार है।    ➽ इस सूचकांक में उत्तर कोरिया को सर्वोच्च रैंकिंग प्राप्त हुई है। यहां प्रति एक हजार आबादी में 104.6 लोग दासता के शिकार हैं।    ➽ इस दासता सूचकांक के अनुसार भारत में एक हजार आबादी पर 6.1 लोग दासता के शिकार हैं। 167 देशों की सूची में भारत की रैंकिंग 53वीं हैं। हालांकि संख्या के हिसाब से देखा जाए तो भारत में आधुनिक दासता के शिकार लोगों की कुल संख्या 80 लाख है जो कि विश्व में सर्वाधिक है। परंतु सूचकांक की रैंकिंग आबादी की प्रतिशतता के दृष्टिकोण से तय की गई है।    ➽ भारत सरकार ने इस सूचकांक की रैंकिंग व रिपोर्ट की आलोचना की है। महिला एवं बाल विकास मंत्रलय के अनुसार बलात श्रम की स्पष्ट व्याख्या नहीं है और इसकी विस्तृत व्याख्या की जरूरत है।    ➽ इस सूचकांक में जापान को निम्नतम रैंकिंग प्राप्त हुई है जो कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है। अर्थात पूरे विश्व में जापान में आधुनिक दासता सबसे कम है। यहां प्रति एक हजार आबादी पर दासता महज 0.3 है।    ➽ सूचकांक में चीन की रैंकिंग 111वीं है और वहां प्रति एक हजार आबादी में 2.8 लोग दास हैं।    ➽ सूचकांक में आधुनिक दासता को बलात श्रम हेतु हिंसा का प्रयोग, धोखा व धमकी का सहारा लेना, यौन उत्पीड़न एवं घरेलू नौकर के साथ बर्तााव के रूप में परिभाषित किया गया है।

वाक फ्री फाउंडेशन द्वारा जारी ‘वैश्विक दासता सूचकांक 2018’ के अनुसार पूरे विश्व में उत्तर कोरिया में सर्वाधिक आधुनिक दासता (प्रतिशत दृष्टिकोण से) है। उत्तर कोरिया की 26 मिलियन आबादी में से 2.6 मिलियन यानी आबादी का 10 प्रतिशत आधुनिक दासता का शिकार है।

➽ इस सूचकांक में उत्तर कोरिया को सर्वोच्च रैंकिंग प्राप्त हुई है। यहाँ प्रति एक हजार आबादी में 104.6 लोग दासता के शिकार हैं।

➽ इस दासता सूचकांक के अनुसार भारत में एक हजार आबादी पर 6.1 लोग दासता के शिकार हैं। 167 देशों की सूची में भारत की रैंकिंग 53वीं हैं। हालांकि संख्या के हिसाब से देखा जाए तो भारत में आधुनिक दासता के शिकार लोगों की कुल संख्या 80 लाख है जो कि विश्व में सर्वाधिक है। परंतु सूचकांक की रैंकिंग आबादी की प्रतिशतता के दृष्टिकोण से तय की गई है।

➽ भारत सरकार ने इस सूचकांक की रैंकिंग व रिपोर्ट की आलोचना की है। महिला एवं बाल विकास मंत्रलय के अनुसार बलात श्रम की स्पष्ट व्याख्या नहीं है और इसकी विस्तृत व्याख्या की जरूरत है।

➽ इस सूचकांक में जापान को निम्नतम रैंकिंग प्राप्त हुई है जो कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है। अर्थात पूरे विश्व में जापान में आधुनिक दासता सबसे कम है। यहां प्रति एक हजार आबादी पर दासता महज 0.3 है।

➽ सूचकांक में चीन की रैंकिंग 111वीं है और वहाँ प्रति एक हजार आबादी में 2.8 लोग दास हैं।

➽ सूचकांक में आधुनिक दासता को बलात श्रम हेतु हिंसा का प्रयोग, धोखा व धमकी का सहारा लेना, यौन उत्पीड़न एवं घरेलू नौकर के साथ बर्तााव के रूप में परिभाषित किया गया है।

100 रुपये का नया नोट होगा जारी, जानिए विशेषताएं


भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही 100 रुपये के नये नोट जारी करेगा। यह नोट भी महात्मा गांधी सीरीज का ही होगा जिस पर वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे। यह नोट बैंगनी रंग का होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी बयान के मुताबिक इस नए नोट के पिछले हिस्से पर गुजरात के पाटन जिले में स्थित 'रानी की वाव' का चित्र होगा जो भारत की विरासत को प्रदर्शित करेगा। इसका आकार 66 mm × 142 mm का होगा।

नोट का अगला भाग
  • छोटे अक्षरों में 'RBI', 'भारत', 'India' और '100' लिखा हुआ है।
  • सुरक्षा के लिहाज से इसमें सिक्योरिटी थ्रेड भी लगाई गई है जिसमें कलर शिफ्ट भी है।
  • नोट पर अंकों में ही 100 लिखा हुआ है।
  • देवनागरी में भी 100 अंक लिखा हुआ है।
  • महात्मा गांधी की तस्वीर मध्य में लगी हुई है।
  • छोटे शब्द जैसे आरबीआई, भारत, इंडिया और 100 लिखे गए हैं।
  • नोट को टेढ़ा करने में उसके धागे का हरा रंग नीला हो जाता है। इस धागे में भारत और RBI लिखा हुआ है।
  • आरबीआई के गवर्नर का गारंटी देने वाला कथन महात्मा गांधी की तस्वीर के दाहिने ओर लिखा हुआ है।
  • नोट के दाहिने हिस्से में अशोक स्तम्भ है।


नोट का पिछला भाग
  • नोट प्रकाशन वर्ष अंकित है।
  • स्वच्छ भारत का लोगो तथा नारा।
  • भाषा का पैनल यथावत रखा गया है।
  • रानी की वाव का चित्र है।
  • देवनागरी लिपी में 100 अंक लिखा गया है।

रानी की वाव क्या है?


"रानी की वाव" गुजरात के पाटन जिले में स्थित एक प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) है जिसे यूनेस्को ने वर्ष 2014 में विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया था। रानी की वाव भूमिगत जल संसाधन और जल संग्रह प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो भारतीय महाद्वीप में में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का बेहतरीन उदहारण है। सात मंजिला इस वाव में मारू-गुर्जर स्‍थापत्‍य शैली का सुन्‍दर उपयोग किया गया है जो जल संग्रह की तकनीक, बारीकियों और अनुपातों की क्षमता की जटिलता को दर्शाता है।

एमिली शेंकल

  यह कहानी एक जर्मन महिला की है, जिनका नाम था (Emilie_Schenkl) एमिली शेंकल ।    हमें नहीं पता आपमें से कितनों ने ये नाम सुना है, और अगर नहीं सुना है तो आप दोषी नहीं । इस नाम को इतिहास से खुरच कर निकाल फेंका गया।    श्रीमती एमिली शेंकल ने 1937 में भारत माँ के लाड़ले बेटे सुभाष चन्द्र बोस से विवाह किया और एक ऐसे देश को ससुराल के रूप में चुना जिसने कभी इस बहू का स्वागत नहीं किया ....न बहू के आगमन में किसी ने मंगल गीत गाये और न उसकी बेटी के जन्म पर कोई सोहर गायी गयी। कभी कहीं जन मानस में चर्चा तक नहीं हुई कि वो कैसे जीवन गुजार रही हैं।    सात साल के कुल वैवाहिक जीवन में सिर्फ 3 साल ही उन्हें अपने पति के साथ रहने का अवसर मिला फिर उन्हें और नन्हीं सी बेटी को छोड़ पति देश के लिए लड़ने चला आए ........ इस वायदे के साथ कि पहले देश को आजाद करा लूँ। फिर तो सारा जीवन तुम्हारे साथ बिताना ही है। पर ऐसा हो न सका और 1945 में एक कथित विमान दुर्घटना में वो लापता हो गए।    उस समय एमिली शेंकल बेहद युवा थीं। चाहतीं तो यूरोपीय संस्कृति के हिसाब से दूसरा विवाह कर सकती थी।पर उन्होंने ऐसा नहीं किया और सारा जीवन बेहद कड़ा संघर्ष करते हुए बिताया ..... एक तारघर की मामूली क्लर्क की नौकरी और बेहद कम वेतन के साथ वो अपनी बेटी को पालती रहीं। न किसी से शिकायत की न कुछ माँगा।    भारत भी तब तक आजाद हो चुका था। और वे चाहतीं थीं कि कम से कम एक बार उस देश में आएँ जिसकी आजादी के लिए उनके पति ने जीवन न्योछावर कर दिया था।    लेकिन भारत का एक राजनीतिक परिवार इतना भयभीत था की .......    आखिरकार बेहद कठिनाइयों भरे और किसी भी तरह की चकाचौंध से दूर रहकर बेहद साधारण जीवन गुजार कर श्रीमती एमिली शेंकल बोस ने मार्च 1996 में गुमनामी में ही जीवन त्याग दिया।

यह कहानी एक जर्मन महिला की है, जिनका नाम था (Emilie Schenkl) एमिली शेंकल।

हमें नहीं पता आपमें से कितनों ने ये नाम सुना है, और अगर नहीं सुना है तो आप दोषी नहीं । इस नाम को इतिहास से खुरच कर निकाल फेंका गया।

श्रीमती एमिली शेंकल ने 1937 में भारत माँ के लाड़ले बेटे सुभाष चन्द्र बोस से विवाह किया और एक ऐसे देश को ससुराल के रूप में चुना जिसने कभी इस बहू का स्वागत नहीं किया ....न बहू के आगमन में किसी ने मंगल गीत गाये और न उसकी बेटी के जन्म पर कोई सोहर गायी गयी। कभी कहीं जन मानस में चर्चा तक नहीं हुई कि वो कैसे जीवन गुजार रही हैं।

सात साल के कुल वैवाहिक जीवन में सिर्फ 3 साल ही उन्हें अपने पति के साथ रहने का अवसर मिला फिर उन्हें और नन्हीं सी बेटी को छोड़ पति देश के लिए लड़ने चला आए ........ इस वायदे के साथ कि पहले देश को आजाद करा लूँ। फिर तो सारा जीवन तुम्हारे साथ बिताना ही है। पर ऐसा हो न सका और 1945 में एक कथित विमान दुर्घटना में वो लापता हो गए।

उस समय एमिली शेंकल बेहद युवा थीं। चाहतीं तो यूरोपीय संस्कृति के हिसाब से दूसरा विवाह कर सकती थी।पर उन्होंने ऐसा नहीं किया और सारा जीवन बेहद कड़ा संघर्ष करते हुए बिताया ..... एक तारघर की मामूली क्लर्क की नौकरी और बेहद कम वेतन के साथ वो अपनी बेटी को पालती रहीं। न किसी से शिकायत की न कुछ माँगा।

भारत भी तब तक आजाद हो चुका था। और वे चाहतीं थीं कि कम से कम एक बार उस देश में आएँ जिसकी आजादी के लिए उनके पति ने जीवन न्योछावर कर दिया था।

लेकिन भारत का एक राजनीतिक परिवार इतना भयभीत था की .......

आखिरकार बेहद कठिनाइयों भरे और किसी भी तरह की चकाचौंध से दूर रहकर बेहद साधारण जीवन गुजार कर श्रीमती एमिली शेंकल बोस ने मार्च 1996 में गुमनामी में ही जीवन त्याग दिया।

गोबर धन योजना

  भारत में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कार्बनिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार टन अपशिष्ट पशुओं से तथा लगभग 600 मिलियन टन अपशिष्ट फसलों से उत्पन्न होता है। इनमें से अधिकांश का निष्पादन जलाकर अथवा इन्हें कहीं खाली पड़ी भूमि पर अथवा किसी जलाशय में फेंक कर किया जाता है। अपशिष्टों के इस अवैज्ञानिक निष्पादन से अनेक स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय दुष्प्रभाव उत्पन्न होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक आकलन के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग अस्वच्छ ईंधन के कारण काल का ग्रास बन जाते हैं।  कार्बनिक अपशिष्टों का यदि उचित प्रयोग किया जाए तो ये संसाधनों के रूप में भी प्रयुक्त किए जा सकते हैं। इनका ईंधन, उर्वरक तथा अन्य ऊर्जा गतिविधियों में उपयोग किया जा सकता है। कार्बनिक अपशिष्टों के इन्हीं संभावनाओं के दोहन हेतु वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण, 2018-19 में गोबर धन योजना की घोषणा की गई थी।  शुभारंभ 30 अप्रैल, 2018 को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती द्वारा हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी शोध संस्थान (NDRI) से गोबर धन (GOBAR Dhan) योजना का शुभारंभ किया गया। गोबर धन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत क्रियान्वित की जाएगी। इस योजना के तहत वर्ष 2018-19 में कुल 700 बायोगैस इकाईयां स्थापित की जाएंगी। योजना के तहत प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक बायोगैस इकाई लगाने का प्रस्ताव है। उद्देश्य गोबर धन योजना बहुआयामी उद्देश्य रखती है। इसके उद्देश्यों को 6 प्रमुख बिंदुओं में रखा जा सकता है- (i) गांवों को बायो ऊर्जा उपलब्ध कराकर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाना। (ii) स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा उपलब्धता के द्वारा ग्रामीण परिवारों का सशक्तीकरण करना। (iii) बायोगैस संयंत्रों के निर्माण, प्रबंधन आदि कार्यों के माध्यम से गांवों में रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना। (iv) कृषि हेतु कार्बनिक उर्वरक प्रदान कर कृषि की धारणीयता एवं उत्पादकता में वृद्धि करना। (v) कार्बनिक अपशिष्टों के उचित प्रबंधन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को प्रोत्साहित करना। (vi) स्वच्छ परिवेश तथा स्वच्छ ईंधन के प्रयोग के माध्यम से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करना।  प्रमुख तथ्य गोबर धन योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के ओडीएफ प्लस (खुले में शौच से मुक्ति से आगे) रणनीति का प्रमुख भाग है। इसके तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता केंद्र एवं राज्य के मध्य 60:40 के अनुपात में होगी। इस पर तकनीकी सहायता देने हेतु पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकारी समिति (NTAC) का गठन किया जाएगा। लाभ योजना से गांवों में स्वच्छता बढ़ेगी जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या का समाधान होगा तथा अनेक बीमारियों जैसे मलेरिया, कॉलरा आदि रोगों के प्रभाव में कमी आएगी। रसोई तक स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ महिलाओं का सशक्तीकरण भी होगा क्योंकि अब वे ईंधन इकट्ठा करने के समय को उत्पादक गतिविधियों में लगा सकेंगी। गोबर धन योजना बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसरों का सृजन करेगी जिससे लोगों की आय में संवर्धन भी होगा। कृषि की दृष्टि से भी यह योजना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जहां एक ओर किसानों को महंगे रासायनिक खादों के विकल्प में सस्ती कार्बनिक खादें मिलेंगी वहीं दूसरी ओर कृषि की उत्पादकता तथा धारणीयता दोनों में सुधार होगा। इसका समग्र प्रभाव किसानों एवं कृषि आश्रित अन्य वर्गों की आय में वृद्धि के रूप में दिखेगा।

भारत में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में कार्बनिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार टन अपशिष्ट पशुओं से तथा लगभग 600 मिलियन टन अपशिष्ट फसलों से उत्पन्न होता है। इनमें से अधिकांश का निष्पादन जलाकर अथवा इन्हें कहीं खाली पड़ी भूमि पर अथवा किसी जलाशय में फेंक कर किया जाता है। अपशिष्टों के इस अवैज्ञानिक निष्पादन से अनेक स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय दुष्प्रभाव उत्पन्न होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक आकलन के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख लोग अस्वच्छ ईंधन के कारण काल का ग्रास बन जाते हैं।

कार्बनिक अपशिष्टों का यदि उचित प्रयोग किया जाए तो ये संसाधनों के रूप में भी प्रयुक्त किए जा सकते हैं। इनका ईंधन, उर्वरक तथा अन्य ऊर्जा गतिविधियों में उपयोग किया जा सकता है। कार्बनिक अपशिष्टों के इन्हीं संभावनाओं के दोहन हेतु वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण, 2018-19 में गोबर धन योजना की घोषणा की गई थी।

शुभारंभ
  • 30 अप्रैल, 2018 को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती द्वारा हरियाणा के करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी शोध संस्थान (NDRI) से गोबर धन (GOBAR Dhan) योजना का शुभारंभ किया गया।
  • गोबर धन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत क्रियान्वित की जाएगी।
  • इस योजना के तहत वर्ष 2018-19 में कुल 700 बायोगैस इकाईयां स्थापित की जाएंगी।
  • योजना के तहत प्रत्येक जिले में कम-से-कम एक बायोगैस इकाई लगाने का प्रस्ताव है।
उद्देश्य
गोबर धन योजना बहुआयामी उद्देश्य रखती है। इसके उद्देश्यों को 6 प्रमुख बिंदुओं में रखा जा सकता है-
(i) गांवों को बायो ऊर्जा उपलब्ध कराकर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाना।
(ii) स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा उपलब्धता के द्वारा ग्रामीण परिवारों का सशक्तीकरण करना।
(iii) बायोगैस संयंत्रों के निर्माण, प्रबंधन आदि कार्यों के माध्यम से गांवों में रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना।
(iv) कृषि हेतु कार्बनिक उर्वरक प्रदान कर कृषि की धारणीयता एवं उत्पादकता में वृद्धि करना।
(v) कार्बनिक अपशिष्टों के उचित प्रबंधन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को प्रोत्साहित करना।
(vi) स्वच्छ परिवेश तथा स्वच्छ ईंधन के प्रयोग के माध्यम से अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करना।

प्रमुख तथ्य
  • गोबर धन योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के ओडीएफ प्लस (खुले में शौच से मुक्ति से आगे) रणनीति का प्रमुख भाग है।
  • इसके तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता केंद्र एवं राज्य के मध्य 60:40 के अनुपात में होगी।
  • इस पर तकनीकी सहायता देने हेतु पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकारी समिति (NTAC) का गठन किया जाएगा।
लाभ
  • योजना से गांवों में स्वच्छता बढ़ेगी जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या का समाधान होगा तथा अनेक बीमारियों जैसे मलेरिया, कॉलरा आदि रोगों के प्रभाव में कमी आएगी।
  • रसोई तक स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ महिलाओं का सशक्तीकरण भी होगा क्योंकि अब वे ईंधन इकट्ठा करने के समय को उत्पादक गतिविधियों में लगा सकेंगी।
  • गोबर धन योजना बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसरों का सृजन करेगी जिससे लोगों की आय में संवर्धन भी होगा।
  • कृषि की दृष्टि से भी यह योजना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जहां एक ओर किसानों को महंगे रासायनिक खादों के विकल्प में सस्ती कार्बनिक खादें मिलेंगी वहीं दूसरी ओर कृषि की उत्पादकता तथा धारणीयता दोनों में सुधार होगा। इसका समग्र प्रभाव किसानों एवं कृषि आश्रित अन्य वर्गों की आय में वृद्धि के रूप में दिखेगा।

Saturday, 21 July 2018

कल तक सबको सलाम ठोकने वाला चौकीदार बन गया कलेक्टर

  भौतिक सुख-सुविधाओं के हम आदी हो चुके हैं। और इसी ने हमें आलसी बना दिया है। निजी कंपनी में नौकरी करने वाले लोग अक्सर यह कहते हुए पाए जाते हैं कि यार कंपनी बहुत काम लेती है. 9 घंटे की नौकरी…… 10 घंटे की नौकरी…. सारा समय ऑफिस में निकल जाता है……. ……ब्ला…ब्ला। पर इस खबर को पढ़ने के बाद शायद आप ये फिर कभी ना कह पाएंगे।    14 वर्षों से सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे एक युवक ने अपने दूसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास कर ली। युवक शादीशुदा और बाल-बच्चेदार है. उड़ीसा के रहने वाले इस युवक का नाम जोति रंजन बागरती है। बागरती ने उस परीक्षा को पास कर दिखाया है जिसे पास करने के लिए विद्यार्थी दिल्ली, मुंबई, पटना जैसे नगरों में अपनी जिंदगी के 5 से 10 वर्ष झोंक देते हैं।    दस वर्ष पहले अपने पहले प्रयास में असफल होने के बाद वो पिछले दो वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहा था। अभी मदुरै में उसका प्रशिक्षण चल रहा है।    भारत में कई ऐसे व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने अभावों से जूझते हुए असाधारण सफलता हासिल की है। इससे पहले भी अभावों में जूझते हुए रिक्शा चालक के बेटे गोविंद जायसवाल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की थी।    जम्मू-कश्मीर के सोपोर क्षेत्र के एक दुकानदार के बेटे बशीर अहमद भट्ट भी सिविल सेवा परीक्षा पास कर सुर्शियों में आए थे। इन गुदड़ी के लालों की जीवटता से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं में उर्जा और उमंग का संचार होता है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है जिससे कई लोगों को प्रेरणा मिलती है।

भौतिक सुख-सुविधाओं के हम आदी हो चुके हैं। और इसी ने हमें आलसी बना दिया है। निजी कंपनी में नौकरी करने वाले लोग अक्सर यह कहते हुए पाए जाते हैं कि यार कंपनी बहुत काम लेती है। 9 घंटे की नौकरी …… 10 घंटे की नौकरी…. सारा समय ऑफिस में निकल जाता है……. ……ब्ला .… ब्ला। पर इस खबर को पढ़ने के बाद शायद आप ये फिर कभी ना कह पाएंगे।

14 वर्षों से सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे एक युवक ने अपने दूसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास कर ली। युवक शादीशुदा और बाल-बच्चेदार है। उड़ीसा के रहने वाले इस युवक का नाम जोति रंजन बागरती है। बागरती ने उस परीक्षा को पास कर दिखाया है जिसे पास करने के लिए विद्यार्थी दिल्ली, मुंबई, पटना जैसे नगरों में अपनी जिंदगी के 5 से 10 वर्ष झोंक देते हैं।

दस वर्ष पहले अपने पहले प्रयास में असफल होने के बाद वो पिछले दो वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहा था। अभी मदुरै में उसका प्रशिक्षण चल रहा है।

भारत में कई ऐसे व्यक्ति हुए हैं जिन्होंने अभावों से जूझते हुए असाधारण सफलता हासिल की है। इससे पहले भी अभावों में जूझते हुए रिक्शा चालक के बेटे गोविंद जायसवाल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की थी।

जम्मू-कश्मीर के सोपोर क्षेत्र के एक दुकानदार के बेटे बशीर अहमद भट्ट भी सिविल सेवा परीक्षा पास कर सुर्खियों में आए थे। इन गुदड़ी के लालों की जीवटता से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं में उर्जा और उमंग का संचार होता है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है जिससे कई लोगों को प्रेरणा मिलती है।

Wednesday, 18 July 2018

IIT प्रोफेसर आलोक सागर जी का एक गुमनाम सफर

  IIT दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में डिग्री, ह्यूस्टन से पी एच डी, टैक्सास से पोस्ट डाक्टरेट, पूर्व RBI गवर्नर श्री रघुराम राजन के प्रोफेसर.... विगत 32 वर्षों से किसी भी तरह के लालच को दरकिनार कर ....मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आदिवासियों के बीच रहते हुए उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक उत्थान और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं I     निजी जीवन में दिल्ली में करोड़ों की सम्पत्ति के मालिक श्री आलोक सागर की मां दिल्ली के मिरांडा हाउस में फिजिक्स की प्रोफेसर, पिता भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे I छोटा भाई आज भी आईआईटी में प्रोफेसर हैI सब कुछ त्याग कर आदिवासियों के उत्थान के लिये समर्पित, आदिवासियों के साथ सादगी भरा जीवन जी रहे है I रहने को घासफूस की एक झोपड़ी, पहनने को तीन कुर्ते, पैरों में टायर से बना चप्पल, आवागमन के लिए एक साइकिल-ताकि प्रकृति को नुकसान न होI     कई भाषाओं के जानकार आलोक सागर आदिवासियों से उन्हीं की भाषा में संवाद करते हैंI उनको पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ-साथ आसपास के जंगलों में उनसे  लाखों फलदार पौधौं का रोपण करवा चुके हैं I फलदार पौधौं का रोपण करवाकर आदिवासियों में गरीबी से लड़ने की उम्मीद जगा रहे हैंI साइकिल से आते जाते बीज इकट्ठा कर आदिवासियों को बोने के लिए देते हैंI

IIT दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में डिग्री, ह्यूस्टन से पी एच डी, टैक्सास से पोस्ट डाक्टरेट, पूर्व RBI गवर्नर श्री रघुराम राजन के प्रोफेसर.... विगत 32 वर्षों से किसी भी तरह के लालच को दरकिनार कर ....मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आदिवासियों के बीच रहते हुए उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक उत्थान और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 

निजी जीवन में दिल्ली में करोड़ों की सम्पत्ति के मालिक श्री आलोक सागर की मां दिल्ली के मिरांडा हाउस में फिजिक्स की प्रोफेसर, पिता भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे। छोटा भाई आज भी आईआईटी में प्रोफेसर है। सब कुछ त्याग कर आदिवासियों के उत्थान के लिये समर्पित, आदिवासियों के साथ सादगी भरा जीवन जी रहे है। रहने को घासफूस की एक झोपड़ी, पहनने को तीन कुर्ते, पैरों में टायर से बना चप्पल, आवागमन के लिए एक साइकिल-ताकि प्रकृति को नुकसान न हो।

कई भाषाओं के जानकार आलोक सागर आदिवासियों से उन्हीं की भाषा में संवाद करते हैं। उनको पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ-साथ आसपास के जंगलों में उनसे  लाखों फलदार पौधौं का रोपण करवा चुके हैं। फलदार पौधौं का रोपण करवाकर आदिवासियों में गरीबी से लड़ने की उम्मीद जगा रहे हैं। साइकिल से आते जाते बीज इकट्ठा कर आदिवासियों को बोने के लिए देते हैं।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दुसरे तक पहुँचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेंजें:- ekawaz18@gmail.com

"आप की कहानी आप की जुबानी। अपनी आपबीती हमें बताएँ, हम दुनिया को बताएँगे।"

Tuesday, 17 July 2018

विम्बलडन 2018-विजेताओं की पूर्ण सूची

  132वें विम्बलडन लॉन टेनिस टूर्नामेंट 2018 का आयोजन 2 जुलाई से 15 जुलाई के बीच लंदन के पास विम्बलडन गांव में हुआ। इसका आयोजन ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब व इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन द्वारा किया गया।    नोवाक जोकोविच ने पुरुष एकल का खिताब जीता। वर्ष 2016 के फ्रेंच ओपन के पश्चात उनका यह पहला ग्रैंड स्लाम टूर्नामेंट विजय है। ओवरऑल जोकोविच का यह चौथा विम्बलडन तथा 13वां ग्रांड स्लैम ट्रॉफी है।    विम्बलडन 2018 के वितेजाओं की पूर्ण सूची इस प्रकार हैः    पुरुष एकलः सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन को 6-2 6-2 7-6 से पराजित कर टूर्नामेंट जीता।    महिला एकलः जर्मनी की एजेंलिक कर्बेर ने यूएसए की सेरेना विलियम्स को 6-3 6-3 से पराजित किया।    पुरुष युगलः माइक ब्रायन व जैक सोक ने दक्षिण अफ्रीका के रावेन क्लासेन व न्यूजीलैंड के माइकल वीनस को पराजित कर पुरुष युगल का खिताब जीता।    महिला युगलः चेक गणराज्य की बार्बोरा क्रेजिस्कोवा व कैटरिना सिनियाकोवा ने क्वेटा पेश्चकके व निकोले मेलिचार को पराजित कर महिला युगल का खिताब जीता।    मिश्रित युगलः आस्ट्रिया के एलेक्जेंडर पेया व अमेरिका की निकोले मेलिचार ने जेमी मरे व विक्टोयिा अजारेंका को पराजित किया।

132वें विम्बलडन लॉन टेनिस टूर्नामेंट 2018 का आयोजन 2 जुलाई से 15 जुलाई के बीच लंदन के पास विम्बलडन गांव में हुआ। इसका आयोजन ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब व इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन द्वारा किया गया।

नोवाक जोकोविच ने पुरुष एकल का खिताब जीता। वर्ष 2016 के फ्रेंच ओपन के पश्चात उनका यह पहला ग्रैंड स्लाम टूर्नामेंट विजय है। ओवरऑल जोकोविच का यह चौथा विम्बलडन तथा 13वां ग्रांड स्लैम ट्रॉफी है।

विम्बलडन 2018 के वितेजाओं की पूर्ण सूची इस प्रकार हैः

पुरुष एकलः सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन को 6-2 6-2 7-6 से पराजित कर टूर्नामेंट जीता।

महिला एकलः जर्मनी की एजेंलिक कर्बेर ने यूएसए की सेरेना विलियम्स को 6-3 6-3 से पराजित किया।

पुरुष युगलः माइक ब्रायन व जैक सोक ने दक्षिण अफ्रीका के रावेन क्लासेन व न्यूजीलैंड के माइकल वीनस को पराजित कर पुरुष युगल का खिताब जीता।

महिला युगलः चेक गणराज्य की बार्बोरा क्रेजिस्कोवा व कैटरिना सिनियाकोवा ने क्वेटा पेश्चकके व निकोले मेलिचार को पराजित कर महिला युगल का खिताब जीता।

मिश्रित युगलः आस्ट्रिया के एलेक्जेंडर पेया व अमेरिका की निकोले मेलिचार ने जेमी मरे व विक्टोयिा अजारेंका को पराजित किया।

काइली जेनर ने तोड़ा मार्क जुकरबर्ग का रिकॉर्ड - अमेरिका की यंगेस्ट सेल्फमेड अरबपति

काइली जेनर अमेरिका की यंगेस्ट सेल्फमेड अरबपति बन गई है। फोर्ब्स के मुताबिक उनका 'काइली' मेकअप प्रोडक्ट ब्रांड 5,477 करोड़ रुपए का बन गया है। जिसके कारण वह 20 साल की उम्र में यंगेस्ट अरबपति बन गई हैं। इस मामले में उन्होंने फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग को भी पीछे छोड़ दिया है क्योंकि वह 23 साल की उम्र में अरबपति कारोबारियों की गिनती में शामिल हुए थे।     काइली जेनर ने तीन साल पहले 2015 में 2000 रुपये (29 डॉलर) इन्वेस्टमेंट से 'काइली' कस्मेटिक प्रोडक्ट की शुरूआत की थी। अभी तक कंपनी 4,313 करोड़ रुपए के मेकअप प्रोडक्ट बेच चुकी है। काइली के लिपस्टिक, आईशैडो किट, कंसीलर, कॉम्पैक्ट, लिप लाइनर जैसे प्रोडक्ट हैं। उनका बिजनेस मॉडल अल्ट्रालाइट स्टार्टअप की गिनती में आता है। फोर्ब्स के अनुसार उनका बिजनेस मॉडल ऐसा है जिसके कारण उनकी मार्केटिंग कॉस्ट बहुत कम आती है और पूरा प्रॉफिट जैनर की पॉकेट में जाता है।    उन्होंने शुरूआत में लिप्सटिक और मैचिंग लिपलाइनर बेचना शुरू किया जो उनके ट्रेडमार्क पाउट के कारण सबसे ज्यादा बिका। जेनर की कंपनी में 7 फुल टाइम और 5 पार्ट टाइम कर्मचारी हैं। वह मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और सेल सहित सभी सर्विसेज आउटसोर्स करती हैं।

काइली जेनर अमेरिका की यंगेस्ट सेल्फमेड अरबपति बन गई है। फोर्ब्स के मुताबिक उनका 'काइली' मेकअप प्रोडक्ट ब्रांड 5,477 करोड़ रुपए का बन गया है। जिसके कारण वह 20 साल की उम्र में यंगेस्ट अरबपति बन गई हैं। इस मामले में उन्होंने फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग को भी पीछे छोड़ दिया है क्योंकि वह 23 साल की उम्र में अरबपति कारोबारियों की गिनती में शामिल हुए थे। 

काइली जेनर ने तीन साल पहले 2015 में 2000 रुपये (29 डॉलर) इन्वेस्टमेंट से 'काइली' कस्मेटिक प्रोडक्ट की शुरूआत की थी। अभी तक कंपनी 4,313 करोड़ रुपए के मेकअप प्रोडक्ट बेच चुकी है। काइली के लिपस्टिक, आईशैडो किट, कंसीलर, कॉम्पैक्ट, लिप लाइनर जैसे प्रोडक्ट हैं। उनका बिजनेस मॉडल अल्ट्रालाइट स्टार्टअप की गिनती में आता है। फोर्ब्स के अनुसार उनका बिजनेस मॉडल ऐसा है जिसके कारण उनकी मार्केटिंग कॉस्ट बहुत कम आती है और पूरा प्रॉफिट जैनर की पॉकेट में जाता है।

उन्होंने शुरूआत में लिप्सटिक और मैचिंग लिपलाइनर बेचना शुरू किया जो उनके ट्रेडमार्क पाउट के कारण सबसे ज्यादा बिका। जेनर की कंपनी में 7 फुल टाइम और 5 पार्ट टाइम कर्मचारी हैं। वह मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और सेल सहित सभी सर्विसेज आउटसोर्स करती हैं।

अरुणा साईराम संगीत कलानिधि पुरस्कार हेतु चयनित

  गायिका अरुणा साईराम को इस वर्ष संगीत अकादमी के संगीत कलानिधि पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।अकादमी की कार्यकारी समिति ने 15 जुलाई 2018 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से साईराम को सम्मानित करने का फैसला लिया।    बैठक में विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं के नाम की घोषण भी की गई। अरुणा कनार्टक गायन शैली की मशहूर गायिका हैं। उन्हें प्रतिष्ठित संगीत कलानिधि पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना गया है। साईराम अकादमी के 92वें वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगी जिसका आयोजन 15 दिसंबर 2018  से एक जनवरी 2019 के बीच किया जाएगा।    अन्य पुरस्कार    संगीत कला आचार्य अवार्ड: यह पुरस्कार मृदंग वादक तंजावुर आर. रामदोस एवं गायक के. ओमान कुट्टी को दिया जायेगा।    टी. के. अवार्ड: यह पुरस्कार वीणा वादक कल्याणी गणेशन एवं नागस्वरम वादक एस.आर.जी. राजन्ना को दिया जायेगा।    म्युजिकोलॉजिस्ट अवार्ड: यह पुरस्कार तमिलनाडु यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. प्रेमीला गुरुमूर्ति को दिया जायेगा।    नृत्य कलानिधि पुरस्कार: यह पुरस्कार वरिष्ठ नृतक शांता धनंजयन को दिया जायेगा।    संगीत कलानिधि पुरस्कार    यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मद्रास संगीत अकादमी द्वारा कर्नाटक संगीत में निपुणता हासिल करने वाले व्यक्ति को दिया जाता है। इस पुरस्कार का नाम संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है संगीत एवं कला का खजाना। इसे इसे कर्नाटक संगीत का प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है।

गायिका अरुणा साईराम को इस वर्ष संगीत अकादमी के संगीत कलानिधि पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।अकादमी की कार्यकारी समिति ने 15 जुलाई 2018 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से साईराम को सम्मानित करने का फैसला लिया।

बैठक में विभिन्न पुरस्कारों के विजेताओं के नाम की घोषण भी की गई। अरुणा कनार्टक गायन शैली की मशहूर गायिका हैं। उन्हें प्रतिष्ठित संगीत कलानिधि पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना गया है। साईराम अकादमी के 92वें वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगी जिसका आयोजन 15 दिसंबर 2018  से एक जनवरी 2019 के बीच किया जाएगा।

अन्य पुरस्कार

संगीत कला आचार्य अवार्ड: यह पुरस्कार मृदंग वादक तंजावुर आर. रामदोस एवं गायक के. ओमान कुट्टी को दिया जायेगा।

टी. के. अवार्ड: यह पुरस्कार वीणा वादक कल्याणी गणेशन एवं नागस्वरम वादक एस.आर.जी. राजन्ना को दिया जायेगा।

म्युजिकोलॉजिस्ट अवार्ड: यह पुरस्कार तमिलनाडु यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. प्रेमीला गुरुमूर्ति को दिया जायेगा।

नृत्य कलानिधि पुरस्कार: यह पुरस्कार वरिष्ठ नृतक शांता धनंजयन को दिया जायेगा।

संगीत कलानिधि पुरस्कार

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मद्रास संगीत अकादमी द्वारा कर्नाटक संगीत में निपुणता हासिल करने वाले व्यक्ति को दिया जाता है। इस पुरस्कार का नाम संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है संगीत एवं कला का खजाना। इसे इसे कर्नाटक संगीत का प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है।

फ्रांस ने 20 वर्ष बाद फुटबॉल विश्व कप जीता, हैरी केन को मिला गोल्डन बूट

  फ्रांस की फुटबॉल ने टीम पहली बार फीफा फाइनल खेल रहे क्रोएशिया की टीम को 4-2 से पराजित कर फीफा विश्वकप फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। फ्रांस ने 20 साल बाद यह खिताब  जीता है।    मैच के फर्स्ट हाफ तक स्कोर 2-1 था जिसमें फ्रांस की ओर से दो गोल शामिल थे। जबकि दूसरे हाफ में फ्रांस ने 2 और गोल करके मैच जीता हालांकि क्रोएशिया ने दूसरा गोल करके फ्रांस को कड़ी टक्कर दी।    फ्रांस ने 1998 में अपनी मेजबानी में पहली बार विश्व कप जीता था और उस कामयाबी के 20 साल बाद उसने एक बार फिर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। फ्रांस का यह दूसरा खिताब है और इसके साथ ही वह दो बार विश्व खिताब जीतने वाले अर्जेंटीना और उरुग्वे की श्रेणी में आ गया है।    क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और थर्ड प्ले ऑफ मुकाबले    क्वार्टर फाइनल मुकाबले                                          उरुग्वे – फ्रांस (फ्रांस 2-0 से जीता)                      स्वीडन - इंग्लैंड (इंग्लैंड 2-0 जीता)                      रूस – क्रोएशिया (क्रोएशिया 4-3 से जीता)    सेमीफाइनल मुकाबले    फ्रांस – बेल्जियम (फ्रांस 1-0 से जीता)    क्रोएशिया – इंग्लैंड (क्रोएशिया 2-1 से जीता)    थर्ड प्ले ऑफ मैच    ब्राज़ील – बेल्जियम (बेल्जियम 2-1 से जीता)    बेल्जियम-इंग्लैंड (बेल्जियम 2-0 से जीता)      हैरी केन को गोल्डन बूट अवार्ड    इंग्लैंड की टीम फीफा विश्व कप के सेमीफानल में हार गयी थी लेकिन उसके कप्तान और स्ट्राइकर हैरी केन को टूर्नामेंट में सर्वाधिक छह गोल करने के लिए गोल्डन बूट का अवार्ड से सम्मानित किया गया। सेमीफाइनल में पराजित हुए बेल्जियम के गोलकीपर तिबौत कोर्टियस को गोल्डन ग्लव्स का अवार्ड मिला जबकि स्पेन को फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी से नवाजा गया।    रूस ने क को अगले विश्व कप की जिम्मेदारी सौंपी  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फीफा विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के आखिरी दिन अगले विश्व कप की जिम्मेदारी कतर को सौंप दी। कतर द्वारा 2022 में अगले विश्व कप की मेजबानी की जाएगी। व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में एक समारोह में आधिकारिक विश्व कप फुटबाल फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो को सौंपी जिन्होंने इसे अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल-थानी को सौंपा।    फीफा विश्व कप 2018 पुरस्कारों की सूची    गोल्डन बूट अवार्ड   ⤍   हैरी केन (6 गोल) (इंग्लैंड)    गोल्डन बॉल अवार्ड   ⤍   लुका मोड्रिक (क्रोएशिया)    गोल्डन ग्लव्स अवार्ड   ⤍    तिबौत कोर्टियस (बेल्जियम)    यंग प्लेयर अवार्ड   ⤍    केलियन एमबापे (फ्रांस)    फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी   ⤍    स्पेन की टीम    फ्रांस के कोच ने बनाया रिकॉर्ड  फ्रांस की वर्ल्ड कप जीत के साथ ही कोच से साथ भी एक खास तरह का विश्व रिकॉर्ड जुड़ गया है. केवल फ्रांस की टीम ने ही दूसरी बार फीफा विश्व कप खिताब नहीं जीता है, बल्कि कोच दिदिएर डेसचेम्पस ने भी यह ट्रॉफी दूसरी बार उठाई है. इससे पहले बतौर खिलाड़ी उन्होंने यह खिताब जीता और अब कोच के रूप में जीता. इस प्रकार दिदिएर ये मुकाम हासिल करने वाले विश्व दुनिया के तीसरे शख्स बन गए हैं. उनका नाम मारियो जागालो व फ्रांज बैकेनबॉर की सूची में जुड़ गया हैं.

फ्रांस की फुटबॉल ने टीम पहली बार फीफा फाइनल खेल रहे क्रोएशिया की टीम को 4-2 से पराजित कर फीफा विश्वकप फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। फ्रांस ने 20 साल बाद यह खिताब  जीता है।

मैच के फर्स्ट हाफ तक स्कोर 2-1 था जिसमें फ्रांस की ओर से दो गोल शामिल थे। जबकि दूसरे हाफ में फ्रांस ने 2 और गोल करके मैच जीता हालांकि क्रोएशिया ने दूसरा गोल करके फ्रांस को कड़ी टक्कर दी।

फ्रांस ने 1998 में अपनी मेजबानी में पहली बार विश्व कप जीता था और उस कामयाबी के 20 साल बाद उसने एक बार फिर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया। फ्रांस का यह दूसरा खिताब है और इसके साथ ही वह दो बार विश्व खिताब जीतने वाले अर्जेंटीना और उरुग्वे की श्रेणी में आ गया है।

क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और थर्ड प्ले ऑफ मुकाबले

क्वार्टर फाइनल मुकाबले                                      

उरुग्वे – फ्रांस (फ्रांस 2-0 से जीता)                  

स्वीडन - इंग्लैंड (इंग्लैंड 2-0 जीता)                  

रूस – क्रोएशिया (क्रोएशिया 4-3 से जीता)

सेमीफाइनल मुकाबले

फ्रांस – बेल्जियम (फ्रांस 1-0 से जीता)

क्रोएशिया – इंग्लैंड (क्रोएशिया 2-1 से जीता)

थर्ड प्ले ऑफ मैच

ब्राज़ील – बेल्जियम (बेल्जियम 2-1 से जीता)

बेल्जियम-इंग्लैंड (बेल्जियम 2-0 से जीता)


हैरी केन को गोल्डन बूट अवार्ड

इंग्लैंड की टीम फीफा विश्व कप के सेमीफानल में हार गयी थी लेकिन उसके कप्तान और स्ट्राइकर हैरी केन को टूर्नामेंट में सर्वाधिक छह गोल करने के लिए गोल्डन बूट का अवार्ड से सम्मानित किया गया। सेमीफाइनल में पराजित हुए बेल्जियम के गोलकीपर तिबौत कोर्टियस को गोल्डन ग्लव्स का अवार्ड मिला जबकि स्पेन को फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी से नवाजा गया।

रूस ने कतर को अगले विश्व कप की जिम्मेदारी सौंपी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फीफा विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के आखिरी दिन अगले विश्व कप की जिम्मेदारी कतर को सौंप दी। कतर द्वारा 2022 में अगले विश्व कप की मेजबानी की जाएगी। व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में एक समारोह में आधिकारिक विश्व कप फुटबाल फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो को सौंपी जिन्होंने इसे अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल-थानी को सौंपा।

फीफा विश्व कप 2018 पुरस्कारों की सूची

गोल्डन बूट अवार्ड   ⤍   हैरी केन (6 गोल) (इंग्लैंड)

गोल्डन बॉल अवार्ड   ⤍   लुका मोड्रिक (क्रोएशिया)

गोल्डन ग्लव्स अवार्ड   ⤍    तिबौत कोर्टियस (बेल्जियम)

यंग प्लेयर अवार्ड   ⤍    केलियन एमबापे (फ्रांस)

फीफा फेयर प्ले ट्रॉफी   ⤍    स्पेन की टीम

फ्रांस के कोच ने बनाया रिकॉर्ड
फ्रांस की वर्ल्ड कप जीत के साथ ही कोच से साथ भी एक खास तरह का विश्व रिकॉर्ड जुड़ गया है। केवल फ्रांस की टीम ने ही दूसरी बार फीफा विश्व कप खिताब नहीं जीता है, बल्कि कोच दिदिएर डेसचेम्पस ने भी यह ट्रॉफी दूसरी बार उठाई है। इससे पहले बतौर खिलाड़ी उन्होंने यह खिताब जीता और अब कोच के रूप में जीता। इस प्रकार दिदिएर ये मुकाम हासिल करने वाले विश्व दुनिया के तीसरे शख्स बन गए हैं। उनका नाम मारियो जागालो व फ्रांज बैकेनबॉर की सूची में जुड़ गया हैं।